राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना – National Health Protection Scheme (NHPS)

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बजट 2018 में, नए भारत 2022 के लिए आयुष्मान भारत कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना – National Health Protection Scheme (NHPS) की घोषणा की गई थी. यह योजना स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन है.

Important Info
विदित हो कि हम लोग जल्द से जल्द 2018 की सभी योजनाओं को Yojana 2018 पेज पर संकलित कर रहे हैं. 2019 की Prelims परीक्षा में इन योजनाओं के बारे में आपसे पूछा जा सकता है. इसलिए सम्पादक महोदय ने मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी है.
About the Author

Ruchira

रुचिरा जी हिंदी साहित्यविद् हैं और sansarlochan.IN की सह-सम्पादक हैं. कुछ वर्षों तक ये दिल्ली यूनिवर्सिटी से भी जुड़ी रही हैं. फिलहाल ये SINEWS नामक चैरिटी संगठन में कार्यरत हैं. ये आपको केंद्र और राज्य सरकारी योजनाओं के विषय में जानकारी देंगी.

आयुष्मान भारत कार्यक्रम

आयुष्मान भारत कार्यक्रम के दो अवयव हैं –

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना (National Health Protection Scheme – NHPS)
  • स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र (Health and Wellness Centres)

स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र

इन केन्द्रों की स्थापना की कल्पना राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति, 2017 के अंतर्गत की गई थी.

  • इसके अंतर्गत 1.5 लाख केन्द्रों के माध्यम से लोगों को उनके घरों के निकट स्वास्थ्य देखभाल सेवाएँ प्रदान की जाएँगी.
  • ये केंद्र समग्र स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करेंगे जिनमें गैर-संचरणीय रोगों से सुरक्षा एवं मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएँ भी सम्मिलित होंगी.
  • कॉर्पोरेट सोशल रेस्पोंसिबिलिटी (CSR) एवं लोकोपकारी संस्थानों के माध्यम से इन केन्द्रों को अपनाने में निजी क्षेत्रक के योगदान की भी कल्पना की गई है.
  • इससे प्रैक्टिशनर्स नर्स जैसे गैर-चिकित्सक स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की संख्या में वृद्धि होगी. मौजूदा कर्मचारियों के अतिरिक्त स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र (HWC), आवश्यक दवाएँ और बुनियादी नैदानिक व्यवस्थाएँ निःशुल्क प्रदान करेगा.
  • इस वितरण केंद्र पर विभिन्न उर्ध्वाधर रोग नियंत्रण कार्यक्रमों का संमिलन होगा.
  • स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र (HWC) द्वारा प्रौद्योगिकी का उपयोग कर, स्वास्थ्य सम्बन्धी विभिन्न संकेतकों की निगरानी हेतु रियल टाइम डाटा उत्पन्न किया जा सकता है.
  • चुनौतियाँ – निम्न बजटीय आबंटन सम्बन्धी चिंताओं के साथ-साथ मानव संसाधन की कमी.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना (NHPS)

विशेष बिंदु

  • लक्ष्य – द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल के लिए प्रति वर्ष 5 लाख रु. तक चिकित्सा उपलब्ध कराना.
  • कवरेज – सामाजिक-आर्थिक एवं जातिगत जनगणना (SECC) डाटा, 2011 के अनुसार देश भर में अनुमानित 10 करोड़ परिवार, “वंचन और व्यवसाय सम्बन्धी मानदंड” के आधार पर कुल जनसंख्या के 40% का गठन करते हैं.
  • JAM का उपयोग – यह लाभार्थियों के बेहतर लक्ष्यीकरण करने हेतु कैशलेस और आधार सक्षम होगा.

महत्त्व

  • यह विश्व का सरकार द्वारा वित्तपोषित सबसे बड़ा स्वास्थ्य कार्यक्रम है.
  • इसके द्वारा उत्पादकता में वृद्धि करके वेतन हानियों और निर्धनता को कम कर नए भारत 2022 का निर्माण करने में सहायता प्राप्त होने की संभावना है.
  • विभिन्न राज्यों में उपस्थित भिन्न-भिन्न स्वास्थ्य देखभाल बीमा सुविधाओं को समेकित करना.
  • वह 2025 तक GDP के 2.5% तक स्वास्थ्य व्यय के राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहयाता कर सकता है तथा इससे यूनिवर्सल हेल्थकेयर कवरेज को प्राप्त किया जा सकेगा.
  • यह निजी व सरकारी अस्पतालों में रोगियों के समान वितरण को बढ़ावा दे सकती है क्योंकि इस योजना को सार्वजनिक और निजी अस्पतालों के नेटवर्क के माध्यम से लागू किया जाएगा.

राज्यों की भूमिका

राज्यों की भूमिका – इसके बेहतर क्रियान्वयन हेतु राज्य की भूमिका सर्वोपरि है, क्योंकि –

  • जन स्वास्थ्य राज्य सूची का विषय है इसलिए स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करने सहित जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं का प्रभावी वितरण करना राज्य की जिम्मेदारी हैं.
  • महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, आंध्र प्रदेश और गोवा जैसे विभिन्न राज्यों की स्वयं की स्वास्थ्य देखभाल योजनाएँ हैं, अतः राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना (NHPS) को इन विभिन्न राज्यों में स्थित भिन्न-भिन्न स्वास्थ्य सेवा बाजार का समेकन करने वाली योजना के रूप में देखा जा रहा है.

वित्त

  • यह एक केंद्र प्रयोजित योजना है जिसमें प्रीमियम के प्रति अंशदान का अनुपात होगा :
  • इसके अंतर्गत केंद्र और राज्य के मध्य 60:40 के अनुपात में वित्त साझा किया जाएगा तथा इसे सभी राज्यों एवं विधानमंडलों वाले केंद्र शाषित प्रदेशों में लागू किया जायेगा.
  • केन्द्र और पूर्वोत्तर राज्यों एवं राज्यों एवं तीन हिमालयी राज्यों के मध्य यह अनुपात 90:10 का होगा.
  • बिना विधानमंडल वाले केंद्र शाषित प्रदेशों (UTs) के लिए केंद्र द्वारा 100% का योगदान किया जाएगा.
  • केन्द्रीय वित्तपोषण : इसके लिए आरम्भिक कोष 2000 करोड़ रु. का घोषित किया गया था और शेष का वित्तपोषण 1% अतिरिक्त उपकार (बजट- 2018) के माध्यम से किया जाएगा.
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना (NHPS) के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (RSBY) को समाविष्ट किया जाएगा.
  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी (NHA) – इसकी स्थापना राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना (NHPS) का प्रबन्धन करने के लिए की जायेगी.
  • इसका संचालन जोखिम संयोजन (रिस्क पूलिंग) से बीमा सिद्धांत के आधार पर होगा. जब बड़ी संख्या में लोग बीमा योजना के सदस्य बनते हैं, तो उनका केवल एक छोटा समूह ही किसी भी दिए गए वर्ष में अस्पताल में भर्ती होगा.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (RSBY)

  • 2007-8 में लांच की गई यह योजना असंगठित क्षेत्र में गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवारों एवं कामगारों के लिए एक स्वास्थ्य बीमा योजना है.
  • यह सूचना-प्रौद्योगिकी समक्ष एवं स्मार्ट-कार्ड आधारित कैशलेस स्वास्थ्य बीमा की व्यवस्था करती है, जिसके अंतर्गत प्रति वर्ष 30,000 रु. तक फैमिली फ्लोटर बेसिस के आधार पर मातृत्व लाभ भी सम्मिलित है.
  • वित्तपोषण का स्वरूप : भारत सरकार द्वारा राज्य सरकार को दिया जाने वाला योगदान 75:25 के अनुपात में होगा.
  • इसे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा लागू किया जाता है.

देश में स्वास्थ्य अवसंरचना

  • निम्न सार्वजनिक व्यय – भारत में स्वास्थ्य पर कुल सार्वजनिक व्यय, सकल घरेलू उत्पाद का 1.4 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में परिकल्पित सकल घरेलू उत्पाद के 2.5% से कम है.
  • जन स्वास्थ्य से सम्बंधित निम्न स्तरीय अवसंरचना – राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (NSSO 2015) के अनुसार 70% से अधिक बीमारियों (ग्रामीण क्षेत्रों में 72% एवं शहरी क्षेत्र में 79%) का उपचार निम्न स्तरीय जन स्वास्थ्य देखभाल सुविधाओं के कारण निजी स्वास्थ्य सुविधाओं में किया जाता था.
  • आउट ऑफ़ पॉकेट (OOP) व्यय – विश्व बैंक के आँकड़ों के अनुसार, 2014 में देश के कुल स्वास्थ्य का 62.4% आउट ऑफ़ (OOP) (वैश्विक औसत 18%) था, जिसके कारण प्रतिवर्ष भारत की जनसंख्या के 7% लोग निर्धन होते जा रहे हैं.
  • विश्व बैंक के अनुसार,भारत का 2014 में $267 के साथ प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य देखभाल व्यय सबसे कम में से एक था, जो विश्व औसत $1,271 से बहुत नीचे है.

चुनौतियाँ

  • पारिवारिक आय के अतिरिक्त लाभार्थी की पहचान अत्यधिक चुनौतीपूर्ण होगी, जिससे भारी असंतोष उत्पन्न होगा.
  • प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की उपेक्षा करना – ग्रामीण स्वास्थ्य सांख्यिकी 2016 के अनुसार, प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों की संख्या पिछले तीन दशकों से स्थिर बनी हुई है और यह योजना स्वास्थ्य देखभाल के अनावश्यक तृतीयककरण (tertiarization of healthcare) को और अधिक बढ़ा सकती है, परिणामस्वरूप लागत में उत्तरोत्तर वृद्धि होगी.
  • पिछले अनुभव (राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना (RSBY) का मूल्यांकन) यह दर्शाते हैं कि भारत में संस्थागत विशेषज्ञता एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा के प्रभावी क्रियान्वयन करने की क्षमता का अभाव है.
  • अंतर्राष्ट्रीय अनुभव के अनुसार भी बीमा-आधारित स्वास्थ्य देखभाल सम्बन्धी प्रावधान, सरकार के लिए स्वास्थ्य देखभाल वित्तपोषण का एक महंगा मॉडल है.
  • निम्न स्तरीय स्वास्थ्य अवसंरचना जैसे अस्पताल में बड़ों की संख्या, चिकित्सक (मुख्यतः विशेषज्ञ), स्वास्थ्य देखभाल स्टाफ, नैदानिक सुविधाएँ, फार्मेसियाँ आदि जनसंख्या की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं.
  • संघवाद के विपरीत – इससे राज्यों की स्वयं की नीति निर्माण करने की स्वयात्तता कम हो जाती है, जो कि संवैधानिक रूप से राज्यों के डोमेन में होना चाहिए.
  • पिछली योजना के अंतर्गत विद्यमान अनैतिक चिकित्सा पद्धतियाँ, जैसे त्वरित मौद्रिक लाभ हेतु अस्पताल में अनावश्यक भर्ती, अस्पताल में भर्ती की अवधि को बढ़ाना आदि.
  • धोखाधड़ी की घटनाएँ – पंजीकरण, नैदानिक जाँच व उपचार के लिए अतिरिक्त शुल्क लगाने एवं सरकारी बीमा योजनाओं के अंतर्गत नकली लाभार्थियों को सम्मिलित कर झूठा बीमा दावा कम्पनी के बीच अनैतिक गठजोड़ पाया गया था.
  • रोग निगरानी एवं स्वास्थ्य पर किया गया व्यय, दोनों ही स्तरों पर भारत की निम्न स्थिति के कारण संरचनात्मक समस्याएँ बनी हुई हैं.

आगे की राह

  • लम्बी अवधि की दीर्घकालिक बीमारी के लिए बाह्य रोगी सेवाओं (outpatient services) पर होने वाले व्यय को साझा कर आयुष्मान भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु इसके दायरे का विस्तार करना.
  • डाइवर्स डिजीज प्रोफाइल (Diverse disease profile) – प्रत्येक राज्य को चिकित्सा प्रक्रियाओं की अपनी सूची निर्धारित करने की स्वायत्ता प्रदान की जानी चाहिए.
  • योजना को व्यवहार्य और संधारणीय बनाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल को राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना (NHPS) के अंतर्गत एकीकृत करना.
  • रोग में वृद्धि के कारणों, अस्पतालों में भर्ती के बोझ को कम करने तथा पोषण की स्थिति में सुधार, जागरूकता और कुशल स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली को बढ़ावा देने हेतु निवारक स्वास्थ्य देखभाल को राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना (NHPS) का अभिन्न अंग बनाया जाए.
  • ब्लॉकचैन टेक्नोलॉजी का उपयोग बीमा-आधारित राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना (NHPS) के लिए एक समेकित रोगी इलेक्ट्रॉनिक मेडिकल रिकॉर्ड (EMRs) विकसित करने के लिए किया जा सकता है ताकि धोखाधड़ी पर रोक और जवाबदेहिता एवं निगरानी सुनिश्चित किया जा सके.
  • परिणामों का मापन करने और योजना के दुरूपयोग से निपटने के लिए रोगी और प्रदाताओं दोनों के बीच नियन्त्रण एवं संतुलन तन्त्र की स्थापना.

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