Sansar डेली करंट अफेयर्स, 03 November 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 03 November 2020


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Modern Indian history from about the middle of the eighteenth century until the present- significant events, personalities, issues.

Topic : Bipin Chandra Pal

संदर्भ

महापुरूष स्मारक समिति व सर्व समाज जागरूकता अभियान के तत्वावधान में स्वतंत्रता संग्राम क्रांतिकारी बिपिन चन्द्रपाल की जयंती 7 नवम्बर को माने जायेगी.

बिपिन चन्द्र पाल (1858-1932)

  • बिपिन चन्द्र पाल का जन्म 1858 में असम के सिलहट जिला में हुआ था. बंगाल विभाजन विरोधी आन्दोलन में उन्होंने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई.
  • उन्होंने स्वदेशी आन्दोलन के प्रसार में भी भाग लिया. 1908 ई. में उन्हें श्री अरविंद घोष पर चलाए जा रहे मुकदमे में गवाही देने को कहा गया, जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया. फलतः सरकार ने उन पर अदालत की मान हानि करने का मकुदमा चलाया और 6 माह कारावास की सजा दी. उन्हें गाधीजी की शांतिपूर्ण नीतियों और असहयोग आन्दालेन के सिद्धांत में आस्था नहीं थी. अतः असहयोग आन्दालेन के समय वे कांग्रेस से अलग हो गये.
  • लाला लाजपत राय, बालगंगाधर तिलक एवं बिपिन चन्द्र पाल (लाल-बाल-पाल) की इस तिकड़ी ने 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध में अंग्रेजी शासन के विरुद्ध आंदोलन किया जिसे बड़े स्तर पर जनता का समर्थन मिला.
  • ‘गरम’ विचारों के लिए प्रसिद्ध इन नेताओं ने अपनी बात तत्कालीन विदेशी शासक तक पहुँचाने के लिए कई ऐसे तरीके अपनाए जो एकदम नए थे. इन तरीकों में ब्रिटेन में तैयार उत्पादों का बहिष्कार, मैनचेस्टर की मिलों में बने कपड़ों से परहेज, औद्योगिक तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में हड़ताल आदि शामिल हैं.
  • बिपिन चंद्र पाल सार्वजनिक जीवन के अलावा अपने निजी जीवन में भी अपने विचारों पर अमल करने वाले और स्थापित दकियानूसी मान्यताओं के विरुद्ध थे. उन्होंने एक विधवा से विवाह किया था जो उस समय दुर्लभ बात थी. इसके लिए उन्हें अपने परिवार से नाता तोड़ना पड़ा. 1932 में उनकी मृत्यु हो गयी.

GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian culture will cover the salient aspects of Art Forms, Literature and Architecture from ancient to modern times.

Topic : Kartarpur Corridor

संदर्भ

भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के समक्ष हाल ही में करतारपुर गलियारे पर पाकिस्तान के एक निर्णय की कठोर शब्दों में आलोचना करते हुए पाकिस्तान को निर्णय को वापस लेने की सलाह दी है . मुद्दा करतारपुर साहिब के प्रबंधन अधिकार से जुड़ा हुआ है जिसे पाकिस्तान ने अपने यहां सिखों से छीनने की कोशिश की है. पाकिस्तान ने इस गुरुद्वारे के प्रबंधन का अधिकार सिखों से लेकर एक गैर सिख इकाई ईवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड को हस्तांतरित करने का काम किया है. अभी तक पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति जो कि अल्पसंख्यक सिख समुदाय के द्वारा चलाई जाती रही है , को करतारपुर गलियारे के प्रबंधन का अधिकार था जिसे पाकिस्तान द्वारा छीनने की कोशिश की गई है.

भारत सरकार ने इस मुद्दे पर सख्त दृष्टिकोण रखते हुए पाकिस्तानी राजनयिक को तेज फटकार लगाते हुए कहा है कि पाकिस्तान में पहले से ही धार्मिक और अन्य अत्याचार झेल रहे सिख अल्पसंख्यक समुदाय को उनके प्रबंधन के अधिकारों से वंचित किया जाना भारत को स्वीकार्य नहीं है , इसलिए पाकिस्तान तत्काल अपने निर्णय को वापस ले . लेकिन पाकिस्तान ने भारत के विरोध को खारिज करते हुए अपने निर्णय को तर्कसंगत ठहराया है जैसा कि वो करता आया है .

करतारपुर गुरुद्वारा दरबार साहिब से सम्बंधित तथ्य

करतारपुर का गुरुद्वारा रावी नदी के तट पर लाहौर से 120 किमी. उत्तर-पूर्व में स्थित है. यह वह स्थान है जहाँ गुरु नानक ने सिख समुदाय को जमा किया था और 1539 में अपनी मृत्यु तक 18 वर्ष तक रहे थे. यह गुरु द्वारा भारतीय भूभाग से दिखाई पड़ता है. यहीं से लोग गुरुद्वारे का दर्शन करते हैं. कभी-कभी घास बड़े हो जाने के कारण भारतीय सिख गुरूद्वारे को ठीक से देख नहीं पाते हैं तो पाकिस्तानी अधिकारी उन घासों को छाँट देते हैं. गुरूद्वारे को ठीक से देखने के लिए भारत के लोग दूरबीन का सहारा लेते हैं. ये दूरबीन गुरुद्वारा डेरा बाबा नानक में लगाये गये हैं.

गुरुद्वारा दरबार साहिब के लिए जत्थे कब निकलते हैं?

करतारपुर (पाकिस्तान) में स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब के लिए भारत से तीर्थयात्रियों के जत्थे हर वर्ष चार बार निकलते हैं. जिन अवसरों पर ऐसे जत्थे पाकिस्तान जाते हैं, वे हैं – वैशाखी, गुरु अर्जन देव शहीदी दिवस, महाराजा रंजित सिंह की पुण्यतिथि तथा गुरु नानक देव की जयंती.

गलियारा निर्माण से सम्बंधित समस्याएँ

कुछ दिनों से पाकिस्तान में खलिस्तान समर्थक लोग गुरुद्वारों का प्रयोग कर रहे हैं. हाल ही में, एक गुरुद्वारे में “सिख जनमत संग्रह 2020” के लिए पोस्टर लगाये गये थे और पैम्फलेट बाँटे गये थे. जब भारत के राजदूत और राजनयिक वहाँ जा रहे थे तो पाकिस्तान ने उन्हें रोक दिया था. इस प्रकार इस बात की प्रबल सम्भावना है कि यदि करतारपुर साहिब गलियारा बनता है तो पाकिस्तान उसका दुरूपयोग भारत के विरुद्ध करेगा.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian culture will cover the salient aspects of Art Forms, Literature and Architecture from ancient to modern times.

Topic : USA Election

संदर्भ

संयुक्त राज्य अमेरिका में 46वें राष्ट्रपति का निर्वाचन 3 नवंबर को, 50 राज्यों और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया के अमेरिकी नागरिक ने अपने 46वें राष्ट्रपति के निर्वाचन के लिए मतदान में भाग लिया.

भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति के मध्य प्रमुख अंतर

भारत का राष्ट्रपति

अप्रत्यक्ष निर्वाचन (आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा :

  • राष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा किया जाता है.
  • निर्वाचक मंडल में राज्य विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य तथा दिल्‍ली और पुडुचेरी की विधान सभाओं के निर्वाचित सदस्य सम्मिलित होते हैं.

पदावधि

  • 5 साल के समय तक पद घारण करता है और कितनी भी बार पुनर्निर्वाचन के लिए पात्र होता है.

शक्तियाँ और कार्य

  • राष्ट्रपति केवल राज्य प्रमुख होता है. उसकी शक्तियों और कार्यों का विश्लेषण निम्नलिखित श्रेणियों के अंतर्गत किया जा सकता है: कार्यकारी, विधायी, वित्तीय, न्यायिक, राजनयिक, सैन्य व आपातकालीन.
  • इसके अतिरिक्त, राष्ट्रपति को कुछ वीटो शक्तियाँ भी प्राप्त हैं, जिसमें सम्मिलित हैं: आत्यंतिक वीटो, निलंबनकारी वीटो और पॉकेट (जेबी) वीटो.

संयुक्त राज्य अमेरिका का राष्ट्रपति

अप्रत्यक्ष निर्वाचन: नागरिक प्रत्येक राज्य में निर्वाचक मंडल के सदस्यों (लोकप्रिय मत) का चयन करने के लिए मतदान करते हैं, हो इसके प्रतिफल में राष्ट्रपति के चयन के लिए चुनावी मत डालते हैं.

पदावधि : 4 वर्ष की अवधि तक पद धारण करता है तथा वह केवल एक बार और पुनर्निर्वाचित हो सकता है.

शक्तियाँ और कार्य : राष्ट्रपति राज्य और सरकार दोनों का प्रमुख होता है. वह कांग्रेस द्वारा बनाए गए कानूनों के कार्यान्वयन और प्रवर्तन के लिए उत्तरदायी होता है. राष्ट्रपति 50 से अधिक स्वतंत्र संघीय आयोगों के प्रमुखों की नियुक्ति भी करता है. राष्ट्रपति के पास या तो विधान को कानून बनाने या कांग्रेस द्वारा पारित किए गए विधेयकों को वीटो करने की शक्ति होती है.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : Stockholm Convention

संदर्भ

मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव के मद्देनज़र हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने स्टॉकहोम अभिसमय (Stockhom convention) के तहत सूचीबद्ध सात स्थाई कार्बनिक प्रदूषकों (POP) पर प्रतिबंध लगा दिया. केंद्र सरकार ने यह कदम एक विशिष्ट नियम और विनियमन के अनुसमर्थन अर्थात् रेटिफिकेशन के लिहाज से उठाया है.

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत 5 मार्च, 2018 को स्थाई कार्बनिक प्रदूषक विनियमन नियम निर्गत किया था. इस रेटिफिकेशन से भारत वैश्विक पर्यावरण सुविधा यानी GEF के वित्तीय संसाधनों का लाभ प्राप्त कर पाएगा. इस लाभ से भारत अपने राष्ट्रीय कार्यान्वयन योजना (NIP) को अद्यतन कर सकेगा. साथ ही, इससे दुनिया को एक सकारात्मक संदेश भी जाएगा कि हम स्वास्थ्य और पर्यावरणीय ख़तरों को बर्दाश्त नहीं करते हैं.

स्‍थायी कार्बनिक प्रदूषक (POPs): POPs चिह्नित रसायनिक पदार्थ हैं, जिनकी विशेषता इस प्रकार है-

  • पर्यावरण में दीर्घकाल तक उपस्थिति
  • सजीवों के फैटी एसिड में जैव-संचय
  • मानव स्वास्थ्य तथा पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव
  • POPs के संपर्क में आने से कैंसर हो सकता है, केंद्रीय और परिधीय तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुँचता है, प्रतिरक्षा प्रणाली संबंधी बीमारियाँ होती है, प्रजनन संबंधी विकार उत्पन्न होते हैं और सामान्य शिशुओं एवं बच्‍चों का विकास बाधित हो सकता है.
  • ये लॉन्ग रेंज एनवायरमेंटल ट्रांसपोर्ट (LERT) की प्रकृति रखते हैं.

स्टॉकहोम अभिसमय

यह एक वैश्विक संधि है जो जैविक प्रदूषण तत्त्वों से सम्बंधित है. इसमें मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की रक्षा के लिए अत्यंत खतरनाक और बहुत समय तक चलने वाले रसायनों के उत्पादन, प्रयोग, व्यापार, विमुक्ति एवं भंडारण को सीमित करने तथा अंततोगत्वा समाप्त करने पर बल दिया गया है.

वैश्विक पर्यावरण सुविधा’ (GLOBAL ENVIRONMENT FACILITY – GEF)

  • GEF पर्यावरण सम्बन्धी परियोजनाओं को अनुदान देने की एक प्रणाली है.
  • Global Environment Facility 1992 के Rio Earth Summit के अवसर पर स्थापित हुआ था.
  • इसका उद्देश्य पृथ्वी के सर्वाधिक विकट पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान में सहायता पहुँचाना है.
  • यह एक वित्तीय संगठन है जो स्वतंत्र रूप से निधि मुहैया कराता है जो इन परियोजनाओं से सम्बंधित हैं –जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन, अंतर्राष्ट्रीय जल, भूमि क्षरण, ओजोन परत, जैविक प्रदूषण, पारा, सतत वन प्रबन्धन, खाद्य सुरक्षा, आत्मनिर्भर नगर आदि.
  • GEF में 183 देशों की भागीदारी है. साथ ही इसके अन्य भागीदार हैं – अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएँ, सामाजिक संगठन, निजी क्षेत्र.
  • GEF विकासशील देशों को अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरणीय संधियों तथा समझौतों के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए निधि मुहैया करता है.
  • Global Environment Facility के निधि का प्रबंधन विश्व बैंक करता है.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

बेसल संधि

  • इस संधि को 22 मार्च 1989 को हस्ताक्षर के लिए रखा गया था.
  • इस पर कुल मिलाकर 187 देशों ने हस्ताक्षर किये हैं.
  • हैती और अमेरिका ने संधि पर हस्ताक्षर कर दिए हैं परन्तु स्वीकृत नहीं किया है.
  • यह संधि 5 मई, 1992 से लागू है.
  • यह एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है जिसका उद्देश्य खतरनाक कचरे को एक देश से दूसरे देश ले जाने की गतिविधियों को घटाना है. इसमें इसपर विशेष बल दिया गया है कि विकसित देशों से अल्प-विकसित देशों तक ये खतरनाक कचरे नहीं पहुँचे.
  • जिन कचरों को यह संधि रोकती है उनमें रेडियोधर्मी कचरे को शामिल नहीं किया गया है.
  • संधि का उद्देश्य उत्पादित कचरे की मात्रा और विषाक्तता को कम से कम करना है जिससे कि उनका प्रबंधन पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित हो.
  • बेसल संधि खतरनाक कचरे के सुचारू प्रबंधन के लिए अल्पविकसित देशों को सहायता देने का प्रावधान भी करती है.

रॉटर्डम संधि

यह संधि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में कुछ हानिकारक रसायनों एवं कीटनाशकों की आवाजाही से संबधित है. यह संधि न केवल मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को सुरक्षित करने के अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों को बढ़ावा देती है, अपितु देशों को यह निर्णय लेने की स्वतंत्रता देती है कि वे संधि-पत्र में अनुसूचित खतरनाक रसायनों और कीटनाशकों के आयात के विषय में उचित निर्णय लें.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

POPs के सत्‍यापन के लिये कैबिनेट की मंज़ूरी पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य की रक्षा के संबंध में अपने अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों को पूरा करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. यह नियंत्रण उपायों को लागू करने, अनजाने में उत्पादित रसायनों के लिये कार्य योजनाओं को विकसित और कार्यान्वित करने, रसायनों के भंडार के आविष्कारों को विकसित करने तथा समीक्षा करने के साथ-साथ अपनी राष्ट्रीय कार्यान्वयन योजना (NIP) को अद्यतन करने के लिये POPs पर सरकार के संकल्प को भी दर्शाता है. सत्‍यापन प्रक्रिया भारत को NIP को आधुनिक बनाने में वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) वित्तीय संसाधनों तक पहुँचने में सक्षम बनाएगी.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Infrastructure and energy related issues.

Topic : Tension Builds Against Sillahalla Hydroelectric Project To Come up in Nilgiris

संदर्भ

सरकार ने तमिलनाडु के नीलगिरी क्षेत्र में सिलहला पंप स्टोरेज हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (SPSHEP) के कार्यान्वयन को मंजूरी दे दी है. तमिलनाडु के पर्यावरण कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में इस क्षेत्र के किसानों तथा स्थानीय नागरिकों द्वारा इस प्रोजेक्ट विरोध किया जा रहा है.

सिलहला हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (SPSHEP)

  • 49.52 बिलियन की लागत से बनने वाली सिलहला पंप स्टोरेज हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट अत्यधिक असुरक्षित पश्चिमी घाट क्षेत्र में अवस्थित है.
  • इस परियोजना के प्रस्तावक तमिलनाडु जनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TANGEDCO), के अनुसार सिलहला पंप स्टोरेज हाइड्रो-इलेक्ट्रिक परियोजना (SPSHEP) का उद्देश्य बेम्बेट्टी गाँव में 260 फीट से अधिक ऊँचाई वाला एक ऊपरी जलाशय निर्मित करना है.
  • यह जलाशय तमिलनाडु की दूसरी सबसे बड़ी नदी की सहायक कुंडाह नदी की सिलहला जलधारा में निर्मित किया जाना है.
  • इसके अतिरिक्त कुंडाह नदी पर पहले से बने कुंडाह बांध के नीचे 350 फीट ऊँचाई वाले एक निचले जलाशय का निर्माण भी किया जाना है.
  • इस दोनों जलाशयों के बीच भूमिगत पावर हाउस बनाया जाना है जिसमें ऊपरी जलाशय से लेकर पावर हाउस को जोड़ते हुए निचले जलाशय तक एक सुरंग का भी निर्माण किया जाना है.
  • तमिलनाडु जनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन लिमिटेड (TANGEDCO), का मानना है कि इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से विद्युत की कमी का सामना कर रहे तमिलनाडु की पावर ग्रिड को 1000 मेगावाट अधिक विद्युत प्राप्त होगी.

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