यूरोपियन यूनियन (European Union) का विकास और उसके अंग

Babli GautamWorld History5 Comments

परिचय यूरोपियन यूनियन यूरोपीय देशों का राजनैतिक व आर्थिक संगठन है. इसका विकास विभिन्न स्तरों पर हुआ है अर्थात यूरोपीय संघ की स्थापना किसी एक समझौते या संधि द्वारा नहीं बल्कि विभिन्न संधिओं तथा उनमे संशोधन के बाद हुई है. इसके विकास में  “पेरिस की संधि (1951)”,”रोम की संधि (1957)”,”मास्त्रिच की संधि (1993)” तथा “लिस्बन की संधि (2009)” का महत्वपूर्ण … Read More

औद्योगिक क्रांति – Industrial Revolution in Hindi

Dr. SajivaWorld History17 Comments

औद्योगिक क्रांति

“क्रांति” शब्द से साधारणतया आकस्मिक उथल-पुथल का बोध होता है. लेकिन औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) के साथ हम वैसी बात नहीं पाते हैं. साधारणतः लोहे, काँसे और दूसरी-दूसरी चीजों के उत्पादन के ढंग में आमूल परिवर्तन को “औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution)” की संज्ञा दी जाती है. दस्तकारी के स्थान पर वैज्ञानिक अनुसंधानों के परिणामस्वरूप कारखानों का जन्म हुआ, उत्पादन में … Read More

इंग्लैंड की गौरवपूर्ण क्रांति -Glorious Revolution 1688 in Hindi

Dr. SajivaWorld History4 Comments

england_kranti

जेम्स द्वितीय 1685 ई. में इंग्लैंड का राजा बना. उसे बहुत सुरक्षित सिंहासन प्राप्त हुआ था. परिस्थिति राजतंत्र के पक्ष में थी. विरोधी दल कुचला जा चूका था. राज्य के प्रति निर्विरोध आज्ञाकारिता का सिद्धांत स्वीकृत हो चूका था. संसद के अधिकांश सदस्य राजा के दैवी अधिकार सिद्धांत के समर्थक थे. जेम्स द्वितीय ने स्वयं ही परिस्थिति को विपरीत बना … Read More

बोस्टन की चाय-पार्टी की घटना क्या थी?

Dr. SajivaWorld History1 Comment

boston_tea_incident

ब्रिटिश संसद ने चाय के व्यापार के सम्बन्ध में नया कानून बनाया था. इस कानून के अनुसार ईस्ट इंडिया कंपनी को अमेरिका में चाय भेजने की अनुमति दी गई थी. चाय के व्यापार को बढ़ाने के लिए मूल्य में कमी की गई थी. फलस्वरूप अमेरिकनों को सस्ती चाय मिल जाती थी और ईस्ट इंडिया कंपनी को भी आर्थिक लाभ हो … Read More

[विश्व इतिहास] फ्रांस की क्रांति – 1789 French Revolution

Dr. SajivaHistory, World History50 Comments

france_ki_kranti

फ्रांस की क्रांति (French Revolution): भूमिका 18वीं शताब्दी के 70-80 के दशकों में विभिन्न कारणों से राजा और तत्कालीन राजव्यवस्था के प्रति फ्रांस के नागरिकों में विद्रोह की भावना पनप रही थी. यह विरोध धीरे-धीरे तीव्र होता चला गया. अंततोगत्वा 1789 में राजा लुई 16वाँ (Louis XVI) को एक सभा बुलानी पड़ी. इस सभा का नाम General State था. यह सभा … Read More