नौकरशाही के दोषों को दूर करने के सुझाव – Ethics Notes

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नौकरशाही के गुण-दोषों की विवेचना करने के बाद यही कहा जा सकता है कि नौकरशाही स्वयं बुरी चीज नहीं है. उसमें कुछ दोष अवश्य विद्यमान है, परंतु वे दोष ऐसे नहीं है कि उन्हें दूर न किया जा सके. उसमें दोष तभी आ जाते हैं जब वह अनियंत्रित हो जाता है. अतः, उसको नियंत्रण में रखना आवश्यक है. रैमजे म्योर (Ramsay Muir) का ठीक ही कहना है कि “नौकरशाही आग के समान है, जो एक सेवक के रूप में तो बहुमूल्य सिद्ध हो सकती है, परंतु जब वह स्वामी बन जाती है, तब घातक सिद्ध होती है.” अतः, इस पद्धति को समाप्त कर देना लाभदायक नहीं होगा, बल्कि उसके दोषों को दूर करने के लिए उचित कदम उठाना है.

नौकरशाही के दोषों को दूर करने के सुझाव (Suggestions to remove the Defects of Bureaucracy)

उसके दोषों को दूर करने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए जा सकते हैं –

(1) नौकरशाही के दोषों को दूर करने के लिए सबसे अधिक आवश्यकता इस बात की है कि सत्ता का विकेंद्रीकरण कर दिया जाए. सत्ता के विकेंद्रीकरण के कारण ही अधिकारियों में कई दोष आ जाते हैं; जैसे-पृथकता, लोचहीनता, भावुकता का अभाव, स्थानीय दशाओं के विषय में अज्ञानता, कार्य में देर या टाल-मटोल करना, कार्य का बेढंगापन तथा अपने में मग्न रहना. अतः, नौकरशाही अधिकारियों की शक्ति पर लगाया जानेवाला सबसे बड़ा नियंत्रण विकेंद्रीकरण है.

(2) असैनिक कर्मचारियों पर संसद तथा मंत्रिमंडल का नियंत्रण प्रभावशाली होना चाहिए. मंत्रिपद पर योग्य व्यक्तियों की ही नियुक्ति की जानी चाहिए, ताकि वे स्वयं असैनिक कर्मचारियों के हाथों की कठपुतली नहीं बन जाएँ, बल्कि उन पर उचित नियंत्रण रख सके.

(3) नागरिकों को असैनिक कर्मचारियों के विरुद्ध अपनी शिकायतें उपस्थित करने का अवसर प्राप्त होना चाहिए. इसके लिए प्रशासकीय न्यायालयों की स्थापना होनी चाहिए जो नागरिकों के दुःख और दिक्कतों को दूर करा सकें.

(4) असैनिक कर्मचारियों को जनता के प्रति पूर्ण उत्तरदायी होना चाहिए. उन्हें एक पृथक वर्ग अथवा जाति का रूप धारण नहीं करना चाहिए. उसे विभिन्न सामाजिक तथा आर्थिक वर्गों का प्रतिनिधि होना चाहिए.

(5) प्रशासकीय पदाधिकारियों और जनता के बीच पत्र-व्यवहार अथवा संदेशों के आदान-प्रदान की एक प्रभावशाली और सतत व्यवस्था होनी चाहिए.

(6) प्रशासन में सामान्य मनुष्यों और गैर-सरकारी व्यक्तियों को भी सक्रिय ढंग से भाग लेना चाहिए. रॉबसन ने ठीक ही विचार व्यक्त किया है, “एकीकरण, पत्र-व्यवहार अथवा संदेशों का आदान-प्रदान तथा प्रशासन में भाग लेना – ये शब्द उन लोगों को सदा ध्यान में रखना चाहिए जो यह चाहते हैं कि प्रजातंत्रीय सरकार की आवश्यकताओं एवं आकांक्षाओं के साथ लोकप्रशासन के संगठनात्मक संबंध कायम हों. इसके सुधार की ऐसी प्रवृत्तियाँ जागृत होती हैं, जिनका यदि अनुसरण किया जाए तो ये असैनिक सेवा को सर्वाधिक मात्रा में योग्य, समर्थ, जवाबदेह तथा उत्तरदायी बना देंगी.”

(7) नौकरशाही को दोषों से मुक्त कराने के लिए आवश्यक है कि कर्मचारियों की भर्ती में किसी तरह के पक्षपात का प्रदर्शन नहीं किया जाए. योग्यता और अनुभव को ही भर्ती के समय ध्यान में रखना चाहिए, सिफारिश को नहीं.

(8) प्रशासन को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए, कर्मचारियों के प्रति जनता में विश्वास उत्पन्न करने के लिए, धन के दुरुपयोग पर रोक और समय की बचत के लिए सरल तथा शीघ्रगामी प्रक्रियाओं की खोज की जानी चाहिए.

निष्कर्ष

इस प्रकार, निष्कर्ष के रूप में कहा जा सकता है कि असैनिक कर्मचारियों से कोई भी देश लाभान्वित हो सकता है. इसे आधुनिक युग की एक अनिवार्य आवश्यकता मानी जाएगी, जिसको समाप्त करना न तो संभव है और न वांछनीय ही. आवश्यकता इस बात की है कि इस पर इतना उचित नियंत्रण रखा जाए कि यह जनता की सेवा में अधिक-से-अधिक संलग्न हो सकें. आवश्यकतानुसार इसकी आलोचना भी होनी याहिए और प्रशंसा भी.

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Tags: Ethics, notes, study-material, UPSC, IAS, civil services, demerits of bureaucracy, suggestions to remove defects.

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