असैनिक सेवाओं द्वारा संपादित कार्य – Ethics Notes

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पिछले पोस्ट में हमने जो सिविल सेवाओं की विशेषताओं का विवरण किया उससे स्पष्ट हो जाता है कि प्रशासन में उनका कितना महत्त्वपूर्ण स्थान है. अपने कार्यों के निर्वाह के लिए उनमें ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा, उत्तरदायित्व एवं जनसेवा की भावना कूट-कूट कर भरी रहनी चाहिए. वास्तव में, उनके उत्तरदायित्व दिनों-दिन बढ़ते जा रहे हैं. उनका कार्य अब नीति-निर्धारण को कार्यान्वित करने तक ही सीमित नहीं है. व्यवहार में तो नीति-निर्धारण में भी असैनिक कर्मचारियों की सूचना एवं सलाह के अनुसार ही सामान्य नीतियों का निर्धारण मंत्रिमंडल द्वारा होता है. असैनिक सेवाओं द्वारा संपादित कार्यों की विवेचना से उनकी महत्ता और स्पष्ट हो जाएगी.

असैनिक सेवाओं द्वारा संपादित कार्य (Functions performed by Civil Services)

राजनीतिक कार्यपालिका को सलाह देना

राजनीतिक कार्यपालिका को सलाह देना असैनिक सेवाओं का सबसे प्रमुख कार्य है. यह कार्य बहुत ही महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि असैनिक सेवकों के इसी कार्य पर प्रशासन की सफलता या असफलता निर्भर करती है. आवश्यकता इस बात की है कि कर्मचारियों को इस कर्तव्य का निर्वाह ईमानदारीपूर्वक करना चाहिए, उन्हें अच्छी-से-अच्छी सलाह देनी चाहिए. जनता की समस्याओं और आवश्यकताओं का जितना ठोस ज्ञान असैनिक कर्मचारियों को होता है, उतना मंत्रियों को नहीं होता. यही कारण है कि असैनिक सेवकों द्वारा दिए गए सुझाव मंत्रियों द्वारा प्रायः स्वीकार ही कर लिए जाते हैं. स्टॉप का कहना ठीक ही है कि, “मैं अपने मस्तिष्क में बिल्कुल स्पष्ट हूँ कि पदाधिकारी को नवीन समाज का मूल स्रोत होना चाहिए और उसे प्रत्येक चरण पर सलाह, उन्नति और परामर्श की बात कहनी चाहिए.”

नियोजन के कार्यक्रम को सफल बनाना

नियोजन-कार्यक्रम की सफलता भी असैनिक सेवकों के ऊपर ही निर्भर करती है. असैनिक कर्मचारियों द्वारा ही अस्थायी कार्यपालिका के विभिन्न लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए योजनाओं का निर्माण किया जाता है तथा उसके लिए उपयुक्त साधनों की खोज की जाती है. इन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए व्यापक अनुभव और व्यापक ज्ञान की आवश्यकता है, जो असैनिक सेवा के द्वारा ही संभव है.

जनता की सेवा करना

असैनिक सेवा का प्रमुख लक्ष्य जनता की सेवा करना ही है. इसके लिए उसे तरह-तरह के कार्य – सड़क-निर्माण, भवन-निर्माण, शिक्षा का प्रबंध, स्वास्थ्य, चिकित्सा का प्रबंध, शांति एवं व्यवस्था कायम रखना, यातायात का विकास करना आदि – संपादित करने पड़ते हैं. इन कार्यों का संपादन कर्मचारियों की योग्यता एवं दूरदर्शिता पर ही निर्भर है. इन कार्यों की पूर्ति के आधार पर ही उसे सरकार और जनता दोनों की प्रशंसा अथवा घृणा का पात्र बनना पड़ता है. असैनिक कर्मचारीगण इन कार्यों को संपादित करके ही लोकहितकारी राज्य के निकट पहुँच सकते हैं और जनसेवक कहला सकते हैं.

संगठन एवं विधियाँ

असैनिक सेवा का सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य संगठन एवं विधि का है. असैनिक कर्मचारियों को इसी के माध्यम से जनता की सराहना प्राप्त होती है और सरकार भी अपने उत्तरदायित्व को सुगमता से निभाने के योग्य बनती है. प्रायः प्रत्येक देश में इसकी स्थापना की जाती है. इससे असैनिक कर्मचारियों में पाया जाने वाला सबसे बड़ा दोष लालफीताशाही को भी दूर किया जा सकता है.

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