Sansar डेली करंट अफेयर्स, 25 June 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 25 June 2020


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Modern Indian history from about the middle of the eighteenth century until the present- significant events, personalities, issues.

Topic : Pune NGO aims to revive spirit of ‘Lal-Bal-Pal’

संदर्भ

पुणे स्थित “सरहद” नामक एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) द्वारा  लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की 100वीं पुण्य तिथि के अवसर पर साहित्यिक तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की एक श्रंखला शुरू की जायेगी.

इस कार्यक्रम का उद्देश्य लाला लाजपत राय, ‘लोकमान्य’ बाल गंगाधर तिलक और बिपिन चंद्र पाल, जिन्हें लाल-बाल-पाल के नाम से भी जाना जाता है, की स्मृतियों को पुनर्जीवित करना है. इस संगठन का मानना है कि उनकी इस पहल से पश्चिमी बंगाल तथा महाराष्ट्र के मध्य संबंधो को मजबूती मिलेगी.

कार्यक्रमों के आयोजन का कारण

  • भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान, पंजाबबंगाल और महाराष्ट्र ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
  • स्वतंत्रता के पश्चात्, महाराष्ट्र और पंजाब के मध्य सामाजिक-सांस्कृतिक बंधनों में दृढ़ता आयी है, पर अतीत की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आत्मीयता की समृद्ध विरासत के बाद भी महाराष्ट्र तथा बंगाल के संबंध कुछ कमजोर पड़ गये हैं.

इस कार्यक्रम के विषय में कुछ मुख्य तथ्य

  1. इस कार्यक्रम की अवधि दो साल की होगी तथा इसे महाराष्ट्र-बंगाल मैत्री अध्याय नाम दिया गया है.
  2. कार्यक्रम को दोनों राज्यों में जनता के ‘सांस्कृतिक पुनरुत्थानवादी आंदोलन’ के रूप में परिकल्पित किया है.
  3. इसका आरम्भ लोकमान्य तिलक की मृत्यु शताब्दी (अगस्त, 1920) से होगा तथा महान दार्शनिकश्री अरबिंदो घोष की 150 वीं जयंती (15 अगस्त, 2022) तक चलेगा.

लाल-बाल-पाल का योगदान

1885 से 1905 तक भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन की बागडोर कांग्रेस के उदारवादी दल के हाथ में थी. 1905 ई. से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का दूसरा चरण प्रारम्भ होता है, जिसे उग्रवादी युग की संज्ञा दी गई है. जब ब्रिटिश साम्राज्यवाद का वरदान मानने वाले तथा उनकी न्यायप्रियता में अटूट विश्वास रखनेवाले उदारवादी नेताओं का विश्वास टूटकर बिखर गया तब कांग्रेस में एक नए तरुण वे का उदय हुआ जो प्रार्थना के बदले संघर्ष का मार्ग अपनाने को आतुर था. उग्रवादी दल के नेताओं में प्रमुख थे – बाल गंगाधर तिलक, लाल लाजपत राय, विपिनचन्द्र पाल (बाल-लाल-पाल) एवं अरविन्द घोष. गरम दल के इन नेताओं का मानना था कि सरकार पर दबाव डालकर ही अधिकारों को पाया जा सकता है. कांग्रेस के अन्दर अब युवा वर्ग की संख्या बढ़ने लगी थी जो जल्द से जल्द स्वराज्य और स्वतंत्रता चाहता था. कांग्रेस के दो दल हो गए – एक शांतिमय ढंग से सरकार का सक्रीय विरोध करना चाहता था और दूसरा क्रांति का मार्ग अपनाना चाहता था.

उग्रवादी सरकार के सुधारों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे. वे जितना सरकार का विरोध करते थे उतना ही उदारवादियों के विचार का भी विरोध करते थे. गरम दल के अग्रदूत ब्रिटिश शासन को वरदान के बदले अभिशाप मानते थे. उनके कार्यक्रम में बहिष्कार तथा स्वदेशी और राष्ट्रीय शिक्षा को विशेष महत्त्व दिया गया था. उनका कहना था कि स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और उसे प्राप्त करना कांग्रेस का लक्ष्य. हम स्वतंत्रता और न्याय चाहते हैं, दया की भीख नहीं. उग्रवादी स्वराज्य का वास्तविक/सार्थक स्वतंत्रता मानते थे. उग्रवादी प्रजातंत्र संविधान और प्रगति के साथ-साथ राष्ट्रीय आन्दोलन का सामाजिक आधार विस्तृत बनाना चाहते थे. उन्हीं के प्रयत्नों के परिणाम-स्वरूप निम्न मध्यम वर्ग राष्ट्रीय आन्दोलन में प्रवेश कर पाए. गरम दल (garam dal) के नेताओं ने जनसाधारण को राष्ट्रीयता और राजनीति का पाठ पढ़ाने के लिए विभिन्न समाचार पत्रों एवं पत्रिकाओं का प्रकाशन आरम्भ किया. इस प्रकार उग्रवाद भारतीय राष्ट्रीय आन्दोलन की महत्त्वपूर्ण इकाई बन गया.


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Pradhan Mantri Mudra Yojana

संदर्भ

हाल ही में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल (Union Cabinet) ने ‘प्रधानमंत्री मुद्रा योजना’ (Pradhan Mantri Mudra Yojana- PMMY) के तहत सभी शिशु ऋण (Shishu Loan) खातों पर 12 माह की अवधि के लिये 2% की ‘ब्याज सब्सिडी योजना’ (Scheme of Interest Subvention) को स्वीकृति प्रदान की है.

मुख्य बिंदु

  • ऋण सब्सिडी योजना का उद्देश्य COVID- 19 महामारी के कारण छोटे व्यापारियों को हुए नुकसान से राहत प्रदान करना है.
  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत प्रदान किये जाने वाले शिशु (Shishu) ऋण का उद्देश्य सूक्ष्म तथा लघु उद्यमों की आर्थिक मदद करना है.

ब्याज सब्सिडी योजना के मानदंड

  • योजना उन ऋणों पर लागू की जाएगी जो निम्नलिखित मानदंडों को पूरा करते हैं:
    1. प्रथम, जिन ऋणों का भुगतान 31 मार्च, 2020 तक बकाया था.
    2. द्वितीय, 31 मार्च, 2020 को तथा योजना की परिचालन अवधि के दौरान ऋण को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया हो.
    3. इसमें वे ऋण भी शामिल किये जाएंगे जिन्हे पूर्व में ‘गैर-निष्पादन परिसंपत्ति’ (Non Performing Assets- NPA) के रूप में वर्गीकृत किया गया था परंतु बाद में उन्हे निष्‍पादित परिसंपत्ति के रूप शामिल किया गया हो.
  • योजना की अनुमानित लागत लगभग 1,542 करोड़ रुपए होगी जिसे भारत सरकार द्वारा वहन किया जाएगा.

मुद्रा योजना क्या है?

  • मुद्रा योजना का पूरा नाम प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) है. इसका आरम्भ अप्रैल, 2015 में हुआ था. इस योजना का उद्देश्य छोटे-छोटे ऋणार्थियों को जमानत-मुक्त ऋण देना है.
  • इस योजना के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई पूँजी 20,000 करोड़ रु. है. इसके तहत छोटे-छोटे व्यवसायियों को 50,000 रु. से लेकर 10 लाख रु. तक का कर्ज दिया जाता है.
  • गैर-कृषि गतिविधियों के लिए 10 लाख रु. तक का मुद्रा ऋण दिया जाता है. ये गतिविधियाँ हैं – दुग्ध उत्पादन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन आदि.
  • मुद्रा योजना की एक अनूठी विशेषता यह है कि इसमें एक मुद्रा कार्ड भी दिया जाता है जिसके माध्यम से ATM और कार्ड मशीन से वांछित कार्यपूँजी निकाली जा सकती है.
  • मुद्रा योजना के ऋणों को इन तीन भागों में बाँटा गया है –
  1. शिशु (50,000 रु. तक)
  2. किशोर (50,001 रु. से 5 लाख रु. तक)
  3. तरुण (500,001 रु. से 10,00,000 रु. तक)

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Issues related to education.

Topic : Global Education Monitoring (GEM) Report

संदर्भ

2020 का UNESCO वैश्विक शिक्षा अनुश्रवन (Global Education Monitoring – GEM) प्रतिवेदन निर्गत हो गया है.

GEM रिपोर्ट के कुछ मुख्य तथ्य

  • यूनेस्को की वैश्विक शिक्षा निगरानी (GEM) रिपोर्ट 2020 के अनुसार विश्व में अल्प और मध्यम आय वाले कम से कम चालीस प्रतिशत देश COVID-19 से उपजे संकट के कारण लागू लॉकडाउन में स्कूल बंद रहने के दौरान छात्रों को पढ़ने का उचित माध्यम उपलब्ध कराने में नाकाम रहे. कई गरीब देशों ने रेडियो और टेलीविजन के माध्यम से पढाई का विकल्प चुना, तथा निम्न आय वाले 55% देशों ने, निम्न-मध्यम-आय वाले 73% देशों तथा उच्च-मध्यम-आय वाले 93% देशों ने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के लिए ऑनलाइन शिक्षण प्लेटफार्मों को चुना.
  • इस वार्षिक रिपोर्ट के चौथे संस्करण में यह भी कहा गया कि विश्व भर में दस प्रतिशत से भी कम देशों में ऐसे कानून हैं जो शिक्षा में पूर्ण समावेश सुनिश्चित करते हैं. सरकारों की प्रौद्योगिकी पर बढ़ती निर्भरता के कारण डिजिटल विभाजन ने शिक्षा-प्रणाली के इन माध्यमों की सीमाओं को उजागर कर दिया है.
  • रिपोर्ट में कहा गया कि शिक्षा व्यवस्था अमूमन छात्रों की विशेष जरूरतों को पूरा करने में असफल रहती है.
  • रिपोर्ट में कहा गया, ‘विश्व के केवल 41 देशों में आधिकारिक रूप से सांकेतिक भाषा को मान्यता दी गई है और दुनियाभर के स्कूल इंटरनेट की सुविधा के अधिक आग्रही हैं बजाय इसके कि वे विकलांग छात्रों को सीखने का माध्यम उपलब्ध करा सकें. साढ़े तैंतीस करोड़ लड़कियां ऐसे स्कूलों में गईं जहां उन्हें पानी, साफ सफाई उपलब्ध नहीं था. सभी छात्रों और शिक्षकों को उपलब्ध प्लेटफार्मों का लाभ उठाने के लिए पर्याप्त इंटरनेट कनेक्शन, उपकरण, कौशल तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं प्राप्त नहीं है.
  • कम और मध्यम आय वाले लगभग आधे देशों ने विकलांग बच्चों की शिक्षा के बारे में पर्याप्त आंकड़े एकत्रित नहीं किए. यूनेस्को के आंकड़ों के अनुसार COVID-19 फैलने की वजह से बंद किए गए शैक्षणिक संस्थानों के कारण 154 करोड़ छात्र गंभीर रूप से प्रभावित हुए.

UNESCO क्या है?

इस विशेष संस्था का गठन 16 नवंबर 1945 को किया गया था, जिसका मुख्यालय फ्रांस में है. इसका उद्देश्य शिक्षा एवं संस्कृति के अंतरराष्ट्रीय सहयोग से शांति एवं सुरक्षा की स्थापना करना है, ताकि संयुक्त राष्ट्र के विशेषाधिकार में वर्णित न्याय, कानून का राज, मानवाधिकार एवं मौलिक स्वतंत्रता के लिए वैश्विक सहमति बन पाए.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

COVID-19 ने हमें अपनी शिक्षा व्यवस्था के बारे में फिर से सोचने का अवसर दिया है. ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों में अधिकतर ग्रामीण बच्चों के पास एंड्रॉयड फोन नहीं हैं. अगर उनके परिवार में माता-पिता के पास एक फोन है भी तो वह उसका उपयोग बच्चों को करने नहीं देते, और एक घंटे के लिए फोन उन्हें मिल भी जाए तो डाटा की स्पीड इतनी कम है कि पढ़ाई-लिखाई या शिक्षण ठीक से हो नहीं पाता. एकाध हफ्ते में डाटा समाप्त हो जाता है और रिचार्ज कराने में पैसे लगते हैं, जिसकी कमी हमेशा बनी रहती है.

इसके विपरीत शहरी क्षेत्रों के बच्चों के पास एंड्रॉयड फोन की उपलब्धता ज्यादा है. यहां बच्चों के पास लैपटॉप या टैबलेट भी हो सकता है और वे ऑनलाइन माध्यम से थोड़ा ज्यादा हासिल कर सकते हैं. लेकिन शहरी गरीब बच्चों की हालत अपने ग्रामीण दोस्तों से कोई बहुत अलग नहीं. बड़े पैमाने पर ग्रामीण और छोटे कस्बों के बच्चे, आदिवासी और समुद्री तथा पहाड़ी इलाकों के बच्चे शिक्षा में हो रही इस डिजिटल क्रांति के करीब ही नहीं पहुंच पाते. इसलिए फासला और बढ़ता जाएगा. इस तरह ऊपर से देखने पर लग सकता है कि हमारे देश में सूचना क्रांति बदस्तूर जारी है, पर वर्तमान त्रासदी ने डिजिटल डिवाइड का एक नया चेहरा सामने ला दिया है.

मगर COVID-19 के बाद क्या? देश की आजादी के बाद शिक्षा में सुधारों के लिए बनी समितियों ने इस क्षेत्र में अधिक से अधिक खर्च करने की सिफारिश की थी. खेर समिति ने 1949 में केंद्र को अपनी आय का 10% खर्च शिक्षा पर करने को कहा, कोठारी आयोग ने 1966 में शिक्षा पर जीडीपी का 6% खर्च करने को कहा, 1968 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी सरकार को अपनी राष्ट्रीय आय का 6% शिक्षा पर खर्च करने के लिए बोला गया था. वहीं 1996 में सैकिया समिति ने कहा कि सरकार को जीडीपी का 6% शिक्षा पर खर्च करना चाहिए, जिसमें से 50% प्राथमिक शिक्षा पर खर्च किए जाए. अब शिक्षा में सुधार के कदम उठने होंगे.


GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Effects of liberalization on the economy, changes in industrial policy and their effects on industrial growth.

Topic : Country of Origin in GeM platform

संदर्भ

हाल ही में, सरकार द्वारा, ‘मेक इन इंडिया’ तथा ‘आत्म निर्भर भारत’ को बढ़ावा देने के लिए विक्रेताओं द्वारा GeM में कुछ परिवर्तन किये गए हैं.

क्या-क्या परिवर्तन किये गये?

  1. विक्रेताओं के लिए GeM पर सभी नए उत्पादों को पंजीकृत करने के समय वे उत्पत्ति के देश के विषय में जानकारी देना अनिवार्य है.
  2. जिन विक्रेताओं ने GeM पर इस नई सुविधा के लागू होने से पूर्व अपने उत्पादों को पहले ही अपलोड कर लिया है, उन्हें, नियमित रूप से उत्पत्ति के देश का अद्यतन करना होगा.
  3. GeM ने उत्पादों में स्थानीय सामग्री की प्रतिशतता का संकेत देने के लिए भी एक प्रावधान किया गया है.
  4. GeM पोर्टल पर ‘मेक इंन इंडिया‘ फिल्टर सक्षम बना दिया गया है. खरीदार केवल उन्हीं उत्पादों का क्रय कर सकता है जो कम से कम 50 प्रतिशत के स्थानीय कंटेंट के मानदंड को पूरी करते हैं.

GEM क्या है?

  1. सरकारी ई-बाजार (GeM) एक ऑनलाइन बाजार है जिसके माध्यम से सरकार के विभिन्न मंत्रालय एवं एजेंसियाँ वस्तुओं और सेवाओं का क्रय करती हैं.
  2. यह बाजार केन्द्र सरकार के विभागों, राज्य सरकार के विभागों, लोक उपक्रम प्रतिष्ठानों और सम्बद्ध निकायों के लिए है.
  3. यह एक सर्वसमावेशी अभियान है जिसमें सभी प्रकार के विक्रेताओं और सेवा-प्रदाताओं को सशक्त किया जाएगा, जैसे – MSMEs, स्टार्ट-अप, स्वदेशी निर्माता, महिला उद्यमी, स्वयं सहायता समूह (SHGs).
  4. इस बाजार का उद्देश्य सरकारी खरीद में भ्रष्टाचार दूर करना तथा उसमें पारदर्शिता, सक्षमता और गति लाना है.
  5. सरकारी ई-बाजार एक 100% सरकारी कम्पनी है जिसकी स्थापना केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन हुई है.

GEM से फायदे

  • विक्रेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा के चलते उत्पाद की कीमतों में कमी (15-20% ↓)
  • अवैध रूप से सरकारी खरीददारी पर रोक लगेगी.
  • इस अभियान का एक उद्देश्य नकद रहित, सम्पर्क रहित और कागज़ रहित लेन-देन को बढ़ावा देना है जिससे कि डिजिटल इंडिया के लक्ष्य को पाया जा सके.

GEM पोर्टल में आने वाली दिक्कतें

  • GeM के माध्यम से खरीददारी कर रहे लोगों की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि GeM किसी भी तरह की खरीद-बिक्री की जिम्मेदारी अपने ऊपर नहीं लेता.
  • इस पोर्टल पर उपलब्ध सामान की कीमत और उपलब्धता पर इसे चलाने वाले विभाग DGS&D का कोई नियंत्रण नहीं होता.
  • उत्पादों की रेट एक समान नहीं है और हमेशा उतार-चढ़ाव होता रहता है जिससे एक ही विभाग एक ही सामान के अलग-अलग समय पर अलग-अलग दाम चुकाता है.
  • GeM के जरिये खरीददारी करते समय कई अलग-अलग ID देनी पड़ती है. इसे लेकर अधिकृत अधिकारी एतराज जताते हैं.

प्रीलिम्स बूस्टर

 

Womaniya

महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को उनके विभिन्न उत्पादों को बेचने के लिए एक मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य सरकारी ई-मार्किट बाजार (Government e-Marketplace – GeM) ने वूमेनिया ऑन GeM (Womaniya on GeM) नामक एक योजना आरम्भ की है.


Prelims Vishesh

Skills Build Reignite :-

  • कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने IBM के साथ भागीदारी में एक निःशुल्क डिजिटल ज्ञानार्जन मंच बनाया है जिसका नाम “Skills Build Reignite रखा गया है.
  • आजीविका की खोज में लगे व्यक्तियों, व्यवसायियों, उद्यमियों और ज्ञानार्जन की आकांक्षा रखने वाले व्यक्तियों को इस मंच में उपलब्ध विषय-वस्तुओं का लाभ मिलेगा, जैसे – कृत्रिम बुद्धि (AI), क्लाउड, डाटा एनलिटिक्स, कौशल पुनर्निर्माण, कौशल उत्क्रमण आदि.
  • COVID-19 के कारण जिन छोटे व्यवसायिओं को धक्का पहुँचा है वे इस मंच के माध्यम से अपने-आप को स्थापित करने और व्यवसाय फिर से शुरू करने के विषय में प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते हैं.

Ashadhi Bij, the Kutchi New Year :-

  • गुजरात के कच्छ में आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को आषाढ़ी बीज नामक उत्सव मनाया जाता है.
  • यह समय वर्षा के आरम्भ से जुड़ा हुआ है और इसी दिन कच्छी नववर्ष मनाया जाता है.

Kushinagar airport declared as international airport :-

  • उत्तर प्रदेश में स्थित कुशीनगर बड़ा बौद्ध तीर्थस्थल है जहाँ गौतम बुद्ध ने महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था.
  • कुशीनगर के आस-पास अनेक बौद्ध स्थल हैं, जैसे – श्रावस्ती, कपिलवस्तु और लुम्बिनी.
  • इस बात को ध्यान में रखते हुए सरकार ने कुशीनगर हवाई अड्डे को अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा घोषित कर दिया है.

Shwe oil & gas project in Myanmar :-

  • म्यांमार की श्वे तेल एवं गैस परियोजना के अतिरिक्त विकास के लिए ONGC विदेश लिमिटेड (OVL) ने 121.27 मिलियन डॉलर के निवेश का निर्णय लिया है जिस पर CCEA की स्वीकृति मिल चुकी है.
  • ज्ञातव्य है कि भारत की एक्ट ईस्ट नीति के अनुपालन में भारतीय लोक क्षेत्र उपक्रम आस-पास के देशों में तेल एवं गैस की खोज और विकास परियोजनाओं में भागीदारी कर रहे हैं.

What is the Order of the Nine Angles? :-

  • एक अमेरिकी सैनिक ने स्वीकार किया है कि वह अपनी ही इकाई पर आक्रमण कराने की योजना के लिए आर्डर ऑफ़ द नाइन एंगल्स (O9A) नामक नव-नाजी समूह (neo-Nazi group) के साथ गुप्त सूचनाएँ साझा कर रहा था.
  • ज्ञातव्य है कि O9A एक शैतानी और अराजकतावादी संगठन है जिसकी स्थापना UK में 1970 में हुई थी और जो अमेरिका सहित पूरे विश्व में काम करता है.

Nation’s top wheat contributor :-

  • पंजाब को पीछे छोड़ते हुए इस वर्ष मध्य प्रदेश देश को सबसे अधिक गेहूँ देने वाला राज्य बन गया.
  • परन्तु यदि देखा जाए तो प्रति हेक्टेयर उत्पादकता की दृष्टि से पंजाब अब भी बहुत आगे (52%) है.
  • विदित हो कि पूरे देश में गेहूँ की खेती जितने क्षेत्रफल में होती है उसमें 31% अंश मध्य प्रदेश का और 10.6% अंश पंजाब का है.


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