अनुच्छेद 35A के बारे में जानें – Art. 35A Explained in Hindi

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अनुच्छेद 35 (ए) (Article 35A) आजकल काफी चर्चा में है. सुप्रीम कोर्ट में इस आर्टिकल को लेकर फैसला कल यानी 31 अगस्त, 2018 को आने वाला है. पूरा देश सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले का इंतज़ार कर रहा है.  पर अनुच्छेद 35A है क्या? क्या यह अनुच्छेद आपने संविधान में देखा है? यदि हाँ तो कहाँ? यदि नहीं तो क्यों नहीं? चलिए जानते हैं कि Article 35A क्या है और किससे सम्बंधित है. (Brief info of Article 35A in Hindi).

article 35Aक्या है मामला?

  • We the Citizen नामक एक NGO ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी है. उसमें 35A को ख़त्म करने की प्रार्थना की गई है और आधार यह दिया गया है कि यह एक संवैधानिक संशोधन था जिसको Aritcle 368 के तहत संसद् द्वारा विचारित किया जाना था और यह संसद् में कभी भी स्वीकृति हेतु पेश नहीं किया गया.
  • संविधान में कुल मिलाकर 395 अनुच्छेद हैं  जिनमें 35A कहीं नहीं है. यह संविधान के परिषिस्ट (appendix) में एक जगह यह पाया जाता है.
  • इस अनुच्छेद को हटाने हेतु एक दलील यह दी जा रही है कि इसे संसद् के जरिए लागू नहीं करवाया गया था.
  • भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने अनुरोध किया है कि वह इस जटिल विषय में निर्णय दे. दूसरी ओर जम्मू-कश्मीर सरकार ने यह गुहार लगाई है कि Art 35A को निरस्त नहीं किया जाए क्योंकि यह कानून  60 वर्षों से चला आ रहा है.
  • दो कश्मीरी महिलाओं ने भी Article 35A को यह कहते हुए चुनौती दी है कि यह पक्षपातपूर्ण है. यदि वे राज्य के किसी बाहर के व्यक्ति से शादी करती हैं तो उनके और उनके बच्चों के सारे अधिकार भी ख़त्म हो जाते हैं.

एक बार और उठा था मामला

पूरनलाल लखनपाल बनाम भारत के राष्ट्रपति मामले में मार्च, 1961 में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि राष्ट्रपति को यह शक्ति है कि वह संविधान के किसी वर्तमान प्रावधान को 370 के तहत संशोधन कर सकता है. परन्तु सर्वोच्च न्यायालाय ने यह स्पष्ट नहीं किया कि आर्टिकल 370 के तहत राष्ट्रपति कोई नया अनुच्छेद/article बना सकता है या नहीं.

Article 35A Explained

370 (1)(D) के तहत जम्मू कश्मीर के लोगों के लाभ के लिए राष्ट्रपति को यह शक्ति है कि वह संविधान में कुछ अपवाद या सुधार कर सकता है. 14 मई, 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद द्वारा एक आदेश (The Constitution Order, 1954) जारी करके संविधान में अनुच्छेद 35 (ए) जोड़ा गया. यह अनुच्छेद संविधान की धारा 370 – clause (1) के तहत आता है. इस अनुच्छेद में जम्मू और कश्मीर की नागरिकता को राज्य का मामला घोषित किया गया है. इसी का लाभ उठाकर 35A का order पास हुआ, जिसमें जम्मू-कश्मीर राज्य को छूट मिल गई कि अपने राज्य के स्थाई निवासी कौन हैं, यह तय कर सकता है.

जम्मू-कश्मीर का नागरिक कौन है?

जम्मू कश्मीर का अपना संविधान है जो 1956 में बना था. उस संविधान में यह उल्लिखित है कि जम्मू कश्मीर का नागरिक वही है जो –

i) 14 मई 1954 को जम्मू कश्मीर का नागरिक रहा हो या

ii) उससे पहले के 10 साल से वह सम्पत्ति हासिल करके J&K में रह रहा हो.

नागरिक होने के फायदे

जो नागरिक हैं, उनको सरकार –

  • सरकारी नौकरी में विशेष अधिकार दे सकती है.
  • राज्य में जायदाद खरीदने का अधिकार दे सकती है.
  • छात्रवृत्ति और अन्य कल्याणकारी लाभ दे सकती है.

नागरिक नहीं होने के नुक्सान

जो नागरिक नहीं हैं यानी शरणार्थी हैं, वे –

  • राज्य में अपनी सम्पत्ति नहीं खरीद सकते.
  • विधान सभा में वोट नहीं दे सकते.
  • चुनाव में खड़े नहीं हो सकते.
  • सरकारी नौकरी नहीं पा सकते.

वर्तमान परिदृश्य

एक विश्वसनीय आंकड़े को यदि देखा जाए तो उसके अनुसार, भारत के विभाजन के समय पाकिस्तान से लगभग 5764 परिवार जम्मू में आकर रहने लगे. जम्मू-कश्मीर में आज भी वाल्मीकि और गोरखा समुदाय लोग कई सालों से भारी संख्या में रह रहे हैं पर न तो इन्हें विधानसभा चुनाव में वोट देने का अधिकार है, न जमीन खरीदने का हक प्राप्त है और न ही सरकारी नौकरी इन्हें कभी मिल सकती है क्योंकि इन्हें आज भी as refugee देखा जाता है और स्थायी निवासी मानने से इनकार किया जाता है.

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Article 370

4 Comments on “अनुच्छेद 35A के बारे में जानें – Art. 35A Explained in Hindi”

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