[संसार मंथन 2021] मुख्य परीक्षा लेखन अभ्यास – Ethics Theory| GS Paper 4/Part 01

Sansar LochanGS Paper 4 Theory EthicsLeave a Comment

Based on the Daily Current Affairs of 02 Jan, 2021. From this link you can visit all questions of 2st Jan, 2021 – SMA Assignment 52 Click here

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“न केवल न्याय किया जाना चाहिए, अपितु यह होते हुए दिखना भी चाहिए।” परीक्षण कीजिए। (GS Paper 4)

“Not only must Justice be done; it must also be seen to be done.” Examine.

क्या न करें

❌प्रश्न में न्याय-निर्णय में विलम्ब के विषय में नहीं पूछा जा रहा है. कक्षा में अनेक छात्रों ने ऐसा किया और पूरा उत्तर अलग रास्ते में चला गया. 

❌सर्वोच्च कोर्ट के मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई के साथ जुड़े यौन उत्पीड़न के मामले में रंजन गोगोई को मिला क्लीन चिट भी ऐसा ही एक मामला है. जिसमें एक लाइन में यह कहा जा सकता है कि ‘न्याय हो गया’ लेकिन न्याय होते हुए दिखता नहीं है. पर यह राजनीतिक मामला हो जाएगा. परीक्षक की अपनी राय हो सकती है, यदि आपके मत के वे विरुद्ध हुए तो आपका उत्तर पढ़े बिना आपको शून्य अंक देंगे.

क्या करें

✅प्रश्न को समझें. प्रश्न टेढ़ा है. आपको दिमाग में पहले डालना होगा कि यहाँ न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता के विषय में पूछा जा रहा है.

संविधान में दिए गये प्रावधानों का उल्लेख करना न भूलें क्योंकि यह न्यायिक मामला है. उत्तर में चार चाँद लगेगा.

एक-दो मामला/वाद यदि दिमाग में हो तो उसको उत्तर में जोड़ना न भूलें.

भूमिका

  • एक सक्षम, पारदर्शी, सुलभ तथा कम खर्चीली न्याय प्रणाली सुशासन की कुंजी है.
  • संविधान के अनुसार देश में खुली अदालतों का चलन है जिसे कोई भी व्यक्ति देख सकता है. कुछ निचली अदालतों में वीडियो रिकॉर्डिंग का प्रारम्भ हुआ है और कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा 2015 के एक मामले में वीडियो रिकॉडिंग की अनुमति दी गई.
  • सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अदालतों की कार्यवाही के सीधे प्रसारण के लिए दायर अनेक जनहित याचिकाओं को निरस्त किया जा चुका है.
  • संविधान के अनुच्छेद-21 का जिक्र करें जिसके अधीन जनता को जल्द न्याय मिलने के मौलिक अधिकार के तहत, खुली अदालतों की कार्यवाही देखने का भी अधिकार है.
  • यूरोप, अमेरिका सहित दुनिया के अनेक देशों में न्यायालयों की कार्यवाही का सीधा प्रसारण होता है. विश्व में सबसे बड़ा लोकतंत्र होने का दावा करने वाले देश में अदालतों की कार्यवाही का प्रत्यक्ष प्रसारण नहीं होने से सम्पूर्ण न्यायिक प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में आ जाती है.

मुख्य विषय-वस्तु

  • विधानसभा और संसद की कार्यवाही का भी सीधा प्रसारण हो जाए तो देश में करोड़ों लोगों को त्वरित न्याय मिलने की आशा बढ़ सकती है.
  • अर्थव्यवस्था का हवाला भी दीजिये. देश में एक सर्वोच्च न्यायालय, 24 उच्च न्यायालय और लगभग 20,400 निचली अदालतें हैं. इस तरह का डाटा देने से परीक्षक प्रभावित होते हैं. मुकदमेबाजी के सभी पक्षकार यदि अदालतों की कार्यवाही में सम्मिलित होने के लिए हर तारीख में आ जाएँ तो न्यायालयों के साथ देश की अर्थव्यवस्था ही ठप पड़ जाएगी.
  • ऑल इंडिया जजेज एसोसिएशन के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के तीन न्यायाधीशों की पीठ ने 1991 में यह निर्णय दिया था कि आम जनता के हितों की सुरक्षा हेतु उत्कृष्ट कदम उठाया जाना चाहिए. सर्वोच्च न्यायालय में वर्ष 1990 और निचली अदालतों में 1997 से कंप्यूटरीकरण के प्रारम्भ करने के पश्चात् तारीख पता लगाने और निर्णय की नकल लेने के लिए न्यायालयों का चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हो गई है.
  • देश में सूचना क्रांति और उदारीकरण के प्रारम्भिक दौर में 1989 से दूरदर्शन के माध्यम से लोकसभा और फिर राज्यसभा की कार्यवाही का प्रसारण प्रारम्भ होने के बाद भी न्यायालय इससे बचता क्यों है?
  • यह सभी को ज्ञात है कि कर्नाटक में विधानसभा चुनावों के बाद सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेश के अंतर्गत शक्ति परीक्षण के दौरान विधानसभा की कार्यवाही का सीधा प्रसारण होने विधायकों के क्रय-विक्रय और अराजकता पर लगाम लगी थी.
  • वीडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से इस प्रकार की गड़बड़ियाँ और अनावश्यक स्थगन पर लगाम लगेगी, क्योंकि न्यायाधीशों को ऊँची अदालतों का और वकीलों को अपने मुवक्किल का भय रहेगा. इससे आपराधिक मामलों में गवाह या अभियुक्त अपने ब्यान को परिवर्तित नहीं कर पाएँगे.

उपसंहार

  • न्यायालयों की कार्यवाही का प्रत्यक्ष प्रसारण प्रारम्भ होने से देश में न्यायिक सुधारों को एक नया मुकाम मिल सकता है.
  • सर्वोच्च न्यायालय के सभी न्यायाधीशों की पूर्ण बेंच ने 1997 में यह प्रस्ताव पारित किया था कि न्याय न मात्र होना चाहिए, बल्कि न्याय होते हुए दिखना भी चाहिए. देश के सभी न्यायालयों में वीडियो रिकॉर्डिंग या सीधे प्रसारण की अनुमति देकर संवैधानिक संकल्प को पूर्ण करने का समय अब आ गया है.

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