[Sansar Editorial] शिक्षा और चिकित्सा के क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रतिभा आकर्षित करने के लिए भूटान की नई नीति

Sansar LochanEconomic Times, Sansar Editorial 2019Leave a Comment

भूटान सरकार ने शिक्षकों और चिकित्सकों को वहाँ के नौकशाहों से अधिक वेतन देने का एक बड़ा निर्णय लिया है. यह बदलाव तत्कालीन कैबिनेट द्वारा 5 जून को पेश किए गए अपने अंतिम वेतन संशोधन द्वारा लाया गया जिसमें शिक्षकों, डॉक्टरों, नर्सों और मेडिकल कर्मचारियों के वेतन को बढ़ाने की बात कही गई.

  • सरकार के इस निर्णय से भूटान के 13,000 शिक्षकों और चिकित्सकों के वेतन बढ़ेंगे.
  • इस निर्णय का सारतत्त्व भूटान की 12वीं पंचवर्षीय योजना (2018-23) में पाया जा सकता है जिससे भूटान के निवासियों को बहुत आशा है.
  • विदित हो कि भूटान सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 7.5% शिक्षा पर खर्च करता है. अब इस नए वेतनमान से भूटान के राजकोषीय स्थिति में क्या परिवर्तन आएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं हैं.

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क्या भारत भी भूटान जैसा कदम उठा सकता है?

  • देखा जाए तो वे शिक्षक ही हैं जो बड़े पैमाने पर सरकारी कर्मचारियों का सृजन करते हैं. यदि भारत भूटान सरकार के जैसा कोई ऐसा कदम उठाने को सोचता भी है तो उसे बहुत सारे अन्य मुद्दों को भी देखना पड़ेगा क्योंकि सरकार के इस प्रशासनिक निर्णय से इसकी वित्तीय व्यवहार्यता पर सवाल खड़े हो सकते हैं.
  • भारत तो एक बहुत बड़ा देश है. उसके एक छोटे से राज्य तमिलनाडु के, जहाँ शिक्षा की गुणवत्ता अन्य राज्यों की तुलना में काफी अधिक है, संबंधित मंत्री ने बेहतर पेंशन की गुहार कर रहे हड़ताली शिक्षकों की मांगों को हमेशा ठुकराया है. उनका कहना है कि राज्य पहले से ही वेतन, पेंशन, प्रशासनिक लागत के चलते सकल राज्य खर्च का 71% वहन कर रही है जिससे उनके पास अन्य विकास कार्यक्रमों के लिए बहुत ही कम राशि है.
  • विश्व बैंक के एक अध्ययन में पाया गया कि भारत में शिक्षकों की अनुपस्थिति लगभग 24% है और इसका सीधा असर भारत के राजकोषीय घाटे में पड़ता है. इस अनुपस्थिति की लागत वार्षिक रूप से 1.5 बिलियन डॉलर के करीब आती है.
  • भारत में शिक्षकों की अनुपस्थिति कई कारणों से हो सकती है, जैसे – हो सकता है कि वे अतरिक्त आय के लिए दूसरा धंधा भी करते हों, स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव के चलते उन्हें अपने रोगी माता-पिता का ध्यान स्वयं करना पड़ता हो, खेती का काम वे स्वयं देखते हों आदि.
  • भारत वर्तमान में अपने सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 3% शिक्षा पर खर्च करता है जो केंद्र और राज्यों के बजटीय खर्च का 10% होता है. इसमें से अधिकांश शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के वेतन के भुगतान में खर्च हो जाते हैं.
  • NITI आयोग ने पिछले साल अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि शिक्षा में होने वाले व्यय को भारत 2022 तक GDP के 6% तक बढ़ा देगा.
  • शिक्षकों को बहुत अधिक ऊँचा वेतन देना एक कठिन कार्य प्रतीत होता है. परन्तु केंद्र और राज्य सरकारें चाहें तो शिक्षकों की नियुक्ति और वर्तमान कार्यक्रमों के लिए धन के आवंटन को तर्कसंगत बनाते हुए इसका समाधान कर सकती हैं.
  • विदित हो कि हमारे कुछ कार्यक्रम ऐसे हैं जो निरर्थक हो चुके हैं और जबकि कुछ ऐसे कार्यक्रम हैं जिनका बेहतर संचालन हो सकता है. साथ ही शिक्षा प्रणाली में उत्तरदायित्व में सुधार करके लागत में कमी लाई जा सकती है.
  • इसलिए ऐसी व्यवस्था की जा सकती है जिसमें जितना ज्यादा उत्तरदायित्व होगा उतना ही अच्छा वेतन मिलेगा. इससे शिक्षा में फैली हुई कई बीमारियों का उपचार हो जाएगा और राष्ट्रीय विकास के महत्त्वपूर्ण लक्ष्यों को पाया जा सकेगा.

बजट 2019: 12.8% स्कूली शिक्षा और 14.3% उच्चतर शिक्षा के लिए आवंटन

  • सरकार ने देश में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए और उसका सम्यक् समन्वयन करने के लिए एक राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (NRF) स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है.
  • राष्ट्रीय शिक्षा मिशन, जिसे समग्र शिक्षा भी कहा जाता है, में सर्व शिक्षा अभियान (प्रारंभिक शिक्षा), राष्ट्रीय मध्यम शिक्षा अभियान (माध्यमिक शिक्षा) और शिक्षक प्रशिक्षण, वयस्क शिक्षा जैसी योजनाएँ सम्मिलित हैं.
  • वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली को विश्व की सर्वश्रेष्ठ शिक्षा प्रणालियों में से एक बनाने के लिए एक नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लाएगी.
  • शिक्षा के क्षेत्र में प्रशासन के एक बेहतर ढाँचे की आवश्यकता है. सरकार को चाहिए कि वह उच्चतर शिक्षा के नियमों में सुधार लाये तथा अधिक स्वायत्तता को बढ़ावा दे एवं बेहतर शैक्षणिक प्रतिफल पर ध्यान केन्द्रित करे.
  • सरकार ने विश्व-स्तरीय संस्थानों के लिए 400 करोड़ रु. का आवंटन किया है. यह कदम जीवंत शैक्षणिक तन्त्र के निर्माण की दिशा में एक सही कदम है.
  • भारत के उच्च शिक्षा आयोग (HECI) की स्थापना के लिए कानून को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है. हालांकि, सरकार का यह इरादा वास्तव में तभी प्राप्त किया जा सकता है जब हमारे पास दीर्घकालिक रणनीति और संगठनात्मक संरचना है.

दिल्ली जैसे छोटे राज्यों के लिए कार्यान्वयन आसान

  • शिक्षा नीति को लागू करना छोटे राज्यों में आसान हो सकता है.
  • दिल्ली सरकार अपने वार्षिक बजट का 26% निवेश शिक्षा पर करती है जो राष्ट्रीय औसत से बहुत अधिक है.
  • प्रशासन ने बेहतर शैक्षणिक परिणामों के लिए शिक्षकों को उत्प्रेरित करने की रणनीति अपनाई है.
  • क्योंकि यह राज्य अत्यधिक शहरी है और उसके अन्दर एक स्थान दूसरे स्थान से अच्छे ढंग से जुड़ा हुआ है, अतः उत्तरदायित्व के लिए किये गये उपायों को लागू करना यहाँ अधिक सरल होगा.

निष्कर्ष

शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए छोटे-छोटे उपायों के स्थान पर एकमुश्त उपाय करने की नीति अपनानी आवश्यक है. एक शिक्षित स्वस्थ उत्तरदायी और प्रसन्न समुदाय के निर्माण के लिए जितना भी निवेश किया जाए वह उतना ही कम होगा. शिक्षा के व्यवसाय में सर्वोत्तम प्रतिभाओं को लाने के लिए ऊँचा से ऊँचा वेतन देना एक क्रांतिकारी कदम होगा जैसा कि भूटान ने किया है. भूटान ने शिक्षकों और चिकित्सकों दोनों को ऊँचा मुआवजा देने की जो घोषणा की है वह अद्वितीय है क्योंकि किसी और देश ने अभी तक सरकारी सेवा को इतनी ऊँची पदवी देने का काम नहीं किया है.

Tags : Steps taken by Bhutan to attract talent to education and health

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