साहित्य के क्षेत्र में प्राचीन भारत का योगदान

Dr. SajivaAncient HistoryLeave a Comment

प्राचीन भारत ने विश्व को अनेक महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ प्रदान किये. उदाहरणार्थ, यहाँ चार वेदों की रचना हुई. ऋग्वेद उनमें प्राचीनतम वेद है. ऋग्वेद के अतिरिक्त तीन और वेद हैं जिनके नाम यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद भी उनकी देन हैं. इनके अलावा अनेक धार्मिक ग्रन्थ भी हैं, जैसे “ब्राह्मण” (वेद मन्त्रों की व्याख्या करने वाले ग्रन्थ), आरण्यक (ब्राह्मण ग्रन्थों के ही … Read More

हर्ष और उसका काल – Harsha’s Kingdom

Dr. SajivaAncient HistoryLeave a Comment

गुप्त लोगों ने उत्तर प्रदेश और बिहार स्थित अपने सत्ता-केन्द्र से उत्तर और पश्चिम भारत पर छठी शताब्दी ई० के मध्य तक (लगभग 160 वर्षों तक) शासन किया. हूणों के आक्रमणों ने गुप्त साम्राज्य को कमजोर बना दिया. इसके पतन के बाद उत्तर भारत फिर अनेक छोटे-छोटे राज्यों में विभाजित हो गया. श्वेत हुणों ने कश्मीर, पंजाब और पश्चिमी भारत … Read More

मौर्योत्तर काल में व्यापार और नगर

Dr. SajivaAncient HistoryLeave a Comment

मौर्योत्तर काल के विषय में सम्पूर्ण जानकारी मौर्यों का साम्राज्य ई०पू० 185 में पूरी तरह ध्वस्त हो गया. देश में अनेक विदेशी शक्तियों (शक, कुषाण आदि) तथा देशी वंशजों (शुंग वंश, कण्व वंश, सातवाहन वंश, पाण्ड्य वंश, चोल वंश तथा चेर वंश आदि) ने अपने-अपने राज्य स्थापित कर लिए. शकों, कुषाणों, सातवाहनों का प्रभाव काल लगभग 200 ई०पू० से 200 ई० … Read More

गंग वंश का इतिहास

Dr. SajivaAncient History1 Comment

पल्लवों के समकालीन राज्यों में एक गंग वश का साम्राज्य था. इसे तलनाड का गंग वंश भी कहा जाता है. अनुश्रुति के अनुसार, गंग राजवंश इक्ष्वाकु वंश से उत्पन्न हुआ था. इन्होंने अपनी ऐतिहासिक महत्ता स्थापित करने के लिए स्वयं को गंग वंश कहलवाया. क्योंकि वे प्राचीन काल में गंगा नदी के किनारे से आये थे. इनकी दो शाखाएँ थीं. … Read More

कदम्ब वंश

Dr. SajivaAncient HistoryLeave a Comment

दक्षिण भारत में 300 ई० से 750 ई० तक एक अन्य वंश जिसका उल्लेख मिलता है वह था कदम्ब वंश. कदम्ब वंश के राजाओं ने चौथी शताब्दी ई० में दक्षिणी महाराष्ट्र और आधुनिक गोआ राज्य सहित कोंकण में अपना साम्राज्य स्थापित किया था. सम्भवतः वे ब्राह्मण थे तथा मानव्य उनका गोत्र था. उन्होंने वर्ण-व्यवस्था को अपने राज्य में कायम रखा … Read More

कण्व वंश

Sansar LochanAncient History1 Comment

मगध राज्य के शुंग वंश के अंतिम सम्राट देवभूति को मारकर 75 ई.पू. वासुदेव ने कण्व वंश की नींव रखी. उस समय भारत की राजनैतिक एकता नष्ट हो चुकी थी. देश की पश्चिमोत्तर सीमा पर शक वंश के राजा लगातार आक्रमण कर रहे थे. मगध राज्य में पाटलिपुत्र तथा उसके आसपास के प्रदेश ही शामिल थे. कण्व राजवंश शुंग वंश … Read More

आंध्र इक्ष्वाकु वंश

Sansar LochanAncient HistoryLeave a Comment

दक्षिणी भारत के पूर्वी भारत के सातवाहन शक्ति के पतन के बाद एक नए वंश का उदय हुआ जिसे इक्ष्वाकु वंश के नाम से जाना जाता है. लगभग तीसरी और चौथी शताब्दी में कृष्णा नदी की पूर्वी घाटी में एक वंश राज कर रहा था जिसे राम के पूर्वज इक्ष्वाकु से अलग दिखाने के लिए आंध्र इक्ष्वाकु कहा जाता है … Read More

चेर राजवंश

Sansar LochanAncient HistoryLeave a Comment

दक्षिण भारत का तीसरा राज्य चेर या केरल था। इस राज्य का मुख्य केन्द्र मालाबार तट के किनारे का आधुनिक केरल राज्य का एक भाग था। इसमें समुद्र और पर्वतीय क्षेत्रों के मध्य की संकरी भूपर्पटी शामिल थी। यहाँ की उत्पत्ति के बारे में (पाण्ड्य तथा चोलों की तरह) सुनिश्चित रूप से बताना कठिन है। कुछ विद्वानों की राय है … Read More

पाण्ड्य राजवंश

Dr. SajivaAncient HistoryLeave a Comment

मेगस्थनीज के विवरण के आधार पर कुछ विद्वानों की राय है कि सुदूर दक्षिण का यह प्राचीनतम राज्य था. उनका प्राचीन राज्य द्रविड प्रदेश के दक्षिण-पूर्व छोर का भाग था. प्रारम्भिक काल में उनका स्थान ताम्रपर्णी के किनारे कोरक नामक स्थान था जो एक अच्छा बन्दरगाह था. कहा जाता है कि यहीं उत्पन्न तीन भाइयों ने तीन स्थानों पर क्रमशः … Read More

वाकाटक वंश – Vakataka Dynasty in Hindi

Dr. SajivaAncient History1 Comment

उत्तर महाराष्ट्र और विदर्भ (बरार) में सातवाहनों का स्थान वाकाटकों ने लिया. वास्तव में सातवाहनों के पतन एवं छठी शताब्दी के मध्य तक चालुक्य वंश के उदय तक दक्कन में वाकाटक ही सबसे महत्त्वपूर्ण शक्ति थे जिन्होंने दक्षिण एवं कभी-कभी मध्य भारत के कुछ क्षेत्रों पर भी अपनी सत्ता स्थापित रखी. वाकाटक कौन थे ? यह अब भी एक ऐतिहासिक … Read More