पोलिक्रैक क्या है? – Polycrack technology Explained

Sansar LochanEnergyLeave a Comment

Polycrack technology Explained in Hindi

पिछले दिनों ओडिशा में मंचेश्वर कैरेज रिपेयर वर्कशॉप में देश का पहला सरकारी कचरे से ऊर्जा उत्पादित करने वाला संयंत्र चालू किया गया. इस संयंत्र में पोलिक्रैक नामक एक पेटेंट-कृत तकनीक (Polycrack technology) अपनाई गई है.

इस प्रकार का यह देश का चौथा और भारतीय रेलवे का पहला संयंत्र है. यह अनेक प्रकार के फीड स्टॉक को हाइड्रोकार्बन, तरल ईंधन, गैस, कार्बन और पानी में बदल डालता है.

पोलिक्रैक क्या है?

  • पोलिक्रैक विश्व की पहली ऐसी पेटेंट-कृत उत्प्रेरण प्रक्रिया (catalytic process) है जिसमें अनेक प्रकार के फीड स्टॉक को हाइड्रोकार्बन, तरल ईंधन, गैस, कार्बन और पानी में बदला जाता है.
  • इस प्रक्रिया में उत्पन्न अपशिष्ट ऊर्जा संयंत्र में फीडर सामग्री का काम करता है.
  • संयंत्र में इस प्रकार जो ऊर्जा उत्पन्न होगी वह हल्के डीजल तेल के रूप में होगी जिसका उपयोग भट्ठियों को जलाने में किया जाएगा.

पोलिक्रैक संयंत्र में कौन-से फीड स्टॉक डाले जाएँगे?

500 किलोग्राम प्रति खेप वाले इस संयंत्र में निम्नलिखित फीड स्टॉक डाले जाएँगे –

  1. सभी प्रकार के प्लास्टिक
  2. पेट्रोलियम की गाद
  3. 50% तक की आर्द्रता वाला बिना पृथक किया गया ठोस कचरा
  4. ई-कचरा
  5. स्वचालित वाहनों से निकला फ्लफ
  6. बाँस, बगीचा आदि का कचरा समेत जैविक अपशिष्ट
  7. जटरोफा फल और ताड़ के टुकड़े

इस प्रकार के संयंत्र के कुछ लाभ

  • पोलिक्रैक संयंत्र में कचरे को प्रक्रिया आरम्भ करने के पहले अलग करना आवश्यक नहीं होता है, अपितु उसे संयंत्र में उठाकर सीधे डाल दिया जाता है.
  • संयंत्र आर्द्रता सहने में बहुत समर्थ रहता है, अतः उपचार के पश्चात् कचरे को सुखाने की आवश्यकता नहीं होती.
  • 24 घंटे के भीतर कचरे का प्रसंस्करण पूरा हो जाता है.
  • कचरा सीधे उसके स्रोत से ज्यों का त्यों उठाया जाता है, इसलिए उसका जैव अपघटन नहीं किया जाता है.
  • कचरे के सभी अवयव मूल्यवान ऊर्जा में बदल जाते हैं, अतः प्रसंस्करण में शून्य के बराबर कचरा निकलता है.
  • प्रसंस्करण के समय जो गैस उत्पन्न होती है उसी गैस से इस संयंत्र में ऊर्जा लगाई जाती है, अतः संयंत्र ऊर्जा के विषय में स्वयं सक्षम होता है. इससे संयंत्र को चलाने की लागत भी कम ही रहती है.
  • अन्य पारम्परिक पद्धतियों की भाँति इस संयंत्र में प्रसंस्करण के समय वातावरण में कोई उत्सर्जन नहीं होता है. इससे मात्र गैस के जलने से थोड़ा बहुत उत्सर्जन होता है जोकि पूरे विश्व में इसके लिए निर्धारित मानदंड से कम ही होता है.

Tags : Polycrack technology, how it works explained in Hindi. Need for and significance.

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