संसद और विधान मंडल की तुलना : (विधेयक के सन्दर्भ में)

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कई बार परीक्षाओं में संसद (राज्य सभा+लोक सभा) या विधान मंडल (विधान परिषद्+विधान सभा) से इतने पेचीदे सवाल आ जाते हैं कि दिमाग ख़राब हो जाता है. इसलिए मैंने कोशिश किया है कि संसद और विधानमंडल के बीच अंतर या यूँ कहें कि तुलना (comparison) स्थापित करके तथ्यों को आपके सामने रखूँ. धन विधयेक को छोड़कर अन्य विधेयकों (other bills) को स्वीकार, अस्वीकार और पारित करने में संसद और विधान मंडल में अलग-अलग प्रावधान हैं.

धन विधेयक (money bill) को इस तुलना में इसलिए नहीं रखा जा रहा है क्योंकि धन विधेयक में लोक सभा और विधान सभा को ही समस्त वास्तविक अधिकार है. इसलिए इस bill को लेकर लोक सभा और राज्य सभा, विधान सभा और विधान परिषद् के बीच कोई गतिरोध उत्पन्न नहीं होता. राज्य सभा या विधान परिषद् money bill को केवल 14 दिन तक रोक सकती है. चौदह दिन बाद वह स्वत: पारित समझा जाता है.

संसद और विधान मंडल की तुलना (धन विधेयक से भिन्न अन्य विधेयकों के सन्दर्भ में)

Comparison of Parliament and Legislature: (Regarding the Bill)

  • GREEN COLOR FOR SANSAD
  • ORANGE COLOR FOR VIDHAN MANDAL

  1. एक bill संसद के दोनों सदनों – राज्य सभा या लोक सभा में से किसी सदन में भी प्रारम्भ किया जा सकता है. ठीक उसी प्रकार दूसरी तरफ, एक विधेयक को राज्य विधान मंडल के दोनों सदनों यानी विधान सभा या विधान परिषद् में से किसी भी सदन में प्रारम्भ किया जा सकता है.
  2. जब किसी ऐसे विधेयक को दोनों सदन (राज्य सभा और लोक सभा) उस विधेयक के मूल रूप में या संशोधनों सहित पारित कर देते हैं तब वह संसद द्वारा पारित समझा जाता है. दूसरी तरफ यदि विधेयक विधान परिषद् में शुरू होता है तो विधान सभा उस विधेयक को अस्वीकार कर दे या ऐसे संशोधन कर दे जो कि विधान परिषद् को स्वीकार नहीं है तो वह bill वहीं समाप्त हो जायेगा.
  3. एक सदन में पारित होने के बाद दूसरे सदन में छः महीने के भीतर विधेयक पारित/अस्वीकार होकर आ जाना चाहिए. दूसरी तरफ विधान सभा में पारित Bill विधान परिषद् में भेजा जाता है जहाँ से उसे तीन महीने के अन्दर वापस आ जाना चाहिए. 
  4. लोक सभा द्वारा पारित होने के बाद विधेयक यदि राज्य सभा द्वारा —
  1. अस्वीकार कर दिया जाता है या
  2. ऐसे संशोधनों सहित प्रस्ताव किया जाता है जिनसे दूसरा सदन सहमत न हो, या
  3. Bill प्राप्ति के छः महीने के भीतर पारित करके न भेजा जाये तो दोनों सदनों में असहमति मानी जाती है.

यदि विधान सभा द्वारा पारित विधेयक जब विधान परिषद् को भेजा जाता है तो विधान परिषद् –

  1. विधेयक को अस्वीकार कर सकती है या
  2. Bill को ऐसे संशोधनों के साथ पारित कर सकती है जिनसे विधान मंडल सहमत नहीं है, या
  3. विधेयक को प्राप्ति के बाद तीन महीने में वापस नहीं करती, तो दोनों सदनों में असहमति मानी जाती है.

5. असहमति होने पर राष्ट्रपति संसद के दोनों  का संयुक्त अधिवेशन ( Joint Session of Parliament) बुलाता है. इस संयुक्त अधिवेशन का निर्णय अंतिम होता है. दूसरी तरफ असहमति होने पर विधान सभा और विधान परिषद् का संयुक्त अधिवेशन बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है और विधान सभा का निर्णय अंतिम होता है.

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