Sansar डेली करंट अफेयर्स, 15 February 2020

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Contents

Sansar Daily Current Affairs, 15 February 2020


GS Paper 1 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Issues related to women.

Topic : HC seeks govt. stand on plea to ban acid sale

संदर्भ

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार से एक तेजाब आक्रमण (acid attack) से बच जाने वाली लड़की की याचिका पर सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट करने का निर्देश दिया है. याचिका में शिकायत है कि सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा तेजाब के विक्रय को नियंत्रित करने का निर्देश दिए जाने पर भी तेजाब सरलता से मिल जाता है. याचिका करने वाली का आरोप है तेजाब के विक्रय से सम्बंधित वैधानिक नियमों का पालन नहीं हो रहा है.

तेजाब के विक्रय पर कठोर नियंत्रण क्यों होना चाहिए?

सर्वविदित है कि आज तेज़ाब स्त्रीविद्वेष का एक हथियार बन गया है और यह पितृसत्तात्मक समाज के द्वारा स्त्रियों के विरुद्ध धड़ल्ले से प्रयोग में आ रहा है. जो स्त्री दहेज़ से मना करती है या सम्पत्ति पर अपना अधिकार मानती है अथवा किसी धार्मिक या सामाजिक रीति की अवहेलना करती है अथवा जोरो से हंसती है अथवा हिजाब पहनने से मना करती है अथवा जींस पहनती है अथवा किसी प्रेम प्रस्ताव को अस्वीकार करती है तो तेज़ाब को उसके विरुद्ध हथियार के रूप में प्रयोग होता है.

पृष्ठभूमि

  • ये निर्देश 2013 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तेज़ाब के हमले के एक मामले में दिए गये थे जिसमें लक्ष्मी नामक एक स्त्री के मुंह और शरीर पर तेज़ाब फेककर उसे विकृत कर दिया गया था.
  • लक्ष्मी ने एक जनहित याचिका दायर कर के माँग की थी कि इस विषय में एक नया कानून बनाया जाए अथवा भारतीय दंड संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम और आपराधिक प्रक्रिया संहिता जैसे वर्तमान कानूनों में संशोधन किये जाएँ जिससे ऐसे मामलों से निबटा जा सके और पीड़िता को उपयुक्त क्षतिपूर्ति मिल सके.
  • अपनी याचिका में लक्ष्मी ने यह माँग की थी कि तेज़ाब की खुदरा बिक्री पर सम्पूर्ण रोक लगाई जाए.

तेज़ाब के बारे में सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देश

  1. तेज़ाब उसी व्यक्ति को बेचा जाए जिसके पास एक वैध पहचान पत्र हो.
  2. खरीदने वाले को बताना होगा कि उसको तेज़ाब क्यों चाहिए.
  3. बेचने वाले को भी बिक्री के बारे में पुलिस को बताना होगा.
  4. पीड़ित व्यक्ति को पहले से अधिक क्षतिपूर्ति राशि दी जायेगी.

आगे की राह

भारत के अतिरिक्त दक्षिण एशिया के अन्य देशों में भी तेज़ाब के हमले होते रहते हैं, जैसे – बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान में. भारत में एक वर्ष में ऐसे एक हजार हमले होते हैं. ये हमले अधिकतर स्त्रियों पर ही होते हैं और तेज़ाब फेकने वाले बहुधा ईर्ष्यालु प्रेमी होते हैं. हमले के पश्चात् चेहरा बिगड़ जाता है जिससे पीड़ितों को एक बहुत बड़ी स्थायी त्रासदी से गुजरना पड़ता है.


GS Paper 1 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Salient features of Indian Society, Diversity of India.

Topic : Uniform Civil Code

संदर्भ

गत सप्ताह एक गोवावासी की सम्पत्ति पर विचार करते समय सर्वोच्च न्यायालय ने गोवा राज्य की इसलिए प्रशंसा की कि वहाँ समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू है. गोवा को एक चमकीला उदाहरण करार देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि संविधान के निर्माताओं ने आशा की थी कि देश को एक समान नागरिक संहिता मिलेगी, किन्तु ऐसी संहिता बनाने कोई प्रयास नहीं किया गया.

संविधान में अनुच्छेद 44 में क्या उल्लिखित है?

राज्य नीति निर्देशक तत्त्व (जो अनुच्छेद 36 से अनुच्छेद 51 तक हैं) के अनुच्छेद 44 में लिखा है कि देश को भारत के सपूर्ण क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता बनाने का प्रयास करना चाहिए.

समान नागरिक संहिता क्या है?

संविधान निर्माण करते वक़्त बुद्धिजीवियों ने सोचा कि हर धर्म के भारतीय नागरिकों के लिए एक ही सिविल कानून रहना चाहिए. इसके अन्दर आते हैं:—
1. Marriage विवाह
2. Succession संपत्ति-विरासत का उत्तराधिकार
3. Adoption दत्तक ग्रहण

यूनिफार्म सिविल कोड लागू करने का मतलब ये है कि शादी, तलाक और जमीन जायदाद के उत्तराधिकार के विषय में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होगा। फिलहाल हर धर्म के लोग इन मामलों का निपटारा अपने-अपने पर्सनल लॉ के तहत करते हैं.

क्या कुछ नागरिक मामलों में भारत में पहले से ही सामान संहिताएँ लागू हैं?

भारत में कई नागरिक मामलों के लिए एक ही प्रकार की संहिता अथवा अधिनियम लागू हैं, जैसे – भारतीय संविधा अधिनियम (Indian Contract Act), व्यवहार प्रक्रिया संहिता  (Civil Procedure Code), वस्तु विक्रय अधिनियम (Sale of Goods Act), सम्पत्ति हस्तांतरण अधिनियम (Transfer of Property Act), भागीदारी अधिनियम (Partnership Act), साक्ष्य अधिनियम (Evidence Act) आदि आदि.

परन्तु इनमें भी राज्यों ने सैकड़ों संशोधन कर डाले हैं. इसलिए इनमें समरूपता है ऐसा नहीं कह सकते हैं. पिछले दिनों कई राज्यों ने 2019 के समान मोटर वाहन अधिनियम को मानने से मन कर दिया.

समान नागरिक संहिता के विषय में चर्चा कब शुरू हुई?

जब ब्रिटिश भारत आये तो उन्होंने पाया कि यहाँ हिन्दू, मुस्लिम, इसाई, यहूदी आदि सभी धर्मों के अलग-अलग धर्म-सबंधित नियम-क़ानून हैं. 

जैसे हिन्दू धर्म में:-
1. पुनर्विवाह वर्जित था (Hindu Widow Remarriage Act of 1856 द्वारा ख़त्म किया गया)
2. बाल-विवाह अनुमान्य था, शादी की कोई उम्र-सीमा नहीं थी.
3. पुरुष के लिए बहुपत्नीत्व हिन्दू समाज में स्वीकार्य था.
4. स्त्री (जिसमें बेटी या पत्नी दोनों शामिल थे) को उत्तराधिकार से वंचित रखा जाता था
5. स्त्री के लिए दत्तक पुत्र रखना वर्जित था
6. विवाहित स्त्री को सम्पत्ति का अधिकार नहीं था (Married Women’s Property Act of 1923 द्वारा उसे ख़त्म किया गया)

मुस्लिम धर्म में:-
1. पुनर्विवाह की अनुमति थी
2. उत्तराधिकार में स्त्री का कुछ हिस्सा था
3. तीन बार तलाक बोलने मात्र से अपने जीवन से पुरुष स्त्री को हमेशा के लिए अलग कर सकता था.

अंग्रेजों ने शुरू में इस पर विचार किया कि सभी भारतीय नागरिकों के लिए एक ही नागरिक संहिता बनायी जाए. पर धर्मों की विविधता और सब के अपने-अपने कानून होने के कारण उन्होंने यह विचार छोड़ दिया. इस प्रकार अंग्रेजों के काल में विभिन्न धर्म के धार्मिक विवादों का निपटारा कोर्ट सम्बन्धित धर्मानुयायियों के पारम्परिक कानूनों के आधार पर करने लगे.     

संविधान सभा ने भी समान नागरिक संहिता पर विचार किया था और एक समय इसे मौलिक अधिकार में रखा जा रहा था. परन्तु 5:4 के बहुतमत से यह प्रस्ताव निरस्त हो गया. किन्तु राज्य नीति निर्देशक तत्त्व के अन्दर इसे शामिल कर दिया गया.


GS Paper 2 Source: Indian Express

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UPSC Syllabus : Functions and responsibilities of the Union and the States, issues and challenges pertaining to the federal structure, devolution of powers and finances up to local levels and challenges therein.

Topic : Private member’s Bill

संदर्भ

चार सांसदों ने निजी सदस्य विधेयक (Private member’s Bill) तैयार कर रखे हैं जिनमें ऊँची बेरोजगारी दर से निबटने के उपाय किये गये हैं.

ये चार विधेयक कौन-कौन से हैं?

  1. बेरोजगारी भत्ता विधेयक 2019 – इसमें बरोजगार नागरिकों को बेरोजगारी भत्ता देने का प्रस्ताव है.
  2. बेरोजगार स्नातकोत्तर उत्तीर्ण को वित्तीय सहायता विधेयक 2019 – इसमें केवल बेरोजगार स्नातकोत्तर उत्तीर्ण लोगों को ही भत्ता देने का प्रस्ताव है.
  3. बेरोजगार युवा (भत्ता एवं रोजगार अवसर) विधेयक 2019 – इसमें बेरोजगारी भत्ते के साथ-साथ फलदायी रोजगार के अवसर सृजित करने के उपाय बताये गये हैं.
  4. बेरोजगार भत्ता विधेयक – इसमें प्रस्ताव है कि बेरोजगारी भत्ता तब तक मिलता रहे जब तक बेरोजगार को कोई फलदाई रोजगार लग सके.

निजी सदस्य कौन होता है?

कोई भी सांसद जो मंत्री नहीं है उसे निजी सदस्य कहा जाता है.

निजी सदस्य विधेयक को विचारार्थ लेने की प्रक्रिया

किसी निजी सदस्य विधेयक को विचार के लिए अपनाया जाए या नहीं इसका निर्णय राज्य सभा के सभापति अथवा लोकसभा के अध्यक्ष करते हैं. दोनों सदस्यों के लिए मोटे तौर पर प्रक्रिया एक ही है :-

  1. विधेयक लाने वाले सदस्य को एक महीने का नोटिस देना होगा. उसके पश्चात् ही विधेयक उपस्थापन के लिए सूचीबद्ध हो सकेगा.
  2. सदन का सचिवालय परीक्षण करके देखता है कि प्रस्तावित विधेयक सांविधानिक प्रावधानों और विधायी नियमों के अनुरूप है अथवा नहीं. इसके पश्चात् ही उसे सूचीबद्ध किया जाता है.

निजी सदस्य विधेयक लाने के लिए निर्धारित दिन

सरकारी विधेयक किसी भी दिन लाये और विचारे जा सकते हैं, परन्तु निजी सदस्य विधेयक केवल शुक्रवार को ही उपस्थापित हो सकते हैं और उसी दिन उन पर चर्चा हो सकती है.

आज तक किसी निजी सदस्य का विधेयक पारित हुआ है?

पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च के अनुसार आज तक 14 निजी सदस्य विधेयक पारित हो चुके हैं जिनमें छह विधेयक 1956 में पारित हुए थे. 1970 से आज तक किसी भी निजी सदस्य का विधेयक संसद ने पारित नहीं किया है. 14वीं लोकसभा में 300 से अधिक ऐसे प्रस्तुत हुए थे जिसमें मोटा-मोटी 4% पर ही चर्चा हुई. शेष 96% विधेयक बिना एक भी वाक्य बिना बोले व्यपगत हो गये.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Awareness in space.

Topic : Solar Orbiter Mission

संदर्भ

पिछले दिनों यूरोपीय अन्तरिक्ष एजेंसी (European Space Agency – ESA) और नासा ने मिलकर सौर परिक्रमा मिशन (Solar Orbiter Mission) का अनावरण करते हुए एक सोलर ऑर्बिटर अन्तरिक्षयान सूर्य की ओर भेजा. यह अन्तरिक्षयान अमेरिका के Cape Canaveral से एक United Launch Alliance Atlas V रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित किया गया.

सोलर ऑर्बिटर क्या है?

  • सोलर ऑर्बिटर एक मिशन का नाम है जो सूर्य एवं हेलियोस्फीयर से सम्बंधित भौतिकी को समर्पित है.
  • यूरोपीय अन्तरिक्ष एजेंसी के Cosmic Vision 2015-2025 कार्यक्रम के अंतर्गत चुना गया यह पहला मध्यम श्रेणी का मिशन है.
  • यह एक ऐसा पहला मिशन है जो सूर्य के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों का छायाचित्र उपलब्ध कराएगा. इसके लिए यह छह उपकरणों का उपयोग करेगा.
  • सोलर ऑर्बिटर मिशन सात वर्षों का है और यह सूर्य से 26 मिलियन माइल की दूरी तक जाएगा.
  • इसमें कैल्शियम फॉस्फेट से पुती हुई कस्टम टाइटेनियम की एक ढाल है जिसके चलते यह सूर्य के ताप को सह लेने में समर्थ है. वस्तुतः सोलर ऑर्बिटर 970 डिग्री फारेनहाइट तक का तापमान झेल सकता है.
  • सूर्य की अत्यंत अंडाकार कक्षा तक पहुँचने में सोलर ऑर्बिटर को दो वर्ष लगेंगे.
  • सोलर ऑर्बिटर मिशन नासा के पार्कर सोलर प्रोब के साथ सक्रिय रहेगा. विदित हो कि पार्कर सोलर प्रोब अभी सूर्य की परिक्रमा कर रहा है.

उद्देश्य

  • सोलर ऑर्बिटर का उपयोग यह पता लगाने में किया जाएगा कि सूर्य हेलियोस्फीयर को कैसे बनाता है और उसे कैसे नियंत्रित करता है. ज्ञातव्य है कि हेलियोस्फीयर सौर पवनों द्वारा अंतरतारकीय क्षेत्र की ओर प्रवाहित आविष्ट कणों से निर्मित विशाल बुलबुले को कहते हैं.
  • इस अन्तरिक्षयान में दूरस्थ संवेदन निरीक्षण के साथ-साथ स्वयं अन्तरिक्षयान से भी सूचना ग्रहण करने की शक्ति है. यह जिन घटनाओं आदि के बारे में सूचना इकठ्ठा करेगा उनमें प्रमुख हैं – सौर पवन, हेलियोस्फीयर का चुम्बकीय क्षेत्र, सूर्य के ऊर्जापूर्ण कण, ग्रहों के बीच होने वाले आते-जाते विक्षोभ और सूर्य का चुम्बकीय क्षेत्र.

सोलर ऑर्बिटर को किन बड़े-बड़े वैज्ञानिक प्रश्नों का हल निकालना है?

  1. सौर पवन कौन चलाता है और कोरोना चुम्बकीय क्षेत्र का उद्गम कहाँ है?
  2. कैसे सौर ट्रांजिएंट हेलियोस्फीयर में विविधता लाते हैं?
  3. सौर विस्फोटों से हेलियोस्फीयर को भरने वाला ऊर्जापूर्ण कण विकिरण कैसे उत्पन्न करता है?
  4. सौर डायनेमो कैसे काम करता है और सूर्य एवं हेलियोस्फीयर के बीच यह सम्पर्क कैसे स्थापित करता है?

लाभ

सूर्य के चुम्बकीय क्षेत्र और सौर पवन को समझना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि ये ही अन्तरिक्षीय मौसम में इनका योगदान होता है. ज्ञातव्य है कि अन्तरिक्षीय मौसम पृथ्वी पर अपना प्रभाव डालता है क्योंकि यह हमारी नेटवर्क प्रणालियों में हस्तक्षेप करता है, जैसे – GPS, संचार आदि में. यहाँ तक कि अंतर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष केंद्र के अन्तरिक्ष यात्रियों पर भी इसका प्रभाव पड़ता है. सूर्य का चुम्बकीय क्षेत्र इतना विशाल है कि यह प्लूटो से भी आगे तक जाता है. यही क्षेत्र सौर पवन को सौर मंडल की यात्रा करने हेतु मार्ग प्रशस्त करता है.

यूलिसस अन्तरिक्षयान (Ulysses spacecraft)

1990 में यूरोपीय अन्तरिक्ष एजेंसी और नासा ने मिलकर सूर्य की ओर एक अन्तरिक्षयान छोड़ा था जिसका नाम Ulysses रखा गया था. यह अन्तरिक्षया सूर्य के ध्रुवों से होकर उड़ा था. इसने सूर्य को तीन बार पार किया और अंततः 2009 में यह मिशन समाप्त हो गया.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Conservation related issues.

Topic : Global conservation list

संदर्भ

एशियाई हाथी और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को वैश्विक संरक्षण सूची (Global conservation list) में  लाने के लिए भारत ने प्रयास करने की सोची है.

  • विदित हो कि इस सूची में आने वाली प्रजाति का संरक्षण बहुत जोर-शोर से किया जाता है. वर्तमान में वैश्विक संरक्षण सूची (अपर नाम Appendix 1) में 173 प्रजातियाँ अंकित हैं.
  • भारत के प्रस्ताव पर 13वें कांफ्रेंस ऑफ़ पार्टीज (COP) में चर्चा होने वाली है. ये पार्टियाँ CMS संधि की पक्षकार हैं.
  • CMS अर्थात् (Convention on the Conservation of Migratory Species of Wild Animals) संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम UNEP के अंतर्गत सम्पन्न एक पर्यावरण संधि है.
  • यह COP गांधीनगर में फ़रवरी 17 से 22 तक चलेगा. उल्लेखनीय है कि अगले तीन वर्षों के लिए भारत को COP का अध्यक्ष चुन लिया गया है.

CMS क्या है?

  • CMS संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम UNEP के अंतर्गत सम्पन्न एक पर्यावरण संधि है जिसका उद्देश्य परिव्रजन (migratory) करने वाली प्रजातियों को सुरक्षा प्रदान करना है.
  • इसे बोन संधि (Bonn Convention) भी कहते हैं.
  • यह एक ऐसा वैश्विक मंच है जहाँ परिव्रजन करने वाले पशुओं और उनके निवास-स्थलों के संरक्षण और सतत उपयोग पर विचार होता है.
  • इस मंच से वे देश जुड़े होते हैं जहाँ से होकर परिव्रजन करने वाले पशु गुजरते हैं. इसलिए इन देशों को रेंज स्टेट्स (Range States) कहा जाता है.
  • CMS पूरे रेंज में संरक्षण के लिए किये जाने वाले उपायों का अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय करता है और इसके लिए वैधानिक आधार मुहैया करता है.
  • यह एकमात्र ऐसा वैश्विक एवं संयुक्त राष्ट्र-आधारित अंतर-सरकारी संगठन है जिसकी स्थापना विशुद्ध रूप से परिव्रजन करने वाले स्थलीय, जलीय और आकाशीय प्राणियों के संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए हुई थी.

किसे परिव्रजन करने वाली प्रजाति कहा जाता है और उनकी सुरक्षा क्यों?

  • परिव्रजन करने वाली प्रजातियाँ उन प्राणियों को कहते हैं जो वर्ष के विभिन्न भागों में एक निवास स्थल से दूसरे निवास स्थल तक कई कारणों से जाया करते हैं, जैसे – बाढ़, धूप, गर्मी, जलवायु आदि.
  • परिव्रजन करते समय कुछ पक्षी और पशु हजारों किलोमीटर तक दूर चले जाते हैं. अपनी यात्रा के बीच ये कहीं घोसला बनाकर भी रहते हैं और प्रजनन भी करते हैं.

Prelims Vishesh

Indian nationals living abroad :-

  • नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, 1.36 करोड़ प्रवासी भारतीय देश से बाहर रहते हैं.
  • सबसे अधिक प्रवासी भारतीय संयुक्त अरब अमीरात में रहते हैं. वहाँ उनकी संख्या 34,20,000 है जोकि सम्पूर्ण प्रवासी भारतीयों की संख्या की एक चौथाई है.
  • जिन अन्य देशों प्रवासी भारतीय हैं, वे क्रमानुसार इस प्रकार हैं – सऊदी अरब (25,94,947), अमेरिका (12,80,000), कुवैत (10,29,861), ओमान (7,79,351), कतर (7,56,062), नेपाल (5,00,000), ब्रिटेन (3,51,000) , सिंगापुर (3,50,000) और बहरैन (3,23,292).

UNHCR launches ‘2 Billion Kilometers to Safety’ campaign :

शरणार्थियों के संघर्ष और शक्ति को मान्यता देने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी –  UNHCR – ने एक नए वैश्विक अभियान की घोषणा की है जिसमें शरणार्थियों द्वारा प्रतिवर्ष तय की गई दूरी (2 बिलियन किलोमीटर) तक जनसाधारण दौड़, जॉगिंग अथवा वाकिंग समारोह आयोजित करेंगे. इसलिए इसका नाम “सुरक्षा तक 2 बिलियन किलोमीटर” अभियान रखा गया है.


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