[संसार मंथन] मुख्य परीक्षा लेखन अभ्यास – Society GS Paper 1/Part 7

RuchiraGS Paper 1, Sansar ManthanLeave a Comment

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सामान्य अध्ययन पेपर – 1

भारत की सबसे बड़ी चुनौती महिलाओं की आर्थिक भागीदारी एवं अवसरों की उपलब्धता को लेकर है. हाल में जारी किये गए आँकड़ों से पता चलता है कि लैंगिक असमानता में भारत आज भी कई सामाजिक रूप से पिछड़े देशों की बराबरी करता है. हालिया आँकड़ों का हवाला देते हुए लैंगिक समानता के पक्ष में तर्क प्रस्तुत करें.  (250 words) 

यह सवाल क्यों?

यह सवाल UPSC GS Paper 1 के सिलेबस से प्रत्यक्ष रूप से लिया गया है –

“सामाजिक सशक्तिकरण….”.

सवाल का मूलतत्त्व

इसलिए कहता हूँ कि Sansar DCA हमेशा पढ़ा कीजिए ताकि आपसे कई बार UPSC मुख्य परीक्षा में आँकड़ों के बारे में पूछ लिया जाता है. आप Sansar DCA से नोट्स बना लिया कीजिये – जैसे एक कॉपी में महिला से सम्बंधित मुद्दों के लिए अलग से आँकड़ें लिखें….दूसरे कॉपी में विधेयक/संशोधन से सम्बंधित आँकड़ों को एकत्र करें. यही सब जाकर मुख्य परीक्षा में काम आयेंगे.

उत्तर आँकड़ों से ही शुरू करना पड़ेगा. फिर उसके बाद लैंगिक समानता के पक्ष में तर्क प्रस्तुत करेंगे जो एक General विषय है, जिसके बारे में आप नहीं भी जानते हैं तो बात बनाकर लिख सकते हैं. पर आँकड़ों में फरेब नहीं चलेगा.

उत्तर :-

लैंगिक असमानता सूचकांक (GII) में भारत को 0.53 GII स्कोर के साथ 131वाँ स्थान प्राप्त हुआ है. भारत जैसे विकासशील देश के लिए इतना निम्न स्थान पाना एक चिंता का विषय है. ग्लोबल जेंडर गैप 2017 में भारत 144 देशों की सूची में 108वें स्थान पर है. रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए पुरुषों एवं महिलाओं के बीच आर्थिक और राजनीतिक सशक्तिकरण के अंतराल को समाप्त करने में भारत को लगभग 217 वर्ष लगेंगे. भारत बांग्लादेश (47) और चीन (100) की तुलना में 21 स्थान फिसलकर 108वें स्थान पर आ गया है.

भारत की सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक भागीदारी एवं अवसरों की उपलब्धता (economic participation and opportunity pillar) को लेकर है, जिसमें भारत 139वें स्थान पर है. स्वास्थ्य एवं उत्तरजीवता के मामले में यह 141वें स्थान पर है. भारत की रैंकिंग में गिरावट का मुख्य कारण राजनीतिक भागीदारी और सशक्तिकरण संबंधी मानकों पर अत्यंत मंद प्रदर्शन है.

लैंगिक समानता के पक्ष में तर्क

आर्थिक रूप से :-

  1. विभिन्न अध्ययनों से पता चलता है कि स्त्री और पुरुष में भेदभाव नहीं करने पूरी अर्थव्यवस्था में कई प्रकार के लाभ होते हैं. ये लाभ परस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं.
  2. श्रम बाजार और शिक्षा कार्यक्रमों में लैंगिक समानता को समर्थन देने से GDP पर सुदृढ़ प्रभाव पड़ता है.
  3. इसके अतिरिक्त Global Human Capital Index में उच्च प्रदर्शन करने वाले देश अपने लैंगिक अंतराल को कम करके अपने देश की प्रतिभा के विकास को अधिकतम बनाने में सफल रहे हैं.

सामाजिक रूप से :-

शिक्षा में निवेश के समान ही स्वास्थ्य में निवेश भी जरुरी है. विशेष रूप से माताओं, नवजात शिशुओं और बाल स्वास्थ्य में निवेश का देश के सम्पूर्ण विकास में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

राजनीतिक रूप से :-

  1. महिलाओं से सम्बंधित मुद्दों के व्यापक सामाजिक निहितार्थ हैं जो पारिवारिक जीवन, शिक्षा और स्वास्थ्य के सभी पहलुओं से जुड़े हुए हैं.
  2. सार्वजनिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी संस्थानों की विश्वसनीयता को बढ़ाती है और साथ ही लोकतंत्र को उन्नत बनाती है.

सामान्य अध्ययन पेपर – 1

कुल प्रजनन दर से आप क्या समझते हैं? परिवार नियोजन हेतु हाल की सरकारी योजनाओं या कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए प्रजनन दर को प्रभावित करने वाले कारकों की चर्चा करें.  (250 words) 

यह सवाल क्यों?

यह सवाल UPSC GS Paper 1 के सिलेबस से प्रत्यक्ष रूप से लिया गया है –

“जनसंख्या एवं सम्बद्ध मुद्दे….”.

सवाल का मूलतत्त्व

नीचे मैंने ऐसे ही आपको जानकारी के लिए फोटो दिया है. आपको पता होना चाहिए कि प्रजनन दर/उर्वरता दर और जन्म दर के बीच क्या अंतर है. इससे उत्तर का कोई लेना-देना नहीं है.

 

fertility-rate-and-birth-rate-difference

उत्तर की शुरुआत हम प्रजनन दर की परिभाषा से करेंगे. आप चाहें तो ऊपर दिए गए फोटो में दिए गए तथ्यों को प्रजनन दर की परिभाषा लिखते समय डाल सकते हैं. परिवार नियोजन से सम्बंधित योजनाओं के विषय में मेरे पास अधिक तथ्य मौजूद नहीं थे, फिर भी मैंने तीन योजनाओं/कार्यक्रमों का जिक्र उत्तर में कर दिया है. यदि आपके पास भी ऐसी कोई योजना के विषय में जानकारी हो तो कमेंट में विस्तार से जरुर शेयर करें.

योजनाओं के बारे में बताकर आपको प्रजनन दर को प्रभावित करने वाले कारकों को बतलाना है. कारक तो बहुत-से हैं. पर मैंने सिर्फ चार का जिक्र किया है क्योंकि उत्तर आपको सिर्फ 250 शब्दों में लिखना है और पहले से ही आप परिभाषा और योजनाओं के बारे में लिख चुके हैं इसलिए कारकों के बारे में बताने के लिए answer-sheet में ज्यादा जगह नहीं बचेगी. इसलिए उत्तर लम्बा करने के लोभ में मत पड़े. और हाँ! मैंने प्रजनन दर के कारकों में धर्म के विषय में भी चर्चा की है. याद रहे आपको किसी धर्म विशेष का प्रत्यक्ष उल्लेख अपने उत्तर में नहीं करनी है. इन सब चीजों से बचने की कोशिश करें. जैसा मैंने लिखा है, उतना ही लिखें.

उत्तर :-

कुल प्रजनन दर (Total Fertility Rate- TFR) को किसी महिला की प्रजनन अवधि के दौरान (15-49) जन्म लेने वाले बच्चों की औसत संख्या के रूप में परिभाषित किया जाता है. यह जन्म दर की तुलना में प्रजनन के स्तर का अधिक प्रत्यक्ष मापक है क्योंकि यह देश में जनसंख्या परिवर्तन की संभावना को दर्शाता है.

परिवार नियोजन हेतु सरकारी की योजनाएँ/कार्यक्रम निम्नलिखित हैं –

मिशन परिवार विकास

इस योजना को उन सात मुख्य राज्यों में आरम्भ किया गया है जहाँ TFR 3 या इससे अधिक है. इस योजना का लक्ष्य उच्च प्रजनन दर वाले जिलों में गर्भ निरोधकों तथा परिवार नियोजन सम्बन्धित सेवाओं तक पहुँच सुनिश्चित करना है.

ASHAs कार्यकर्ताओं द्वारा गर्भ निरोधकों की होम डिलीवरी

गर्भ निरोधक की खरीद को लेकर महिलाएँ प्रायः सहज अनुभव नहीं करती हैं. इसलिए इस योजना के अंतर्गत ASHAs कार्यकर्ता, समुदाय में गर्भ निरोधकों को घर-घर वितरण कर रही हैं.

राष्ट्रीय परिवार नियोजन बीमा योजना (NFPIS)

NFPIS के तहत बंध्याकरण के पश्चात् होने वाली मृत्यु, संभावित हानि तथा विफलता की संभावनाओं के कारण ग्राहकों का बीमा किया जाता है.

प्रजनन दर को प्रभावित करने वाले कारक

शिक्षा

हाल के आँकड़े के अनुसार, 12 वर्ष या उससे अधिक उम्र की विद्यालयी शिक्षा प्राप्त कर रही महिलाओं में प्रजनन दर 1.7 पाई गई है, जबकि जिन महिलाओं ने विद्यालयी शिक्षा प्राप्त नहीं की है, उनमें यह दर 3.1 है. शिक्षा का अभाव महिलाओं को प्रजनन नियंत्रण से रोकता है. इस कारण भारत में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य समस्या में भी वृद्धि होती है. शिक्षा का अभाव, कम आयु में गर्भधारण और उच्च प्रसूति दर महिलाओं के आर्थिक विकल्पों को सीमित करता है. इस प्रकार यह प्रजनन नियंत्रण को बाधित कर एक दुष्चक्र निर्मित करता है.

गर्भ निरोधकों के उपयोग में विषमता

गर्भ निरोधक पद्धतियों से सम्बंधित ज्ञान में वृद्धि होने के बाद भी पुरुषों द्वारा प्रबन्धन पर अधिक ध्यान नहीं दिया जाता.  भारत में गर्भ निरोधक का प्रयोग मुख्यतः महिलाएँ ही करती हैं. महिला बंध्याकरण की दर 36% है जबकि पुरुष बंध्याकरण की दर केवल 0.3% है.

भारतीय पुरुषों द्वारा नसबंदी के प्रति अनिच्छा के कुछ कारण निम्नलिखित दिए गये हैं –

  • यौन एवं प्रजनन मामलों में जागरुकता का अभाव
  • उचित गर्भ निरोधक विधियों के विषय में जानकारी का अभाव
  • मिथक एवं भ्रम (नसबंदी को पौरुष की हानि के रूप में माना जाता है)
  • सामाजिक निषेध
  • गाँवों के स्तर पर स्वास्थ्य कर्मचारी मुख्य रूप से महिलाएँ होती हैं एवं उनके द्वारा पुरुषों के साथ इन संवेदनशील मामलों पर चर्चा करना कठिन होता है

धार्मिक

देश के कुछ लोग अज्ञानतावस परिवार नियोजन को धर्म विरुद्ध तथा अनैतिक क्रिया मानते हैं. अतः इस कार्यक्रम का समर्थन करने के बजाए वे इसका विरोध करते हैं.

आय/सम्पत्ति का प्रभाव

ऐसा प्रायः देखा गया है कि निम्न आय वाले वर्ग के परिवारों में समृद्ध वर्ग के परिवारों की तुलना में अधिक बच्चे पैदा होते हैं.

Reminder : Last Date of Sansar Assignment SMA Submission is 1/10/2018. You can download last assignment from this link >

“संसार मंथन” कॉलम का ध्येय है आपको सिविल सेवा मुख्य परीक्षा में सवालों के उत्तर किस प्रकार लिखे जाएँ, उससे अवगत कराना. इस कॉलम के सारे आर्टिकल को इस पेज में संकलित किया जा रहा है >> Sansar Manthan

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