[संसार मंथन] मुख्य परीक्षा लेखन अभ्यास – Ethics GS Paper 4/Part 4

सामान्य अध्ययन पेपर – 4 Case Study – Ethics “जिला आरोग्य, हिमालय की तलहटी में स्थित है और यहाँ मानव विकास के संकेतक कम हैं. यह राज्य की राजधानी से दूर स्थित है. भौगोलिक दृष्टि से बड़ा और अनेक विशेषताएँ जैसे कि घने जंगलों से ढकी हुई पहाड़ियाँ, छोटी दरार वाली घाटियाँ, ऊँचाई से बहती […]

[संसार मंथन] मुख्य परीक्षा लेखन अभ्यास – Ethics GS Paper 4/Part 3

सामान्य अध्ययन पेपर – 4 लोक-सेवा के सन्दर्भ में “जवाबदेही” का क्या अर्थ है? लोक-सेवकों की व्यक्तिगत और सामूहिक जवाबदेही को सुनिश्चित करने के लिए क्या उपाय अपनाए जा सकते हैं? (250 words)  यह सवाल क्यों? यह सवाल UPSC GS Paper 4 के सिलेबस से प्रत्यक्ष रूप से लिया गया है – “लोक प्रशासनों में […]

[संसार मंथन] मुख्य परीक्षा लेखन अभ्यास – Ethics GS Paper 4/Part 2

सामान्य अध्ययन पेपर – 4 प्रशासनिक नैतिकता को बनाए रखने या नैतिकता स्तर को ऊँचा उठाने के उपाय सुझाएँ. (250 words)  यह सवाल क्यों? यह सवाल UPSC GS Paper 4 के सिलेबस से प्रत्यक्ष रूप से लिया गया है – “लोक प्रशासनों में लोक/सिविल सेवा मूल्य तथा नीतिशास्त्र : स्थिति तथा समस्याएँ ; सरकारी तथा […]

[संसार मंथन] मुख्य परीक्षा लेखन अभ्यास – Ethics GS Paper 4/Part 1

सामान्य अध्ययन पेपर – 4 नीतिशास्त्र (Ethics) की परिभाषा लिखें.  नैतिक अभिशासन से आप क्या समझते हैं? (250 words)  यह सवाल क्यों? यह सवाल UPSC GS Paper 4 के सिलेबस से प्रत्यक्ष रूप से लिया गया है – “नीतिशास्त्र तथा मानवीय सह-सम्बन्ध मानवीय क्रियाकलापों में नीतिशास्त्र का सार तत्त्व, इसके निर्धारक और परिणाम : नीतिशास्त्र […]

नैतिक सक्षमता का अर्थ एवं उसके तत्त्व (Ethics Notes Part 5)

किसी लोक-सेवक को नैतिक रूप से सक्षम होना चाहिए. नैतिक रूप से सक्षम लोक-सेवक वह होता है जो उच्च कोटि के वैयक्तिक एवं व्यावसायिक व्यवहार वाला हो, प्रासंगिक नीतिगत शास्त्र, संहिता एवं विधि का ज्ञाता हो, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियाँ उत्पन्न हो जाने पर नैतिक तर्कबुद्धि का प्रयोग करने की क्षमता रखता हो, नैतिकतापूर्ण कृत्य करता हो […]

नैतिक निर्णय करने से सम्बंधित सिद्धांत (Ethics Notes Part 4)

जटिल परिस्थितियों में नैतिक निर्णय करने में नीतिशास्त्र के अध्ययन के विभिन्न आयाम सहायक होते हैं. ऐसे आयाम हैं – उपयोगितावादी सिद्धांत, अधिकारवादी सिद्धांत, न्यायवादी सिद्धांत, सर्वहितवादी सिद्धांत और सद्‌गुणवादी सिद्धांत. चलिए स्वागत है आपका Ethics Notes Part 4 में. बाकी के Notes की लिंक नीचे दे दी गई है. उयोगितावादी सिद्धांत उपयोगितावाद की अवधारणा […]

मानवीय कृत्य – नैतिक आधारभूमि (Ethics Notes Part 3)

मानवीय कृत्यों के नैतिक सिद्धांतों के दो मुख्य वर्ग हैं. पहला, कर्तव्यपरक दृष्टिकोण (स्वयं मानवीय कृत्यों पर आधारित) और परिणामवादी दृष्टिकोण (मानवीय कृत्यों के परिणामों पर आधारित). कर्तव्यपरक एवं परिणामवादी दृष्टिकोणों की तुलना हम इन दृष्टिकोणों की चर्चा नीतिशास्त्र की शाखाओं के वर्णन के समय कर चुके हैं. नीचे इन दो दृष्टिकोणों में कुछ तुलनात्मक […]

नीतिशास्त्र की शाखाएँ – (Ethics Notes Part 2)

नीतिशास्त्र की चार मुख्य शाखाएँ हैं – वर्णनात्मक नीतिशास्त्र, मानदंडपरक नीतिशास्त्र, परानीतिशास्त्र तथा अनुप्रयुक्त नीतिशास्त्र. इनका वर्णन हम नीचे संक्षेप में करेंगे. चलिए जानते हैं Ethics के branches के विषय में (Notes Part 2). वर्णनात्मक नीतिशास्त्र वर्णनात्मक नीतिशास्त्र उन विषयों का शास्त्र हैं जिन्हें लोग उचित अथवा अनुचित मानते हैं या मानने को विवश कर […]

नीतिशास्त्र की प्रकृति एवं विषय-क्षेत्र (Ethics Notes Part 1)

यूनानी शब्द Ethikos से उत्पन्न नीतिशास्त्र (Ethics) दर्शनशास्त्र की वह मुख्य शाखा है जो समाज द्वारा प्रतिस्थापित मानंदड एवं नैतिक सिद्धांतों के परिप्रेक्ष्य में उचित और अनुचित मानवीय कृत्यों एवं आचरण का अध्ययन करता है. इस प्रकार यह किसी व्यक्ति के नैतिक चरित्र तथा साथ ही स्वीकृत सिद्धांतों के अनुसार समाज उससे क्या अपेक्षा रखता […]

Basava Vachana Deepthi केस – Free Expression पर प्रतिबंध

सरकार ने माते महादेवी (Mate Mahadevi) नामक लेखिका द्वारा रचित एक पुस्तक पर प्रतिबंध लगाया था जिसका नाम “Basava Vachana Deepthi” था. यह मामला सर्वोच्च न्यायलय तक गया जहाँ हाल ही में इस प्रतिबंध की पुष्टि की गई. Basava Vachana Deepthi घटनाक्रम Basava Vachana Deepthi पर कर्नाटक सरकार ने 1998 में प्रतिबंध लगाया था. इसका […]