Britain के European Union से बाहर जाने पर चर्चा: Brexit in Hindi

Britain के European Union से बाहर जाने पर चर्चा: Brexit in Hindi
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ब्रिटेन की जनता ने एक जनमत द्वारा यूरोपियन यूनियन से बाहर जाने का निर्णय लिया. लगभग 52 % ब्रिटिश जनता का कहना था कि देश को EU से बाहर (Brexit) निकल जाना चाहिए.

क्या है Brexit का अर्थ (meaning)?

‘ब्रेक्ज़िट’ Brexit शब्द जिन दो शब्दों से मिलकर बना है उसका अर्थ है “Britain=Br“और “Exit“…

क्यों थे कोई पक्ष में और क्यों थे कोई विपक्ष में?

इंग्लैंड का EU में बने रहने का समर्थन करने वालों का मानना था कि ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था EU के निर्णयों से ही फलती-फूलती है. यूरोपियन यूनियन के अन्दर रहकर Britain का लोकतंत्र सुरक्षित है एवं इससे यूरोपीय अर्थव्यवस्था को भी संबल मिलता है। जबकि विरोध करनेवालों का मानना है कि यूरोपीय संघ अपनी वर्तमान राजनैतिक क्षमताओं एवं सीमाओं से बाहर जा रहा है जो ब्रिटेन या किसी भी देश के हित में नहीं है।

यूरोपियन संघ (यूरोपियन यूनियन) मुख्यत: यूरोप में स्थित 28 देशों का एक राजनैतिक एवं एवं आर्थिक मंच है जिनमें आपस में प्रशासकीय साझेदारी होती है जो संघ के कई या सभी राष्ट्रो पर लागू होती है।

ब्रिटेन की प्रगति एक तरह से रुकी हुई थी. मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री काफी दिनों से सुस्त पड़ी थी. लोगों को घुटन महसूस हो रहा था. लोगों को लगने लगा था कि European Union का कैपिटल Brussels ही ब्रिटेन के अंदरूनी और बाहरी मामलों के सभी निर्णय ले रहा है. इसलिए ब्रिटेन की जनता में एक ऐसी सोच उत्पन्न हो रही थी कि शायद इससे अलग हो जाने (Brexit) में ही ब्रिटेन की भलाई है.

ब्रिटेन ने एक जमाने में Commonwealth of nations (राष्ट्रमंडल) बनाया था. Commonwealth of nations ५३ स्वतंत्र राज्यों का एक संघ है जिसमें सारे राज्य अंग्रेजी राज्य का हिस्सा थे. अभी के समय में राष्ट्रमंडल भी अधिक सक्रीय नहीं रहा. जिन आर्थिक उद्द्येश्यों से इस राष्ट्रमंडल का निर्माण हुआ था, ब्रिटेन को इन देशों से उतना आर्थिक फायदा नहीं हो रहा था जितना होना चाहिए. भले ही ब्रिटेन की इन देशों में इन्वेस्टमेंट की गति बरकरार रही हो मगर कई देश १, २ प्रोडक्ट से अधिक ब्रिटेन को एक्सपोर्ट नहीं करते थे. पिछले चार सालों से ब्रिटेन में Commonwealth nations को revive करने की चर्चा हो रही थी. मगर इतने महत्त्वपूर्ण निर्णय में  भी European Union का शिकंजा था.

BREXIT की सच्चाई क्या है?

हजार साल से Britain की foreign policy यही रही थी कि यूरोप में जो राजा थे,  वे एकत्रित न हो पायें क्योंकि उनको यह डर था कि यदि कभी ये एकत्रित हो जाएँ तो ये सब मिलकर हमारी छोटी-सी island पर हमला कर देंगे.  ब्रिटेन की कोशिश यही रहती थी कि कम-से-कम दो गुट हर वक़्त यूरोप में बना रहे. परन्तु  1950 के दशक में यूरोप के एकीकरण का प्रस्ताव आया और धड़ा-धड़ कई देश इससे जुड़ने लगे. ब्रिटेन भी जुड़ा मगर यह उसके व्यवहार के विपरीत था. तभी से वह EU से बाहर आने के फ़िराक में था. यूरोपियन यूनियन हर छोटी से छोटी बात का निर्णय लेता है. आपको जानकर यह आश्चर्य होगा कि आप कौन से design की गाड़ी इस्तमाल करेंगे से लेकर आपके लिए क्या environment laws होंगे, यह सारा निर्णय EU ही करता है.  इसलिए ऐसा देश (ब्रिटेन) जो सालों से लोगों पर राज करता आया है वह किसी के दबाव में रहकर काम क्यों करे, अपना हर निर्णय क्यों बदले, उसके कामों में कोई दूसरा अड़ंगा क्यों डाले? यह भावना कई वर्षों से जनता में जाग रही थी.

कौन किसके तरफ खड़ा था?

जब से ब्रिटेन ने EU ज्वाइन किया, कुछ अँगरेज़ इसके खिलाफ थे. सिर्फ अँगरेज़ ही नहीं, Northern Island, Scotland में काफी लोग ब्रिटेन के यूरोपियन संघ से जुड़ने के खिलाफ थे. मगर जब जनमत आया तो कुछ और ही दिखा. Northern Island और Scotland की जनता ब्रिटेन के EU में बने रहने के पक्ष में खड़े दिखे जबकि Yorkshire, Derbyshire (इंग्लैंड और वेल्स) के लोग इस मैत्री के खिलाफ थे. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरून EU से जुड़ा रहना चाहते थे तो दूसरी तरफ उनके धूर विरोधी रहे Boris Johnson (United Kingdom Independent Party) जो  ब्रिटेन के आगामी प्रधानमंत्री भी हो सकते हैं का मानना था कि ब्रिटेन को EU से हट जाना चाहिए.

आखिरकार कब होगा ब्रिटेन पूरी तरह EU से अलग?

लिसबन समझौता (Lisbon treaty) के आर्टिकल 50 के अनुसार, जनतम संग्रह के बाद अलग होने के लिए दो साल का समय होता है. यानी ब्रिटेन त्वरित प्रक्रिया शुरू करेगा तो 2018 तक वह यूरोपीय यूनियन से अलग हो पाएगा.

Brexit का भारत पर क्या प्रभाव (Impact) पड़ेगा?

European Union से  ब्रिटेन का बाहर निकल जाना ब्रिटेन का अपना अन्दरुनी मामला है. आज इसका असर (impact) जरुर विश्व और भारत (India and rest of the world) पर पड़ेगा. ब्रिटेन एक बहुत बड़ी अर्थव्यवस्था है और एक बहुत पावरफुल देश भी है.

  1. Brexit का यदि सबसे अधिक असर पड़ेगा तो वह असर टाटा मोटर्स, टाटा स्टील व आईटी कंपनियों पर पड़ेगा. ब्रिटेन में भारत की जिन कंपनियों का सबसे ज्यादा निवेश है उनमें टाटा शामिल है. टाटा मोटर्स के स्वामित्व वाले जगुआर लैंड-रोवर्स  व टाटा स्टील का ब्रिटेन के बाजार में मजबूत हिस्सेदारी है. ये कंपनियां वहां पौंड (pound) में कमाएगी. Brexit के बाद पौंड की वैल्यू वैसे ही गिर रही है. तो इन कम्पनी के फायदे पर जोरदार झटका लगेगा.
  2.  मॉरिशस और सिंगापुर के बाद ब्रिटेन भारत में तीसरा सबसे बड़ा निवेशक है (third largest investor). यदि Brexit के बाद ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था कमजोर होती है तो उसके निवेश  (investment) में भी कमी आ सकती है. आखिर क्यों कोई देश कमजोर देश पर इन्वेस्ट करना चाहेगा?
  3. पौंड (ब्रिटेन की मुद्रा) के कमजोर होने से डॉलर मजबूत बनेगा. ऐसी परिस्थिति में रु. का $ के मुकाबले कमजोर होने की आशंका बढ़ेगी.
  4.  यह सब सिर्फ शोर्ट-टर्म के लिए होगा, लॉन्ग-टर्म भारत को कोई नुक्सान नहीं पहुंचेगा.

इंग्लिश में पढ़िए.

10 Responses to "Britain के European Union से बाहर जाने पर चर्चा: Brexit in Hindi"

  1. Md Gulab   May 2, 2017 at 12:50 pm

    It’s a Great decision.

    Reply
  2. Shilpa Singh   April 25, 2017 at 6:30 pm

    Very helpfully..

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  3. Anonymous   March 19, 2017 at 10:18 pm

    Beautiful explanation sir

    Reply
  4. jitender   March 17, 2017 at 9:00 pm

    Nice knowledge

    Reply
  5. shibu   February 20, 2017 at 12:10 am

    Thank you it’s very useful n knowledgeable

    Reply
  6. Pari   October 2, 2016 at 11:13 pm

    Awessum….helped alot

    Reply
  7. NARENDRA   July 12, 2016 at 10:01 am

    IT WAS BETTER IF BREXIT WOULD NOT OCCUR

    Reply
  8. shobha   July 5, 2016 at 5:46 pm

    Mind Blowing Content, Thanks !!

    Reply
  9. avanish Kumar   July 3, 2016 at 10:38 pm

    Knowledgeable

    Reply
  10. Tanmay Dutta   July 3, 2016 at 9:24 pm

    Very useful thanks sir.

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