Sansar डेली करंट अफेयर्स, 11 May 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 11 May 2020


GS Paper 1 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Modern Indian history from about the middle of the eighteenth century until the present- significant events, personalities, issues.

Topic : Gopal Krishna Gokhale

संदर्भ

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गोपाल कृष्ण गोखले को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित किया.

गोपाल कृष्ण गोखले

  • गोपाल कृष्ण गोखले (9 मई 1866 – फरवरी 19, 1915) भारत के एक स्वतंत्रता सेनानी, समाजसेवी, विचारक एवं सुधारक थे.
  • महादेव गोविंद रानाडे के शिष्य गोपाल कृष्ण गोखले को वित्तीय मामलों की गजब की समझ  थीऔर उस पर अधिकारपूर्वक वह बहस करने की क्षमता रहते थे. इसलिए उन्हें भारत का ग्लेडस्टोनकहा जाता है.
  • गोपाल कृष्ण गोखले जी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में सबसे प्रसिद्ध नरमपंथी नेता थे.
  • उनका कहना था कि “वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा भारत की महत्वपूर्ण आवश्यकता है”/
  • यहाँ तक कि महात्मा गांधी स्वयं उन्हें अपना राजनीतिक गुरु मानते थे. महात्मा गांधी ने गोपाल कृष्ण गोखले पर गुजराती भाषा में एक पुस्तक धर्मात्मा गोखले लिख डाली थी.
  • कांग्रेस के शैशव काल में उसकी नीतियों को संचालित करने का भार मुख्यतः दादा भाई नौरोजी, सुरेन्द्रनाथ बनर्जी, गोपाल कृष्ण गोखले, फिरोजशाह मेहता और ए.ओ. ह्यूम पर ही था.

भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भूमिका

  • गोखले वर्ष 1889 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य बने और एक प्रमुख समाज सुधारक महादेव गोविंद रानाडे के प्रभाव में आए.
  • वर्ष 1905 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बनारस अधिवेशन के लिये गोखले को अध्यक्ष पद के लिये चुना गया था यह वह समय था जब लाला लाजपत राय और बाल गंगाधर तिलक के नेतृत्व में ‘नरमपंथियों’ और ‘अतिवादियों’ के समूह के मध्य मतभेद पैदा हो गए और वर्ष 1907 में कांग्रेस सूरत अधिवेशन में दोनों गुट पृथक हो गए.
  • वर्ष 1899-1902 के दौरान वह बॉम्बे विधान परिषद के सदस्य थे और वर्ष 1902-1915 तक ‘इम्पीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल’ में कार्य किया.
  • गोखले ने वर्ष 1909 के मार्ले-मिंटो सुधार को तैयार करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई.

शिक्षा एवं समाज सुधारक के रूप में उनकी भूमिका

  • चरित्र निर्माण की आवश्यकता से पूर्णत: सहमत होकर उन्होंने 1905 में सर्वेन्ट्स ऑफ इंडिया सोसायटी की स्थापना की ताकि नौजवानों को सार्वजनिक जीवन के लिए प्रशिक्षित किया जा सके. 
  • वह महादेव गोविंद रानाडे द्वारा प्रारम्भ की गई ‘सार्वजनिक सभा पत्रिका’ से भी जुड़े थे.
  • साल 1908 में गोखले ने ‘रानाडे इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनॉमिक्स’ की स्थापना की.
  • उनके द्वारा अंग्रेजी साप्ताहिक समाचार पत्र ‘द हितवाद’ प्रारम्भ किया गया.
  • गोखले की विचारधारा शिक्षा के विस्तार, भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के लिये प्रतिक्रियावादी या क्रांतिकारी तरीकों के इस्तेमाल को खारिज़ करने, सामाजिक सशक्तीकरण पर आधारित थी.

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GS Paper 1 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Indian culture will cover the salient aspects of Art Forms, Literature and Architecture from ancient to modern times.

Topic : Maharana Pratap

संदर्भ

देशभर में 9 मई को महाराणा प्रताप जयंती मनाई गई.

महाराणा प्रताप

  • महान योद्धा महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1540 को राजस्थान राज्य के मेवाड़ के राजपूत परिवार में हुआ था.
  • इनके पिता का नाम राणा उदय सिंह था और माता का नाम जयवंता बाई था. इनके दो पुत्र थे – अमर सिंह और भगवान दास.
  • महान योद्धा महाराणा प्रताप जिस घोड़े पर सवारी करते थे, उसका नाम चेतक था.

हल्दी घाटी युद्ध

1576 में अकबर की 8000 सैनिकों ने एक साथ युद्ध का शंखनाद किया, जिसका नेतृत्व राजा मान सिंह कर रहे थे. जबकि महाराणा प्रताप को अफगानी राजाओं का समर्थन प्राप्त था. 

इस युद्ध में प्रताप का घोड़ा चेतक बुरी तरह घायल हो गया था और 21 जून 1576 को नदी को पार करने के बाद उसकी मृत्यु हो गई. इस युद्ध के बाद राणा प्रताप जंगल में ही रहने लगे थे और इसी अंतराल में 29 जनवरी, 1597 को 57 वर्ष की उम्र में उन्हें वीर गति प्राप्त हुई. हल्दी घाटी युद्ध में महाराणा प्रताप की वीरता को देख स्वयं अकबर ने भी उनकी प्रशंसा की थी और उन्हें महान योद्धा बताया था.


GS Paper 1 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Population and related issues.

Topic : Sample Registration System

संदर्भ

भारत के महापंजीयक द्वारा नमूना पंजीकरण प्रणाली (Sample Registration System – SRS) बुलेटिन जारी किया गया है. यह 2018 के लिए एकत्र किए गए आंकड़ों पर आधारित है.

मुख्य निष्कर्ष

जन्म दर

  1. 2018 में राष्ट्रीय जन्म दर 20 थी. ज्ञातव्य है कि यह दर 1971 में 36.9 थी.
  2. जन्म दर की सूची में बिहार (26.2) इस बार भी सबसे ऊपर है, जबकि सबसे निचला स्थान अंडमान-निकोबार (11.2) है.
  3. ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म दर पहले की तरह अधिक है, परन्तु इस मामले में गाँव और शहर का अंतर पहले से घटा है.
  4. पिछले दशक में जन्म दर में 11% की कमी आई है. 2009 में जन्म दर 22.5 थी जो 2018 में 20.0 रह गई.
  5. उसी अवधि में ग्रामीण क्षेत्रों में जन्म दर 24.1 से घटकर 21.6 हुई तो शहरी क्षेत्रों में 18.3 से घटकर 16.7 हो गई.

मृत्यु दर

  1. 1971 में मृत्यु दर 14.9 थी जो 2018 में घटकर 6.2 हो गई.
  2. छत्तीसगढ़ की मृत्यु दर सबसे ऊँची है जबकि दिल्ली की सबसे कम है.
  3. ग्रामीण क्षेत्रों में मृत्यु दर की गिरावट अधिक तेज़ रही.
  4. पिछले दशक में अखिल भारतीय स्तर पर मृत्यु दर 7.3 से 6.2 हो गई. गांवों में यह गिरावट 7.8 से 6.7 तक हुई जबकि शहरी क्षेत्रों में मृत्यु दर 5.8 से घटकर 5.1 तक पहुंची.

शिशु मृत्यु दर

  1. 1971 (129) की तुलना में शिशु मृत्यु दर 32 थी.
  2. सबसे अधिक मृत्यु दर मध्य प्रदेश (48) की थी और जबकि सबसे कम नागालैंड (4) में थी.
  3. पिछले दस वर्षों में शिशु मृत्यु दर गांवों में 35% घटी, जबकि शहरों में यह गिरावट 32% रही.
  4. अखिल भारतीय स्तर पर पिछले दशक में शिशु मृत्यु दर 50 से घटकर 32 हो गई.

नमूना पंजीकरण प्रणाली क्या है?

  • नमूना पंजीकरण प्रणाली एक जनसांख्यिक सर्वेक्षण है जिसके माध्यम से प्रतिवर्ष शिशु मृत्यु दर, जन्म दर, मृत्यु दर तथा अन्य प्रजनन एवं मृत्यु संकेतकों के विषय में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर अनुमान लगाया जाता है.
  • यह एक दोहरी रिकॉर्ड प्रणाली पर आधारित है और इसकी शुरुआत गृह मंत्रालय के अधीन रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय द्वारा वर्ष 1964-65 में जन्म और मृत्यु के आँकड़ों को पंजीकृत करने के उद्देश्य से कुछ राज्यों में की गई थी.
  • तब से नमूना पंजीकरण प्रणाली नियमित रूप से आँकड़े उपलब्ध करा रही है.
  • नमूना पंजीकरण प्रणाली के तहत अंशकालिक गणक (गणना करने के लिये नियुक्त व्यक्ति) द्वारा गाँवों/शहरों के जन्म और मृत्यु दर की निरंतर गणना की जाती है और एक पूर्णकालिक गणक द्वारा अर्द्धवार्षिक पूर्वव्यापी सर्वेक्षण किया जाता है.
  • इन दोनों स्रोतों से प्राप्त आँकड़ों का मिलान किया जाता है. बेमेल और आंशिक रूप से सुमेलित आँकड़ों को फिर से सत्यापित किया जाता है ताकि सही एवं स्पष्ट गणना की जा सके और वैध आँकड़े प्राप्त हो सकें.
  • हर दस साल कि अवधि में नवीनतम जनगणना के परिणामों के आधार पर नमूना पंजीकरण प्रणाली नमूना में संशोधन किया जाता है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Inter-State Migrant Workmen (Regulation of Employment and Conditions of Service) Act, 1979

संदर्भ

कोविड-19 महामारी के चलते मार्च 24 से अचानक पूरे देश में तालाबंदी हो गई जिस कारण प्रवासी मजदूरों को बहुत कष्ट झेलना पड़ा. ऐसी स्थिति में लोगों का ध्यान 1979 में पारित अंतर-राज्य प्रवासी मजदूर अधिनियम (Inter-State Migrant Workmen Act, 1979) की ओर गया है.

लोगों का मानना है कि एक राज्य से दूसरे राज्य जाने वाले मजदूरों के रोजगार और काम करने की दशाओं से सम्बंधित यह अधिनियम अभी तक गंभीरतापूर्वक लागू नहीं हो सका है.

अंतर-राज्य प्रवासी मजदूर अधिनियम, 1979 के मुख्य प्रावधान

  1. अधिनयम में मजदूरों की पंजी बनाने का निर्देश है.
  2. इस पंजीकरण के बिना कोई भी मुख्य रोजगारदाता किसी प्रवासी मजदूर को नौकरी पर नहीं रख सकता है. इसके लिए उसे पंजीकरण का प्रमाण-पत्र देना होगा.
  3. जो ठेकेदार एक राज्य से दूसरे राज्य में नौकरी के लिए मजदूर लाता है उसके पास भी एक लाइसेंस होना आवश्यक है.
  4. ठेकेदार को यह बताना होगा कि वे मजदूरों को जो नौकरी दिलाते हैं उसकी शर्तें आदि क्या होंगी.

यह कानून कहाँ पर लागू होता है?

  • जो भी प्रतिष्ठान दूसरे राज्यों के पाँच या अधिक प्रवासी मजदूर को रखता है, उस पर यह कानून लागू होता है. पिछले 12 महीनों में किसी एक दिन भी उस प्रतिष्ठान ने पाँच या अधिक प्रवासी मजदूर रखे हैं तो वह भी अधिनियम के दायरे में आ जाएगा.
  • पाँच या उससे अधिक दूसरे राज्यों के मजदूरों को नौकरी पर लगाने वाले ठेकेदार पर भी यह अधिनियम लागू होता है.

अधिनियम का महत्त्व

  • प्रवासी मजदूरों को रखने वाले प्रतिष्ठानों के पंजीकरण से प्रतिष्ठान की जिम्मेवारी सुनिश्चित होती है.
  • पंजीकरण से सरकार यह पता लगा लेती है कि कितने बाहरी मजदूर किसी राज्य में काम कर रहे हैं.
  • प्रवासी मजदूरों की दशा को नियमित करने के लिए यह पंजीकरण एक कानूनी आधार प्रदान करता है.
  • अधिनियम कहता है कि यदि काम की प्रकृति एक जैसी हो तो प्रवासी मजदूर को वही मजदूरी मिलेगी और अन्य सुविधाएँ, जैसे – छुट्टी, काम के घंटे आदि मिलेंगे जो उस राज्य के स्थानीय मजदूरों को मिलती हैं.

संशोधन के प्रस्ताव

वर्तमान सरकार का लक्ष्य है कि श्रम से सम्बंधित सभी कानूनों को एक जगह लिया जाए और उनमें सुधार लाया जाए. इसके लिए एक विधेयक भी संसद में लाया गया है जिसका नाम Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2019 रखा गया है. इस प्रस्तावित संहिता में 13 श्रम कानूनों को एक कानून का रूप दे दिया जा रहा है. अंतर-राज्य प्रवासी मजदूर अधिनियम 1979 भी इन्हीं कानूनों में से एक है.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Issues relating to development and management of Social Sector/Services relating to Health, Education, Human Resources.

Topic : Public Liability Insurance Act, 1991

संदर्भ

पिछले दिनों विशाखापत्तनम में स्थित LG Polymers India Private Ltd कारखाने में हुई गैस लीक ने एक बार फिर लोगों का ध्यान सार्वजनिक दायित्व बीमा अधिनियम, 1991 (Public Liability Insurance Act, 1991) पर केन्द्रित कर दिया है.

ज्ञातव्य है कि इस अधिनियम के अंतर्गत कम्पनी की सार्वजनिक दायित्व बीमा के तहत गैस लीक के शिकार व्यक्तियों को क्षतिपूर्ति देना बनता है.

सार्वजनिक दायित्व बीमा अधिनियम, 1991 क्या है?

  • यह अधिनियम भोपाल गैस त्रासदी के पश्चात् पारित हुआ था.
  • इस कानून के अनुसार, खतरनाक पदार्थों का काम करने वाले सभी प्रतिष्ठानों को अपने कामगारों की सार्वजनिक दायित्व बीमा करानी होगी जिससे उन्हें मृत्यु या चोट या सम्पत्ति क्षय के लिए मुआवजा मिल सके.
  • अधिनियम के अनुसार, क्षतिपूर्ति का दावा दुर्घटना के पाँच वर्षों के भीतर कलक्टर के पास किया जा सकता है. ऐसा दावा प्राप्त होने पर कलक्टर प्रतिष्ठान के स्वामी को नोटिस भेजेगा और उभयपक्षों की सुनवाई करने के पश्चात् दावे की जाँच करेगा और जितनी क्षतिपूर्ति उसे न्यायोचित लगेगी उतनी क्षतिपूर्ति वह घोषित करेगा.
  • क्षतिपूर्ति की अधिकतम की राशि 25,000 रु. होगी. इसके अतिरिक्त चिकित्सा के लिए अधिकतम 12,500 रु. दिए जा सकते हैं.
  • कामगार के कुछ समय के लिए काम के योग्य नहीं रह जाने के कारण मजदूरी की क्षति को पूरा करने के लिए उसे प्रति माह अधिकतम 1,000 रु. तीन महीनों के लिए दी जायेगी. परन्तु इसके लिए शर्त है कि मजदूर 16 वर्ष से ऊपर का हो और वह तीन दिन से अधिक अस्पताल में रहा हो.
  • यदि कामगार की निजी सम्पत्ति को क्षति पहुँचती है तो उस क्षति का आकलन करके अधिकतम 6,000 रु. देय होता है.

आलोचना

क्योंकि इस अधिनियम के तहत निर्दिष्ट राशि को लगभग दो दशक पहले निर्धारित किया गया था. इसलिए आज की तिथि में यह मुआवजा बहुत कम प्रतीत होता है. आवश्यकता है कि इसमें समुचित वृद्धि की जाए जिससे पीड़ितों को न्याय मिल सके.


Prelims Vishesh

VesaK :-

  • 7 मई, 2020 को संयुक्त राष्ट्र ने वैशाख पूर्णिमा मनाया.
  • यह दिन बुद्ध पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है.
  • कहा जाता है कि इसी दिन बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और मृत्यु (महापरिनिर्वाण) हुआ था.
  • संयुक्त राष्ट्र यह आयोजन 1999 से करता रहा है.
  • मानवता के प्रति बौद्ध धर्म की देन को मान्यता देने के लिए यह दिवस मनाया जाता है.

MahaKavach App :-

  • यह ऐप महाराष्ट्र सरकार द्वारा अनावृत किया गया है.
  • इस ऐप के माध्यम से नागरिकगण कोविड-19 के कारण क्वार्न्टीन में भेजे गए रोगियों का पता लगाने और स्वास्थ्य कर्मियों को सहायता पहुँचाने का काम कर सकेंगे.
  • इसमें आभासी उपस्थिति पाने के लिए सेल्फी का भी प्रावधान किया गया है.
  • यह ऐप कोविड-19 के रोगियों के विषय में क्षण-प्रतिक्षण की जानकारी देगा.

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