पर्यावरणीय नैतिकता – Environmental Ethics

Sansar LochanEthics2 Comments

पर्यावरणीय नैतिकता (environmental ethics) का सम्बन्ध प्राकृतिक पर्यावरण के साथ मनुष्यों के नैतिक समबन्धों से है. यह इस तथ्य को प्रकट करती है कि पृथ्वी पर उपस्थित सभी जीवों को जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है. प्रकृति को नष्ट करके, हम सभी जीवों के जीवन जीने के इस अधिकार को अस्वीकृत कर रहे हैं. यह कार्य अन्यायपूर्ण और अनैतिक है. … Read More

असमानता एवं नीतिशास्त्र – Inequality and Ethics Notes in Hindi

Sansar LochanEthics2 Comments

असमानता (inequality) तब होती है जब सभी व्यक्तियों को समान रूप से स्थान, वस्तु, सेवा अथवा अवसर उपलब्ध नहीं होते हैं. ऐतिहासिक रूप से, प्रायः असमानताओं का आरोपण आज्ञापत्रों द्वारा हुआ, जैसे कुलीन वर्ग और संघों की उपस्थिति अथवा रंगभेद, दासता या जातिवाद आदि के रूप में असमानता अस्तित्व में आई. विशेषकर भारत में शास्त्रों और स्मृतियों में ऐसी व्यवस्थाएँ … Read More

[संसार मंथन] मुख्य परीक्षा लेखन अभ्यास – Ethics GS Paper 4/Part 4

Sansar LochanEthics, GS Paper 4, Sansar Manthan5 Comments

सामान्य अध्ययन पेपर – 4 Case Study – Ethics “जिला आरोग्य, हिमालय की तलहटी में स्थित है और यहाँ मानव विकास के संकेतक कम हैं. यह राज्य की राजधानी से दूर स्थित है. भौगोलिक दृष्टि से बड़ा और अनेक विशेषताएँ जैसे कि घने जंगलों से ढकी हुई पहाड़ियाँ, छोटी दरार वाली घाटियाँ, ऊँचाई से बहती हुई नदियाँ और झरने होने … Read More

[संसार मंथन] मुख्य परीक्षा लेखन अभ्यास – Ethics GS Paper 4/Part 3

Sansar LochanEthics, GS Paper 4, Sansar Manthan2 Comments

सामान्य अध्ययन पेपर – 4 लोक-सेवा के सन्दर्भ में “जवाबदेही” का क्या अर्थ है? लोक-सेवकों की व्यक्तिगत और सामूहिक जवाबदेही को सुनिश्चित करने के लिए क्या उपाय अपनाए जा सकते हैं? (250 words)  यह सवाल क्यों? यह सवाल UPSC GS Paper 4 के सिलेबस से प्रत्यक्ष रूप से लिया गया है – “लोक प्रशासनों में लोक/सिविल सेवा मूल्य तथा नीतिशास्त्र … Read More

[संसार मंथन] मुख्य परीक्षा लेखन अभ्यास – Ethics GS Paper 4/Part 2

Sansar LochanEthics, GS Paper 4, Sansar Manthan6 Comments

सामान्य अध्ययन पेपर – 4 प्रशासनिक नैतिकता को बनाए रखने या नैतिकता स्तर को ऊँचा उठाने के उपाय सुझाएँ. (250 words)  यह सवाल क्यों? यह सवाल UPSC GS Paper 4 के सिलेबस से प्रत्यक्ष रूप से लिया गया है – “लोक प्रशासनों में लोक/सिविल सेवा मूल्य तथा नीतिशास्त्र : स्थिति तथा समस्याएँ ; सरकारी तथा निजी संस्थानों में नैतिक चिंताएँ … Read More

[संसार मंथन] मुख्य परीक्षा लेखन अभ्यास – Ethics GS Paper 4/Part 1

Sansar LochanEthics, GS Paper 4, Sansar Manthan1 Comment

सामान्य अध्ययन पेपर – 4 नीतिशास्त्र (Ethics) की परिभाषा लिखें.  नैतिक अभिशासन से आप क्या समझते हैं? (250 words)  यह सवाल क्यों? यह सवाल UPSC GS Paper 4 के सिलेबस से प्रत्यक्ष रूप से लिया गया है – “नीतिशास्त्र तथा मानवीय सह-सम्बन्ध मानवीय क्रियाकलापों में नीतिशास्त्र का सार तत्त्व, इसके निर्धारक और परिणाम : नीतिशास्त्र के आयाम, निजी और सार्वजनिक … Read More

नैतिक सक्षमता का अर्थ एवं उसके तत्त्व (Ethics Notes Part 5)

Sansar LochanEthics3 Comments

किसी लोक-सेवक को नैतिक रूप से सक्षम होना चाहिए. नैतिक रूप से सक्षम लोक-सेवक वह होता है जो उच्च कोटि के वैयक्तिक एवं व्यावसायिक व्यवहार वाला हो, प्रासंगिक नीतिगत शास्त्र, संहिता एवं विधि का ज्ञाता हो, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियाँ उत्पन्न हो जाने पर नैतिक तर्कबुद्धि का प्रयोग करने की क्षमता रखता हो, नैतिकतापूर्ण कृत्य करता हो तथा सार्वजनिक एजेंसियों एवं संगठनों … Read More

नैतिक निर्णय करने से सम्बंधित सिद्धांत (Ethics Notes Part 4)

Sansar LochanEthicsLeave a Comment

जटिल परिस्थितियों में नैतिक निर्णय करने में नीतिशास्त्र के अध्ययन के विभिन्न आयाम सहायक होते हैं. ऐसे आयाम हैं – उपयोगितावादी सिद्धांत, अधिकारवादी सिद्धांत, न्यायवादी सिद्धांत, सर्वहितवादी सिद्धांत और सद्‌गुणवादी सिद्धांत. चलिए स्वागत है आपका Ethics Notes Part 4 में. बाकी के Notes की लिंक नीचे दे दी गई है. उयोगितावादी सिद्धांत उपयोगितावाद की अवधारणा 19वीं शताब्दी में जेरेमी बेन्थैम … Read More

मानवीय कृत्य – नैतिक आधारभूमि (Ethics Notes Part 3)

Sansar LochanEthics1 Comment

मानवीय कृत्यों के नैतिक सिद्धांतों के दो मुख्य वर्ग हैं. पहला, कर्तव्यपरक दृष्टिकोण (स्वयं मानवीय कृत्यों पर आधारित) और परिणामवादी दृष्टिकोण (मानवीय कृत्यों के परिणामों पर आधारित). कर्तव्यपरक एवं परिणामवादी दृष्टिकोणों की तुलना हम इन दृष्टिकोणों की चर्चा नीतिशास्त्र की शाखाओं के वर्णन के समय कर चुके हैं. नीचे इन दो दृष्टिकोणों में कुछ तुलनात्मक अंतर दिए गए हैं – … Read More

नीतिशास्त्र की शाखाएँ – (Ethics Notes Part 2)

Sansar LochanEthics2 Comments

नीतिशास्त्र की चार मुख्य शाखाएँ हैं – वर्णनात्मक नीतिशास्त्र, मानदंडपरक नीतिशास्त्र, परानीतिशास्त्र तथा अनुप्रयुक्त नीतिशास्त्र. इनका वर्णन हम नीचे संक्षेप में करेंगे. चलिए जानते हैं Ethics के branches के विषय में (Notes Part 2). वर्णनात्मक नीतिशास्त्र वर्णनात्मक नीतिशास्त्र उन विषयों का शास्त्र हैं जिन्हें लोग उचित अथवा अनुचित मानते हैं या मानने को विवश कर दिए जाते हैं और यह … Read More