Sansar डेली करंट अफेयर्स, 29 May 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 29 May 2021


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Modern Indian history from about the middle of the eighteenth century until the present- significant events, personalities, issues.

Topic : Veer Sawarkar

संदर्भ

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अग्रणी हिंदुत्व विचारक वीर सावरकर को उनकी जयंती- 28 मई पर श्रद्धांजलि अर्पित की.

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वीर सावरकर

  • सावरकर का पूरा नाम विनायक दामोदर सावरकर था.
  • सावरकर ने 1904 में नासिक में ‘मित्रमेला’ नाम से एक संस्था आरंभ की थी जो शीघ्र ही मेजनी के ‘तरुण इटली’ की तर्ज पर एक गुप्त सभा ‘अभिनव भारत’ में परिवर्तित हो गयी.
  • अभिनव भारत ने अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए विदेशों से अस्त्र-शस्त्र मंगवाया और बम बनाने का काम रूसियों के सहायता से किया. अनेक गुप्त संस्थाएं बम्बई, पूना, नासिक, नागपुर, कोल्हापुर आदि जगहों में सक्रिय थीं. शीघ्र ही सरकार इनकी कार्यवाहियों से पराजित हो गयी.
  • सावरकर स्वदेशी आन्दोलन से भी जुड़े रहे.
  • कालांतर में सावरकर तिलक की स्वराज पार्टी में भी शामिल हुए थे.
  • उनके राष्ट्रभक्ति से पूर्ण भाषणों एवं गतिविधियों से क्रुद्ध होकर ब्रिटिश सरकार ने उनकी BA की डिग्री वापस ले ली थी.
  • जून, 1906 को बेरिस्टर बनने के लिए लंदन गये. वहाँ उन्होंने भारतीय छात्रों को भारत में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध एकत्र किया.
  • सावरकर ने फ्री इंडिया सोसाइटी नामक एक समूह बनाया जो भारत की स्वतंत्रता के विषय में चर्चा करने के लिए बना था. यह सोसाइटी भारतीय पंचाग के अनुसार विभिन्न पर्वों तथा स्वतंत्रता आन्दोलन से सम्बंधित मुख्य तिथियों को मनाया करती थी.
  • उन्होंने अंग्रेजो से भारत को मुक्त करने के लिए सशस्त्र आन्दोलन को बढ़ावा दिया और इसके लिए इंग्लैंड में रहने वाले भारतीयों का एक जत्था तैयार किया जिनके पास हथियार भी होते थे.
  • 1908 में उन्होंने 1857 की क्रांति पर एक प्रमाणिक शोधग्रन्थ लिखा. वे अंग्रेजों के इस दावे को नहीं मानते थे कि यह घटना सिपाहियों का विद्रोह थी. इस पुस्तक का नाम ही रखा गया था – 1857 का भारतीय स्वातंत्र्य युद्ध. ब्रिटेन की सरकार ने इस पुस्तक के ब्रिटेन और भारत दोनों जगह छपने पर प्रतिबंध लगा दिया. आगे चलकर इस पुस्तक को मैडम भिकाजी कामा ने हौलेंड में प्रकाशित किया और कालांतर में यह पुस्तक भारत में क्रांतिकारियों तक पहुँच गई.
  • जन नासिक के कलक्टर ए.एम.टी. जैक्सन को किसी युवा व्यक्ति ने गोली मारी तो सावरकर को इस हत्या का आरोपी इस आधार पर बनाया गया क्योंकि उनका इंडिया हाउस से सम्बन्ध रहा था.
  • लन्दन में ही सावरकर को मार्च 13, 1910 को बंदी बना दिया गया और भारत भेज दिया गया.
  • 1920 में विट्ठल भाई पटेल, महात्मा गाँधी और बाल गंगाधर तिलक जैसे प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों ने वीर सावरकर की रिहाई की माँग की परन्तु सावरकर को छोड़ा नहीं गया.
  • मई 2, 1921 को उनको पहले रत्नागिरी जेल भेजा गया और फिर वहाँ से यरवदा जेल में बंद किया गया. कालांतर में उन्हें कालापानी की सजा मिली और उनको अंडमान निकोबार के सेलुलर जेल में रख दिया गया. वहाँ उन्होंने 14 वर्ष तक यातनाएं सहीं.
  • रत्नागिरी जेल में रहते हुए सावरकर ने एक और पुस्तक लिखी, जिसका नाम था –हिंदुत्व, हू इज हिन्दू?
  • सावरकर 1937 से 1943 तक हिन्दू महासभा के अध्यक्ष रहे. जब 22 अक्टूबर, 1939 को कांग्रेस के मंत्रियों ने सरकार से त्यागपत्र दे दिया तो हिन्दू महासभा ने मुस्लिम लीग के साथ सहयोग कर सिंध, बंगाल और उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रान्त में सरकारें गठित कीं.

GS Paper 1 Source : BBC

UPSC Syllabus : World History.

Topic : Germany officially recognises colonial-era Namibia genocide

संदर्भ

जर्मनी ने मान लिया है कि उसने नामीबिया में उसके औपनिवेशिक शासन के दौरान जनसंहार हुआ था. इसके साथ ही जर्मनी ने नामीबिया को एक अरब यूरो देने का वादा किया जिसके जरिए जनसंहार पीड़ितों के वशंजों की सहायता की जाएगी. इस स्वीकारोक्ति के साथ ही, जर्मनी ने नामीबिया में सामुदायिक परियोजनाओं में सहायता करने हेतु 1.1 बिलियन यूरो (1.2 बिलियन डॉलर) की राशि देने की भी घोषणा की है.

नामीबिया ने इसका स्वागत करते हुए इसे “पहला कदम” बताया है, परन्तु कई सामाजिक कार्यकर्ता कहते हैं कि क्या वित्तीय सहायता से वे जख्म भर सकते हैं जो एक सदी से भी अधिक समय से रिस रहे हैं.

 ‘जनसंहार’ के बारे में- तात्कालिक घटनाक्रम

  1. वर्ष 1904 से 1908 के मध्य, जर्मन उपनिवेशियों द्वारा तात्कालिक ‘जर्मन साउथ वेस्ट अफ्रीका’ में हरेरो तथा नामा जनजातियों द्वारा औपनिवेशिक शासन के खिलाफ विद्रोह करने पर, इन समुदायों के लाखों पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की हत्या कर दी गई थी.
  2. विद्रोह के कारण: स्थानीय जनजातियों द्वारा जर्मन उपनिवेशियों को अपनी भूमि और संसाधनों के लिए एक खतरे के रूप में देखा था.
  3. महत्वपूर्ण घटना- वाटरबर्ग की लड़ाई (Battle of Waterberg): इस लड़ाई में जर्मन सैनिकों द्वारा रेगिस्तान में महिलाओं और बच्चों सहित करीब 80,000 हरेरो का पीछा किया गया, जिसमे से मात्र 15,000 लोग जीवित बचे सके.

वर्तमान नामीबिया पर जर्मनी का अधिकार कब तक रहा?

  1. 1884 और 1890 के मध्य, जर्मनी ने वर्तमान नामीबिया के कुछ भागों को औपचारिक रूप से उपनिवेश बना लिया था.
  2. जर्मनों ने 1915 तक इस क्षेत्र पर शासन किया, जिसके बाद इस पर 75 तक दक्षिण अफ्रीका का नियंत्रण रहा.
  3. नामीबिया को अंततः वर्ष 1990 में स्वतंत्रता प्राप्त हुई.

आगे की कार्रवाई

कुछ इतिहासकारों द्वारा इन अत्याचारों को बीसवीं शताब्दी का पहला नरसंहार बताया जाता है.

  1. इस हालिया स्वीकारोक्ति के पश्चात्, जर्मनी द्वारा एक घोषणापत्र पर हस्ताक्षर किए जाएँगे, जिसके बाद दोनों देशों की संसदों द्वारा इसकी अभिपुष्टि की जाएगी.
  2. पुनः, जर्मन राष्ट्रपति फ्रैंक-वाल्टर स्टीनमीयर द्वारा नामीबियाई संसद के सामने जर्मनी द्वारा किए गए अपराधों के लिए आधिकारिक रूप से क्षमा माँगी जाएगी.

GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Issues related to women.

Topic : Dowry deaths | Supreme Court widens scope of Section 304-B

संदर्भ

सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ‘दहेज उत्पीड़न’ को एक “रोगप्रसारक” (Pestiferous) अपराध बताया है, जिसमे महिला “लोभी” पतियों और ससुराल वालों की क्रूरता का शिकार बन जाती है.

साथ ही, कोर्ट ने एक फैसले में संकेत देते हुए कहा है, कि दहेज हत्या पर दंडात्मक प्रावधानों से संबंधित्त धारा 304-B, की एक जकड़ी हुई और शाब्दिक व्याख्या ने ‘लंबे समय से चली आ रही इस सामाजिक बुराई” के खिलाफ लड़ाई को कुंद कर दिया है.

IPC की धारा 304B

  • धारा 304 के अनुसार दहेज हत्या का मामला बनाने के लिये महिला की शादी के सात वर्ष के भीतर जलने या अन्य शारीरिक चोटों (सामान्य परिस्थितियों के अलावा) से मृत्यु होनी चाहिये.
  • दहेज की माँग के संबंध में मृत्यु से ठीक पहले उसे पति या ससुराल वालों से क्रूरता या उत्पीड़न का सामना करना पड़ा हो.

दहेज

  • ‘दहेज’ शब्द को IPC में परिभाषित नहीं किया गया है बल्कि दहेज निषेध अधिनियम, 1961 में परिभाषित किया गया है. अधिनियम के अनुसार, इसे किसी भी संपत्ति या मूल्यवान वस्तु के रूप में परिभाषित किया गया है या प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इसे देने के लिये सहमति व्यक्त की गई हो:
    1. एक पक्ष द्वारा दूसरे पक्ष को विवाह के लिये या
    2. विवाह में भाग लेने वाले दोनों पक्षों में से किसी एक पक्ष के माता-पिता या किसी अन्य व्यक्ति ने किसी दूसरे पक्ष अथवा किसी व्यक्ति को विवाह के समय, विवाह के पहले या विवाह के बाद विवाह की एक आवश्यक शर्त के रूप में दिया हो या देना स्वीकार किया हो.
  • हालाँकि विभिन्न समाजों में प्रचलित प्रथागत भुगतान, जैसे कि बच्चे के जन्म के समय आदि दहेज के अंतर्गत नहीं आते हैं.
  • दहेज लेना और देना दोनों ही अपराध हैं.
  • दहेज निषेध अधिनियम, 1961 के अतिरिक्त कानूनों को और अधिक कठोर बनाया गया है, अर्थात्,
    1. धारा 304B (दहेज मृत्यु) और धारा 498A (पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता) को भारतीय दंड संहिता में एकीकृत किया गया है.
    2. दहेज प्रथा और संबंधित मौतों के इस जघन्य कृत्य की समाप्तिन या इसे कम से कम करने के लिये धारा 113B (दहेज मृत्यु के रूप में अनुमान) को भारतीय साक्ष्य अधिनियम का हिस्सा बनाया गया है.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

 केवल उच्च नैतिक मानकों को स्थापित करने से ही एक नैतिक समाज का निर्माण संभव नहीं क्योंकि यह आवश्यक नहीं कि लोग उन नैतिक मानकों का पालन ही करें. उदाहरण के लिये सत्यवादिता को नैतिक मानक के रूप में स्थापित किए जाने के पश्चात् भी समाज के लोग अपने स्वार्थों के लिये झूठ बोलते हैं. उसी प्रकार दहेज प्रथा तथा भ्रष्टाचार जैसी समस्याएँ नैतिक रुप से अनुचित होने पर भी समाज में प्रचलित हैं. यह दर्शाता है कि महज नैतिक मानकों का निर्माण नैतिक समाज के निर्माण की गारंटी नहीं है.

नैतिक समाज के लिये यह आवश्यक है कि व्यक्ति के सुपर-ईगो को इतना मजबूत किया जाए कि वह नैतिक मानकों का पालन कर सके. इसके लिये एक समाज  में सभी सदस्यों द्वारा समन्वित नीति को बनाए जाने की आवश्यकता है ताकि व्यक्तियों में नैतिक अभिवृति का विकास हो सके.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation. Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : Lakshadweep Crisis

संदर्भ

ज्ञातव्य है कि संघ शासित प्रदेश लक्षद्वीप में विधानमंडल नहीं है, इसलिए इसके कानूनों में प्रस्तावित कोई भी परिवर्तन किसी विधेयक की बजाय, इसके प्रशासक द्वारा तय विनियमों के माध्यम से किया जाता है. इसके प्रशासक की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है.

इन परिवर्तनों को प्रभावी होने के लिए, इन्हें गृह मंत्रालय (लक्षद्वीप के लिए प्रशासकीय मंत्रालय) के अनुमोदन की आवश्यकता होती है. लक्षद्वीप को मालदीव की तर्ज पर विकसित करने (पर्यटन प्रयोजन) के प्रयास में, हालिया नीतियों के कारण प्रशासन के विरुद्ध तीव्र प्रतिक्रिया हुई है.

प्रारूप लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन (Draft Lakshadweep Development Authority Regulation (LDAR), 2021

  • यह प्रारूप प्राधिकरण को अनुसूचित जनजातियों से संबंधित द्वीपवासियों के स्वामित्व की संपत्ति के लघु भूखण्डों को हटाने या विलय के लिए अनुमति प्रदान करता है.
  • इस प्रकार संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) का उल्लंघन होता है.
  • निर्माण गतिविधियां इसके नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरा हो सकती हैं.

पंचायत विनियमन, 2021

  • दो से अधिक बच्चों वाले व्यक्तियों को स्थानीय चुनाव लड़ने से अपात्र करते हैं.
  • लक्षद्वीप भारत में जनसंख्या क्रम में निम्नतम स्थान पर है. लगभग 65,000 लोग इसके 36 द्वीपों में से 10 में निवास करते हैं. इसकी दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर 6.23 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय स्तर पर 17.70 प्रतिशत से काफी कम है.

असमाजिक गतिविधि निषेध अधिनियम

  • सरकार को किसी भी व्यक्ति को सार्वजिनिक प्रकटीकरण के बिना एक वर्ष तक की अवधि के लिए हिरासत में लेने की शक्ति प्रदान करता है.
  • आलोचकों का तर्क है कि इस संघ शासित प्रदेश में नगण्य अपराधों के कारण मौजूदा कानूनी ढांचा पर्याप्त है. यह द्वीपवासियों की नागरिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगाएगा.

Prelims Vishesh

Ayush Clinical Case Repository (CCR) portal :-

  • हाल ही में, आयुष मंत्रालय द्वारा CCR पोर्टल और आयुष संजीवनी ऐप का तीसरा संस्करण निर्गत किया गया है.
  • CCR पोर्टल का उद्देश्य आयुष चिकित्सकों द्वारा प्राप्त नैदानिक परिणामों के विषय में बड़े पैमाने पर जानकारी जमा करना है.
  • यह आयुष चिकित्सकों और सामान्य जन दोनों को सहायता प्रदान करने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करेगा.
  • आयुष संजीवनी ऐप का तीसरा संस्करण आयुष हस्तक्षेपों की प्रभावकारिता के संबंध में महत्त्वपूर्ण अध्ययन एवं दस्तावेजीकरण की सुविधा प्रदान करेगा, जिसमें आयुष 64 और कबूसुर कुडीनीर दवाएँ सम्मिलित हैं.

BlackBuck in Odisha :-

  • पिछले छह वर्षों में ओडिशा की ब्लैकबक जनसंख्या दोगुनी हो गई है.
  • वर्तमान में, ब्लैकबक राज्य के दक्षिणी भाग में गंजाम जिले तक ही सीमित हैं.
  • भारत में यह प्रजाति राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश, तमिलनाडु और अन्य क्षेत्रों सहित संपूर्ण प्रायद्वीपीय भारत में व्यापक रूप से विस्तारित है.
  • ब्लैकबक को चीता के उपरांत विश्व का सबसे तेज जीव माना जाता है.
  • यह आंध्र प्रदेश, हरियाणा और पंजाब का राज्य पशु है.
  • यह वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I में अधिसूचित है.
  • IUCN स्थिति: लीस्ट कंसर्न.

NIDHI4COVID 2.0 :-

  • यह पहल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अधीन राष्ट्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी उद्यमिता विकास बोर्ड (NSTEDB) का विशेष अभियान है.
  • इसके अंतर्गत महामारी के संकट की विद्यमान चुनौती से निपटने में देश को घरेलू समाधान तथा अभिनव उत्पाद मिल सकें यह सुनिश्चित किया गया है.
  • निधि4कोविड 2.0 के द्वारा भारत में पंजीकृत उन पात्र स्टार्ट-अप और कंपनियों को आर्थिक सहायता दी जाएगी, जो ऑक्सीजन नवाचार, सुगमता से लाने-ले जाने वाले उपकरण, आवश्यक चिकित्सा सहायक सामग्री, निदान संबंधी समाधान और कोविड-19 के गहन प्रभाव का सामना करने तथा इसका प्रमाव कम करने का समाधान निकाल सकें.

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