Sansar डेली करंट अफेयर्स, 29 January 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 29 January 2021


GS Paper 2 Source : The Hindu

UPSC Syllabus : Related to Health.

Topic : Asia-Pacific Personalised Health Index

संदर्भ

एशिया-प्रशांत व्यक्तिगत स्वास्थ्य सेवा सूचकांक (Asia-Pacific Personalised Health Index) में भारत को ग्यारह देशों में 10वाँ स्थान दिया गया है.

एशिया-प्रशांत व्यक्तिगत स्वास्थ्य सेवा सूचकांक

  1. यह सूचकांक इकोनॉमिक इंटेलिजेंस यूनिट द्वारा विकसित किया गया है.
  2. इस प्रतिवेदन को 27 तरह के अलग-अलग बिंदुओं के आधार पर तैयार किया गया है.

सूचकांक से सम्बंधित मुख्य तथ्य

  1. स्वास्थ्य सूचना सूचकांक में भारत 41 अंकों के साथ 10वें स्थान पर है.
  2. स्वास्थ्य सेवा को लेकर भारत 24 अंकों के साथ ग्यारहवें जबकि व्यक्तिगत स्तर पर स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी तकनीक के प्रयोग में भारत 30 अंकों के साथ नौवें स्थान पर है.
  3. स्वास्थ्य नीति को लेकर भारत 48 अंकों के साथ 5वें नंबर पर है जो व्यक्तिगत स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में बेहतर स्थिति में दिखता है
  4. एशिया प्रशांतक्षेत्र के ग्यारह देशों में से सिंगापुर ने सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त किया.
  5. इसके पश्चात् ताइवान ने दूसरा, जापान ने तीसरा और ऑस्ट्रेलिया ने चौथा स्थान प्राप्त किया. मूलभूत सुविधाओं, सेवा और स्वास्थ्य सेवा में तकनीक के क्षेत्र में इंडोनेशिया सबसे पिछड़ा है और वे इस सूची में ग्यारहवें नंबर पर है.
  6. एशिया पैसेफिक पर्सनलाइज्ड हेल्थ सूचकांक के अनुसार प्रशांत क्षेत्र के ऑस्ट्रेलिया, चीन, जापान, भारत, इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, ताइवान, थाईलैंड और न्यूजीलैंड जैसे देश सही व्यक्ति को सही समय पर इलाज मुहैया करा रहे हैं.

भारत की निम्न रैंकिंग का कारण

  • शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच असमानताओं के बावजूद भी यद्यपि हाल के वर्षों में भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में पर्याप्त प्रगति हुई है.
  • भारत में व्यक्तिगत स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता ज़्यादातर औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों में ही सीमित है. इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में वृद्धि को रोकने वाले महत्त्वपूर्ण कारकों में मुख्य सूप से लागत अवरोध है.
  • हालांकि भारत व्यक्तिगत स्वास्थ्य सेवा की पहुँच को सुनिश्चित करने के लिए योजनागत रूप से कार्य कर रहा है. आयुष्मान भारत जैसी योजना के साथ व्यक्तिगत स्वास्थ्य सेवा में क्षमताओं के निर्माण पर केंद्रित कई नीतिगत पहलों और राष्ट्रव्यापी परियोजनाओं की शुरुआत की गयी है.
  • भारत के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में- शहरी-ग्रामीण विषमता, स्वास्थ देखभाल सीमित पहुंच, डिजिटल बुनियादी ढांचे की कमी और स्वास्थ्य साक्षरता का अपर्याप्त स्तर आदि प्रमुख चुनौतियों मुख्य रूप में विद्यमान हैं.
  • इस रिपोर्ट में भारत की अत्यधिक संघात्मक प्रकृति को भी स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच को सीमित करने के एक कारण के रूप में देखा गया है.

इकोनॉमिक इंटेलिजेंस यूनिट

  • इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट (EIU) The Economist Group का अनुसन्धान एवं विश्लेषण प्रभाग है.
  • EIU 1946 में बना था और आज यह वैश्विक व्यवसाय आसूचना के मामले में विश्व की अग्रणी संस्था है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

UPSC Syllabus : Parliament and State Legislatures – structure, functioning, conduct of business, powers & privileges and issues arising out of these.

Topic : PRESIDENT’S ADDRESS AND MOTION OF THANKS

संदर्भ

PRESIDENT’S ADDRESS AND MOTION OF THANKS बजट सत्र की शुरुआत में संसद के संयुक्त अधिवेशन के दौरान राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद के अभिभाषण का 18 विपक्षी दलों ने बहिष्कार करने की घोषणा की है. विपक्षी दलों द्वारा यह निर्णय तीनों कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए किया गया है.

राष्‍ट्रपति का अभिभाषण

भारत के संविधान में राष्ट्रपति द्वारा संसद के किसी एक सदन में या एक साथ समवेत दोनों सदनों में अभिभाषण करने का प्रावधान है. राष्ट्रपति द्वारा संसद में अभिभाषण का यह प्रावधान भारत शासन अधिनियम, 1919 के अंतर्गत वर्ष 1921 में पहली बार स्थापित किये गए केन्द्रीय विधानमंडल के समय से चला आ रहा है.

संवैधानिक प्रावधान

 राष्ट्रपति निम्नलिखित दो स्थितियों में संसद के सदनों में अलग-अलग या एक साथ समवेत दोनों सदनों के समक्ष अभिभाषण कर सकते हैं –

  • अनुच्छेद 86(1) के अनुसार राष्ट्रपति संसद के किसी एक सदन में या एक साथ समवेत दोनों सदनों में अभिभाषण कर सकते हैं.
  • अनुच्छेद 87(1) के अनुसार राष्ट्रपति, लोक सभा के लिए प्रत्येक साधारण निर्वाचन के बाद प्रथम सत्र के आरम्भ में तथा प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरम्भ में एक साथ समवेत दोनों सदनों में अभिभाषण करेंगे और संसद को सत्र के आह्वान के कारण बताएंगे.

अभिभाषण की विषय-वस्तु

अभिभाषण में सरकार की नीति का विवरण होता है. इसलिए अभिभाषण का प्रारूप भी सरकार द्वारा ही तैयार किया जाता है. इसमें पिछले वर्ष के सरकार के कार्य-कलापों और उपलब्धियों की समीक्षा होती है और महत्वपूर्ण आन्तरिक और उपस्थित अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं के सम्बन्ध में सरकार द्वारा अपनायी जाने वाली नीतियों का निरूपण होता है. इसमें उन विधायी कार्यों की मुख्य मदों का भी उल्लेख होता है जिन्हें उस वर्ष के दौरान होने वाले सत्रों में संसद में लाने का विचार होता है.

अभिभाषण की प्रति का संसद के सदनों के समक्ष रखा जाना

राष्ट्रपति द्वारा दिए गए अभिभाषण को सदन की कार्यवाही का अंग बनाने तथा उसमे शामिल करने के लिए दोनों सदन अभिभाषण की समाप्ति के बाद अपनी-अपनी बैठकें करती हैं और राष्ट्रपति के द्वारा दिए गए अभिभाषण की सत्यापित प्रतियों को सभा के पटल पर रखा जाता है. उसके बाद धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाता है और राष्ट्रपति के अभिभाषण में निर्दिष्ट विषयों पर चर्चा की जाती है.

क्‍या सदस्‍य राष्‍ट्रपति‍ के अभि‍भाषण पर प्रश्‍न उठा सकते हैं ?

कोई भी सदस्‍य राष्‍ट्रपति‍ के अभि‍भाषण पर प्रश्‍न नहीं उठा सकता है. कि‍सी सदस्‍य का कोई भी कार्य, जि‍ससे अवसर की शालीनता भंग होती है अथवा जि‍ससे कोई बाधा उत्‍पन्‍न हो, उस सभा द्वारा दंडनीय होता है जि‍सका वह सदस्‍य है. कि‍सी सदस्‍य द्वारा प्रस्‍तुत तथा अन्‍य सदस्‍य द्वारा अनुमोदि‍त धन्‍यवाद-प्रस्‍ताव पर राष्‍ट्रपति‍ के अभि‍भाषण में नि‍र्दिष्‍ट वि‍षयों पर चर्चा की जाती है. राष्‍ट्रपति‍ के अभि‍भाषण पर चर्चा की वि‍स्‍तृति‍ बहुत व्‍यापक होती है और संपूर्ण प्रशासन के कार्यकरण पर चर्चा की जा सकती है. इस संबंध में अन्‍य बातों के साथ-साथ सीमाएँ यह है कि‍ सदस्‍यों को एक तो उन मामलों का उल्‍लेख नहीं करना चाहि‍ए जिनके लि‍ए भारत सरकार प्रत्‍यक्षत: उत्तरदायी नहीं है और दूसरा यह कि‍ वह वाद-वि‍वाद के दौरान राष्‍ट्रपति‍ का नाम नहीं ले सकते क्‍योंकि‍ अभि‍भाषण की वि‍षय-वस्‍तु के लि‍ए सरकार उत्तरदायी होती है, न कि‍ राष्‍ट्रपति‍.

धन्यवाद ज्ञापन में संशोधन

धन्यवाद ज्ञापन में संशोधन के लिए सांसद सूचना दे सकते हैं. ये संशोधन अभिभाषण में कथित विषयों के बारे में हो सकते हैं. इसके अतिरिक्त कोई सांसद उस समय भी संशोधन प्रस्तुत कर सकता है यदि उसे लगे की अभिभाषण में कोई विषय छूट गया है.

धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा और उसकी विषय-वस्तु

  • धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा सदन द्वारा स्वयं या कार्यमंत्रणा समिति की सिफारिश पर आवंटित 3 या 4 दिन होती है.
  • आबंटित समय का बंटवारा विभिन्न दलों तथा गुटों के लिए सदन में उनकी संख्या के अनुपात में किया जाता है.
  • चर्चा के लिए नियत दिनों में सदन अभिभाषण में निर्दिष्ट विषयों पर सुविधानुसार चर्चा कर सकती है.
  • अभिभाषण पर चर्चा बहुत व्यापक होती है और सदस्य राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय सभी प्रकार की समस्याओं पर बोल सकते हैं.
  • जिन मामलों का उल्लेख अभिभाषण में विशिष्ट रूप से नहीं होता है, उन पर भी धन्यवाद प्रस्ताव में संशोधनों के माध्यम से चर्चा की जाती है.
  • धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा प्रधानमंत्री या किसी अन्य मंत्री द्वारा उत्तर दिए जाने पर समाप्त हो जाती है. इसके बाद उसके संशोधनों को निपटाया जाता है और धन्यवाद प्रस्ताव मतदान के लिए रखा जाता है तथा स्वीकृत किया जाता है.
  • धन्यवाद प्रस्ताव स्वीकृत किये जाने के बाद उसकी सूचना अध्यक्ष द्वारा एक पत्र के जरिये सीधे राष्ट्रपति को दी जाती है.

धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा की सीमा

  • इसके सम्बन्ध में एकमात्र प्रतिबन्ध यह है कि एक तो सदस्य उन मामलों का उल्लेख नहीं कर सकते जिनके लिए केंद्र सरकार प्रत्यक्षत: उत्तरदायी नहीं है
  • दूसरा यह कि वे वाद-विवाद के दौरान राष्ट्रपति का नाम नहीं ले सकते क्योंकि अभिभाषण की विषय-वस्तु के लिए सरकार उत्तरदायी होती है, न कि राष्ट्रपति.

GS Paper 3 Source : The Hindu

UPSC Syllabus : Science and Technology. 

Topic : 5G Network

संदर्भ

टेलीकॉम कंपनी भारती एयरटेल ने भारत में पहले 5G नेटवर्क की घोषणा की है. कंपनी ने हैदराबाद में कमर्शियल नेटवर्क पर 5G सेवा का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया है.

भारत में पहले 5G सेवा से संबंधित जानकारी

  • भारती एयरटेल 5G सेवा शुरू करने वाली देश पहली कंपनी बन गई है. एयरटेल ने भारत में 5G नेटवर्क के लिए एरिक्शन (Ericsson) के साथ साझेदारी की है.
  • भारती एयरटेल इस 5G सेवा के लिए अपने मौजूदा लिबरलाइज्‍ड स्पेक्ट्रम को 1800 मेगाहर्ट्ज बैंड में एनएसए नेटवर्क की तकनीक का उपयोग किया गया है.
  • हालांकि आम ग्राहकों के लिए अभी यह 5G सेवा उपलब्ध नहीं होगी, आम ग्राहकों को यह सेवा तब उपलब्ध होगी, जब पर्याप्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध होगा और सरकार की मंजूरी मिल जाएगी.

5G क्या है?

  • 5G एक वायरलेस दूरसंचार प्रौद्योगिकी है. इसमें डेटा प्रसारण एवं प्राप्ति के लिए रेडियो तरंगे और रेडियो आवृत्ति (RF) का प्रयोग किया जाता है.
  • यह 4G LTE नेटवर्क के बाद मोबाइल नेटवर्क प्रौद्योगिकी की अगली पीढ़ी है. 2019 के आरम्भ में 5G प्रौद्योगिकी का उपयोग सेवाओं में क्रमिक रूप से शुरू किया जाएगा और 2024 तक सम्पूर्ण सेवाओं तक इसका विस्तार किया जायेगा.
  • 5G के लिए अंतिम मानक अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) द्वारा निर्धारित किया जाएगा.

5G की विशेषताएँ

  • उच्च डेटा दर (Hotspots के लिए 1Gbps, डाउनलोड गति 100Mbps तथा वाइड-एरिया कवरेज हेतु 50Mbps की अपलोड गति).
  • व्यापक कनेक्टिविटी (प्रति वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 1 मिलियन कनेक्शन)
  • अल्ट्रा-लो-लेटेंसी (1 मिलीसेकंड)
  • उच्च विश्वसनीयता (मिशन क्रिटिकल “अल्ट्रा-रिलाएबल” संचार हेतु 99.999%).
  • उच्च गति पर गतिशीलता (500 किमी./घंटा की गति तक अर्थात् उच्च-गति ट्रेन के लिए).

इस प्रौद्योगिकी को वास्तविकता में परिणत होने में अभी काफी समय लगेगा किन्तु इसमें वायरलेस उपकरणों के साथ अंतर्क्रिया के हमारे वर्तमान तरीके को पूर्णतया परिवर्तित करने की पर्याप्त क्षमता है.

5G के लाभ

  • इन्टरनेट की तीव्र गति –वर्तमान में 4G नेटवर्क एक गीगाबाइट प्रति सेकंड की अधिकतम डाउनलोड गति प्राप्त करने में सक्षम है. 5 के साथ इस गति को 10 गीगाबाइट प्रति सेकंड तक बढ़ाया जा सकता है.
  • अल्ट्रा-लो-लेटेंसी –लेटेंसी उस समय को संदर्भित करती है जो एक device से दूसरी device तक एक डेटा पैकेट को भेजने में लगता है. 4G में लेटेंसी दर 50 milliseconds है जबकि 5G में 1 millisecond तक हो सकती है.
  • अच्छी तरह से कनेक्टेड विश्व –5G इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स जैसी प्रौद्योगिकियों  के समायोजन के लिए प्रयोक्ता की आवश्यकता के अनुसार क्षमता तथा बैंडविड्थ प्रदान करेगा. इस प्रकार यह आर्टिफिशियल इन्टेलिजेन्स को अपनाने में सहायता करेगा.
  • डिजिटल आर्थिक नीति पर आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) समिति के अनुसार 5G प्रौद्योगिकी का क्रियान्वयन GDP में वृद्धि, रोजगारों का सृजन तथा अर्थव्यवस्था को डिजिटल बनाने में सहायता करेगा.

भारत को 5G से लाभ

  • भारत पर 5G का संचयी आर्थिक प्रभाव 2035 तक एक ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच सकता है. यह हमारे जीवन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सम्मिलित करने में सहायता करेगा और इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स (IOT) के लिए परिवेश प्रदान करने हेतु स्मार्ट उपकरणों को निर्बाध रूप से डेटा के आदान-प्रदान को सक्षम बनाएगा.
  • 5G कृषि से लेकर, स्मार्ट सिंचाई, मृदा एवं फसल की बेहतर निगरानी एवं पशुधन प्रबन्धन तक सम्पूर्ण मूल्य शृंखला में सुधार को सक्षम बना सकता है.
  • 5G सटीक विनिर्माण के लिए रोबोटिक्स के उपयोग को सक्षम बनायेगा, विशेषत: जहाँ मनुष्य इन कार्यों को सुरक्षित या सटीकता से निष्पादित नहीं कर सकता.
  • ऊर्जा क्षेत्र में, “स्मार्ट ग्रिड” और “स्मार्ट मीटरिंग” को सहायता प्रदान की जा सकती है.
  • स्वास्थ्य देखभाल में, 5G अधिक प्रभावी दूरस्थ-चिकित्सा वितरण, सर्जिकल रोबोटिक्स के दूरस्थ नियंत्रण और महत्त्वपूर्ण आँकड़ों की वायरलेस निगरानी को सक्षम बना सकता है.

चुनौतियाँ

यह एक विशाल कार्य है जिसमें स्पेक्ट्रम और नए एंटेना की स्थापना सम्बन्धित मुद्दे सम्मिलित हैं. जैसे कि ईमारतें, वृक्ष, खराब मौसम आदि भी अवरोधक का कारण बन सकते हैं. अतः बेहतर कनेक्शन हेतु अधिक बेस स्टेशनों का निर्माण किये जाने की आवश्यकता है.

5G तक संक्रमण हेतु भारत के पास एक मजबूत बैकहॉल (backhaul) का अभाव है. दरअसल बैकहॉल एक प्रकार का नेटवर्क होता है जो सेल साइट्स को सेन्ट्रल एक्सचेंज से जोड़ता है. इस समय 80% सेल साइट्स माइक्रोवेव बैकहॉल तथा 20% साइट्स फाइबर के माध्यम से कनेक्टेड हैं.  भारतीय बाजार आज की तिथि में सिर्फ 4G के लिए अनुकूल है.

यह जरूर पढ़ें > 5G तकनीक


GS Paper 3 Source : The Hindu

UPSC Syllabus : Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : GLOBAL CLIMATE RISK INDEX 2021

संदर्भ

जर्मनवाच नामक अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण से सम्बंधित थिंकटैंक ने पिछले दिनों 2021 का वैश्विक जलवायु जोखिम सूचकांक (Global Climate Risk Index 2021) प्रकाशित कर दिया.

प्रतिवर्ष छपने वाले इस सूचकांक में यह दर्शाया जाता है कि आंधी, बाढ़, लू आदि मौसम से जुड़ी आपदाओं का विभिन्न देशों पर कितना दुष्प्रभाव पड़ा है.

ज्ञातव्य है कि जर्मनी के बॉन और बर्लिन नगरों से काम करने वाली संस्था जर्मनवाच विकास एवं पर्यावरण से जुड़ा एक ऐसा स्वतंत्र संगठन है जो सतत वैश्विक विकास के लिए काम करता है.

सूचकांक के निष्कर्ष

  • इस रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019 में भारत में मानसून सामान्य से एक अधिक महीने तक जारी रहा.
  • जून से सितंबर 2019 की अवधि में, लंबी अवधि का औसत 110% दर्ज किया गया था.
  • भारी बारिश के कारण भारत में भयंकर बाढ़ आई, जिसके परिणामस्वरूप 14 राज्यों में 1,800 लोग मारे गए.बाढ़ से 8 मिलियन लोगों का विस्थापन भी हुआ.
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में आठ उष्णकटिबंधीय चक्रवात आये थे.
  • इस रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि, ‘अत्यधिक गंभीर’ चक्रवात फेनी ने 28 मिलियन लोगों को प्रभावित किया और भारत और बांग्लादेश में इसके कारण 90 लोगों की मौत हुई थी.
  • 2000 से 2019 के बीच वैश्विक स्तर पर 11,000 से अधिक चरम मौसम की घटनाओं के प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में लगभग 4,75,000 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.
  • 2000 से 2014 की अवधि के लिए, चरम मौसम की स्थिति के कारण लगभग 56 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की क्रय शक्ति समता का आर्थिक नुकसान हुआ.
  • इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर लगभग 8 मिलियन लोग मानसून से प्रभावित थे, जिसके परिणामस्वरूप 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर की आर्थिक क्षति हुई.

जलवायु परिवर्तन विकट मौसम के लिए उत्तरदायी कैसे है?

  • कई अध्ययनों का यह निष्कर्ष है कि जलवायु प्रणाली के अधिक गर्म होने के कारण कुछ विकट जलवायवीय घटनाओं की बारंबारता, तीव्रता और अवधि में बढ़ोतरी हुई है.
  • उदाहरण के लिए, वैश्विक ताप वृद्धि से तापमान बढ़ जाता है और इससे जलचक्र में तीव्रता उत्पन्न होती है. इसका तात्पर्य यह है कि एक ओर जहाँ सूखे अधिक होंगे, वहीं सूखी मिट्टी और बढ़ी हुई आर्द्रता के कारण बाढ़ भी अधिक होगी.
  • जैसे-जैसे वैश्विक तापमान जलचक्र में तीव्रता लाता है, वैसे-वैसे अतिवृष्टि की संभावना बढ़ती जाती है.
  • समुद्रों की सतह का तापमान बढ़ने से आँधियों और अतिवृष्टि में बढ़ोतरी के साथ-साथ पवन की गति में वृद्धि देखी जाती है. जलवायु परिवर्तन के कारण भूमि का मरुस्थलीकरण और गुणवत्ता में क्षरण होता है. फलतः जैव विविधता को क्षति तो पहुँचती ही है, साथ ही दावानल अर्थात् जंगलों में आग लगने की संभावना भी प्रबल हो जाती है.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

वर्ष 2019 में भारत, चरम मौसम की घटनाओं से सर्वाधिक प्रभावित होने वाला सातवाँ देश था (मोजाम्बिक सबसे अधिक प्रभावित था). इन घटनाओं के कारण वर्ष 2019 में भारत में मृत्यु की अत्यधिक संख्या (2,267) और सर्वाधिक आर्थिक हानि (68,812 मिलियन डॉलर) दर्ज की गई थी. अत्यधिक वर्षा के कारण आई बाढ़ से 1,800 लोगों की मृत्यु हुई और इसके कारण 1.8 मिलियन लोगों का विस्थापन हुआ. भारत में आठ उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का आगमन हुआ था. उनमें से छह “अत्यधिक गंभीर” श्रेणी के थे. वर्ष 2000-2019 के मध्य चरम मौसम की घटनाओं के प्रत्यक्ष परिणाम के रूप में वैश्विक स्तर पर 4,75,000 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई और लगभग 2.56 ट्रेलियन डॉलर राशि का आर्थिक नुकसान हुआ. कोई भी देश अपनी भौगोलिक अवस्थिति से निरपेक्ष मौसम के चरम प्रभावों से नहीं बच सकता है.आपदाओं के हानिकारक प्रभावों के प्रति अधिक जोखिम और उनका सामना करने की अल्प क्षमता होने के कारण निर्घन देश सर्वाधिक प्रभावित होते हैं.

विभिन्‍न प्रकार के जोखिमों के प्रति अनुकूलन बढ़ाने के लिए व्यापक आपदा जोखिम न्यूनीकरण रणनीतियों (सेंडाइ फ्रेमवर्क के अनुरूप) का अंगीकरण करना चाहिए. क्षति एवं हानि से निपटने के लिए आवश्यक सहायता प्रदान करके निर्धन देशों की प्रत्यास्थ क्षमता को दृढ़ बनाना चाहिए.


Prelims Vishesh

India’s first Cheetah Sanctuary :-

  • हाल ही में मध्य प्रदेश के कूनो-पालपुर वन्यजीव अभयारण्य को भारत का पहला चीता अभयारण्य (Cheetah Sanctuary) नामित किया गया है.
  • भारत में एशियाटिक चीता (Asiatic cheetah) विलुप्त हो चुके थे. अब भारत सरकार फिर से चीता को भारत में लाने हेतु प्रतिबद्ध है. इसके लिए मध्य प्रदेश के कूनो-पालपुर वन्यजीव अभयारण्य (Kuno-Palpur Wildlife Sanctuary) को चुना गया है.

India’s First Boat Library :-

  • हाल ही में भारत की पहली नौका पुस्तकालय (India’s First Boat Library) हुगलीनदी के किनारे कोलकाता में प्रारम्भ किया गया है.
  • इस नौका पुस्तकालय में हिंदी, अंग्रेजी और बंगाली में कई पुस्तकों का संग्रह है। यह एक फ्लोटिंग लाइब्रेरी(Floating Library) है. यह हुगली (Hooghly) नदी में फ्लोट कर रही है.

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