Sansar डेली करंट अफेयर्स, 18 February 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 18 February 2020


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Statutory, regulatory and various quasi-judicial bodies. Mechanisms, laws, institutions and bodies constituted for the protection and betterment of these vulnerable sections.

Topic : Tribes of Tripura

संदर्भ

पिछले दिनों विशेषज्ञों के एक द्विदिवसीय सम्मेलन के पश्चात केन्द्रीय संस्कृति मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने बताया कि कोणार्क के 800 वर्ष पुराने सूर्य मंदिर का जीर्णोद्धार और संरक्षण किया जाएगा.

पृष्ठभूमि

कोणार्क मंदिर को सुदृढ़ता प्रदान करने के लिए 1903 में ब्रिटिशों ने इस मंदिर को बालू से भर दिया था और बंद कर दिया था. कालांतर में 2013 से लेकर 2018 तक रुढ़की में स्थित केन्द्रीय भवन निर्माण शोध संस्थान ने इसका एक वैज्ञानिक अध्ययन करके पता लगाना चाहा था कि इस मंदिर की बनावट कैसी है और वहाँ डाले गए बालू की स्थिति क्या है.

कोणार्क सूर्य मंदिर से सम्बंधित जानकारियाँ

  • यह मंदिर 13वीं शताब्दी में गंग वंश के महान राजा नरसिंहदेव प्रथम ने बनाया था.
  • इसकी आकृति विशाल सूर्य देवता के विशाल रथ के समान है जिसमें अतिशय कलात्मकता के साथ बने पहियों के 12 जोड़े हैं. इस रथ को सात घोड़ों द्वारा खींचते हुए दिखाया गया है.
  • कोणार्क सूर्य मंदिर कलिंग स्थापत्य का एक सटीक उदाहरण है.
  • यह समुद्र तट के पास है. यहाँ समुद्र तट की प्राकृतिक सुन्दरता देखते ही बनती है.
  • ओडिशा राज्य तीन महान मंदिरों के लिए जाना जाता है. इन मंदिरों को स्वर्णिम त्रिभुज कहा जाता है. इस त्रिभुज के अन्दर आने वाले दो अन्य मंदिर हैं – पुरी का जगन्नाथ मंदिर और भुबनेश्वर का लिंगराज मंदिर.
  • कोणार्क मंदिर का रंग काला है. अतः इसे Black Pagoda भी कहते हैं. विदित हो कि जगन्नाथ मंदिर का एक अन्य नाम White Pagoda भी है.
  • शतियों से ओडिशा आने वाले नाविकों के लिए कोणार्क मंदिर एक लैंडमार्क रहा है.
  • कोणार्क हिन्दुओं के लिए एक बड़ा तीर्थ भी है जहाँ प्रतिवर्ष लोग फ़रवरी में आकर चन्द्रभागा मेले में आते हैं.
  • यह मंदिर 1984 में अपने महान स्थापत्य, सूक्ष्म कलाकृतियों एवं प्रचुर मूर्ति शिल्पों के लिए UNESCO के द्वारा विश्व धरोहर स्थल की सूची में सम्मिलित किया गया था.
  • प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्त्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 (Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains (AMASR) Act) और इसकी नियमावली (1959) के द्वारा यह मंदिर भारतीय राष्ट्रीय संरचना (National Framework of India) के रूप में संरक्षित है.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Statutory, regulatory and various quasi-judicial bodies. Mechanisms, laws, institutions and bodies constituted for the protection and betterment of these vulnerable sections.

Topic : Jal Jeevan Mission

संदर्भ

जल जीवन अभियान (JJM) एक मूर्धन्य केन्द्रीय योजना है जिसमें केंद्र और राज्य सरकार का योगदान 50:50 के अनुपात में होता है. पिछले दिनों राजस्थान सरकार ने माँग की कि इस अनुपात में परिवर्तन किया जाए जिससे राज्यों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को हल्का किया जा सके.

जल जीवन अभियान क्या है?

  • यह अभियान 2024 तक सभी ग्रामीण और शहरी घरों (हर घर जल) में नलके से पानी पहुँचाने के लिए तैयार किया गया है.
  • जल जीवन अभियान की घोषणा अगस्त, 2019 में हुई थी.
  • इसके अतिरिक्त इस अभियान का उद्देश्य है वर्षा जल संग्रह, भूजल वापसी और घर से निकलने वाले अपशिष्ट जल को खेती में प्रयोग करने से सम्बंधित स्थानीय अवसंरचनाओं का निर्माण करना.
  • जल जीवन अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण के अनेक कार्य किये जाएँगे, जैसे – पॉइंट रिचार्ज, छोटे सिंचाई जलाशयों से गाद निकालना, अपशिष्ट जल को खेती में डालना और जल स्रोतों को टिकाऊ बनाना.
  • सतत जल आपूर्ति के लक्ष्य को पाने के लिए जल जीवन अभियान में अन्य केन्द्रीय और राज्य योजनाएँ समाहित की जाएँगी.

अभियान के लाभ

  1. घर-घर में नलके द्वारा पानी की आपूर्ति
  2. स्वच्छ एवं पीने योग्य जल
  3. भूजल का स्तर ऊपर लाना
  4. स्थानीय अवसंरचना को बेहतर बनाना
  5. जल से होने वाले रोगों में कमी
  6. जल की बर्बादी में कमी

इस अभियान का माहात्म्य

भारत में विश्व की 16% जनसंख्या रहती है, परन्तु मृदु जल के स्रोत यहाँ 4% ही है. भूजल का स्तर घटता जा रहा है. पानी का अत्यधिक दोहन हो रहा है, पानी की गुणवत्ता खराब हो रही है, जलवायु परिवर्तन देखा जा रहा है.

इन सब कारणों से पेय जल की उपलब्धता एक समस्या बनी हुई है. आज आवश्यकता है कि देश में तुरंत जल संरक्षण किया जाए, विशेषकर इसलिए कि भूजल का स्तर गिरता जा रहा है. अतः जल जीवन अभियान में मुख्य ध्यान स्थाई स्तर पर पानी की माँग और आपूर्ति का समेकित प्रबंधन करने पर दिया जाएगा.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Salient features of the Representation of People’s Act.

Topic : Criminalization of Politics

संदर्भ

संसद और विधान सभाओं में अधिक से अधिक अपराधी पृष्ठभूमि के लोगों को चुनकर आते हुए देखकर सर्वोच्च न्यायालय ने राजनीतिक दलों से पूछा है कि वे बताएँ कि वे ऐसे लोगों को टिकट क्यूँ देते हैं.

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश

इसके लिए न्यायालय ने निम्नलिखित निर्देश दिए हैं –

  1. राजनीतिक दलों के लिए यह अनिवार्य होगा कि वे अपने प्रत्याशियों के विरुद्ध लंबित आपराधिक वादों की सूचना न केवल स्थानीय समाचार पत्रों में ही वरन अपने वेबसाइट तथा सोशल मीडिया हैंडलों में भी प्रकाशित करें.
  2. राजनीतिक दलों को यह भी बताना होगा कि आपराधिक वादों वाले प्रत्याशियों को क्यों चुना जा रहा है, ऐसे प्रत्याशी क्यों नहीं चुने जा रहे जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है.
  3. कारण बताते समय राजनीतिक दल ये नहीं बोलें कि जीतने की क्षमता के चलते किसी प्रत्याशी को टिकट दिया गया है, अपितु प्रत्याशी की योग्यताओं, उपलब्धियों और गुणों का हवाला दें.

पृष्ठभूमि

सर्वोच्च न्यायालय के ये निर्देश भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त के विरुद्ध दायर एक अवमाननावाद में निर्गत किये गये.

इस वाद में दावा किया गया था कि भारतीय निर्वाचन आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के 2018 के उस निर्णय का अनुपालन नहीं किया जिसमें राजनीतिक दलों को अनिवार्य रूप से अपने प्रत्याशियों के विरुद्ध चल रहे आपराधिक वादों की घोषणा और प्रकाशन करना था.

वाद दायर करने वालों का कहना था कि राजनीतिक दल 2018 के निर्णय का सटीक अनुपालन नहीं कर रहे हैं और अपने प्रत्याशियों की आपराधिक पृष्ठभूमि के विषय में सूचना ऐसे समाचार पत्रों में प्रकाशित कर रहे हैं जिनको कोई जानता भी नहीं या जिनको बहुत कम लोग पढ़ते हैं. साथ ही यह सूचना वे अपने वेबसाइट पर ऐसे वेबपेजों पर दे रहे हैं जहाँ पहुंचना कठिन होता है.

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में क्या प्रावधान है?

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम कहता है कि कोई व्यक्ति चुनाव तभी नहीं लड़ सकता है जब उसको किसी आपराधिक वाद में सजा मिल चुकी है.

इस अधिनियम के अनुभाग आठ के अनुसार, जो व्यक्ति दो वर्ष या अधिक की अवधि के कारावास की सजा पाता है वह चुनाव नहीं लड़ सकता है. किन्तु जिस पर अभी मुकदमा चल ही रहा है वह चुनाव में रह सकता है.

अपराधीकरण के मुख्य कारण

  1. भ्रष्टाचार
  2. वोट बैंक
  3. शासन का अभाव

आपराधिक अभ्यर्थियों को रोकने के लिए उपाय

  1. राजनीतिक दलों को चाहिए कि वे कलंकित व्यक्तियों को टिकट देने से स्वयं ही मना कर दें.
  2. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम में संशोधन करके उन व्यक्तियों को चुनाव लड़ने से रोक दिया जाए जिनके विरुद्ध जघन्य प्रकृति के वाद चल रहे हैं.
  3. कलंकित विधायकों के वादों के त्वरित निपटान के लिए फ़ास्ट ट्रैक न्यायालय गठित किये जाएँ.
  4. चुनावी अभियान में लगाये गए पैसे के मामले में अधिक पारदर्शिता बरती जाए.
  5. भारतीय निर्वाचन आयोग को राजनीतिक दलों के वित्तीय लेखों को जाँचने की शक्ति मिले.
  6. निर्वाचन आयोग को चाहिए कि वह अपराधियों और राजनेताओं की दुरभिसंधि को तोड़ने के लिए पर्याप्त उपाय करे.

निहितार्थ

कहना न होगा कि राजनीति में भ्रष्टाचार और अपराधीकरण लोकतंत्र की जड़ों पर कुठाराघात कर रहा है. अतः इस विकृति दूर करने के लिए संसद को शीघ्र ही कदम उठाने होंगे. राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों को चाहिए कि वे नामांकन के पश्चात् प्रत्याशियों के विरुद्ध लंबित आपराधिक वादों का प्रचार-प्रसार स्थानीय प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से करें.

अधिक जानकारी के लिए पढ़ें > राजनीति में अपराधीकरण


GS Paper 2 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Issues related to health.

Topic : School Health Ambassador Initiative

संदर्भ

पिछले दिनों केंद्र सरकार ने एक पहल का सूत्रपात किया जिसका नाम है – विद्यालय स्वास्थ्य राजदूत पहल (School Health Ambassador Initiative).

विद्यालय स्वास्थ्य राजदूत पहल का स्वरूप और उद्देश्य

  • इस पहल का अनावरण आयुष्मान भारत के एक अंग के रूप में हुआ है.
  • यह कार्यक्रम केन्द्रीय स्वास्थ्य तथा मानव संसाधन विकास मंत्रालयों द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जाएगा.
  • बच्चों के स्वास्थ्य में समग्र विकास के लिए इस कार्यक्रम को सरकार की अन्य पहलों से जोड़ा जाएगा, जैसे – सही खाओ अभियान (Eat Right Campaign), फिट इंडिया मूवमेंट और पोषण अभियान.
  • इस कार्यक्रम में प्रत्येक सरकारी स्कूल से दो शिक्षक स्वास्थ्य एवं स्वस्ति राजदूत (health and wellness ambassadors) के रूप में चुने जाएँगे.

इस कार्यक्रम का संचालन कैसे होगा?

  • प्रत्येक विद्यालय में दो शिक्षकों को स्वास्थ्य एवं स्वस्ति राजदूत बनाया जाएगा जिनका काम रोगों से बचाव के उपायों के बारे में जानकारी फैलाना होगा.
  • इन राजदूतों को इस काम में कक्षा मॉनिटरों से सहयोग मिलेगा जो “स्वास्थ्य एवं स्वस्ति सन्देशवाहक” (Health and Wellness Messengers) कहे जाएँगे.
  • स्वास्थ्य एवं स्वस्ति राजदूत इस कार्यक्रम के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए वर्ष में 24 सप्ताह तक प्रति सप्ताह एक घंटे सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील गतिविधियों का सत्र चलाएंगे जिसमें खेल-खेल में ज्ञान दिया जाएगा.
  • कार्यक्रम की सफलता के लिए NCERT ने 40 सदस्यों का एक राष्ट्रीय संसाधन समूह (National Resource Group – NRG) गठित किया है जिनके सदस्यों के पास किशोर स्वास्थ्य से सम्बंधित उत्तम प्रशिक्षण कौशल और अनुभव है. यह NRG राज्य स्तरीय संसाधन समूह को प्रशिक्षित करेगा.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Issues related to direct and indirect farm subsidies and minimum support prices; Public Distribution System objectives, functioning, limitations, revamping; issues of buffer stocks and food security; Technology missions; economics of animal-rearing.

Topic : Pesticides Management Bill 2020

संदर्भ

जैव कीटनाशकों को देश में बढ़ावा देने के लिए तैयार कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2020 (Pesticides Management Bill) के प्रारूप को केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने अनुमोदित कर दिया है.

कीटनाशक प्रबंधन विधेयक के प्रमुख प्रावधान

  1. देश की सभी भाषाओं में डिजिटल रूप से कीटनाशकों के बारे में यह जानकारी सार्वजनिक रूप से किसानों को उपलब्ध कराई जाए कि इन कीटनाशकों के गुण-अवगुण क्या हैं और इनके व्यवहार में क्या जोखिम हो सकता है और इनके क्या विकल्प हो सकते हैं.
  2. नकली और बुरी गुणवत्ता वाले कीटनाशकों के प्रयोग से होने वाली क्षति के लिए किसानों को क्षतिपूर्ति राशि दी जायेगी.
  3. इस क्षतिपूर्ति को मुहैया करने के लिए भारत सरकार एक केन्द्रीय कोष बनाएगी.
  4. जो व्यक्ति कीटनाशकों का आयात, निर्माण अथवा निर्यात करना चाहता है तो विधेयक के अनुसार उसे अपने-आप को पंजीकृत करना होगा और सम्बंधित कीटनाशक की क्षमता, प्रदर्शन, सुरक्षात्मकता, प्रयोग की विधि और भंडारण के लिए उपलब्ध अवसंरचना के बारे में जानकारी देनी होगी. जानकारी में यह भी बताया जाएगा कि उस कीटनाशक से पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ सकता है.
  5. कीटनाशक प्रबंधन विधेयक कीटनाशकों के विज्ञापनों को भी नियमित करेगा जिससे उनके बारे में निर्मातागण कोई गलत दावा नहीं कर सकें.

पेस्टीसाइड्स मैनेजमेंट बिल की आवश्यकता क्यों?

वर्तमान में कीटनाशकों की बिक्री और प्रयोग कीटनाशक अधिनियम, 1968 (Insecticides Act 1968) से शाषित होते हैं. यह अधिनियम अब पुराना पड़ चुका है क्योंकि इसके पारित होने के बाद कीट प्रबंधन विज्ञान बहुत आगे बढ़ चुका है और रासायनिक कीटनाशकों के दुष्प्रभाव के विषय में हजारों वैज्ञानिक साक्ष्य आ चुके हैं. इसलिए इस विषय में एक नए कानून की आवश्यकता आन पड़ी है.

आये दिन समाचार आते रहते हैं कि कीटनाशकों के कारण किसान विषाक्तता के शिकार हो जाते हैं और मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं. यहाँ तक कि जंगली जीव और घरेलू मवेशी भी इस गति को प्राप्त होते हैं.

भारत में कीटनाशकों का प्रयोग

विश्व में कीटनाशकों के निर्माण करने वाले देशों में भारत चौथा सबसे बड़ा निर्माता है. कहा जाता है कि भारत के आठ राज्य देश में प्रयोग होने वाले कीटनाशकों के 70% की खपत कर डालते हैं. जहाँ तक फसलों का प्रश्न है, सबसे अधिक (26-28%) कीटनाशक का प्रयोग धान की खेती में होता है. उसके पश्चात् कपास (18-20%) का स्थान आता है.

देश में 292 कीटनाशक पंजीकृत हैं और अनुमान है कि लगभग 104 कीटनाशक ऐसे हैं जिनपर विश्व के दो या अधिक देशों में प्रतिबंध लगा हुआ है, पर इनका उत्पादन भारत में हो ही रहा है. सच पूछा जाए तो भारत का कीटनाशक उद्योग 20,000 करोड़ रु. का व्यवसाय है जिसमें 57% बाजार का हिस्सा मात्र शीर्षस्थ तीन कम्पनियों के हाथ में है.


Prelims Vishesh

Madhav National Park :-

मध्य प्रदेश में स्थित और पूर्व सिंधिया महाराजा माधव राव के नाम पर नामित माधव राष्ट्रीय उद्यान शुष्क पर्णपाती एवं शुष्क कटंक वनों का एक सम्मिश्रण है जहाँ कई प्रकार के हरिन, जैसे –  नीलगाय, चिंकारा और मृग मिलते हैं तो वहीं दूसरी ओर तेंदुआ, भेड़िया, सियार, लोमड़ी, बनैले सूअर आदि भी दिख जाते हैं.

Urban bent-toed gecko :

  • पिछले दिनों असम के गुवाहाटी नगर में छिपकली की एक नई प्रजाति का पता चला है जिसका नाम Cyrtodactylus urbanus रखा गया है.
  • यह एक शहरी छिपकली है जिसके अस्तित्व पर वर्तमान में खतरा है.

Wayanad Wildlife Sanctuary (WWS) :-

  • पिछले दिनों वायनाड वन्यजीव आश्रयणी व्याघ्र अभयारण्य के रूप में अधिसूचित होने से चूक गई क्योंकि इस विषय में दिए गए प्रस्ताव को जन समर्थन नहीं मिला.
  • विदित हो कि केरल की इस आश्रयणी में राज्य के आधे बाघ रहते हैं.
  • “भारत में बाघों की स्थिति” (Status of Tigers in India) नामक पिछले वर्ष के एक प्रतिवेदन में बताया गया था कि वायनाड में 75 से 80 बाघ हैं.
  • ज्ञातव्य है कि यह आश्रयणी नीलगिरी बायोस्फीयर रिज़र्व का एक अभिन्न अंग बन गई है.
  • यह पूर्वोत्तर में कर्नाटक के नागरहोल और बांदीपुर के संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क और दक्षिण-पूर्व में तमिलनाडु के मुदुमलई से घिरा है.

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