धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा और उसकी विषय-वस्तु

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आज हम धन्यवाद प्रस्ताव (Motion of Thanks) के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे.

पिछले दिनों बजट सत्र के आरम्भ राष्ट्रपति ने संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में सरकार द्वारा तैयार अभिभाषण पढ़ा जिसमें सरकार की उपब्धियों को दर्शाया गया था.

अभिभाषण के उपरान्त धन्यवाद ज्ञापन का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया और उस पर चर्चा हुई.

धन्यवाद ज्ञापन में संशोधन

धन्यवाद ज्ञापन में संशोधन के लिए सांसद सूचना दे सकते हैं. ये संशोधन अभिभाषण में कथित विषयों के बारे में हो सकते हैं. इसके अतिरिक्त कोई सांसद उस समय भी संशोधन प्रस्तुत कर सकता है यदि उसे लगे की अभिभाषण में कोई विषय छूट गया है.

धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा और उसकी विषय-वस्तु

  • धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा सदन द्वारा स्वयं या कार्यमंत्रणा समिति की सिफारिश पर आवंटित 3 या 4 दिन होती है.
  • आबंटित समय का बंटवारा विभिन्न दलों तथा गुटों के लिए सदन में उनकी संख्या के अनुपात में किया जाता है.
  • चर्चा के लिए नियत दिनों में सदन अभिभाषण में निर्दिष्ट विषयों पर सुविधानुसार चर्चा कर सकती है.
  • अभिभाषण पर चर्चा बहुत व्यापक होती है और सदस्य राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय सभी प्रकार की समस्याओं पर बोल सकते हैं.
  • जिन मामलों का उल्लेख अभिभाषण में विशिष्ट रूप से नहीं होता है, उन पर भी धन्यवाद प्रस्ताव में संशोधनों के माध्यम से चर्चा की जाती है.
  • धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा प्रधानमंत्री या किसी अन्य मंत्री द्वारा उत्तर दिए जाने पर समाप्त हो जाती है. इसके बाद उसके संशोधनों को निपटाया जाता है और धन्यवाद प्रस्ताव मतदान के लिए रखा जाता है तथा स्वीकृत किया जाता है.
  • धन्यवाद प्रस्ताव स्वीकृत किये जाने के बाद उसकी सूचना अध्यक्ष द्वारा एक पत्र के जरिये सीधे राष्ट्रपति को दी जाती है.

धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा की सीमा

  • इसके सम्बन्ध में एकमात्र प्रतिबन्ध यह है कि एक तो सदस्य उन मामलों का उल्लेख नहीं कर सकते जिनके लिए केंद्र सरकार प्रत्यक्षत: उत्तरदायी नहीं है
  • दूसरा यह कि वे वाद-विवाद के दौरान राष्ट्रपति का नाम नहीं ले सकते क्योंकि अभिभाषण की विषय-वस्तु के लिए सरकार उत्तरदायी होती है, न कि राष्ट्रपति.

राष्‍ट्रपति का अभिभाषण

भारत के संविधान में राष्ट्रपति द्वारा संसद के किसी एक सदन में या एक साथ समवेत दोनों सदनों में अभिभाषण करने का प्रावधान है. राष्ट्रपति द्वारा संसद में अभिभाषण का यह प्रावधान भारत शासन अधिनियम, 1919 के अंतर्गत वर्ष 1921 में पहली बार स्थापित किये गए केन्द्रीय विधानमंडल के समय से चला आ रहा है.

 संवैधानिक प्रावधान

राष्ट्रपति निम्नलिखित दो स्थितियों में संसद के सदनों में अलग-अलग या एक साथ समवेत दोनों सदनों के समक्ष अभिभाषण कर सकते हैं –

  • अनुच्छेद 86(1)के अनुसार राष्ट्रपति संसद के किसी एक सदन में या एक साथ समवेत दोनों सदनों में अभिभाषण कर सकते हैं.
  • अनुच्छेद 87(1)के अनुसार राष्ट्रपति, लोक सभा के लिए प्रत्येक साधारण निर्वाचन के बाद प्रथम सत्र के आरम्भ में तथा प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरम्भ में एक साथ समवेत दोनों सदनों में अभिभाषण करेंगे और संसद को सत्र के आह्वान के कारण बताएंगे.

अभिभाषण की विषय-वस्तु

अभिभाषण में सरकार की नीति का विवरण होता है. इसलिए अभिभाषण का प्रारूप भी सरकार द्वारा ही तैयार किया जाता है. इसमें पिछले वर्ष के सरकार के कार्यकलापों और उपलब्धियों की समीक्षा होती है और महत्वपूर्ण आन्तरिक और उपस्थित अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं के सम्बन्ध में सरकार द्वारा अपनायी जाने वाली नीतियों का निरूपण होता है. इसमें उन विधायी कार्यों की मुख्य मदों का भी उल्लेख होता है जिन्हें उस वर्ष के दौरान होने वाले सत्रों में संसद में लाने का विचार होता है.

अभिभाषण की प्रति का संसद के सदनों के समक्ष रखा जाना

राष्ट्रपति द्वारा दिए गए अभिभाषण को सदन की कार्यवाही का अंग बनाने तथा उसमे शामिल करने के लिए दोनों सदन अभिभाषण की समाप्ति के बाद अपनी-अपनी बैठकें करती हैं और राष्ट्रपति के द्वारा दिए गए अभिभाषण की सत्यापित प्रतियों को सभा के पटल पर रखा जाता है. उसके बाद धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया जाता है और राष्ट्रपति के अभिभाषण में निर्दिष्ट विषयों पर चर्चा की जाती है.

क्‍या सदस्‍य राष्‍ट्रपति‍ के अभि‍भाषण पर प्रश्‍न उठा सकते हैं ?

कोई भी सदस्‍य राष्‍ट्रपति‍ के अभि‍भाषण पर प्रश्‍न नहीं उठा सकता है. कि‍सी सदस्‍य का कोई भी कार्य, जि‍ससे अवसर की शालीनता भंग होती है अथवा जि‍ससे कोई बाधा उत्‍पन्‍न हो, उस सभा द्वारा दंडनीय होता है जि‍सका वह सदस्‍य है. कि‍सी सदस्‍य द्वारा प्रस्‍तुत तथा अन्‍य सदस्‍य द्वारा अनुमोदि‍त धन्‍यवाद-प्रस्‍ताव पर राष्‍ट्रपति‍ के अभि‍भाषण में नि‍र्दिष्‍ट वि‍षयों पर चर्चा की जाती है. राष्‍ट्रपति‍ के अभि‍भाषण पर चर्चा की वि‍स्‍तृति‍ बहुत व्‍यापक होती है और संपूर्ण प्रशासन के कार्यकरण पर चर्चा की जा सकती है. इस संबंध में अन्‍य बातों के साथ-साथ सीमाएँ यह है कि‍ सदस्‍यों को एक तो उन मामलों का उल्‍लेख नहीं करना चाहि‍ए जिनके लि‍ए भारत सरकार प्रत्‍यक्षत: उत्तरदायी नहीं है और दूसरा यह कि‍ वह वाद-वि‍वाद के दौरान राष्‍ट्रपति‍ का नाम नहीं ले सकते क्‍योंकि‍ अभि‍भाषण की वि‍षय-वस्‍तु के लि‍ए सरकार उत्तरदायी होती है, न कि‍ राष्‍ट्रपति‍.

Tags : What is Motion of thanks, what it contains? Its significance and what happens if it is not passed. Explained in Hindi.

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