स्वराज दल की स्थापना, उद्देश्य और पतन – Swaraj Party

Dr. SajivaHistory, Modern History9 Comments

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1921 ई. में महात्मा गाँधी द्वारा असहयोग आन्दोलन (Non Cooperation Movement) को बंद किये जाने के कारण बहुत-से नेता क्षुब्ध हो गए. इसी कारण कुछ नेताओं ने मिलकर एक अलग दल का निर्माण किया, जिसका नाम स्वराज दल रखा गया. इस दल की स्थापना 1 जनवरी, 1923 को देशबंधु चित्तरंजन दास तथा पं. मोतीलाल नेहरु ने की. इस दल का प्रथम अधिवेशन इलाहबाद में हुआ, जिसमें इसका संविधान और कार्यक्रम निर्धारित हुआ.

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इस दल के निम्नलिखित उद्देश्य निश्चित किये गए – – Objectives of Swaraj Party

  1. भारत को स्वराज्य (Self Rule) दिलाना
  2. परिषद् में प्रवेश कर असहयोग के कार्यक्रम को अपनाना और असहयोग आन्दोलन को सफल बनाना
  3. सरकार की नीतियों का घोर विरोध कर उसके कार्यों में अड़ंगा लगाना, जिससे उसके कार्य सुचारू रूप से नहीं चल सकें और सरकार अपनी नीतियों में परिवर्तन के लिए विवश हो जाए.

इन उदेश्यों की प्राप्ति के लिए निम्नलिखित कार्यक्रम निर्धारित किये गए – – Programs to achieve Objectives 

  1. परिषद् में जाकर सरकारी आय-व्यय के ब्यौरे को रद्द करना
  2. सरकार के उन प्रस्तावों का विरोध करना, जिनके द्वारा नौकरशाही को शक्तिशाली बनाने का प्रयत्न हो
  3. राष्ट्र की शक्ति में वृद्धि लाने वाले प्रस्तावों, योजनाओं और विधेयकों को परिषद् में प्रस्तुत करना
  4. केन्द्रीय और प्रांतीय व्यवस्थापिका सभाओं के सभी निर्वाचित स्थानों को घेरने के लिए प्रयत्न करते रहना जिससे कि स्वराज दल की नीति को अधिक प्रभावशाली बनाया जा सके
  5. परिषद् के बाहर महात्मा गांधी द्वारा निर्धारित रचनातमक कार्यक्रम को सहयोग प्रदान करना
  6. हमेशा सत्याग्रह के लिए तैयार रहना और यदि आवश्यक हो तो पदों का त्याग भी कर देना

स्वराज दल ने अपने इन कामों को पूरा करने में अप्रत्याशित सफलता प्राप्त की. केन्द्रीय धारा सभा में 145 स्थानों में 45 स्थान स्वराज दल के प्रतिनिधियों ने प्राप्त किये. वहां उन्होंने स्वतंत्र तथा राष्ट्रवादी सदस्यों से गठबंधन कर अपना बहुमत बनाया और सरकार के कार्यों में अड़ंगा डालना शुरू किया. बंगाल में इस दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ. वहाँ के गवर्नर ने स्वराज दल के नेता C.R. Das को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया.

स्वराज दल के पतन के कारण – – Reasons behind the failure of Swaraj Party

1. देशबंधु चितरंजन दास की मृत्यु- चितरंजन दास (Chittaranjan Das) महान् देशभक्त थे. इसलिए उन्हें “देशबंधु” नाम दिया गया था. 1925 ई. में उनकी मृत्यु हो गयी जिससे स्वराज दल का संगठन कमजोर पड़ गया. विशेषकर बंगाल में इस party की स्थिति अत्यंत शिथिल पड़ गयी.

2. सहयोग की नीति- आरम्भ में स्वराजवादियों ने असहयोग की नीति अपनाई थी और सरकार के कार्यों में विघ्न डालना ही उनका प्रमुख उद्देश्य बन गया था. परन्तु उन्हें बाद में लगने लगा कि असहयोग की नीति अपनाने से देश को लाभ के बदले हानि ही हो रही है. इसलिए उन्होंने सहयोग की नीति अपना ली. परिणामस्वरूप जनता में उनकी लोकप्रियता घटने लगी.

3. स्वराज दल में मतभेद- पंडित मोतीलाल नेहरु (Motilal Nehru) सरकार से असहयोग करनेवालों का नेतृत्व कर रहे थे. दूसरी ओर बम्बई के स्वराज दल के नेता सहयोग के पक्ष में आ गए थे. इस प्रकार स्वराज दल में मतभेद उभर आया.

4. 1926 का निर्वाचन- 1926 ई. के निर्वाचन में स्वराजवादियों को वह सफलता प्राप्त नहीं हो सकी जो उन्होंने 1923 ई. के निर्वाचन में मिली थी. इससे पार्टी को बहुत बड़ा धक्का लगा.

5. हिंदूवादी दल की स्थापना- पं. मदनमोहन मालवीय और लाला लाजपत राय  की धारणा यह थी कि स्वराजवादियों की अड़ंगा नीति से हिन्दुओं को हानि होगी और मुसलमानों को लाभ. यह सोचकर उन्होंने Congress से हटकर एक नया दल बनाया. उनके इस निर्णय से कांग्रेस के साथ-साथ स्वराज दल को बड़ा झटका लगा.

 

स्वराज दल से सम्बंधित विगत परीक्षाओं में आए कुछ प्रश्न – Previous Year Questions related to Swaraj Party

1. स्वराज दल की स्थापना कब हुई? [47th BPSC, 2005]

a) 1923

b) 1930

c) 1932

d) 1939

 

2. स्वराज दल के संस्थापक कौन थे? [UPPSC (Pre), 1995]

a) विपिनचन्द्र पाल और बाल गंगाधर तिलक

b) भीमराव आंबेडकर और रवीन्द्रनाथ टैगोर

c) जवाहर लाल नेहरु और महात्मा गाँधी

d) चित्तरंजन दास और पं. मोतीलाल नेहरु

 

3. स्वराज दल ने किस राज्य में स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया? [SSC Section Officer Exam, 2007]

a) उत्तर प्रदेश

b) बंगाल

c) गुजरात

d) महाराष्ट्र

(नोट: इस आर्टिकल में ही प्रश्नों के उत्तर छिपे हैं इसलिए इन प्रश्नों का उत्तर स्वयं दें)

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9 Comments on “स्वराज दल की स्थापना, उद्देश्य और पतन – Swaraj Party”

  1. Can I get its PDF sir?
    Thank you. Kindly upload more topics like this. These contents are far better than NCERT books

    thank u

  2. Thank you sir for your kind info about Swaraj Party that too in Hindi.
    Answers should be

    1. A
    2. D
    3. B

    thanks again

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