Sansar डेली करंट अफेयर्स, 27 February 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 27 February 2020


GS Paper 1 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Population and associated issues, poverty and developmental issues, urbanization, their problems and their remedies.

Topic : Shyama Prasad Mukherji Rurban Mission

संदर्भ

श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन (SPMRM) के शुभारंभ की चौथी वर्षगांठ 21 फरवरी, 2020 को मनाई गई. प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने विकास की दहलीज पर पहुंच चुके ग्रामीण क्षेत्रों में व्‍यापक बदलाव लाने वाले कदमों को उठाने के विजन के साथ 21 फरवरी, 2016 को इस मिशन का अनावरण किया था.

SPMRM क्या है?

श्यामा प्रसाद मुखर्जी रर्बन मिशन एक अनोखा सरकारी कार्यक्रम है जिसकी रूपरेखा विकास की दहलीज पर पहुँचे हुए ग्रामीण क्षेत्रों को भौतिक सुविधाओं से युक्त करने के लिए तैयार की गई है.

धनराशि का प्रावधान

  • इस मिशन के लिए पहले केंद्र सरकार प्रत्येक रर्बन संकुल के लिए अनुमानित निवेश का 30% अंश देती है जिसे क्रिटिकल गैप फंडिंग कहा जाता है. शेष 70% धनराशि राज्यों द्वारा उपलब्ध कराई जाती है. इसके लिए राज्य केन्द्रीय और राज्य कार्यक्रमों के साथ-साथ निजी निवेश एवं सांस्थानिक वित्तीयन का सहारा लेती है.
  • अब क्रिटिकल गैप फंडिंग को केंद्र और राज्य (मैदानी राज्य) 60:40 के अनुपात में तथा हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्य 90:10 के अनुपात में साझा करते हैं.

मिशन के विभिन्न प्रावधान

मूलभूत सुविधाएँ

  • सभी घरों को 27/7 जल की आपूर्ति करना.
  • घर और संकुल के स्तर पर ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन की सुविधा.

सड़कों के लिए प्रावधान

मिशन के अन्दर सड़कों में प्रकाश की उचित व्यवस्था की जायेगी और हरित तकनीक का प्रयोग करते हुए सार्वजनिक यातायात की सुविधाएँ दी जाएँगी.

आर्थिक सुविधाएँ

कृषि सेवा एवं प्रसंस्करण, पर्यटन और लघु एवं मध्यम उद्यमों को बढ़ावा के लिए कौशल्य का विकास.

मिशन का उद्देश्य

मिशन का उद्देश्य स्थानीय आर्थिक निकास को प्रेरित करना, मूलभूत सुविधाओं में वृद्धि करना तथा सुनियोजित रर्बन संकुलों का निर्माण करना.

संकुलों का विश्वास क्यों?

  • जनगणना के अनुसार, भारत में गाँव में रहने वालों की संख्या 833 मिलियन है जोकि सम्पूर्ण जनसंख्या का लगभग 60% होता है.
  • 2001-2011 के बीच ग्रामीण जनसंख्या में 12% की वृद्धि हुई है. साथ ही इसी अवधि में गाँवों की संख्या भी बढ़ी है.
  • अधिकतर गाँवों में बस्तियाँ अलग-अलग नहीं होती हैं, अपितु उनके संकुल होते हैं जो एक दूसरे से अपेक्षाकृत निकट होती हैं. ऐसे संकुलों में विकास की अच्छी संभावना होती है.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Interim order on Mahadayi tribunal’s award

संदर्भ

सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को अपने अंतरिम आदेश में गोवा, कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच महादयी नदी के पानी के बंटवारे के लिए एक ट्रिब्यूनल द्वारा अंतिम पुरस्कार के कार्यान्वयन के लिए कर्नाटक सरकार की दलील दी.

सर्वोच्च न्यायालय ने क्या कहा?

अंतरिम आदेश तीन राज्यों के वकील की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने पारित किया. पीठ ने कहा कि मामले में अंतिम सुनवाई जुलाई में होगी. यह भी कहा कि अंतरिम आदेश ट्रिब्यूनल के पुरस्कार के खिलाफ तीन राज्यों द्वारा दायर याचिकाओं के अंतिम परिणाम के अधीन है.

महादयी नदी

  • महादयी नदी कर्नाटक से निकलती है और इसी नदी को गोवा में मंडोवी कहा जाता है.
  • यदि नदी कर्नाटक में 35 किमी और गोवा में 82 किमी क्षेत्र में प्रवाहित होती है और अंत में जाकर अरब सागर में मिल जाती है.
  • कर्नाटक कालसा-बंदुरी नाला परियोजना (Kalasa-Banduri Nala project) के लिए गोवा से महादयी नदी से 7.56 tmcft पानी की रिहाई की मांग कर रहा है पर गोवा द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट के तहत महादायी नदी की सहायक नदियों कालसा और बंदुरी में barrages/बाँधों का निर्माण किया जाना है. प्रस्तावित बाँधों के द्वारा जल की धारा को मोड़कर उसे महाप्रभा नदी से मिलाने की योजना है. यह जानने की बात है कि महाप्रभा नदी ही उत्तरी कर्नाटक के कुछ जिलों जैसे धारवाड़, बेलगाँव, बगलकोट में पेय जल मुहैया करती है.

पृष्ठभूमि

  • महादयी जल विवाद न्यायाधिकरण ने 14 अगस्त, 2018 को आदेश दिया था कि महादयी घाटी बेसिन से कर्नाटक तक 42 टीएमसी पानी (घटे हुए मालप्रभा नदी बेसिन में 3.9 टीएमसी सहित) का आवंटन किया जाए.
  • महाराष्ट्र को 1.33 टीएमसी पानी आवंटित किया गया था जबकि गोवा को ट्रिब्यूनल के अंतिम फैसले में 24 टीएमसी दिया गया था.
  • यूपीए – 2 सरकार ने 2010 में महादयी जल विवाद न्यायाधिकरण का गठन किया था. कर्नाटक सरकार, जिसने दोनों राज्यों के बीच महादयी नदी के पानी को साझा करने के बड़े मुद्दे पर पड़ोसी गोवा के साथ सींग बंद कर दिए हैं, ने न्यायाधिकरण को याचिका दी थी कि वह कलसा-बंडूरी नाला परियोजना के लिए 7.56 tmcft पानी छोड़ने की मांग कर रही है.

कलसा-बंडूरी नाला (डायवर्सन) परियोजना क्या है?

  • कलसा-बंडूरी नाला (डायवर्सन) परियोजना, जो अंतरराज्यीय महादयी नदी के पानी के 7.56 tmcft का उपयोग करेगी, कर्नाटक द्वारा हुबली-धारवाड़ के जुड़वां शहरों और बेलागवी और गदग के जिलों में पीने के पानी की आपूर्ति में सुधार करने के लिए शुरू की जा रही है.
  • इसमें कालिदास और बंडुरी, महादेई नदी की सहायक नदियों के लिए बैराज का निर्माण शामिल है, जो 7.56 टीएमसी पानी को मलप्रभा नदी तक ले जाती है जो जुड़वा शहरों की पेयजल जरूरतों को पूरा करती है.

GS Paper 2 Source: Economic Times

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UPSC Syllabus : Issues related to education.

Topic : Worldwide Educating for the Future Index (WEFFI) 2019

संदर्भ

पिछले दिनों दी इकोनॉमिस्ट इंटेलिजेंस यूनिट ने 2019 का WEFFI सूचकांक  2019 (Worldwide Educating for the Future Index ) प्रकाशित किया.

WEFFI सूचकांक क्या है?

  • यह सूचकांक Yidan Prize Foundation द्वारा निकाला जाता है.
  • इसमें आज के तेजी से बदलते हुए परिवेश में छात्रों को काम की माँग और जीवन के लिए तैयार करने में शिक्षा प्रणालियों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन किया जाता है.
  • यह विश्व का ऐसा पहला व्यापक वैश्विक सूचकांक है जिसमें शिक्षा प्रणालियों के प्रतिफलों के स्थान पर उन प्रणालियों से जुड़े तत्त्वों का अध्ययन होता है. इसके लिए यह विश्व की 35 अर्थव्यवस्थाओं में 15 से लेकर 24 वर्ष के छात्रों पर अपना ध्यान केन्द्रित करता है.

सूचकांक में क्रमांक कैसे निर्धारित होता है?

इस सूचकांक में देशों को इस आधार पर क्रमांक दिया जाता है कि वे कौशल आधारित शिक्षा छात्रों को देने में कितने समर्थ हैं. इसके लिए ये तीन श्रेणियाँ निर्धारित हैं –

  1. नीतिगत परिवेश
  2. शिक्षणगत परिवेश
  3. समग्र सामाजिक-आर्थिक परिवेश

इस बार भारत का प्रदर्शन

  1. 2019 के सूचकांक में भारत ने गत वर्ष के 40वें क्रमांक से छलांग लगाकर 35वाँ क्रमांक प्राप्त किया है.
  2. भारत को 53 अंक मिले हैं.
  3. प्रतिवेदन बताता है कि भारत की इस विषय में प्रगति का मूल कारण 2019 में लाइ गई नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति है.
  4. नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भविष्योन्मुख कौशलों, जैसे – विश्लेषणपरक सोच, संवाद एवं उद्यमिता का उल्लेख है.

वैश्विक प्रदर्शन

  1. सूचकांक में पहले दो स्थानों पर क्रमशः फ़िनलैंड और स्वीडन हैं.
  2. जहाँ तक विश्व की बड़ी-बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की बात है उनमें चीन, भारत और इंडोनेशिया ने अपने क्रमांक सुधारे हैं, परन्तु अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और रूस नीचे फिसले हैं.

आगे की चुनौतियाँ

  • अपने उच्चतर शिक्षा के तंत्र के अंतर्राष्ट्रीयकरण के अवसर को भुनाने में भारतीय शिक्षा तंत्र विफल रहा है.
  • एक विकेंद्रीकृत शिक्षातंत्र.

GS Paper 3 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Conservation related issues.

Topic : Species included in Appendix I of UN Convention on Migratory Species

संदर्भ

गुजरात के गांधीनगर में चल रहे प्रवासी प्रजाति संधि के पक्षकारों के 13वें सम्मेलन में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, एशियाई हाथी और बंगाल फ्लोरिकन को संयुक्त राष्ट्र प्रवासी प्रजाति संधि के परिशिष्ट 1 (Appendix I of UN Convention on Migratory Species) में सम्मिलित करने का निर्णय लिया गया है.

एशियाई हाथी

  • यह हाथी भारत, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और म्यांमार में पाया जाता है.
  • IUCN में इसे संकटग्रस्त (Endangered) की पदवी मिली हुई है.
  • इसके अतिरिक्त यह निम्नलिखित प्रलेखों में भी सूचीबद्ध है – संकटग्रस्त वन्य जीव एवं वनस्पति अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संधि (CITES) तथा भारतीय वन्यजीव सुरक्षा अधिनियम, 1972 की अनुसूची

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड 

  • यह विश्व के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में से एक है.
  • यह सबसे अधिक भारत के राजस्थान राज्य में पाया जाता है जहाँ इसे राज्य पक्षी घोषित किया गया है.
  • IUCN की लाल सूची में इसे “विकट रूप से संकटग्रस्त” (Critically Endangered) बताया गया है.
  • यह पक्षी CITES और भारतीय वन्यजीव सुरक्षा अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में भी सूचीबद्ध है.

बंगाल फ्लोरिकन

  • भारत में यह पक्षी उत्तर प्रदेश, असम और अरुणाचल प्रदेश में पाया जाता है.
  • IUCN लाल सूची में इसे भी “विकट रूप से संकटग्रस्त” (Critically Endangered) दर्शाया गया है.
  • यह पक्षी भी CITES और भारतीय वन्यजीव सुरक्षा अधिनियम, 1972 की अनुसूची I में भी सूचीबद्ध है.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Challenges to internal security through communication networks, role of media and social networking sites in internal security challenges, basics of cyber security; money-laundering and its prevention.

Topic : Clause 6 in Assam Accord

संदर्भ

असम में रहने वाले बंगाल मूल के या बांग्ला बोलने वाले मुसलमानों (जिन्हें मियाँ कहा जाता है), बंगाली हिन्दुओं और गुरखाओं ने 1985 के असम समझौते के उपवाक्य के 6 के कार्यान्वयन के विषय में गठित उच्चस्तरीय समिति की अनुशंसाओं पर चिंता व्यक्त की है.

इतिहास

असम समझौते, 1985 के उपवाक्य 6 के कार्यान्वयन के लिए एक 13 सदस्यीय समिति गठित हुई थी. इस समिति ने पिछले दिनों अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत कर दिया है.

चिंता का विषय क्या है?

यह समझा रहा है कि समझौते के उपवाक्य 6 के कार्यान्वयन के फलस्वरूप इन समुदायों को मूल समुदायों की सूची से बाहर होना पड़ेगा. जबकि इनमें से 80% असम में शताब्दियों से रहते आये हैं.

उपवाक्य 6 क्या है?

समझौते का उपवाक्य 6 कहता है कि असमिया लोगों की सांस्कृतिक, सामाजिक और भाषिक पहचान तथा विरासत को सुरक्षित, संरक्षित और प्रोत्साहित करने के लिए समुचित संवैधानिक, कानूनी एवं प्रशासनिक उपाय किये जाएँगे. परन्तु किसी भी सरकार ने 1985 के उपरान्त इस दिशा में कोई कानून नहीं बनाया है.

असम समझौता क्या है?

यह समझौता 1985 में भारत सरकार और अखिल असम छात्र संघ (All Assam Students Union – AASU) के नेताओं के बीच में हस्ताक्षरित हुआ था. ये नेता बांग्लादेश से आने वाले अवैध आव्रजकों को राज्य से बाहर निकालने के लिए छह वर्षों से संघर्ष कर रहे थे. इस समझौते पर हस्ताक्षर होने से यह संघर्ष समाप्त हो गया था.


Prelims Vishesh

Yongle Blue Hole (YBH) :-

Yongle Blue Hole

  • दक्षिणी चीन सागर के नीचे एक विशाल छिद्र है जिसके अन्दर 8,000 वर्ष से अधिक पुराना कार्बन अटका पड़ा है.
  • यह छिद्र अभी तक ज्ञात सबसे गहरा समुद्री गुफा है जो दक्षिणी चीन सागर में स्थित खीसा द्वीप समूह (Xisha Islands) में स्थित है.
  • इसकी गहराई मोटा-मोटी 300 मीटर है.
  • इसका पानी समुद्र के आस-पास के पानी से अलग-थलग है और इसमें वृष्टि से बहुत थोड़ा जल पहुँचता है. अतः ऑक्सीजन रहित समुद्री पारिस्थितिकी के रसायनशास्त्र के अध्ययन के लिए यह एक अच्छा स्थल है.

German court scraps ban on assisted suicide :

  • पिछले दिनों जर्मनी के सर्वोच्च न्यायालय ने यह व्यवस्था दी कि 2015 में लाया गया वह कानून असंवैधानिक था जिसमें पेशेवरों को आत्महत्या में सहायता पहुँचाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था.
  • विदित हो कि ऐसे रोगी जिनका रोग उपचार योग्य नहीं और जिनकी मृत्यु अवश्यंभावी है वे बहुधा चाहते हैं कि डॉक्टरों एवं आत्महत्या में सहायता पहुँचाने वाले कतिपय संगठनों के सहयोग से अपने जीवन का अंत कर लें.

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