Sansar डेली करंट अफेयर्स, 04 March 2020

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Contents

Sansar Daily Current Affairs, 04 March 2020


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Statutory, regulatory and various quasi-judicial bodies.

Topic : National Interlinking of Rivers Authority (NIRA)

संदर्भ

केंद्र सरकार नदियों को जोड़ने की परियोजनाओं को लागू करने के लिए एक विशेष निकाय की स्थापना पर कार्य करने जा रही है जिसे राष्ट्रीय नदी अन्तराबंधन प्राधिकरण (National Interlinking of Rivers Authority – NIRA) कहा जाएगा.

राष्ट्रीय नदी-जोड़ो परियोजना (NRLP) क्या है?

  • देश की कुछ नदियों में आवश्यकता से अधिक जल रहता है तथा अधिकांश नदियाँ ऐसी हैं जो वर्षा ऋतु को छोड़कर वर्षभर सूखी ही रहती हैं या उनमें जल की मात्रा बहुत ही कम रहती है.
  • ब्रह्मपुत्र जैसी अन्य नदियों में जल अधिक रहता है, उनसे बाढ़ आने का ख़तरा बना रहता है.
  • राष्ट्रीय नदी-जोड़ो परियोजना (NRLP) ‘जल अधिशेष’ वाली नदी घाटी (जो बाढ़-प्रवण होता है) से जल की ‘कमी’ वाली नदी घाटी (जहाँ जल की कमी या सूखे की स्थिति रहती है) में अंतर-घाटी जल अंतरण परियोजनाओं के जरिये जल के हस्तांतरण की परिकल्पना करती है. इसे औपचारिक रूप से हम राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (NPP) के रूप में जानते हैं.
  • यहाँ “जल अधिशेष” से हमारा तात्पर्य नदी में उपलब्ध उस अतिरिक्त जल से है जो सिंचाई, घरेलू खपत और उद्योगों की आवश्यकताओं की पूर्ति के पश्चात् शेष बच जाता है, परन्तु इस दृष्टिकोण में नदियों के स्वयं की जल की जरूरतों की अनदेखी कर दी जाती है.
  • जल की अल्पता को भी मात्र मानव आवश्यकताओं के परिप्रेक्ष्य में देखा गया है, न कि नदी की खुद की जरूरतों के परिप्रेक्ष्य में जिनमें कई अन्य कारक भी सम्मिलित होते हैं.

नदियों के इंटरलिंकिंग के समक्ष चुनौतियाँ

  • नदियों के इंटरलिंकिंग में बहुत सारे पैसे खर्च हो जाते हैं.
  • यह भूमि, वन, जैव विविधता, नदियों और लाखों जनों की आजीविका पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है.
  • नदियों के परस्पर संपर्क से जंगलों, आर्द्रभूमि और स्थानीय जल निकायों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.
  • यह लोगों के विस्थापन का कारण बनता है. कालांतर में विस्थापितों के पुनर्वास के मुद्दे से निपटने के लिए सरकार पर भारी बोझ पड़ता है.
  • नदियों को आपस में जोड़ने के कारण समुद्रों में प्रवेश करने वाले ताजे जल की मात्रा में कमी हो जाती है और इससे समुद्री जीवन को गंभीर खतरा होगा.

बाढ़ और सूखे से निजात कैसे मिले?

बांधों के पक्षकार बाढ़ वाली नदियों को एक अवसर के रूप में देखते हैं. यह अवसर उन्हें ज्यादा बांध बनाने के रूप में दिखता है, जबकि वास्तविकता इससे एकदम विपरीत है. बाढ़ वाली नदियाँ हमें बताती हैं कि हमें बारिश के जल के भंडारण की आवश्यकता है. लेकिन यह भंडारण बांध बनाए जाने के रूप में नहीं होना चाहिए. सूखा पड़ने के ठीक बाद बाढ़ वाली नदियां हमें भविष्य में सूखे की आहट भी दे देती हैं. यदि हम उनके इस संकेत को समझ नहीं पाते तो हम अपने पाँव पर ही कुल्हाड़ी मारते हैं.

निष्कर्ष

एकीकृत तरीके से जल संसाधनों का विकास एवं इसके लिये लघु अवधि और दीर्घावधि के समस्त उपायों को अपनाया जाना चाहिए. सही ढंग से समयबद्ध रूप से लागू किया जाए तो एक नदी घाटी से दूसरे नदी घाटी क्षेत्र में पानी पहुँचाने वाली जल संसाधन परियोजनाएँ पानी की उपलब्धता के असंतुलन को खत्म करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. इसके अतिरिक्त जलवायु परिवर्तन के संभावित प्रतिकूल प्रभावों के शमन में भी इनका महत्त्वपूर्ण योगदान हो सकता है.

हिमालयी क्षेत्र की संयोजक नहरें

  1. सोन बांध-गंगा की दक्षिणी सहायक नदियां
  2. सुवर्णरेखा-महानदी
  3. शारदा-यमुना
  4. राजस्थान-साबरमती
  5. यमुना-राजस्थान
  6. ब्रह्मपुत्र-गंगा(जोगीगोपा-तीस्ता-फरक्का)
  7. ब्रह्मपुत्र-गंगा (मानस-संकोश-तीस्ता-गंगा)
  8. फरक्का-सुंदरवन
  9. फरक्का-दामोदर-सुवर्णरेखा
  10. चुनार-सोन बैराज
  11. घाघरा-यमुना
  12. गंडक-गंगा
  13. कोसी-मेकी
  14. कोसी-घाघरा

प्रायद्वीपीय क्षेत्र की संयोजक नहरें

  1. कावेरी (कट्टई)- वईगई-गुंडुर
  2. कृष्णा (अलमाटी)-पेन्नार
  3. कृष्णा (नागार्जुन सागर)-पेन्नार (स्वर्णशिला)
  4. कृष्णा (श्रीसैलम)-पेन्नार (प्रोडात्तुर)
  5. केन-बेतवा लिंक
  6. गोदावरी (इंचमपाली लो डैम)-कृष्णा (नागार्जुन टेल पाँड)
  7. गोदावरी (इंचमपाली)-कृष्णा (नागार्जुन सागर)
  8. गोदावरी (पोलावरम)-कृष्णा (विजयवाड़ा)
  9. दमनगंगा-पिंजाल
  10. नेत्रावती-हेमावती
  11. पम्बा-अचनकोविल-वप्पार
  12. पार-तापी- नर्मदा
  13. पार्वती-काली सिंध-चंबल
  14. पेन्नार (स्वर्णशिला)-कावेरी (ग्रांड आर्नीकट)
  15. महानदी (मणिभद्रा)-गोदावरी (दौलाईस्वरम)
  16. वेदती-वरदा

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Structure, organization and functioning of the Executive and the Judiciary Ministries and Departments of the Government; pressure groups and formal/informal associations and their role in the Polity.

Topic : Sukhna Lake is a living entity

संदर्भ

हाई कोर्ट ने सुखना झील के आसपास अतिक्रमण को बढ़ावा देने के लिए पंजाब सरकार पर 100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. साथ ही कोर्ट ने तीन माह के भीतर पंजाब एवं हरियाणा के क्षेत्र में सुखना लेक के निकट हुए निर्माण को गिराने के आदेश दिए हैं.

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने सुखना झील को “कानूनी व्यक्ति या संस्था” (legal person) का दर्जा जारी किया है और उसे “जीवित व्यक्ति के समान अधिकार, कर्तव्य और दायित्व” (living entity) प्रदान किए हैं.

सुखना झील के बारे में

  • सुखना झील भारत के चण्डीगढ़ नगर में हिमालय की शिवालिक पहाड़ियों की तलहटी में स्थित एक सरोवर है.
  • इसका निर्माण 1958 में बरसाती झील सुखना खाड़ पर बांध बनाकर किया गया.
  • 1974 में बरसाती पानी का रुख दूसरी ओर मोड़ दिया गया. इसमें साफ पानी भरा जाता है. गंदगी रोकने के लिए 42 किलोमीटर जमीन का अधिग्रहण करके जंगल लगाया गया.

पृष्ठभूमि

समय के साथ सुखना झील के आसपास भवन निर्माताओं की गिद्ध दृष्टि पड़ी. झील के जलसंग्रहण क्षेत्र में पंजाब और हरियाणा सरकार ने निर्माण की अनुमति दे दी. अब यहां बड़ी संख्या में निर्माण हो गए हैं. इन्हीं निर्माणों को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है. तीन माह के अंदर जुर्माना राशि जमा करने और निर्माण हटाने का आदेश दिया है.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : Foreigners being served ‘Leave India’ notices: How does Indian law define ‘anti-govt’ activities for them?

संदर्भ

आप्रवासन ब्यूरो (Bureau of Immigration – BOI) के अनुसार, पाँच विदेशी नागरिक CAA के विरुद्ध प्रदर्शन में सम्मिलित हुए जो वीजा के नियमों का उल्लंघन है. BOI ने इन्हें भारत छोड़ने के लिए कहा है. वहीं दूसरी तरफ, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने CAA पर सर्वोच्च न्यायालय में हस्तक्षेप याचिका दायर की है.

भारत सरकार का पक्ष

  • CAA भारत का आंतरिक मामला है और यह कानून बनाने वाली भारतीय संसद के संप्रभुता के अधिकार से संबंधित है.
  • भारत की संप्रभुता से सम्बंधित मुद्दों पर किसी विदेशी या गैर-भारतीय को अपने पक्ष रखने का कोई अधिकार नहीं है.
  • CAA संवैधानिक रूप से वैध है और संवैधानिक मूल्यों का अनुपालन करता है.

क्या भारतीय वीज़ा पर किसी विदेशी को भारत के अन्दर विरोध करने का अधिकार है?

जहाँ अनुच्छेद 19(1)(a) भारत के सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्रदान करता है वहीं अनुच्छेद 14 के अंतर्गत यह कहा गया है कि राज्य, भारत के राज्य क्षेत्र में किसी व्यक्ति को कानून के समक्ष समता से या कानून के समान संरक्षण से वंचित नहीं करेगा. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 का निचोड़ यह है कि सरकार भारत में किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं करेगी. इसका निष्कर्ष यह भी निकाला जा सकता है कि विदेशियों को भी शांतिपूर्वक विरोध करने का अधिकार है.

इसके अतिरिक्त, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत किसी व्यक्ति को प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का सरंक्षण का अधिकार प्राप्त है अर्थात् किसी भी व्यक्ति को विधि द्वारा स्थापित प्रकिया के अतिरिक्त उसके जीवन और वैयक्तिक स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है.

विदित हो कि केंद्र सरकार को विदेशी नागरिकों को बिना कोई कारण बताओ नोटिस जारी किये देश से बाहर करने का अधिकार नहीं है. दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2019 में एक पाकिस्तानी महिला को जारी “भारत छोड़ो नोटिस” को यह कहते हुए निरस्त कर दिया था कि भारत सरकार ने समुचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया.

इसका तात्पर्य यह हुआ कि भारत सरकार को भारत छोड़ो नोटिस देने से पहले संदिग्ध विदेशी पर्यटक को सुनवाई का उचित अवसर दिया जाना चाहिए और उसके विरुद्ध औपचारिक रूप से नोटिस जारी करना चाहिए या उसे उसके विशिष्ट आरोपों के बारे में सूचित करना चाहिए.

अन्य महत्त्वपूर्ण अनुच्छेद

  • अनुच्छेद 19(1)(a) : सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है.
  • अनुच्छेद 19(1)(b) :बिना हथियार किसी जगह शांतिपूर्वक इकट्ठा होने का अधिकार है.
  • अनुच्छेद 19(1)(c) :संघ या संगठन बनाने का अधिकार है.
  • अनुच्छेद 19(1)(d) :भारत में कहीं भी स्वतंत्र रूप से घूमने का अधिकार है.
  • अनुच्छेद 19(1)(e) :भारत के किसी भी हिस्से में रहने और बसने का अधिकार है
  • अनुच्छेद 19(1)(f) :इसे हटाया जा चुका है (पहले इसमें संपत्ति के अधिकार का प्रावधान था)
  • अनुच्छेद 19(1)(g) : कोई भी व्यवसाय, पेशा अपनाने या व्यापार करने का अधिकार है.

देशद्रोह किसे कहा जाता है?

  • भारतीय कानून संहिता (आईपीसी) की धारा 124A में देशद्रोह की दी हुई परिभाषा के अनुसार, यदि कोई भी व्यक्ति सरकार-विरोधी सामग्री लिखता या बोलता है या फिर ऐसी सामग्री का समर्थन करता है, या राष्ट्रीय चिन्हों का अपमान करने के साथ संविधान को नीचा दिखाने का प्रयास करता है, तो उसे आजीवन कारावास या तीन वर्ष की सजा हो सकती है.
  • देशद्रोह पर कोई भी कानून 1859 तक नहीं था. यह कानून 1860 में बनाया गया और बाद में 1870 में इसे IPC में सम्मिलित कर लिया गया.

देशद्रोह के आरोप किनपर कब लगे?

  1. 1870 में बने इस कानून का प्रयोग सबसे पहले ब्रिटिश सरकार ने महात्मा गांधी के खिलाफ किया. ब्रिटिश सरकार को साप्ताहिक जर्नल यंग इंडिया में गांधीजी द्वारा लिखे आलेख से आपत्ति थी जो ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध था.
  2. बिहार के निवासी केदारनाथ सिंह पर 1962 में राज्य सरकार ने उनके एक भाषण को लेकर उनपर देशद्रोह का मामले दर्ज किया था, जिस पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी थी. केदारनाथ सिंह के केस पर सर्वोच्च न्यायालय की पाँच न्यायधीशों की एक बेंच ने भी आदेश दिया था. इस आदेश में कहा गया कि ‘देशद्रोही भाषणों और अभिव्यक्ति को मात्र तभी दंडित किया जा सकता है, जब उसके कारण किसी प्रकार की हिंसा, असंतोष या फिर सामाजिक असंतुष्टिकरण को बढ़ावा मिले.’
  3. 2010 को बिनायक सेन पर नक्सबल विचारधारा फैलाने का आरोप लगाते हुए उन पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया. बिनायक के अतिरिक्त नारायण सान्याल और कोलकाता के उद्योगपति पीयूष गुहा को भी देशद्रोह का दोषी पाया गया था. इन्हें अंततः उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी परन्तु बिनायक सेन को 16 अप्रैल 2011 को सर्वोच्च न्यायालय की ओर से जमानत मिल गई थी.
  4. 2012 में काटूर्निस्टल असीम त्रिवेदी को उसकी वेबसाइट पर संविधान से जुड़ी भद्दी और अश्लील तस्वीरें डालने के कारण से इस कानून के तहत गिरफ्तार किया गया. यह कार्टून उसने मुंबई में 2011 में भ्रष्टारचार के विरुद्ध चलाए गए एक आंदोलन के समय बनाए थे.
  5. 2012 में तमिलनाडु सरकार ने कुडनकुलम परमाणु प्लांट के विरोध में स्वर उठाने वाले 7 हजार ग्रामीणों पर देशद्रोह की धाराएँ लगाईं थी.
  6. 2015 में हार्दिक पटेल और कन्हैया कुमार को देशद्रोह मामले में गिरफ्तार किया गया था.

GS Paper 2 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes; mechanisms, laws, institutions and bodies constituted for the protection and betterment of these vulnerable sections.

Topic : Pradhan Mantri Bhartiya Janaushadhi Pariyojana (PMBJP)

संदर्भ

भारत में 1-7 मार्च, 2020 तक जन औषधि सप्‍ताह मनाया जा रहा है. पूरे सप्ताह स्‍वास्‍थ्‍य जाँच शिविर, ‘जन औषधि परिचर्चा’ एवं ‘जन औषधि का साथ’ जैसी विभिन्‍न गतिविधियाँ चलाई जाएँगी.

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) क्या है?

  • प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) भारत सरकार के फार्मास्यूटिकल विभाग द्वारा आरम्भ की गई एक योजना है जिसका उद्देश्य PMBJP केन्द्रों के माध्यम से जन-सामान्य को सस्ती किन्तु गुणवत्ता युक्त औषधियाँ मुहैया करना है.
  • ज्ञातव्य है कि जेनेरिक दवाओं को उपलब्ध कराने के लिए इस योजना के अन्दर कई वितरण केंद्र बनाए गए हैं जिन्हें प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र कहते हैं. विदित हो कि जेनेरिक दवाएँ उतनी ही गुणवत्तायुक्त और कारगर हैं जितनी ब्रांड की गई महँगी दवाइयाँ. साथ ही इनके दाम इन महँगी दवाइयों की तुलना में बहुत कम होते हैं.
  • भारतीय फार्मा लोक सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम ब्यूरो (Bureau of Pharma PSUs of India – BPPI) इस योजना के लिए कार्यान्वयन एजेंसी बनाई गई है. इसकी स्थापना केंद्र सरकार के फार्मास्यूटिकल विभाग ने की है.

जन औषधि केन्द्रों की भूमिका

  • देश में अधिक से अधिक चिकित्सक जेनरिक दवाएँ लिखने लगे हैं. उधर 652 जिलों में 5,050 जन औषधि बाजार खुल गये हैं, इसलिए उच्च गुणों वाली सस्ती जेनेरिक दवाओं को उपलब्ध कराना और उनके बारे में जागरूकता उत्पन्न करना आवश्यक हो गया है. इन केन्द्रों से प्रतिदिन 10-15 लाख लाभान्वित हो रहे हैं. पिछले तीन वर्षों में जेनरिक दवाओं की बाजार में खपत 2% से बढ़कर 7% अर्थात् तिगुनी हो गई है.
  • जन औषधि दवाओं के चलते जानलेवा बीमारियों से ग्रस्त रोगियों का खर्च अच्छा-ख़ासा घट गया है. ये दवाइयाँ बाजार मूल्य की तुलना में 50 से 90 प्रतिशत तक सस्ती होती है. बताया जाता है कि PMBJP योजना के कारण जनसाधारण को 1,000 करोड़ रू. की बचत हुई.
  • इस योजना के कारण नियमित आय से युक्त स्वरोजगार के अवसर बढ़ गये हैं.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Govt. imposes curbs on drug exports

संदर्भ

केंद्र सरकार ने दवाओं के निर्यात नियमों में परिवर्तन करते हुए 26 दवाओं और उनके रसायन के निर्यात पर रोक लगा दी है.

पृष्ठभूमि

सरकार ने दर्द निवारक दवा, ज्वर में काम आने वाले पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक, मैट्रोनिडजोल और विषाणुओं के इलाज में प्रयुक्त होने वाली दवाओं के साथ-साथ ही विटामिन बी1 और बी12 के निर्यात को अस्थायी रूप प्रतिबंधित कर दिया है. विदेश व्यापार महानिदेशालय ने हाल ही में एक अधिसूचना जारी की थी जिसके अनुसार 26 सक्रिय औषधि सामग्री (active pharmaceutical ingredientsAPI) और फार्मुलेशंस के निर्यात के लिये अब लाइसेंस लेना अनिवार्य बना दिया गया था. पहले इन दवा सामग्रियों के निर्यात पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं था.

ऐसा क्यों किया गया?

  • कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए केंद्र सरकार ने पैरासिटामोल समेत 26 जीवनरक्षक दवाओं के निर्यात पर रोक लगा दी है.
  • भारत सरकार ने किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए यह निर्णय लिया है.
  • भारत में दवा निर्माता कंपनियाँ दवाओं का निर्यात बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, अफगानिस्तान एवं श्रीलंका समेत अन्य देशों में करती हैं. भारत सरकार के अगले आदेश तक ये कम्पनियाँ इन दवाओं और इनके रसायनों का निर्यात नहीं कर पाएंगी.
  • कोरोना के प्रकोप से चीन से दवाओं का आयात सीमित कर दिया गया है. जीवन रक्षक दवाओं के उत्पादन में भी गिरावट हुई है. ऐसे में निर्यात को नियंत्रित करना आवश्यक हो गया था जिसे देश में दवाओं की अल्पता का सामना न करना पड़े.

आर्थिक पहलू : आँकड़े क्या बताते हैं?

  • भारत चीन से लगभग 10 बिलियन डॉलर के फार्मास्युटिकल एवं जैविक दवाओं का आयात करता है, जिसमें से थोक दवा (दवाओं के निर्माण के लिए कच्चा माल) या API का आयात 2.5 बिलियन डॉलर से ज्यादा है.
  • भारत में दवा उत्पादन का कुल मूल्य 30 बिलियन डॉलर (निर्यात और खपत हेतु) से ज्यादा है.
  • भारतीय दवा निर्माता अपनी कुल थोक दवाओं की आवश्यकताओं का करीब70% चीन से आयात करते हैं.
  • 2018-19 के वित्तीय वर्ष के दौरान केंद्र सरकार ने लोकसभा बताया था कि देश के दवा निर्माताओं ने चीन से भारी मात्रा में 2 . 4 अरब डॉलर मूल्यकी दवाओं और मध्यस्थों का आयात किया था.

सक्रिय औषधि सामग्री (API) क्या है?

सक्रिय औषधि सामग्री (API) का प्रयोग टेबलेट, कैप्सूल और सिरप बनाने के के लिए “कच्चे माल” की तरह किया जाता है. किसी भी दवाई के बनने में API की मुख्य भूमिका होती है और इसी API के लिए भारतीय कंपनियाँ बहुत हद तक चीन पर निर्भर हैं.

सक्रिय औषधि सामग्री (API) किसी दवा का वह भाग है जो रोग को ठीक करने की क्षमता रखता है. आपने कई बार दवाइयाँ खरीदते समय किसी टैबलेट पर लिखा देखा होगा – Dolo 650 (Paracetamol). इसका अर्थ यह होता है कि इस टैबलेट में 650mg सक्रिय औषधि सामग्री है जो आपके ज्वर को ठीक करने में सहायता पहुंचाएगी. दवाई बनाने वाली कंपनियों में भी दो तरह की कंपनियाँ होती है. अधिकांश कंपनियां सक्रिय औषधि सामग्री बनाती हैं और इन दवाइयों को लेकर दूसरी कंपनियाँ इनका फार्मूलेशन तैयार करने का काम करती हैं.

नकली दवाओं की समस्या

नकली API से बनी दवाओं से मरीजों को स्वास्थ्य में लाभ नहीं पहुँचता. ज्ञातव्य है कि पिछले वर्ष ही केंद्र सरकार ने दवाओं के लिए आयात हो रहे कच्चे माल यानी API में हो रहे बड़े घपले को उजागर किया था. विशेषकर चीन से बिना रोक-टोक के घटिया गुणवत्ता वाले प्रतिबंधित और मिलावटी श्रेणी के API का आयात धड़ल्ले से किया जा रहा था. 

पिछले वर्ष सितम्बर से केंद्र सरकार ने दवाओं में प्रयोग होने वाले एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (Active Pharmaceutical Ingredients) पर QR कोड लगाना अनिवार्य कर दिया था जिससे असली-नकली दवाओं की पहचान की जा सके.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Conservation related issues

Topic : Black carbon levels spike at Himalayan glaciers

संदर्भ

वैज्ञानिक पत्रिका ‘ऐटमोस्पियरिक एनवायरनमेंट’ (Atmospheric Environment) में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, कृषि अपशिष्ट दहन और वनाग्नि से उत्पन्न ब्लैक कार्बन’ (Black carbon) के कारण गंगोत्री हिमनद’ (Gangotri glacier) के पिघलने की दर में वृद्धि हो सकती है.

हिमनद की महत्ता

  • हिमनद प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका अदा करते हैं.
  • नदियों को जल ग्लेशियरों से ही मिलता है और फिर ये नदियां समूचे भारत की भूमि को सींचती हैं तथा लोगों की प्यास भी बुझाती है.
  • जिन शहरों से नदियां होकर गुजरती हैं, उनके के लिए यह जीवन रेखा के समान है.
  • गोमुख से निकलने वाली गंगा जैसी पवित्र नदियों से प्रत्यक्ष तौर पर करोड़ों लोगों का व्यापार जुड़ा है, लेकिन जंगलों में लगने वाली आग से ब्लैक कार्बन ग्लेशियरों तक पहुँच रहा है.

ब्लैक कार्बन क्या होता है?

ब्लैक कार्बन जीवाश्म ईंधन, लकड़ी और अन्य ईंधन के अपूर्ण दहन द्वारा उत्सर्जित कणिकीय पदार्थ (Particulate Matter : PM) है जो वायुमंडल के ताप को बढ़ाता है. यह वायुमंडल में उत्सर्जन के कुछ दिनों से सप्ताहों तक स्थिर रहने वाला एक अल्पकालिक जलवायु प्रदूषक है. इस छोटी अवधि के दौरान ब्लैक कार्बन जलवायु, हिमनद क्षेत्रों, कृषि और मानव स्वास्थ्य पर महत्त्वपूर्ण प्रत्यक्ष और परोक्ष प्रभाव डाल सकता है.

ब्लैक कार्बन के प्रभाव

जलवायु पर प्रभाव

ब्लैक कार्बन तापवृद्धि में सहायक है क्योंकि यह प्रकाश को अवशोषित करने और निकटवर्ती वातावरण की ऊष्मा की वृद्धि में अत्यधिक प्रभावी है. यह बादल निर्माण के साथ-साथ क्षेत्रीय परिसंचरण और वर्षा को भी प्रभावित करता है. बर्फ तथा हिम पर निक्षेपित होने पर, ब्लैक कार्बन और सह-उत्सर्जित कण एल्बिडो प्रभाव (सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करने की क्षमता) को कम करते हैं तथा सतह के तापमान में वृद्धि करते हैं. इसके परिणामस्वरूप आर्कटिक और हिमालय जैसे ग्लेशियर क्षेत्रों में बर्फ पिघलने लगती है.

स्वास्थ्य पर प्रभाव

  1. ब्लैक कार्बन और इसके सह-प्रदूषक सूक्ष्म कणिकीय पदार्थ (5) वायु प्रदूषण के प्रमुख घटक हैं.
  2. इनसे होने वाले रोग हैं – हृदय और फेफड़ों के रोग, स्ट्रोक, हार्ट अटैक, चिरकालिक श्वसन रोग जैसे ब्रोंकाइटिस, गंभीर अस्थमा तथा अन्य कार्डियो-रेस्पिरेटरी लक्षणों सहित वयस्कों में समयपूर्व मृत्यु.

वनस्पति और पारिस्थितिकी तन्त्र पर प्रभाव

  1. ब्लैक कार्बन अनेक प्रकार से पारिस्थितिकी तन्त्र के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है. यह पौधों पर जमा हो जाता है तथा उनके तापमान में वृद्धि कर देता है. यह पृथ्वी पर आपतित सूर्यताप में कमी लाता है तथा वर्षा प्रतिरूप को भी परिवर्तित कर देता है.
  2. वर्षा प्रतिरूप में परिवर्तन के पारिस्थितिकी तन्त्र और मानव आजीविका दोनों के लिए दूरगामी परिणाम हो सकते हैं, उदाहरण के लिए यह मानसून में अवरोध उत्पन्न करता है, जो एशिया और अफ्रीका के बृहद् क्षेत्रों में कृषि के लिए महत्त्वपूर्ण है.
  3. ब्लैक कार्बन में वृद्धि के कारण हिमरेखा के समीप हिम-आच्छादित क्षेत्र के विस्तार में कमी के साथ-साथ मूल्यवान् औषधीय जड़ी बूटियों के विलुप्त होने जैसे प्रभाव दृष्टिगत होते हैं.

Prelims Vishesh

National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) :-

  • राष्ट्रीय कम्पनी कानून अपीलीय पंचाट (NCLAT) का गठन (1 जून, 2016 से प्रभावी) कम्पनी अधिनियम, 2013 के अनुभाग 410 के अंतर्गत किया गया था.
  • इसका कार्य राष्ट्रीय कम्पनी कानून पंचाटों (NCLT) द्वारा पारित आदेशों के विरुद्ध अपील सुनना है
  • यह संस्था NCLT द्वारा ऋणशोधन एवं दिवालियापन संहिता (Insolvency and Bankruptcy Code – IBC), 2016 के विभिन्न अनुभागों के अंतर्गत पारित आदेशों पर भी अपील सुनती है.
  • इसके अतिरिक्त यह भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के द्वारा पारित किसी आदेश के विरुद्ध भी अपील की सुनवाई करती है.

अधिक जानकारी के लिए पढ़ें > NCLAT


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