सोलर ऑर्बिटर मिशन के बारे में जानें – यूलिसिस अंतरिक्षयान

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Solar Orbiter Mission Explained in Hindi

पिछले दिनों यूरोपीय अन्तरिक्ष एजेंसी (European Space Agency – ESA) और नासा ने मिलकर सौर परिक्रमा मिशन (Solar Orbiter Mission) का अनावरण करते हुए एक सोलर ऑर्बिटर अन्तरिक्षयान सूर्य की ओर भेजा. यह अन्तरिक्षयान अमेरिका के Cape Canaveral से एक United Launch Alliance Atlas V रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित किया गया.

सोलर ऑर्बिटर क्या है?

  • सोलर ऑर्बिटर एक मिशन का नाम है जो सूर्य एवं हेलियोस्फीयर से सम्बंधित भौतिकी को समर्पित है.
  • यूरोपीय अन्तरिक्ष एजेंसी के Cosmic Vision 2015-2025 कार्यक्रम के अंतर्गत चुना गया यह पहला मध्यम श्रेणी का मिशन है.
  • यह एक ऐसा पहला मिशन है जो सूर्य के उत्तरी और दक्षिणी ध्रुवों का छायाचित्र उपलब्ध कराएगा. इसके लिए यह छह उपकरणों का उपयोग करेगा.
  • सोलर ऑर्बिटर मिशन सात वर्षों का है और यह सूर्य से 26 मिलियन माइल की दूरी तक जाएगा.
  • इसमें कैल्शियम फॉस्फेट से पुती हुई कस्टम टाइटेनियम की एक ढाल है जिसके चलते यह सूर्य के ताप को सह लेने में समर्थ है. वस्तुतः सोलर ऑर्बिटर 970 डिग्री फारेनहाइट तक का तापमान झेल सकता है.
  • सूर्य की अत्यंत अंडाकार कक्षा तक पहुँचने में सोलर ऑर्बिटर को दो वर्ष लगेंगे.
  • सोलर ऑर्बिटर मिशन नासा के पार्कर सोलर प्रोब के साथ सक्रिय रहेगा. विदित हो कि पार्कर सोलर प्रोब अभी सूर्य की परिक्रमा कर रहा है.

उद्देश्य

  • सोलर ऑर्बिटर का उपयोग यह पता लगाने में किया जाएगा कि सूर्य हेलियोस्फीयर को कैसे बनाता है और उसे कैसे नियंत्रित करता है. ज्ञातव्य है कि हेलियोस्फीयर सौर पवनों द्वारा अंतरतारकीय क्षेत्र की ओर प्रवाहित आविष्ट कणों से निर्मित विशाल बुलबुले को कहते हैं.
  • इस अन्तरिक्षयान में दूरस्थ संवेदन निरीक्षण के साथ-साथ स्वयं अन्तरिक्षयान से भी सूचना ग्रहण करने की शक्ति है. यह जिन घटनाओं आदि के बारे में सूचना इकठ्ठा करेगा उनमें प्रमुख हैं – सौर पवन, हेलियोस्फीयर का चुम्बकीय क्षेत्र, सूर्य के ऊर्जापूर्ण कण, ग्रहों के बीच होने वाले आते-जाते विक्षोभ और सूर्य का चुम्बकीय क्षेत्र.

सोलर ऑर्बिटर मिशन को किन बड़े-बड़े वैज्ञानिक प्रश्नों का हल निकालना है?

  1. सौर पवन कौन चलाता है और कोरोना चुम्बकीय क्षेत्र का उद्गम कहाँ है?
  2. कैसे सौर ट्रांजिएंट हेलियोस्फीयर में विविधता लाते हैं?
  3. सौर विस्फोटों से हेलियोस्फीयर को भरने वाला ऊर्जापूर्ण कण विकिरण कैसे उत्पन्न करता है?
  4. सौर डायनेमो कैसे काम करता है और सूर्य एवं हेलियोस्फीयर के बीच यह सम्पर्क कैसे स्थापित करता है?

लाभ

सूर्य के चुम्बकीय क्षेत्र और सौर पवन को समझना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि ये ही अन्तरिक्षीय मौसम में इनका योगदान होता है. ज्ञातव्य है कि अन्तरिक्षीय मौसम पृथ्वी पर अपना प्रभाव डालता है क्योंकि यह हमारी नेटवर्क प्रणालियों में हस्तक्षेप करता है, जैसे – GPS, संचार आदि में. यहाँ तक कि अंतर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष केंद्र के अन्तरिक्ष यात्रियों पर भी इसका प्रभाव पड़ता है. सूर्य का चुम्बकीय क्षेत्र इतना विशाल है कि यह प्लूटो से भी आगे तक जाता है. यही क्षेत्र सौर पवन को सौर मंडल की यात्रा करने हेतु मार्ग प्रशस्त करता है.

यूलिसस अन्तरिक्षयान (Ulysses spacecraft)

1990 में यूरोपीय अन्तरिक्ष एजेंसी और नासा ने मिलकर सूर्य की ओर एक अन्तरिक्षयान छोड़ा था जिसका नाम Ulysses रखा गया था. यह अन्तरिक्षया सूर्य के ध्रुवों से होकर उड़ा था. इसने सूर्य को तीन बार पार किया और अंततः 2009 में यह मिशन समाप्त हो गया.

Tags : Objectives, features and significance of the Solar orbiter mission in Hindi.

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