5G क्या है? 5G की स्पीड की तुलना और इसके समक्ष चुनौतियाँ

Richa KishoreScience TechLeave a Comment

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भारत के लिए 5G परियोजना रोडमैप को तैयार करने के लिए गठित संचालन समिति ने हाल ही में “Making India 5G Ready” नामक रिपोर्ट प्रस्तुत की है. मोबाइल वायरलेस जनरेशन सामान्यतः प्रणाली, गति, तकनीक, आवृत्ति, डाटा क्षमता, विलम्बता (latency) आदि की प्रकृति में परिवर्तन को संदर्भित करती है. प्रत्येक जेनेरेशन के निश्चित मानक, भिन्न क्षमताएँ, नई तकनीक तथा विशेषताएँ होती हैं जो इन्हें अपनी पहले के प्रौद्योगिकी से अलग ला कर खड़ा कर देती है. जैसे हम लोग जानते हैं कि भारत में 1G, 2G, 3G और 4G का लोग उपयोग पहले से करते आ रहे हैं.

1G, 2G, 3G और 4G Features

  • 1G = इसका प्रयोग केवल voice call के लिए ही प्रयोग किया जाता था. इसकी मौलिक विशेषताएँ थीं – 2.4kbps की गति, केवल एक देश में ही voice call, एनालॉग सिग्नल का प्रयोग, खराब voice गुणवत्ता आदि.
  • 2G= यह एक डिजिटल प्रौद्योगिकी है जिसमें टेक्स्ट संदेशों का प्रयोग भी किया जाता है. 2G के आगे 2.5G प्रणाली के अंतर्गत पॉकेट स्विचिंग एवं सर्किट स्विचिंग डोमेन का प्रयोग किया जाता है तथा यह 144kbps तक डाटा गति प्रदान करता है, उदाहरण के लिए GPRS, CDMA आदि.
  • 3G= 3G की मोबाइल प्रौद्योगिकी उच्च डेटा प्रेषण दर, वर्धित क्षमता और मल्टीमीडिया सपोर्ट उपलब्ध कराती है. इस प्रौद्योगिकी का लक्ष्य उच्च गति डेटा उपलब्ध कराना तथा डेटा सेवाएँ, टेलीविज़न/विडियो तक एक्सेस, वैश्विक रोमिंग जैसी नवीन सेवाएँ आदि प्रदान करना है. इसके अंतर्गत वाइड बैंड वायरलेस नेटवर्क का प्रयोग किया जाता है जिससे स्पष्टता में वृद्धि होती है.
  • 4G = यह वायरलेस मोबाइल नेटवर्क को समर्थन प्रदान करने लिए 3G को स्थायी इन्टरनेट के साथ एकीकृत करती है. यह मोबाइल प्रौद्योगिकी के लिए एक क्रांति है तथा यह 3G के समक्ष विद्यमान बाधाओं को कम करती है. इसमें लॉन्ग टर्म इवेल्यूशन (LTE) को 4G तकनीक माना जाता है.

5G क्या है?

  • 5G एक वायरलेस दूरसंचार प्रौद्योगिकी है. इसमें डेटा प्रसारण एवं प्राप्ति के लिए रेडियो तरंगे और रेडियो आवृत्ति (RF) का प्रयोग किया जाता है.
  • यह 4G LTE नेटवर्क के बाद मोबाइल नेटवर्क प्रौद्योगिकी की अगली पीढ़ी है. 2019 के आरम्भ  में 5G प्रौद्योगिकी का उपयोग सेवाओं में क्रमिक रूप से शुरू किया जाएगा और 2024 तक सम्पूर्ण सेवाओं तक इसका विस्तार किया जायेगा.
  • 5G के लिए अंतिम मानक अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) द्वारा निर्धारित किया जाएगा.

5G की विशेषताएँ

  • उच्च डेटा दर (Hotspots के लिए 1Gbps, डाउनलोड गति 100Mbps तथा वाइड-एरिया कवरेज हेतु 50Mbps की अपलोड गति).
  • व्यापक कनेक्टिविटी (प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 1 मिलियन कनेक्शन)
  • अल्ट्रा-लो-लेटेंसी (1 मिलीसेकंड)
  • उच्च विश्वसनीयता (मिशन क्रिटिकल “अल्ट्रा-रिलाएबल” संचार हेतु 99.999%).
  • उच्च गति पर गतिशीलता (500 किमी./घंटा की गति तक अर्थात् उच्च-गति ट्रेन के लिए).

इस प्रौद्योगिकी को वास्तविकता में परिणत होने में अभी काफी समय लगेगा किन्तु इसमें वायरलेस उपकरणों के साथ अंतर्क्रिया के हमारे वर्तमान तरीके को पूर्णतया परिवर्तित करने की पर्याप्त क्षमता है.

5G के लाभ

  • इन्टरनेट की तीव्र गति – वर्तमान में 4G नेटवर्क एक गीगाबाइट प्रति सेकंड की अधिकतम डाउनलोड गति प्राप्त करने में सक्षम है. 5 के साथ इस गति को 10 गीगाबाइट प्रति सेकंड तक बढ़ाया जा सकता है.
  • अल्ट्रा-लो-लेटेंसी – लेटेंसी उस समय को संदर्भित करती है जो एक device से दूसरी device तक एक डेटा पैकेट को भेजने में लगता है. 4G में लेटेंसी दर 50 milliseconds है जबकि 5G में 1 millisecond तक हो सकती है.
  • अच्छी तरह से कनेक्टेड विश्व – 5G इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स जैसी प्रौद्योगिकियों  के समायोजन के लिए प्रयोक्ता की आवश्यकता के अनुसार क्षमता तथा बैंडविड्थ प्रदान करेगा. इस प्रकार यह आर्टिफिशियल इन्टेलिजेन्स को अपनाने में सहायता करेगा.
  • डिजिटल आर्थिक नीति पर आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) समिति के अनुसार 5G प्रौद्योगिकी का क्रियान्वयन GDP में वृद्धि, रोजगारों का सृजन तथा अर्थव्यवस्था को डिजिटल बनाने में सहायता करेगा.

भारत को 5G से लाभ

  • भारत पर 5G का संचयी आर्थिक प्रभाव 2035 तक एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच सकता है. यह हमारे जीवन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सम्मिलित करने में सहायता करेगा और इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स (IOT) के लिए परिवेश प्रदान करने हेतु स्मार्ट उपकरणों को निर्बाध रूप से डेटा के आदान-प्रदान को सक्षम बनाएगा.
  • 5G कृषि से लेकर, स्मार्ट सिंचाई, मृदा एवं फसल की बेहतर निगरानी एवं पशुधन प्रबन्धन तक सम्पूर्ण मूल्य शृंखला में सुधार को सक्षम बना सकता है.
  • 5G सटीक विनिर्माण के लिए रोबोटिक्स के उपयोग को सक्षम बनायेगा, विशेषत: जहाँ मनुष्य इन कार्यों को सुरक्षित या सटीकता से निष्पादित नहीं कर सकता.
  • ऊर्जा क्षेत्र में, “स्मार्ट ग्रिड” और “स्मार्ट मीटरिंग” को सहायता प्रदान की जा सकती है.
  • स्वास्थ्य देखभाल में, 5G अधिक प्रभावी दूरस्थ-चिकित्सा वितरण, सर्जिकल रोबोटिक्स के दूरस्थ नियंत्रण और महत्त्वपूर्ण आँकड़ों की वायरलेस निगरानी को सक्षम बना सकता है.

चुनौतियाँ

यह एक विशाल कार्य है जिसमें स्पेक्ट्रम और नए एंटेना की स्थापना सम्बन्धित मुद्दे सम्मिलित हैं. जैसे कि ईमारतें, वृक्ष, खराब मौसम आदि भी अवरोधक का कारण बन सकते हैं. अतः बेहतर कनेक्शन हेतु अधिक बेस स्टेशनों का निर्माण किये जाने की आवश्यकता है.

5G तक संक्रमण हेतु भारत के पास एक मजबूत बैकहॉल (backhaul) का अभाव है. दरअसल बैकहॉल एक प्रकार का नेटवर्क होता है जो सेल साइट्स को सेन्ट्रल एक्सचेंज से जोड़ता है. इस समय 80% सेल साइट्स माइक्रोवेव बैकहॉल तथा 20% साइट्स फाइबर के माध्यम से कनेक्टेड हैं.  भारतीय बाजार आज की तिथि में सिर्फ 4G के लिए अनुकूल है.

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