Sansar डेली करंट अफेयर्स, 31 January 2020

Sansar LochanSansar DCALeave a Comment

Sansar Daily Current Affairs, 31 January 2020


GS Paper 2 Source: Indian Express

indian_express

UPSC Syllabus : India and it’s neighbours.

Topic : Import duty on palm oil cut

संदर्भ

भारत सरकार ने कच्चे पाम तेल (crude palm oil – CPO) और प्रसंस्कृत, श्वेतिकृत एवं निर्गंधीकृत (refined, bleached and deodorised (RBD) palm oil) पाम तेल पर लगने वाले आयात शुल्क को घटा दिया है और साथ ही RBD तेल को आयात सूची में “निःशुल्क की श्रेणी” से निकालकर “प्रतिबंधित श्रेणी” में डाल दिया है.

मामला क्या है?

माना जा रहा है कि भारत सरकार ने यह कार्रवाई मलेशिया के प्रधानमंत्री महाथिर बिन मुहम्मद के उस बयान की प्रतिक्रियास्वरूप की है जिसमें भारत के जम्मू-कश्मीर और नागरिकता से सम्बंधित अधिनियमों की आलोचना की गई थी.

स्मरण रहे कि मलेशिया 2017 से इस्लामी उपदेशक जाकिर नायक को शरण दिए हुए है, जिसपर मनी लौन्डरिंग, घृणा भाषण, आतंकियों से सम्बन्ध आदि आरोप हैं और जिसे भारत सरकार कार्रवाई के लिए भारत में लाना चाहती है.

क्यों और कैसे यह निर्णय मलेशिया को प्रभावित करेगा?

  • इंडोनेशिया और मलेशिया मिलकर विश्व का 85% पाम तेल उत्पन्न करते हैं और भारत पाम तेल के सबसे बड़े क्रेताओं में से एक है.
  • मलेशिया जितना पाम तेल उत्पन्न करता है, उतना ही पाम तेल वह प्रसंस्कृत भी कर लेता है. इसलिए मलेशिया प्रसंस्कृत पाम तेल का निर्यात करने के लिए तत्पर रहता है. दूसरी ओर, इंडोनेशिया के पास प्रसंस्करण की क्षमता कम है, अतः वह केवल कच्चा पाम तेल ही भारत को भेज सकता है.
  • भारत ने 2019 में मलेशिया से पाम तेल का आयात कम कर दिया था और मलेशिया में उत्पन्न कच्चे पाम तेल का मात्र 23% ही ख़रीदा था. इस कारण मलेशिया के पाम तेल का फ्यूचर जनवरी 10 और जनवरी 17 के बीच 10% गिर गया था. यदि भारत प्रसंस्कृत तेल के आयत के लिए लाइसेंस निर्गत नहीं करेगा तो मलेशिया को अपने उत्पाद के लिए लिए नए क्रेताओं को ढूँढना पड़ जाएगा.

भारत पर इस कदम का प्रभाव

भारत में लोग पाम तेल का व्यवहार नहीं करते हैं. यहाँ कच्चा पाम तेल आयात से आता है. अतः प्रसंस्कृत पाम तेल का आयात घटाने से भारत की खाद्य मुद्रा स्फीति पर कोई तत्काल प्रभाव नहीं पड़ेगा.

भारत को इतना पाम तेल क्यों चाहिए?

  • पाम तेल ऐसा प्राकृतिक रूप से उपलब्ध तेल है जो सबसे सस्ता पड़ता है.
  • पाम तेल लगभग स्वादरहित होता है इसलिए इसका बेक की गई सामग्रियों से लेकर तले हुए स्नैक आदि में सरलता से प्रयोग किया जाता है.
  • पाम तेल ऊचे तापमान पर भी अपेक्षाकृत स्थिर रहता है और इसलिए दुबारा उपयोग और गहन तड़के (deep frying) के लिए उपयुक्त होता है.
  • हाइड्रोजनेटेड वनस्पति तेल का मुख्य अवयव पाम तेल ही होता है.

GS Paper 2 Source: PIB

pib_logo

UPSC Syllabus : Important aspects of governance, transparency and accountability, e-governance- applications, models, successes, limitations, and potential.

Topic : Bhuvan Panchayat 3.0

संदर्भ

पिछले दिनों भुवन पंचायत संस्करण 3.0 (Bhuvan Panchayat Version 3.0) नामक वेब पोर्टल का अनावरण हुआ.

भुवन पंचायत संस्करण 3.0 क्या है?

भुवन पंचायत विकेन्द्रीकृत योजना निर्माण अपडेट परियोजना के लिए बनाया गया ISRO द्वारा बनाया गया एक अन्तरिक्ष पर आधारित सूचना तंत्र है जिसका उद्देश्य सरकारी परियोजनाओं के बेहतर योजनान्वयन और अनुश्रवण की सुविधा देना है.

पोर्टल का यह संस्करण पंचायत सदस्यों आदि के लाभ के लिए डेटाबेस देखने और सम्बन्धित सेवाओं का लाभ उठाने की सुविधा देता है.

यह पोर्टल जिन वर्गों को विशेष लक्षित करता है, वे हैं – जनसामान्य, पंचायती राज संस्थाएँ और ग्राम पंचायत से जुड़े विभिन्न हितधारक.

पोर्टल की विशेषताएँ

भुवन अन्तरिक्ष छायांकन (Bhuvan satellite imagery) का उपयोग करके 1:10000 परिमाण के उच्च रिजोल्यूशन डेटाबेस की सहायता से भूमि के उपयोग और उसके आच्छादन, बस्तियों, सड़कों, रेल संजालों आदि का पता लगाया जा सकता है.

इस पोर्टल में ग्राम पंचायत सदस्यों और अन्य हितधारकों की सुविधा के लिए न केवल डेटाबेस देखा जा सकता है, अपितु इसके द्वारा अन्य सुविधाओं का भी लाभ उठाया जा सकता है, जैसे – डाटा विश्लेषण, स्वतः उत्पन्न प्रतिवेदन, मॉडल पर आधारित उत्पाद एवं सेवाएँ.

कार्यान्वयन

यह परियोजना कम से कम दो वर्ष चलेगी. ग्राम पंचायत सदस्यों और हितधारकों को इसरो उनकी डाटा सम्बन्धी आवश्यकताओं को समझने में सहायता करेगा.

पृष्ठभूमि

पंचायती राज संस्थाओं और उनके हितधारकों को देश के विकेंद्रीकृत योजना निर्माण में प्रतिभागी बनाने के लिए अन्तरिक्ष पर आधारित सूचना तंत्र का कार्यक्रम सबसे पहले 2011 में हाथ में लिया गया था.

सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी में हुई प्रगति का लाभ उठाकर भुवन पंचायत वेब पोर्टल बनाया गया था जिससे पंचायत के विभिन्न स्तरों पर योजनाओं के निर्माण, प्रदर्शन और अनुश्रवण के काम में सहायता पहुँची.


GS Paper 3 Source: Indian Express

indian_express

UPSC Syllabus : Awareness in space.

Topic : Spitzer telescope

संदर्भ

NASA की SPITZER नामक अन्तरिक्षीय दूरबीन जनवरी 30, 2020 को सेवानिवृत्त हो गई. पिछले 16 वर्षों से यह दूरबीन इन्फ्रारेड प्रकाश में कोसमोस के अन्वेषण में लगी हुई थी.

SPITZER क्या है?

SPITZER दूरबीन NASA के वृहद् वेधशाला कार्यक्रम “Great Observatory” प्रोग्राम की सबसे बाद में बनी दूरबीन है. अगस्त 25, 2003 में यह सौर परिक्रमा पथ में प्रक्षेपित की गई थी. इस दूरबीन का उद्देश्य ब्रह्मांड के अन्य सूर्यों के आस-पास के और सौरमंडल के निकटस्थ अन्य ग्रहों की खोज करना था.

इस प्रकार की जो विशेष दूरबीनें छोड़ी जा चुकी हैं उनमें 1990 और 2003 के बीच प्रक्षेपित हबल अन्तरिक्ष दूरबीन भी सम्मिलित है. विदित हो कि बड़ी वेधशालाओं का लक्ष्य ब्रह्मांड का अलग-अलग प्रकाश तरंग दैर्घ्य में अध्ययन करना था जिनका विवरण निम्नलिखित है –

  • हबल (अभी भी कार्यरत) – दृश्य प्रकाश
  • कोम्पटन गामा-रे वेधशाला (सेवानिवृत्त) – गामा किरणें
  • चन्द्र एक्स-रे वेधशाला (अभी भी कार्यरत) – एक्स-रे

SPITZER कैसे काम करता है?

  • SPITZER इन्फ्रा रेड पट्टी पर केन्द्रित है क्योंकि यह पट्टी सामान्यतः पिंडों से होने वाले ताप विकिरण का प्रतिनिधित्व करती है.
  • SPITZER में लगे उपकरण अत्यंत ही संवेदनशील हैं और इसलिए यह वैज्ञानिकों को उन ब्रह्मांडीय क्षेत्रों को देखने में सहायक हैं जो ऑप्टिकल दूरबीनों से छिपे रहते हैं, जैसे – धूल-धूसरित तारकपुंज, अन्तरिक्ष गंगाओं के केंद्र तथा नई-नई बन रही ग्रह प्रणालियाँ.
  • SPITZER की इन्फ्रारेड आँखों के माध्यम से अन्तरिक्षवेत्ता अन्तरिक्ष के अधिक शीतल पिंडों को देखने में समर्थ होते हैं, जैसे – मृत तारे (भूरे बौने/brown dwarfs), सौर मंडल से बाहर के ग्रह, विशालकाय कण-निर्मित बादल और वैसे जैव कण जिनमें अन्य ग्रहों में जीवन होने का रहस्य छुपा हुआ है.

SPITZER के बंद होने से इसका क्या होगा?

यह दूरबीन एक विशेष परिक्रमा पथ पर चल रहा है जो पृथ्वी से लगभग 158 मील पीछे है क्योंकि इसको बीच में आने वाली ऊष्मा से बचाना आवश्यक था. आज से 53 वर्षों के पश्चात् SPITZER हमारे ग्रह से आगे निकल जाएगा. किन्तु उस समय SPITZER उल्टी दिशा में चला जाएगा और अंततः अन्तरिक्ष की शून्यता में ओझल हो जाएगा.

मुख्य उपलब्धियाँ

  • स्पिज़र द्वारा की गई खोजें सौर मंडल के अतिरिक्त अन्य तारों के आस-पास के ग्रहों से सम्बंधित रहीं. नासा के अन्य बड़ी-बड़ी वेधशालाओं से सहयोग कर SPITZER ने वैज्ञानिकों को कई ब्रह्मांडीय घटनाओं से सम्बंधित अधिक पूर्ण परिदृश्य उपलब्ध कराया है.
  • पिछले 15 वर्षों में SPITZER ने खोज में 106,000 घंटे बिठाये.
  • इसने ब्रह्मांड के कुछ सबसे पुरानी आकाशगंगाओं का पता लगाया और शनि ग्रह के चारों ओर एक नई मुद्रा (ring) की जानकारी दी.
  • साथ ही इसने नवजात तारों और कृष्ण विवरों का अध्ययन करने के लिए उनके चारों ओर फैले धूल के आम्बंडर के आर-पार ताक-झाँक की.
  • सौर मंडल के बाहर इसने कई ग्रहों का पता लगाया जिनमें पृथ्वी के आकार के ऐसे सात ग्रह भी थे जो TRAPpist-1 नामक तारे के चारों ओर परिक्रमा करते हैं.

GS Paper 3 Source: The Hindu

the_hindu_sansar

UPSC Syllabus : Indigenization of technology and developing new technology.

Topic : Polycrack technology

संदर्भ

पिछले दिनों ओडिशा में मंचेश्वर कैरेज रिपेयर वर्कशॉप में देश का पहला सरकारी कचरे से ऊर्जा उत्पादित करने वाला संयंत्र चालू किया गया. इस संयंत्र में पोलिक्रैक नामक एक पेटेंट-कृत तकनीक (Polycrack technology) अपनाई गई है.

इस प्रकार का यह देश का चौथा और भारतीय रेलवे का पहला संयंत्र है. यह अनेक प्रकार के फीड स्टॉक को हाइड्रोकार्बन, तरल ईंधन, गैस, कार्बन और पानी में बदल डालता है.

पोलिक्रैक क्या है?

  • पोलिक्रैक विश्व की पहली ऐसी पेटेंट-कृत उत्प्रेरण प्रक्रिया (catalytic process) है जिसमें अनेक प्रकार के फीड स्टॉक को हाइड्रोकार्बन, तरल ईंधन, गैस, कार्बन और पानी में बदला जाता है.
  • इस प्रक्रिया में उत्पन्न अपशिष्ट ऊर्जा संयंत्र में फीडर सामग्री का काम करता है.
  • संयंत्र में इस प्रकार जो ऊर्जा उत्पन्न होगी वह हल्के डीजल तेल के रूप में होगी जिसका उपयोग भट्ठियों को जलाने में किया जाएगा.

इस संयंत्र में कौन-से फीड स्टॉक डाले जाएँगे?

500 किलोग्राम प्रति खेप वाले इस संयंत्र में निम्नलिखित फीड स्टॉक डाले जाएँगे –

  1. सभी प्रकार के प्लास्टिक
  2. पेट्रोलियम की गाद
  3. 50% तक की आर्द्रता वाला बिना पृथक किया गया ठोस कचरा
  4. ई-कचरा
  5. स्वचालित वाहनों से निकला फ्लफ
  6. बाँस, बगीचा आदि का कचरा समेत जैविक अपशिष्ट
  7. जटरोफा फल और ताड़ के टुकड़े

इस प्रकार के संयंत्र के कुछ लाभ

  • ऐसे संयंत्र में कचरे को प्रक्रिया आरम्भ करने के पहले अलग करना आवश्यक नहीं होता है, अपितु उसे संयंत्र में उठाकर सीधे डाल दिया जाता है.
  • संयंत्र आर्द्रता सहने में बहुत समर्थ रहता है, अतः उपचार के पश्चात् कचरे को सुखाने की आवश्यकता नहीं होती.
  • 24 घंटे के भीतर कचरे का प्रसंस्करण पूरा हो जाता है.
  • कचरा सीधे उसके स्रोत से ज्यों का त्यों उठाया जाता है, इसलिए उसका जैव अपघटन नहीं किया जाता है.
  • कचरे के सभी अवयव मूल्यवान ऊर्जा में बदल जाते हैं, अतः प्रसंस्करण में शून्य के बराबर कचरा निकलता है.
  • प्रसंस्करण के समय जो गैस उत्पन्न होती है उसी गैस से इस संयंत्र में ऊर्जा लगाई जाती है, अतः संयंत्र ऊर्जा के विषय में स्वयं सक्षम होता है. इससे संयंत्र को चलाने की लागत भी कम ही रहती है.
  • अन्य पारम्परिक पद्धतियों की भाँति इस संयंत्र में प्रसंस्करण के समय वातावरण में कोई उत्सर्जन नहीं होता है. इससे मात्र गैस के जलने से थोड़ा बहुत उत्सर्जन होता है जोकि पूरे विश्व में इसके लिए निर्धारित मानदंड से कम ही होता है.

GS Paper 3 Source: The Hindu

the_hindu_sansar

UPSC Syllabus : Security challenges and their management in border areas; linkages of organized crime with terrorism.

Topic : Govt signs accord with NDFB, ABSU to resolve Bodo issue

संदर्भ

भारत सरकार के गृह मंत्रालय, असम सरकार और बोड़ो समूहों ने पिछले दिनों एक समझौते पर हस्ताक्षर किये जिसके द्वारा असम में बोड़ो लैंड टेरिटोरियल एरिया डिस्ट्रिक्ट (BTAD) का मानचित्र और नामकरण फिर से किया गया.

ज्ञातव्य है कि वर्तमान में BTAD जिला असम के इन चार जिलों में फैला हुआ है – कोकरझाड़, चिराँग, बक्सा और उदलगिरी.

समझौते का विहंगम स्वरूप

  • वर्तमान BTAD क्षेत्र से उन क्षेत्रों को हटाया जाएगा जहाँ बोड़ो नहीं रहते हैं और उन क्षेत्रों को जोड़ा जायेगा जहाँ बहुतायत से रहते हैं.
  • नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोड़ोलैंड अर्थात् NDFB गुटों के उन सदस्यों के विरुद्ध पंजीकृत आपराधिक वादों को असम सरकार वापस ले लेगी जिनके अपराध अजघन्य प्रकृति के हैं तथा जिन वादों में जघन्य अपराध का आरोप है उन वादों की समीक्षा की जायेगी.
  • बोड़ो आन्दोलन में जो लोग मर गये उनके प्रत्येक परिवार को पाँच लाख रुपये दिए जाएँगे.
  • बोड़ो क्षेत्र में विशेष विकास परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार 1,500 करोड़ रु. का एक विशेष पैकेज मुहैया करेगी.
  • BATD में नया क्षेत्र जोड़ने और निकालने के बारे में निर्णय करने के लिए एक समिति होगी. ऐसा करने से बोड़ो लैंड क्षेत्र में विधान सभा सीटों की संख्या वर्तमान के 40 से बढ़कर 60 हो सकती है.

बोड़ो समझौते का माहात्म्य

  • इस समझौते पर हस्ताक्षर होते ही 50 वर्ष से चलता आया बोड़ो संकट समाप्त हो जाएगा.
  • केंद्र और असम सरकार NDFB(P), NDFB(RD) और NDFB(S) के 1,500 के लगभग व्यक्तियों का पुनर्वास करेगी और उन्हें मुख्य धारा में ले आएगी.
  • समझौते के उपरान्त NDFB के सभी गुट हिंसा का मार्ग त्याग देंगे, अपने हथियार डाल देंगे और अपने सशस्त्र संगठनों को एक महीने में विघठित कर देंगे.

क्या है बोड़ोलैंड का मुद्दा?

  • 1960 के दशक से ही बोड़ो अपने लिये अलग राज्य की मांग करते आए हैं.
  • असम में इनकी ज़मीन पर अन्य समुदायों का आकर बसना और ज़मीन पर बढ़ता दबाव ही बोड़ो असंतोष के कारण हैं.
  • अलग राज्य के लिये बोड़ो आंदोलन 1980 के दशक के बाद हिंसक हो गया और तीन धड़ों में बंट गया. पहले का नेतृत्व नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोड़ोलैंड ने किया, जो अपने लिये अलग राज्य चाहता था. दूसरा समूह बोड़ोलैंड टाइगर्स फोर्स है, जिसने अधिक स्वायत्तता की मांग की. तीसरा धड़ ऑल बोड़ो स्टूडेंट्स यूनियन है, जिसने मध्यम मार्ग की तलाश करते हुए राजनीतिक समाधान की मांग की.
  • बोड़ो अपने क्षेत्र की राजनीति, अर्थव्यवस्था और प्राकृतिक संसाधन पर जो वर्चस्व चाहते थे, वह उन्हें 2003 में मिला. तब बोड़ो समूहों ने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा की राजनीति में आने पर सहमति जताई.
  • इसी का नतीजा था कि बोड़ो समझौते पर 2003 में हस्‍ताक्षर किये गए और भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के तहत बोड़ोलैंड क्षेत्रीय परिषद का गठन हुआ.

NDFB क्या है?

  • एनडीएफबी अर्थात् नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोड़ोलैंड एक ऐसा संगठन है जिसका उद्देश्य असम से बोड़ो बहुल इलाके को अलग कर एक स्वतंत्र और संप्रभु बोड़ोलैंड देश की स्थापना है. भारत सरकार ने इस ग्रुप को आतंकी गुट की श्रेणी में डाल रखा है.
  • एनडीएफबी में दो गुट हैं, पहला आईके सांग्बिजित के नेतृत्व में एनडीएफबी(एस). जो भारत सरकार से वार्ता के पक्ष में है. वहीं, दूसरा धड़ा एनडीएफबी(आर-बी) रंजन डायमरी के नेतृत्व में जो हमेशा से संघर्ष का ही रास्ता अख्तियार करता रहा है. हालांकि पहले दोनों धड़े एक ही थे, लेकिन साल 2012 के बाद से दोनों धड़े अलग हुए हैं. ज्यादातर हमलों के लिए एनडीएफबी(आर-बी) ग्रुप ही जिम्मेदार है.
  • लगभग 28 साल पहले 1986 में बना ये संगठन सामूहिक नरसंहार के लिए कुख्यात है और ऐसे हमलों में वो अब तक हजार से भी ज्यादा लोगों की जान ले चुका है.
  • इस ग्रुप में फिलहाल 1200 के करीब आतंकी हैं, जो अक्सर सुरक्षा बलों और गैर बोड़ो समुदाय पर हमला करते रहते हैं. एक समय ये संख्या 3500 से ज्यादा थी, लेकिन भारत और भूटानी सुरक्षा बलों के अभियानों और आंतरिक फूट के चलते इसकी ताकत कम हो रही है. जिसकी बौखलाहट में इस संगठन ने अपने हमलों को तेज कर दिया है.

बोड़ो कौन हैं?

  • बोड़ोपूर्वोत्तर भारत के असम राज्य के मूल निवासी हैं और भारत की एक महत्वपूर्ण जनजाति हैं. बोड़ो समुदाय स्वयं एक बृहत बोड़ो-कछारी समुदाय का हिस्सा माने जाते हैं.
  • सन् 2011 की भारतीय राष्ट्रीय जनगणना में लगभग 20 लाख भारतीयों ने स्वयं को बोड़ो बताया था जिसके अनुसार वे असम की कुल आबादी के 5.5% हैं. भारतीय संविधान की छठी धारा के तहत वे एक अनुसूचित जनजाति हैं.
  • बोड़ो लोगों की मातृभाषा भी बोड़ो भाषा कहलाती है, जो एक ब्रह्मपुत्री भाषा है.

Prelims Vishesh

SAMPRITI-IX :-

  • संप्रीति भारत और बांग्लादेश के द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास को कहते हैं.
  • इस वर्ष इसका 9वाँ संस्करण मेघालय के उमरोई में आयोजित हो रहा है.

Click here to read Sansar Daily Current Affairs – Sansar DCA

December, 2019 Sansar DCA is available Now, Click to Download

Books to buy

Leave a Reply

Your email address will not be published.