Sansar डेली करंट अफेयर्स, 23-28 February 2022

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Contents

Sansar Daily Current Affairs, 23 February 2022


GS Paper 1 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: स्वतंत्रता संग्राम- इसके विभिन्न चरण और देश के विभिन्न भागों से इसमें अपना योगदान देने वाले महत्त्वपूर्ण व्यक्ति/उनका योगदान.

Topic : Chauri Chaura

संदर्भ

4 फरवरी को “चौरी-चौरा” घटना के 100 वर्ष पूरे हो गये. 4 फरवरी को चौरी-चौरा कांड के सौ वर्ष पूर्ण होने पर स्वतंत्रता संग्राम के नायकों को स्मरण किया गया.

चौरी चौरा की घटना के बारे में 

4 फरवरी 1922 को संयुक्त प्रांत (वर्तमान उत्तरप्रदेश) के गोरखपुर जिले के चौरी-चौरा गाँव में कांग्रेस के कार्यकर्ता शराब बिक्री एवं खाद्यान्न के मूल्यों में हुई वृद्धि का विरोध कर रहे थे. पुलिस ने इन कार्यकर्ताओं को बुरी तरह पीटा, परिणामस्वरूप प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने पुलिस पर हमला कर दिया, पुलिस की तरफ से गोलीबारी होने लगी. इससे भीड़ आक्रामक हो गई और पुलिस पर आक्रमण कर दिया, पुलिसकर्मी थाने में जाकर छिपे तो भीड़ ने थाने को भी जला दिया. जो सिपाही बाहर आये उन्हें भी भीड़ ने मार दिया, इस घटना में 23 पुलिसकर्मी मारे गये.

चौरी चौरा की घटना का प्रभाव

संयुक्त प्रांत के एक छोटे से गाँव में हुई यह घटना इतनी महत्त्वपूर्ण थी कि गांधीजी ने असहयोग आंदोलन को वापस ले लिया और उनका बहुप्रतीक्षित सविनय अवज्ञा आंदोलन 6 वर्षों के लिए स्थगित हो गया. इस घटना से चौरी-चौरा गाँव का नाम भारतीय इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया. सरकार ने हिंसा करने वाले 19 कार्यकर्ताओं को फांसी पर चढ़ा दिया. गांधीजी पर राजद्रोह का मुकदमा चला और मार्च 2022 में उनको 6 वर्षों के लिए जेल भेज दिया गया. गांधीजी ने इस घटना के बाद आंदोलन वापस इसलिए लिया कि उनका मानना था भारतीयों ने अहिंसा के सिद्धांत को अच्छी तरह नही सीखा है. 16 फरवरी 1922 को गांधीजी ने अपने लेख ‘चौरी चौरा का अपराध’ में लिखा कि अगर ये आंदोलन वापस नहीं लिया जाता तो दूसरी जगहों पर भी ऐसी घटनाएँ होतीं. हिंसक आंदोलन को तो सरकार, राज्य के हितों की रक्षा के बहाने आसानी से कुचल सकती है.


GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय.

Topic : Beijing Olympics: What a diplomatic boycott means?

संदर्भ

भारत ने चीन में आयोजित किये जा रहे शीतकालीन ओलिंपिक खेलों का कूटनीतिक बहिष्कार (Deplomatic Boycott) करने का निर्णय किया है. भारत ने इसके पीछे वजह बताई है कि चीन द्वारा जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में हुई झड़प में शामिल एक सैन्य अधिकारी को टॉर्चबियरर (torchbearer) के रूप में दिखाना निंदनीय है. यह भारत द्वारा किसी भी ओलिंपिक खेल का पहला बहिष्कार है. ज्ञातव्य है कि भारत से सिर्फ एक एथलीट स्कियर (skier) आरिफ़ खान इन खेलों में भाग ले रहे हैं.

उल्लेखनीय है कि कई देशों ने इन शीतकालीन खेलों का कूटनीतिक बहिष्कार करने का निर्णय किया है, इनमे शामिल हैं- ऑस्ट्रिया, स्वीडन ने कोविड प्रोटोकॉल की वजह से जबकि अमरीका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जापान, न्यूज़ीलैण्ड, लिथुआनिया, लात्विया, एस्टोनिया, बेल्जियम, नीदरलैंड, डेनमार्क, चेक गणराज्य देशों ने शिनजियांग एवं तिब्बत में मानवाधिकार उल्लंघन का हवाला देते हुए इन खेलों का बहिष्कार करने का निर्णय किया है.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता.

Topic : Dark Energy and Dark Matter

संदर्भ

खगोलीय प्रेक्षणों से पता चलता है, कि ब्रह्मांड का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा ‘डार्क मैटर’ (Dark Matter) से बना हुआ है, जोकि केवल गुरुत्वाकर्षण खिंचाव के माध्यम से शेष ब्रह्मांड के साथ अंतःक्रिया करता है.

प्रयोगशालाओं में किए गए कई बड़े प्रयोगों में डार्क मैटर के संभावित ‘मौलिक कणों’ का पता लगाने की कोशिश की गयी है. हालांकि, अब तक इन डार्क मैटर कणों का पता नहीं चल सका है.

डार्क मैटर का आकलन

शोधकर्ताओं द्वारा ‘लेंसिंग सिग्नेचर’ के ‘अप्रेक्षण’ (Non-Observation) अर्थात ‘लेंसिंग सिग्नेचर’ (Lensing Signatures) के दिखाई नहीं देने का उपयोग यह आकलन करने के लिए किया जाता है, कि ब्लैक होल का कितना भाग ‘डार्क मैटर’ से बना हुआ हो सकता है. चूंकि ‘गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग’ (Gravitational lensing) डार्क मैटर की मात्रा और वितरण के प्रति प्रत्यक्ष रूप से संवेदनशील होती है, अतः यह ‘ब्रह्मांड विज्ञानियों’ के लिए काफी उपयोगी होती है.

‘गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग’ एवं इसकी क्रियाविधि

‘गुरुत्वाकर्षण लेंसिंग’, आइंस्टीन के ‘सामान्य सापेक्षता सिद्धांत’ (Theory of General Relativity) का एक प्रभाव है – सीधे शब्दों में कहें, तो ‘द्रव्यमान’, प्रकाश को मोड़ देता है.

  • किसी विशालकाय पिंड का गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र अंतरिक्ष में काफी दूर तक विस्तारित होता है, और उस पिंड के करीब से गुजरने वाली प्रकाश किरणों को (और अपने गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र के माध्यम से) किसी अन्य दिशा में मोड़ने और दोबारा से केंद्रित करने का कारण बनता है.
  • पिंड, जितनी अधिक विशालकाय होता है, उसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र उतना ही सशक्त होता है और इसलिए प्रकाश किरणों का झुकाव भी अधिक होता है. जिस प्रकार ‘ऑप्टिकल लेंस’ बनाने के लिए सघन सामग्री का उपयोग करने से ‘अपवर्तन’ की मात्रा अधिक होती है.

‘डार्क एनर्जी’ क्या है?

अब तक जितना कुछ ज्ञात है उससे कही अधिक अज्ञात है. हम अंतरिक्ष में ‘डार्क एनर्जी’ (Dark Matter) की मौजूद मात्रा के बारे में जानते हैं, क्योंकि हम यह ज्ञात है कि यह ब्रह्मांड के विस्तार को किस प्रकार प्रभावित करती है. इसके अलावा, ‘डार्क एनर्जी’ एक पूर्ण रहस्य है. यह एक अति महत्त्वपूर्ण रहस्य है, क्योंकि ब्रह्मांड का लगभग 68% हिस्सा ‘डार्क एनर्जी’ से ही बना हुआ है.

  • ‘डार्क एनर्जी’ ऊर्जा का एक काल्पनिक रूप है, जो गुरुत्वाकर्षण के विपरीत व्यवहार करते हुए एक नकारात्मक, प्रतिकारक दबाव को दर्शाती है.
  • यह, हमारे ब्रह्मांड के विस्तार की दर को धीमा करने के बजाय समय के साथ तेज कर रही है, जोकि बिग बैंग से उत्पन्न हुए ब्रह्मांड से जो अपेक्षा की जा सकती है, उसके ठीक विपरीत है.

‘डार्क एनर्जी’, डार्क मैटर से किस प्रकार अलग है?

हम जो कुछ भी देखते हैं – ग्रह, चंद्रमा, विशाल आकाशगंगाएँ – यह ब्रह्मांड का 5% से भी कम हिस्सा हैं. पूरे ब्रह्मांड में, लगभग 27% डार्क मैटर है और 68% डार्क एनर्जी है.

  • ‘डार्क मैटर’ (Dark Matter), आकाशगंगाओं को परस्पर आकर्षित करता है और एक साथ जोड़कर रखता है, और ‘डार्क एनर्जी’ हमारे ब्रह्मांड के विस्तार का कारण बनती है.
  • डार्क मैटर के अस्तित्व का संकेत 1920 के दशक में मिल गया था, जबकि ‘डार्क एनर्जी’ की खोज वर्ष 1998 तक नहीं हुई थी.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता.

Topic : NASA’s Lucy mission

संदर्भ

‘लूसी मिशन’ (Lucy mission) के तहत भेजा गया अंतरिक्ष यान अगले 12 वर्षों में जिन कुछ क्षुद्रग्रहों का भ्रमण करेगा, ‘यूरीबेट्स’ (Eurybates) उन क्षुद्रग्रहों में से एक है.

  • हाल ही में, ‘लास वेगास’ में खगोलविदों ने एक तारे का अवलोकन करने के दौरान, उस तारे को कुछ समय के लिए गायब होते हुए देखा, क्योंकि ‘यूरीबेट्स’ क्षुद्रग्रह इस तारे के सामने से होकर गुजरा था.
  • जैसे ही यूरीबेट्स ने तारे को अपनी छाया में लिया – वैज्ञानिक शब्दावाली में इस घटना को ‘ग्रहण’ (Occultation) कहा जाता है- क्षुद्रग्रह के आकार की लगभग एक 40 मील (64 किलोमीटर) चौड़ी छाया इस क्षेत्र के ऊपर से गुजरती हुई देखी गयी.
  • इस जानकारी का उपयोग ‘लूसी मिशन’ के शोधकर्ताओं द्वारा, वर्ष 2027 में लूसी अंतरिक्ष यान के यूरीबेट्स के नजदीक से गुजरने के दौरान एकत्र किए गए डेटा को पूरा करने के लिए किया जाएगा.

‘आकल्टेशन’ या ‘ग्रहण’ क्या होता है?

  • एक खगोलीय पिंड के किसी अन्य खगोलीय पिंड के सामने से गुजरने के दौरान, पहला पिंड, दूसरे पिंड को पर्यवेक्षक की दृष्टि से ओझल कर देता है. इस जटिल परिघटना को ‘ग्रहण’‘ या ‘आकल्टेशन’ (Occultations) कहा जाता है.
  • इस परिघटना का सबसे प्रमुख उदाहरण ‘सूर्य ग्रहण’ है, जो चंद्रमा के सूर्य और पृथ्वी के बीच से होकर गुजरने पर घटित होती है. इस दौरान चंद्रमा, सूर्य को हमारी दृष्टि से ओझल कर देता है.

‘लूसी मिशन’ के बारे में

यह, बृहस्पति ग्रह के ‘ट्रोजन क्षुद्रग्रहों’ (Trojan asteroids) का अन्वेषण करने हेतु नासा द्वारा भेजा जाने वाला पहला मिशन है.

  • यह मिशन, सौर ऊर्जा से संचालित है.
  • इस मिशन के पूरा होने में 12 साल से अधिक लंबा समय लगने का अनुमान है. इस दौरान, अंतरिक्ष यान “युवा सौर मंडल” के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए लगभग 6.3 बिलियन किमी की यात्रा करते हुए ‘आठ क्षुद्रग्रहों’ का दौरा करेगा.

मिशन का उद्देश्य

‘लूसी मिशन’ को ‘ट्रोजन क्षुद्रग्रहों’ के समूह में शामिल विविध क्षुद्रग्रहों की संरचना को समझने, क्षुद्रग्रहों के द्रव्यमान और घनत्व को निर्धारित करने तथा ट्रोजन क्षुद्रग्रहों की परिक्रमा करने वाले उपग्रहों और रिंगों को देखने और उनका अध्ययन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है.

‘ट्रोजन क्षुद्रग्रह’ के बारे में

‘ट्रोजन क्षुद्रग्रहों’ (Trojan asteroids) को प्रारंभिक सौर मंडल का अवशेष माना जाता है, और इनका अध्ययन करने से वैज्ञानिकों को इनकी उत्पत्ति, विकास और इनके वर्त्तमान स्वरूप को समझने में मदद मिलेगी.

माना जाता है, कि इन ‘क्षुद्रग्रहों’ की उत्पत्ति, लगभग 4 अरब साल पहले सौर मंडल का निर्माण होने के साथ ही हुई थी, और ट्रोजन क्षुद्रग्रहों का निर्माण, उन्ही पदार्थों से हुआ है, जिनसे सौर मंडल के अन्य ग्रह बने थे.


Sansar Daily Current Affairs, 24 February 2022


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus: संसद और राज्य विधायिका- संरचना, कार्य, कार्य-संचालन, शक्तियाँ एवं विशेषाधिकार और इनसे उत्पन्न होने वाले विषय.

Topic : Motion of Thanks

संदर्भ

हाल ही में लगभग कई वक्ताओं ने राज्यसभा एवं लोकसभा में, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा की. 

धन्यवाद प्रस्ताव

राष्ट्रपति के अभिभाषण के पश्चात प्रत्येक सदन में सत्तापक्ष के सांसदों द्वारा ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ (Motion of thanks) प्रस्तुत किया जाता है.

  • इस दौरान, राजनीतिक दल धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा करते हैं तथा संशोधन करने हेतु सुझाव भी देते हैं.
  • ‘राष्ट्रपति का अभिभाषण’ और ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ की कार्रवाई, संविधान के अनुच्छेद 86(1) और 87(1) और लोकसभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन नियमवाली के नियम 16 ​​से लेकर नियम 24 तक के अनुसार की जाती है.

‘धन्यवाद प्रस्ताव’ में संशोधन

राष्ट्रपति द्वारा सदन को संबोधित करने के पश्चात, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ में संशोधन सदन के पटल पर पेश किया जा सकता है.

  • संशोधन में अभिभाषण में निहित मामलों के साथ-साथ उन विषयों को भी संदर्भित किया जा सकता है, जिनका, संशोधन प्रस्ताव पेश करने वाले सदस्य की राय में, अभिभाषण में उल्लेख नहीं किया गया था.
  • ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ में संशोधन को, अध्यक्ष अपने विवेकानुसार उचित तरीके से पेश कर सकता है.

सीमाएं

  • ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ के तहत, सदस्य उन विषयों पर चर्चा नहीं कर सकते हैं, जिनके लिए केंद्र सरकार प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार नहीं होती है.
  • इसके अलावा, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस के दौरान राष्ट्रपति का उल्लेख नहीं किया जा सकता, क्योंकि अभिभाषण की विषयवस्तु राष्ट्रपति द्वारा नहीं, बल्कि केंद्र सरकार द्वारा तैयार की जाती है.

‘धन्यवाद प्रस्ताव’ किस प्रकार पारित होता है?

संसद सदस्यों द्वारा ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ पर मतदान किया जाता है. यह प्रस्ताव, दोनों सदनों में पारित होना आवश्यक होता है.

‘धन्यवाद प्रस्ताव’ के पारित न होने को, सरकार की हार समझा जाता है और यह सरकार के पतन का कारण बन सकता है. यही कारण है, कि ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ को ‘अविश्वास प्रस्ताव’ के समान माना जाता है.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: वृद्धि एवं विकास.

Topic : Sri Lanka Crisis

संदर्भ

हाल ही में भारत के निर्यात आयात (EXIM) बैंक और श्रीलंका सरकार ने 500 मिलियन अमरीकी डालर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस ऋण समझौते का उद्देश्य श्रीलंका में सबसे खराब आर्थिक संकट के बीच श्रीलंका को अपनी मौजूदा ईंधन की कमी से निपटने में मदद करना है. इससे पहले भारत ने जनवरी 2022 में श्रीलंका को 400 मिलियन अमरीकी डालर की मुद्रा अदला-बदली (Currency Swap) की थी.

करेंसी स्वैप समझौता क्या होता है?

यह समझौता दो देशों के बीच, एक देश की मुद्रा के बदले दूसरे देश की मुद्रा प्राप्त करने हेतु किया जाता है. इसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा बाज़ार और विनिमय दर में स्थिरता तथा अन्य जोखिमों से बचना होता है. एक करेंसी स्वैप सुविधा, एक देश को बाजार से सीधे उधार लेने की तुलना में बेहतर ब्याज दरों पर विदेशी मुद्रा ऋण प्राप्त करने में मदद करती है, इसके तहत भुगतान समझौते के समय पर तय विनिमय दर पर किया है. यह विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव के कारण जोखिम को समाप्त करता है.

उल्लेखनीय है कि बढ़ती खाद्य कीमतों, मुद्रा के अवमूल्यन और घटते विदेशी मुद्रा भंडार के कारण श्रीलंका सरकार ने पिछले वर्ष आर्थिक आपातकाल की घोषणा की थी.

“आपातकालीन नियमों” के तहत, बाजार की अनियमितताओं और जमाखोरी को रोकने के लिए अधिकारियों को सरकार द्वारा गारंटीकृत कीमतों पर धान, चावल और चीनी सहित आवश्यक खाद्य पदार्थों के स्टॉक को खरीदकर, आम जनता को “रियायती दर” पर आवश्यक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने की शक्ति प्रदान की गई. आपातकालीन नियमों को लागू करना इसलिए भी आवश्यक था क्योंकि अभी श्रीलंका में, सभी उपभोक्ताओं तक आवश्यक सामग्री पहुँचने को सुनिश्चित करने के लिए कोई ‘सार्वभौमिक सार्वजनिक वितरण प्रणाली” या राशन कार्ड’ व्यवस्था मौजूद नहीं है.

श्रीलंकाई आर्थिक संकट के बारे में

कोविड 19 महामारी के कारण, श्रीलंका में पर्यटन उद्योग को काफी नुकसान हुआ है, जो सकल घरेलू उत्पाद के 10% से अधिक का प्रतिनिधित्व करता है और भारी विदेशी मुद्रा लाता है. पिछले दिनों कोविड संक्रमण मामलों में वृद्धि होने के बाद 20 अगस्त को घोषित किए गए लॉकडाउन के दौरान कई लोग, विशेष रूप से दैनिक वेतन भोगी, और कम आय वाले परिवार, खाद्यान्न खरीदने में असमर्थ होने की शिकायत कर रहे हैं, और कई मामलों में दूध, चीनी और चावल जैसी आवश्यक वस्तुएं, आम लोगों की पहुँच से बाहर हो गई हैं.

श्रीलंका अपनी जरूरतों, आवश्यक वस्तुओं, जैसे- पेट्रोलियम, चीनी, डेयरी उत्पाद, गेहूं, चिकित्सा आदि की आपूर्ति के लिए आयात पर निर्भर है, जबकि दूसरी ओर देश का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घट रहा है, जो कि नवंबर 2019 में $7.5 बिलियन से घटकर जुलाई 2021 में $2.8 बिलियन रह गया है, इसके अतिरिक्त श्रीलंका सरकार के सामने आगामी वर्षों में विदेशी ऋण को चुकाने की चुनौती भी बनी हुई है.

श्रीलंका के बारे में

श्रीलंका, भारत के दक्षिण में स्थित एक छोटा द्वीपीय देश है, यह भारत से पाक जलडमख्मध्य से पृथक होता है. श्रीलंका के अधिकांश निवासी थेरवाद बौद्ध धर्मावलंबी है. यहाँ बहुमत सिंहली भाषा भाषियों का है एवं तमिल भाषा भाषी लोग अल्पमत में है. दक्षिण एशिया के अन्य देशों की तरह श्रीलंका भी लंबे समय तक औपनिवेशिक शासन के अधीन रहा, 4 फ़रवरी 1948 को इसे स्वतंत्रता मिली.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन.

Topic : Coastal Regulation Zone norms

संदर्भ

‘अवैध निर्माण’ एवं ‘तटीय विनियमन क्षेत्र’ (Coastal Regulation Zone – CRZ) नियमों के उल्लंघन की शिकायत मिलने के बाद बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) द्वारा जुहू में स्थित केंद्रीय मंत्री ‘नारायण राणे’ के बंगले का निरीक्षण पूरा कर लिया गया है.

संबंधित प्रकरण

केंद्रीय मंत्री का बंगला ‘तटीय विनियमन क्षेत्र’ (CRZ) नियमों का उल्लंघन करते हुए, समुद्र से 50 मीटर दूरी के भीतर अवैध रूप से बनाया गया है..

‘तटीय विनियमन क्षेत्र’ मानदंड

  • भारत के पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 3 के तहत, पहली बार फरवरी 1991 में, ‘तटीय विनियमन क्षेत्र’ अधिसूचना जारी की गई थी.
  • वर्ष 2018 में, तटीय विनियमन क्षेत्र संबंधी नए नियम जारी किए गए. इनका उद्देश्य इस क्षेत्र में निर्माण पर लगे कुछ प्रतिबंधों को हटाना, अनापत्ति प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना और तटीय क्षेत्रों में पर्यटन को प्रोत्साहित करना था.

तटीय विनियमन क्षेत्र मानदंडों का उद्देश्य

ये मानदंड, सागर तट से एक निश्चित दूरी के भीतर कुछ विशेष गतिविधियों, जैसे- बड़े निर्माण, नए उद्योगों की स्थापना, खतरनाक सामग्री का भंडारण या निपटान, खनन, भूमि-उपयोग परिवर्तन और बांध निर्माण पर रोक लगाते हैं.

‘विनियमन क्षेत्र’ की परिभाषा

सभी नियमों में, विनियमन क्षेत्र (Regulation Zone) को उच्च-ज्वार रेखा से 500 मीटर तक के क्षेत्र के रूप में परिभाषित किया गया है.

CRZ में प्रतिबंध

  • CRZ में प्रतिबंध, क्षेत्र की आबादी, पारिस्थितिक संवेदनशीलता, किनारे से दूरी तथा क्षेत्र के प्राकृतिक उद्यान अथवा वन्यजीव क्षेत्र के रूप में अधिसूचित होने जैसे मानदंडों पर निर्भर करते है.
  • नए नियमों के अनुसार, मुख्यभूमि के तट के निकटवर्ती सभी द्वीपों और मुख्य भूमि के सभी अप्रवाही जल वाले (Backwater) द्वीपों के लिए 20 मीटर की सीमा तक नो-डेवलपमेंट ज़ोन घोषित किया गया है.

CRZ-III (ग्रामीण) के लिए प्रतिबंधो की दो भिन्न श्रेणियों को निर्धारित किया गया है

  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, 2,161 प्रति वर्ग किमी जनसंख्या घनत्व सहित घनी आबादी वाले ग्रामीण क्षेत्रों (CRZ-IIIA) में, नो-डेवलपमेंट ज़ोन की सीमा, उच्च-ज्वार रेखा से 50 मीटर तक निर्धारित की गयी है, जबकि पहले यह सीमा 200 मीटर थी.
  • CRZ-IIIB श्रेणी (2,161 प्रति वर्ग किमी से कम जनसंख्या घनत्व वाले ग्रामीण क्षेत्र) में नो-डेवलपमेंट ज़ोन की सीमा, उच्च-ज्वार रेखा से 200 मीटर तक निर्धारित की गयी है.

कार्यान्वयन

हालांकि, तटीय विनियमन क्षेत्र (CRZ) संबंधी नियम केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा बनाए गए हैं, किन्तु, इनका कार्यान्वयन तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरणों (Coastal Zone Management Authorities) के माध्यम से राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: संचार नेटवर्क के माध्यम से आंतरिक सुरक्षा को चुनौती, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों में मीडिया और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों की भूमिका, साइबर सुरक्षा की बुनियादी बातें, धन-शोधन और इसे रोकना.

Topic : Data Accessibility Policy

संदर्भ

हाल ही में, ‘इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा ‘आंकड़ा सुलभता’ / डेटा एक्सेसिबिलिटी एवं उपयोग नीति (Data Accessibility and Use policy) का मसौदा तैयार किया गया है.

नीति के प्रमुख बिंदु

  • ‘आंकड़ा सुलभता एवं उपयोग नीति’ (Data Accessibility and Use policy) के अंतर्गत, जारी दशक की वर्तमान और उभरती प्रौद्योगिकी मांगों के अनुरूप डेटा उपलब्धता, गुणवत्ता और उपयोग में सुधार करने का प्रस्ताव किया गया है.
  • कोई भी डेटा साझाकरण (Data Sharing) भारत के कानूनी ढांचे, इसकी राष्ट्रीय नीतियों और कानून के साथ-साथ मान्यता प्राप्त अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों के भीतर होगा.
  • केंद्र सरकार और अधिकृत एजेंसियों द्वारा सृजित, निर्मित, एकत्रित या संग्रहीत सभी डेटा और जानकारी को इस नीति के तहत कवर किया जाएगा.
  • प्रयोज्यता: डेटासेट की नकारात्मक सूची के तहत वर्गीकृत डेटा, तथा संबंधित मंत्रालय या विभाग द्वारा परिभाषित, नियंत्रित पहुँच एवं केवल विश्वसनीय उपयोगकर्ताओं के साथ साझा किए जाने वाले डेटा को छोड़कर, सभी सरकारी डेटा खुला रहेगा और साझा करने योग्य होगा.

नीति के तहत प्रस्तावित महत्त्वपूर्ण निकाय

  • इंडिया डेटा ऑफिस (IDO):‘आंकड़ा सुलभता एवं उपयोग नीति’ के तहत, सरकार और अन्य हितधारकों के बीच डेटा सुलभता/ अभिगम्यता और साझाकरण को सुव्यवस्थित और एकीकृत करने के लिए ‘इंडिया डेटा ऑफिस’ (India Data Office – IDO) की स्थापना का प्रस्ताव किया गया है.
  • संस्थागत ढांचे के मामले में, मसौदे में कहा गया है कि प्रत्येक मंत्रालय या विभाग में मुख्य डेटा अधिकारियों की अध्यक्षता में डेटा प्रबंधन इकाइयां होनी चाहिए, जो इस नीति के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए आईडीओ के साथ मिलकर काम करेंगी.
  • इंडिया डेटा काउंसिल – इसमें आईडीओ और मुख्य डेटा अधिकारी शामिल होंगे. इसका गठन मंत्रालयों, विभागों और राज्य सरकारों के बीच विचार-विमर्श की आवश्यकता वाले कार्यों को करने के उद्देश्य से किया जाएगा.

अपेक्षित नीतिगत परिणाम

  • संपूर्ण अर्थव्यवस्था में उच्च-मूल्य वाले डेटा को अनलॉक करना.
  • एक अनुकूल और सशक्त शासन रणनीति को सुगम बनाना.
  • एक ‘इंटरऑपरेबल डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर’ को साकार करना.
  • डेटा कौशल और डेटा-संचालित संस्कृति का निर्माण करना.

संबंधित चिंताएं

परामर्श और प्रारूपण प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव: नीति तैयार करने के दौरान ‘परामर्श की प्रक्रिया’ पारदर्शी नहीं रही है.

प्रतिकूल राजस्व उद्देश्य: नीति की ‘प्रस्तावना’ में कहा गया है कि “भारत की 5 ट्रिलियन डॉलर की डिजिटल अर्थव्यवस्था बनने की महत्वाकांक्षा डेटा के मूल्य का दोहन करने की उसकी क्षमता पर निर्भर करती है”. इसके अलावा, नीति का प्राथमिक उद्देश्य नागरिक डेटा की बिक्री के माध्यम से ‘राजस्व सृजन’ प्रतीत होता है.

नागरिकों की सूचनात्मक गोपनीयता पर हानिकारक प्रभाव: ‘निजी डेटा संरक्षण कानून’ की अनुपस्थिति में, सरकारी विभागों में डेटा के परिकल्पित अंतर-विभागीय साझाकरण से नागरिकों की गोपनीयता का व्यापक उल्लंघन हो सकता है.

प्रमुख अवधारणाओं के संदर्भ में स्पष्ट और संक्षिप्त परिभाषाओं का अभाव: नीति के तहत आरंभ की गई ‘नई अवधारणाओं’ को अस्पष्ट तरीके से परिभाषित किया गया है, जिससे इनकी गलत व्याख्या की जा सकती है.

उदाहरण के लिए, ‘आंकड़ा सुलभता एवं उपयोग नीति’ के तहत ‘शासन और नवाचार’ के लिए आवश्यक ‘उच्च-मूल्य वाले डेटा सेट’ की एक अलग श्रेणी का निर्माण किया गया है, जिससे इन आंकड़ों तक पहुंच में तेजी आएगी. हालाँकि, बैकग्राउंड नोट या नीति में कहीं भी इस श्रेणी को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है.


Sansar Daily Current Affairs, 25 February 2022


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: केंद्रीय क्षेत्र की योजना, विकास से संबंधित मुद्दे.

Topic : One Nation One Ration Card Scheme – ONORC

संदर्भ

हाल ही में छत्तीसगढ़ राज्य में लागू की गई. इसके साथ ही 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वन नेशन वन राशन कार्ड योजना चालू हो गई है. यह अब राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (National Food Security Act) में शामिल 96.8% आबादी को कवर कर रही है. उल्लेखनीय है कि जून 2021 में सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 31 जुलाई तक ONORC को लागू करने के लिए कहा था.

एक राष्ट्र –  एक राशन कार्ड योजना क्या है?

यह एक राष्ट्रीय योजना है जो यह सुनिश्चित करती है कि जन-वितरण प्रणाली से लाभ लेने वाले सभी व्यक्ति, विशेषकर एक स्थान से दूसरे स्थान जाने वाले, देश के अन्दर किसी भी अपनी पसंद की PDS दुकान से अनाज आदि प्राप्त कर सकें.

लाभ

इस योजना का लाभ यह होगा कि खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत सब्सिडी युक्त अनाज पाने से कोई निर्धन व्यक्ति इसलिए वंचित न हो जाए कि वह एक स्थान से दूसरे स्थान चला गया है. इस योजना से एक अतिरिक्त लाभ यह होगा कि कोई व्यक्ति अलग-अलग राज्यों में जन-वितरण प्रणाली का लाभ लेने के लिए एक से अधिक राशन कार्ड नहीं बनवा पायेगा.

माहात्म्य

इस योजना से के फ़लस्वरूप लाभार्थी किसी एक PDS दुकान से बंधा नहीं रह जाएगा और ऐसी दुकान चलाने वालों पर उसकी निर्भरता घट जायेगी और साथ ही भ्रष्टाचार के मामलों में भी कटौती होगी.

मेरी राय – मेंस के लिए

चुनौतियाँ

  • प्रत्येक राज्य के पास जन-वितरण प्रणाली के विषय में अपने नियम होते हैं. यदि एक राष्ट्र – एक राशन कार्ड योजना लागू की गई तो संभावना है कि इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिले. वैसे भी सभी जानते हैं कि इस प्रणाली में भ्रष्टाचार होता रहता है.
  • इस योजना से जन-सामान्य का कष्ट बढ़ जाएगा और बिचौलिए तथा भ्रष्ट PDS दुकान के मालिक उसका शोषण करेंगे.
  • इन्हीं कारणों से तमिलनाडु ने इस योजना का विरोध किया है और कहा है कि इसको लागू करने से अवांछित परिणाम होंगे. साथ ही उसका कहना है कि यह योजना संघवाद पर कुठाराघात करती है.
  • वैकल्पिक वितरण केंद्र खोलना: यदि आपात स्थितियाँ राशन की दुकानों पर अधिक दबाव बनाए रखती हैं जिससे सेवा बाधित होती है तो कमज़ोर समूहों तक खाद्यान्न की पहुँच सुनिश्चित करने के लिये वैकल्पिक वितरण चैनलों पर विचार किया जा सकता है.
  • पोषाहार सुरक्षा पर ध्यान देनाः खाद्य सुरक्षा को पोषाहार सुरक्षा के व्यापक ढाँचे से देखा जाना चाहिए. इसलिये ONORC को एकीकृत बाल विकास सेवाओं, मध्याह्न भोजन, टीकाकरण, स्वास्थ्य देखभाल और अन्य सुविधाओं की सुवाह्यता या पोर्टेबिलिटी को अनुमति देना चाहिये.
  • PDS को फूड कूपन से प्रतिस्थापित करना: दीर्घावधि में PDS प्रणाली को एक सुदृढ़ फ़ूड कूपन सिस्टम या प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण से प्रतिस्थापित किया जा सकता है. यह व्यवस्था ऐसी होगी जहाँ गरीबी रेखा से नीचे का परिवार किसी भी किराना स्टोर से बाज़ार मूल्य पर चावल, दाल, चीनी और तेल की खरीद कूपन के माध्यम से या नकद भुगतान द्वारा कर सकता है.

ONORC खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू होने के बाद से सार्वजनिक वितरण पारिस्थितिकी तंत्र में लाया गया एक दूरगामी सुधार है. यह बेरोज़गार प्रवासी श्रमिकों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करेगा और ‘सतत् विकास लक्ष्य 2: वर्ष 2030 तक भुखमरी की समाप्ति’ (SDG 2: Ending hunger by 2030) के तहत निर्धारित लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगा.


GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus: केंद्रीय क्षेत्र की योजना, विकास से संबंधित मुद्दे.

Topic : Bharatmala Pariyojana

संदर्भ

हाल ही में परिवहन, पर्यटन एवं संस्कृति सम्बन्धी संसद की स्थायी समिति ने भारतमाला परियोजना के अंतर्गत “पत्तन सम्पर्क सड़कों” के निर्माण में देरी पर चिंता व्यक्त करते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की आलोचना की है.

उल्लेखनीय है कि भारतमाला परियोजना के प्रथम चरण के अंतर्गत 2017-18 से 2021-22 तक की अवधि में लगभग 2200 किमी पत्तन सम्पर्क सड़कों का निर्माण किया जाना था, इसमें से अब तक केवल 168 किमी सड़कें ही बनाई गई हैं. इसके अलावा NHAI के पास स्वीकृत कर्मियों की संख्या 1892 है जबकि केवल 1122 कर्मी ही कार्यरत हैं.

समिति की सिफारिशें

रखरखाव एवं मरम्मत को अधिक से अधिक प्राथमिकता एवं महत्व दिया जाना चाहिए॥| > टोल पर राजस्व की हानि को रोकने के लिए समानांतर सड़कों के निर्माण को रोकने हेतु कानून बनाया जाना चाहिए| > यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वित्तपोषण के लिए अनुरोध के समय धन सम्बन्धी जरूरतों को सही तरीके से प्रस्तुत किया गया है या नही. > सड़क परियोजनाओ का एक केन्द्रीय डेटाबेस बनाया जाना चाहिए.

भारतमाला परियोजना

इसकी शुरुआत 25 अक्टूबर, 2017 को हुई. भारतमाला परियोजना राजमार्गों के निर्माण की परियोजना है जो NHDP के पश्चात् देश की ऐसी सबसे बड़ी परियोजना है. इसके अंतर्गत देश-भर में 50 हजार किलोमीटर राजमार्गों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है. इस परियोजना का मूल उद्देश्य भारत में आर्थिक गलियारों, सीमान्त क्षेत्रों और दूरस्थ क्षेत्रों के बीच सम्पर्क की व्यवस्था में सुधार करना है जिससे कि देश-भर में माल ढुलाई का काम तेजी से हो सके और निर्यात को बढ़ावा मिले.

NHDP क्या है?

भारत में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने व्‍यापक राष्‍ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना शुरू की है देश की अब तक की सबसे बड़ी राजमार्ग परियोजना है. इस परियोजना का क्रियान्‍वयन भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा किया जा रहा है.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: सांविधिक, विनियामक और विभिन्न अर्द्ध-न्यायिक निकाय.

Topic : Tribunal Reforms Act of 2021

संदर्भ

हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है, कि सरकार द्वारा प्रमुख अधिकरणों के संबंध में एक कानून बनाने- वह भी न्यायालय द्वारा इसी तरह के एक अन्य क़ानून को रद्द किए जाने के कुछ ही दिनों बाद –  का निर्णय न्यायालय के निर्णय का अनादर करने के बराबर हो सकता है.

संबंधित प्रकरण

पिछले वर्ष केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए ‘अधिकरण सुधार अधिनियम’, 2021 (ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट 2021) को शीर्ष न्यायालय में चुनौती दी गई है.

  • याचिकाकर्ताओं का तर्क है, कि यह क़ानून प्रमुख अधिकरणों के सदस्यों की नियुक्तियों, सेवा शर्तों, वेतन आदि के संबंध में सरकार को व्यापक अधिकार प्रदान करता है, जिससे ‘न्यायिक स्वतंत्रता’ के लिए एक गंभीर खतरा उत्पन्न होता है.
  • याचिकाकर्ताओं का कहना है, कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्ष 2021 में प्रख्यापित ‘अधिकरण सुधार (सुव्यवस्थीकरण और सेवा शर्तें) अध्यादेश, (Tribunals Reforms (Rationalisation and Conditions of Service), Ordinance) को रद्द करने के कुछ ही दिनों बाद इस अधिनियम को लोकसभा में पेश किया गया था. इस अधिनियम में अध्यादेश के उन्हीं प्रावधानों को वापस लाया गया जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रद्द कर दिया गया था.

अधिनियम के विवादास्पद प्रावधान

‘ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट, 2021’ को पिछले साल दोनों सदनों में पारित किया गया था. इस अधिनियम ने ‘कानून बनाने की शक्तियों और सीमाओं’ पर विधायिका एवं न्यायपालिका के मध्य एक नया गतिरोध शुरू कर दिया है.

  1. विधेयक के अनुसार, अधिकरणों के सदस्यों के रूप में अधिवक्ताओं की नियुक्ति के लिए न्यूनतम आयु 50 वर्ष और कार्यकाल चार वर्ष होगा. न्यायालय के अनुसार, यह ‘निर्धारित सीमा रेखा’ एकपक्षीय और मनमानी है. इस पर सरकार ने तर्क दिया है कि यह प्रावधान, अधिकरणों के सदस्यों के चुनाव हेतु अधिवक्ताओं के एक विशेषज्ञ प्रतिभा पूल को तैयार करेगा.
  2. अधिनियम की धारा 3(1), धारा 3(7), 5 और 7(1), संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 50 के दायरे से बाहर हैं. अधिनियम की धारा 3(1) में 50 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को अधिकरणों में नियुक्ति से प्रतिबंधित किया गया है. यह प्रावधान कार्यकाल की अवधि /सुरक्षा को दुर्बल करता है तथा न्यायिक स्वतंत्रता और शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत, दोनों का उल्लंघन करता है.
  3. अधिनियम की धारा 3(7) के तहत ‘खोज एवं चयन समिति’ (Search-cum-Selection Committee) द्वारा केंद्र सरकार के लिए दो नामों के एक पैनल की सिफारिश करना अनिवार्य किया गया था. यह प्रावधान भी ‘शक्तियों के पृथक्करण’ और ‘न्यायिक स्वतंत्रता’ के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है.

अधिकरण सुधार (सुव्यवस्थीकरण और सेवा शर्तें) अधिनियम, 2021 के प्रमुख बिंदु:

अधिनियम में, ‘अधिकरण’ (ट्रिब्यूनल) के विभिन्न सदस्यों हेतु समान नियम और सेवा-शर्तों का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा, विधेयक में, अधिकरणों को युक्तिसंगत बनाने हेतु प्रयास के रूप में कुछ अधिकरणों को समाप्त करने प्रस्ताव किया गया है.

मुख्य परिवर्तन

  1. विधेयक में, कुछ मौजूदा अपीलीय निकायों को भंग करने और उनके कार्यों (जैसे अपीलों पर न्यायिक निर्णय लेना) को दूसरे मौजूदा न्यायिक निकायों को अंतरित करने का प्रावधान किया गया है.
  2. विधेयक के तहत, केंद्र सरकार को अधिकरणों के सदस्यों की योग्यता, नियुक्ति, पदावधि, वेतन और भत्ते, त्यागपत्र, पद-मुक्ति और अन्य नियमो व सेवा-शर्तों हेतु नियम बनाने की शक्ति प्रदान की गई है.
  3. विधेयक के अनुसार, केंद्र सरकार ‘खोज एवं चयन समिति’ (Search-cum-Selection Committee) के सुझाव पर अधिकरण के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति करेगी. इस समिति की अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा नामित सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश द्वारा की जाएगी.
  4. राज्य प्रशासनिक अधिकरणों (State Tribunals) के लिए, एक पृथक ‘खोज समिति’ होगी.
  5. केंद्र सरकार को ‘खोज एवं चयन समितियों’ के सुझावों पर तीन महीने के भीतर ‘अधिमान्य रूप से’ फैसला लेना होगा.
  6. कार्यकाल: अधिकरण का अध्यक्ष, 4 साल की अवधि या 70 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, जो भी पहले हो, तक पद धारण करेगा. अधिकरण के अन्य सदस्य, 4 साल की अवधि या 67 वर्ष की आयु प्राप्त करने तक, जो भी पहले हो, तक पद धारण करेंगे.

अपीलीय अधिकरणों का उन्मूलन

विधेयक के तहत, पांच अधिकरणों – ‘फिल्म प्रमाणन अपीलीय अधिकरण’,  ‘हवाईअड्डा अपीलीय अधिकरण’, ‘अग्रिम निर्णय प्राधिकरण’, ‘बौद्धिक संपदा अपीलीय बोर्ड’ और ‘पादप प्रजाति संरक्षण अपीलीय अधिकरण’ – को समाप्त करने तथा उनके कार्यों को मौजूदा न्यायिक निकायों के लिए अंतरित किया जाने का प्रस्ताव किया गया है.

विधेयक के संदर्भ में न्यायालय का निर्णय

  • ‘मद्रास बार एसोसिएशन बनाम भारत संघ’ मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने किसी अधिकरण के अध्यक्ष एवं सदस्यों के के रूप में नियुक्ति के लिए न्यूनतम आयु 50 वर्ष और चार साल का कार्यकाल, निर्धारित करने वाले प्रावधानों को रद् कर दिया था.
  • न्यायालय के अनुसार- इस प्रकार की शर्तें, शक्तियों के पृथक्करण, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, विधि के शासन और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 के सिद्धांतों का उल्लंघन करती हैं.

विवाद

विधेयक के द्वारा निम्नलिखित प्रावधानों के संदर्भ में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को निष्प्रभावी करने का प्रयास किया गया है:

  1. विधेयक में आवश्यक न्यूनतम आयु को 50 वर्ष रखा गया है.
  2. अधिकरण के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल चार वर्ष का प्रस्तावित किया गया है.
  3. प्रत्येक पद पर नियुक्ति के लिए ‘खोज एवं चयन समिति’ द्वारा दो नामों की सिफारिश और सरकार द्वारा तीन महीने के भीतर निर्णय लेने की अपेक्षा की गयी है.

Sansar Daily Current Affairs, 26 February 2022


GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन.

Topic : Solar Roof Top (SRT)

संदर्भ

हाल ही में केंद्र सरकार ने आवासीय उपभोक्ताओं के लिए सोलर रूफ टॉप (SRT) संयंत्र स्थापित करने के लिए प्रक्रिया को सरल बना दिया है. इसके तहत आवेदनों के पंजीकरण, अनुमोदन एवं प्रगति की निगरानी के लिए एक राष्ट्रीय पोर्टल बनाया गया है. अब कोई आवासीय उपभोक्ता स्वयं भी SRT संयंत्र स्थापित कर सकता है या अपनी पसंद के किसी विक्रेता द्वारा स्थापित करवा सकता है.

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2022 तक 40GW सोलर रूफ टॉप स्थापना का लक्ष्य रखा गया था लेकिन अभी तक केवल 5.7GW ही स्थापित किया गया है. केंद्र सरकार इस सीधा में गति बढ़ाने के उद्देश्य से ग्रिड कनेक्टेड रूफ टॉप एवं लघु सौर ऊर्जा संयंत्र कार्यक्रम शुरू किया गया है. इसके अलावा अनुमोदनों में तेजी लेन के लिए ऑनलाइन “SRT पोर्टल” बनाया गया है.

सोलर रूफ टॉप संयंत्रों के बारे में

  • SRT प्रणाली में इमारतों, भवनों की छतों पर सौर पैनल लगाये जाते हैं.
  • ये दो प्रकार के हो सकते हैं- बैटरी का उपयोग कर ऊर्जा भंडारण की सुविधा वाले SRT एवं ग्रिड कनेक्टेड SRT

लाभ/महत्व

  • पर्यावरण के अनुकूल
  • पारेषण एवं वितरण के दौरान होने वाली हानि को कम करता है
  • अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता नहीं
  • विद्युत्‌ बिल कमी आती है
  • स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन

चुनौतियाँ

  • आरंभिक पूंजी लागत अधिक होती है
  • सौर मोड्यूल और सौर फोटोवोल्टिक (PV) के लिए आयात पर निर्भरता है
  • अनुसंधान गतिविधियाँ धीमी हैं
  • डिस्कॉम कम्पनियाँ, वाणिज्यिक उद्यमों में SRT को हतोत्साहित करने का प्रयास करती है.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-टैक्नोलॉजी, बायो-टैक्नोलॉजी और बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित विषयों के संबंध में जागरुकता.

Topic : Solar Roof Top (SRT)

संदर्भ

हाल ही में गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (GAIL) ने राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन के तहत हाइड्रोजन सम्मिश्रण की तकनीकी-व्यावसायिक संभाव्यता स्थापित करने के लिए पायलट परियोजना के रूप में इंदौर शहर के सिटी गैस वितरण (CGD) नेटवर्क में हाइड्रोजन सम्मिश्रण शुरू किया है.

इसके तहत इंदौर में कार्यरत एचपीसीएल (HPCL) के साथ GAIL, की संयुक्त उद्यम कंपनी “अवंतिका गैस लिमिटेड” को हाइड्रोजन मिश्रित प्राकृतिक गैस की आपूर्ति की जाएगी. GAIL, ने सिटी गेट स्टेशन (CGS), इंदौर में “ग्रे हाइड्रोजन” को इंजेक्ट करना अर्थात् भरना शुरू कर दिया है. बाद में इस ग्रे हाइड्रोजन को ग्रीन हाइड्रोजन से बदल दिया जाएगा.

उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक खपत के लिए “पाइप से आपूर्ति की जाने वाली प्राकृतिक गैस” के साथ 15% ग्रीन हाइड्रोजन को मिश्रित करने की योजना बनायी जा रही है.

पृष्ठभूमि

ज्ञातव्य है कि कुछ समय पहले ही संयुक्त राज्य अमेरिका के ऊर्जा विभाग ने भी हाइड्रोजन उत्पादन और ईंधन सेल प्रौद्योगिकी अनुसंधान और विकास में $100 मिलियन तक के निवेश की घोषणा की थी. गत वर्ष सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा हाइड्रोजन ईंधन सेल वाहनों के सुरक्षा मूल्यांकन के मानकों को अधिसूचित किया गया था. उन्हें केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 में संशोधन के माध्यम से अधिसूचित किया गया था. ये मानक उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भी हैं. इससे भारत में हाइड्रोजन ईंधन सेल आधारित वाहनों को बढ़ावा मिलेगा.

hydrogen mission india

हाइड्रोजन ईंधन सेल की कार्यप्रणाली (चित्र से समझिये)

  • इसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के सम्मिश्रण से विद्युत धारा का निर्माण किया जाता है.
  • इस प्रक्रिया में जल उप-उत्पाद होता है.
  • चूँकि इसमें कार्बन डाइऑक्साइड जैसी ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन नही होता अतः इसे स्वच्छ ऊर्जा तकनीक के रूप में प्रयुक्त किया जाता है.
  • इसे भविष्य का ईंधन बताया जा रहा है, हालाँकि विकसित सुरक्षा तकनीक के प्रयोग के कारण हाइड्रोजन चलित वाहन अभी महँगे हैं.

हाइड्रोजन ईंधन ही क्यों?

  • हाइड्रोजन ईंधन का एक स्वच्छ स्रोत है क्योंकि इसके प्रयोग से सह उत्पाद के रूप में मात्र पानी और ताप का ही सृजन होता है.
  • हाइड्रोजन कई स्रोतों से निकाला जा सकता है, जैसे – मीथेन, कोयला, पानी और यहाँ तक की कचरा भी.
  • बिजली से चलने वाली गाड़ियों को रिचार्ज करने में घंटों लग जाते हैं और वे कुछ सौ किलोमीटर ही चल पाती हैं. किन्तु FCVs को रिचार्ज करने में कम समय लगता है और ये अधिक दूर तक भी जाती हैं.
  • यह प्रदूषण को समाप्त करता है, तेल और गैस के आयात पर निर्भरता को कम करता है, उच्च विद्युत दक्षता से युक्त है, शोर-रहित परिचालन होता है आदि.

सीमाएँ

उपकरणों की उच्च लागत, हाइड्रोजन गैस के भंडारण एवं रखरखाव से संबद्ध मुद्दे (जैसे संक्षारण) आदि.

अनुप्रयोग

स्थिर क्षेत्र (भवनों, पृथक घरों आदि के लिए विद्युत आपूर्ति), वहनीय (पोर्टेबल) क्षेत्र (सैन्य अनुप्रयोगों जैसे सुवाह्य सैनिक शक्ति, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण आदि), परिवहन क्षेत्र इत्यादि.

मेरी राय – मेंस के लिए

हाइड्रोजन बहुत कम ऊर्जा घनत्व रखता है. इसलिये, इसको पर्याप्त मात्रा में स्टोर करने के लिये बड़ी जगह की आवश्यकता है. ऑटोमोबाइल अनुप्रयोगों के लिये, हाइड्रोजन का कॉम्पैक्ट और कुशल तरीके से पर्याप्त मात्रा में स्टोर करने की आवश्यकता हैं ताकि पुनः ईंधन भरने से पहले एक निश्चित ड्राइविंग रेंज प्रदान की जा सके. हाइड्रोजन एक रंगहीन और गंधहीन गैस है तथा दहन के बाद एक रंगहीन लौ पैदा करता है. इसलिये, सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये तथा गैस रिसाव का पता लगाने के लिये विशेष उपकरणों की आवश्यकता होती है. दुनिया भर में अत्यधिक कुशल ऑन-बोर्ड स्टोरेज तरीकों को विकसित करने के लिये अनुसंधान के प्रयास किये जा रहे हैं. वर्तमान में हाइड्रोजन भंडारण के लिये 350 बार/700 बार उच्च दबाव वाले सिलेंडर उपयोग में लाए जाते हैं. अनुसंधान एवं विकास तथा व्यावसायीकरण के ठोस प्रयास चल रहे हैं.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन.

Topic : Two more Ramsar sites announced on World Wetlands Day

संदर्भ

हाल ही में बखिरा वन्यजीव अभयारण्य (उत्तर प्रदेश) तथा खिजड़िया पक्षी अभयारण्य (गुजरात) को आर्द्र भूमियों की रामसर सूची में जोड़ा गया है. ये भारत के 48वें और 49वें रामसर स्थल बन गये हैं.

आर्द्रभूमि

रामसर अभिसमय के अंतर्गत दलदल, पंकभूमि (fen), पीटभूमि, कृत्रिम या प्राकृतिक, स्थिर या गतिमान जल स्रोत आदि आर्द्रभूमि के तहत आते हैं. इसके तहत ऐसे सागरीय क्षेत्र भी आते हैं, जहां निम्न ज्वार के समय की गहराई 6 मीटर से अधिक नहीं होती.

महत्त्व

  • महत्त्वपूर्ण संसाधनों के स्रोत होते हैं (विश्वभर में लगभग 1 अरब लोगों की आजीविका, पोषण इन पर निर्भर करती है) 
  • वेटलैंड जैव विविधता को संरक्षण प्रदान करते हैं.
  • ये भूजल पुनर्भरण (recharge) करते है, जल शोधन (purify) करते हैं (न्यूयॉर्क में $10 बिलियन की लागत वाले ट्रीटमेंट प्लांट के बराबर जल शोधन)
  • बाढ़ को नियंत्रित करते हैं, अपरदन को कम करते हैं.

रामसर संधि क्या है?

  • रामसर आर्द्रभूमि समझौते (Ramsar Convention on Wetlands) पर 2 फरवरी, 1971 में इरान के कैप्सियन सागर के तट पर स्थित शहर रामसर में हस्ताक्षर किये गये थे. इसलिए इसे रामसर संधि कहा जाता है. कुछ लोग इस संधि को आर्द्रभूमि संधि (Wetland Convention) भी कहते हैं.
  • यह 1975 में लागू हुई.
  • इस संधि का औपचारिक नाम है – अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व, विशेषकर जल पक्षी आवास के रूप में आर्द्रभूमियों के विषय में संधि.
  • यह एक अंतर-सरकारी संधि है जो आर्द्रभूमि के संरक्षण और समुचित उपयोग के सम्बन्ध में मार्गदर्शन प्रदान करती है.
  • भारत ने 1982 में इस संधि पर हस्ताक्षर किए.
  • भारत में आर्द्रभूमि के संरक्षण के मामलों के लिए केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु-परवर्तन मंत्रालय नोडल मंत्रालय घोषित है.
  • विदित हो कि भारत में सम्पूर्ण भूमि के 4.7% पर आर्द्रभूमि फैली हुई है.

Sansar Daily Current Affairs, 28 February 2022


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय.

Topic : Pradhan Mantri Matritva Vandana Yojana Application

संदर्भ

हाल ही में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि “प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना” के तहत एकल माताओं और परित्यक्त माताओं को शामिल करने और उनके लिए सुविधा प्रदान करने के लिए, पतियों का आधार कार्ड माँगा जाना अनिवार्य नहीं है.

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना

इसके अंतर्गत गर्भवती स्त्रियों के बैंक खातों में 6,000 रु. सीधे भेज दिए जाते हैं जिससे कि वे प्रसव की बेहतर सुविधाएँ पा सकें. प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना एक मातृत्व लाभ की योजना है जिसका आरम्भ 2010 में इंदिरा गाँधी मातृत्व सहयोग योजना के नाम से (IGMSY) हुआ था. इस योजना के अंतर्गत पहले बच्चे के जन्म के लिए 19 वर्ष अथवा उससे अधिक उम्र की गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को नकद राशि दी जाती है. इस राशि से बच्चा होने और उसकी देखभाल करने के कारण दिहाड़ी की क्षति का सामना करने वाली महिला को आंशिक क्षतिपूर्ति दी जाती है और साथ ही इससे सुरक्षित प्रसव और उत्तम पोषण का प्रबंध किया जाता है. अपवाद : जो महिलाएँ केंद्र सरकार अथवा राज्य सरकार अथवा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम में काम करती हैं अथवा जिन्हें इसी प्रकार का लाभ पहले से मिल रहा है, उनको इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा. वित्त पोषण : यह एक केंद्र संपोषित योजना है जिसमें केंद्र और राज्य की लागत 60:40 होती है. पूर्वोत्तर राज्यों में और तीन हिमालयवर्ती राज्यों में यह अनुपात 90:10 है. जिन केंद्र शाषित क्षेत्रों में विधान सभा नहीं है वहाँ इस योजना के लिए केन्द्रीय योगदान 100% होता है.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

  1. पोषण अभियान : POSHAN अभियान (National Nutrition Mission) का आरम्भ प्रधानमन्त्री द्वारा राजस्थान के झुंझुनू में 8 मार्च, 2018 में किया गया था. इस अभियान का लक्ष्य है छोटे-छोटे बच्चों, महिलाओं और किशोरियों के बीच कुंठित विकास, कुपोषण, रक्ताल्पता और साथ ही जन्म के समय शिशु के भार की अल्पता की दर को क्रमशः 2%, 2%, 3 % और 2% प्रतिवर्ष घटाना. मिशन का एक लक्ष्य यह भी है कि 0 से 6 साल के बच्चों में शारीरिक विकास में कमी की दर को वर्तमान के 38.4% से घटाकर 2022 तक 25% कर दिया जाए. सरकार पोषण अभियान को 2020 तक विभिन्न चरणों में देश के सभी 36 राज्यों/केंद्र शाषित क्षेत्रों तथा 718 जिलों तक ले जाना चाहती है.
  2. नेशनल खाद्य सुरक्षा अधिनियम(NFSA), 2013 : इस अधिनियम के द्वारा भोजन को एक कानूनी अधिकार बना दिया गया है जिससे सरकार की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से वंचित वर्गों को भोजन और पोषाहार की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके.
  3. मध्याह्न भोजन योजना:
  • इस योजना के अंतर्गत सभी स्कूली बच्चों को दिन में भोजन खिलाया जाता है जिससे न केवल उनके पोषण स्तर में सुधार हो, अपितु वे अपने-अपने स्कूल में नाम लिखायें और उपस्थित रहें.
  • भारत सरकार द्वारा 15 अगस्त, 1995 को मध्याह् भोजन योजना प्रारम्भ की गई थी.
  • पहले इसके तहत खाद्यान्न दिए जाते थे, लेकिन वर्ष 2000 से पका पकाया भोजन प्राथमिक विद्यालयों में उपलब्ध कराने की योजना आरम्भ किया गया.
  • इस योजना के तहत न्यूनतम 200 दिनों के लिए निम्न प्राथमिक स्तर के लिये प्रतिदिन न्यूनतम 450 कैलोरी ऊर्जा एवं 8-12 ग्राम प्रोटीन तथा उच्च प्राथमिक स्तर के लिये न्यूनतम 700 कैलोरी ऊर्जा एवं 20 ग्राम प्रोटीन देने का प्रावधान है.
  • इस योजना का प्रमुख उद्देश्य प्राथमिक विद्यालयों में नामांकन और उपस्थिति बढ़ाना था.
  • कुछ राज्यों में इसके तहत दूध और नाश्ता भी दिया जाने लगा है.

GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus: सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिये हस्तक्षेप और उनके अभिकल्पन तथा कार्यान्वयन के कारण उत्पन्न विषय.

Topic : Tamil Nadu legislative assembly to pass anti-NEET Bill

संदर्भ

तमिलनाडु NEET विरोधी विधेयक को एक बार फिर राज्य विधानसभा द्वारा पारित किया गया है, उल्लेखनीय है कि सितंबर 2021 में राज्य विधानसभा द्वारा पारित किया गया था, तब तमिलनाडु के राज्यपाल ने हाल ही में विधानसभा अध्यक्ष को विधेयक लौटाते हुए कहा कि यह विधेयक छात्रों के हित के खिलाफ है. राज्यपाल के अनुसार इस विधेयक से ग्रामीण इलाकों के छात्रों के हितों पर असर पड़ेगा. उन्होंने अपने तर्क के पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का भी हवाला दिया है. क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अनुसार, तमिलनाडु में धर रद्द करने से गरीब छात्रों का आर्थिक शोषण होगा.

तमिलनाडु सरकार द्वारा लाया गया विधेयक राज्य में चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए |धाःए’ की अनिवार्यता को समाप्त करने का प्रयास करता है. इसके बजाय राज्य सरकार कक्षा 12 की परीक्षा में प्राप्त अंकों के आधार पर चिकित्सा और दंत चिकित्सा प्रवेश प्रदान करना चाहती है. नीट की अनिवार्यता से पहले, राज्य में मेडिकल प्रवेश इस तरह से होते थे और तमिलनाडु सरकार इसे जारी रखना चाहती है.

मुद्दा क्या है?

केंद्र सरकार ने देश के सभी छात्रों के लिए मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश हेतु राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (National Eligibility cum Entrance Test) अनिवार्य कर दी थी. इस अनिवार्यता के विरोध में तमिलनाडु सरकार द्वारा यह विधेयक पारित किया गया था. जस्टिस ए के रंजन समिति ने इस विधेयक के पक्ष में सुझाव दिया था. तमिलनाडु सरकार का तर्क है कि नीट समाज में असमानता पैदा करता है. NEET उन अमीरों का पक्षधर है जो अपनी नियमित बारहवीं कक्षा की शिक्षा के अलावा विशेष कोचिंग का खर्च उठा सक हैं. संपन्न वर्ग ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा करने से हिचकिचाते हैं. वे विदेशों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा रखते हैं. दूसरी ओर, ग्रामीण क्षेत्रों के 90% मेडिकल छात्र अपने पैतृक गाँवों में सेवा करके खुश हैं.

आगे की राह

संविधान के अनुसार यदि कोई राज्य कानून, केन्द्रीय कानून के साथ मतभेद की स्थिति में होता है तो उसे राज्यपाल द्वारा राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए सुरक्षित रख लिया जाना चाहिए. अब राज्यपाल आर एन रवि के पास यही विकल्प शेष है. केंद्र-राज्य सम्बन्धों पर गठित सरकारिया आयोग की सिफारिशों के अनुसार एक राज्यपाल किसी विधेयक पर राज्य मंत्रिपरिषद की राय का विरोध केवल इसलिए नही कर सकता कि वह किसी विधेयक की नीति से खुश नही है. केंद्र सरकार को राज्य के मेडिकल कॉलेजों में दाखिले में नीट की अनिवार्यता पर पुनर्विचार करना चाहिए तथा राज्य सरकारों की भूमिका को नजरअंदाज नही किया जाना चाहिए.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus:  संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन.

Topic : Sathyamangalam Tiger Reserve wins TX2 award for doubling tiger population

संदर्भ

हाल ही में भारत के सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व (STR) को प्रतिष्ठित 12 पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. रिजर्व में वर्ष 2010 के बाद से टाइगरों की संख्या दोगुनी हो गई है. इससे पहले उत्तरप्रदेश में स्थित पीलीभीत टाइगर रिजर्व तथा भारत और भूटान की सीमा पर स्थित ट्रांसबाउंडरी मानस संरक्षण क्षेत्र (TraMCA) ने भी इस दिशा में अपने प्रयासों के लिये कंज़र्वेशन एक्सीलेंस अवार्ड जीता था.

उल्लेखनीय है कि Tx2 पुरस्कार ऐसी ‘साइट’ को दिया जाता है, जिसने वर्ष 2010 से अब तक बाघों की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है. Tx2 लक्ष्य वर्ष 2022 तक विश्व में जंगली बाघों की संख्या को दोगना करने की वैश्विक प्रतिबद्धता को प्रकट करते है. इन लक्ष्यों का निर्धारण विश्व वन्यजीव कोष (WWF) द्वारा ग्लोबल टाइगर इनिशिएटिव, ग्लोबल टाइगर फोरम और ऐसे ही अन्य महत्त्वपूर्ण प्लेटफार्मों के माध्यम से किया था.

सत्यमंगलम टाइगर रिज़र्व

सत्यमंगलम टाइगर रिज़र्व, तमिलनाडु राज्य में पूर्वी और पश्चिमी घाटों के सम्मिलन स्थल पर स्थित है. यह रिजर्व नीलगिरि बायोस्फीयर का भाग है. इसे 2013 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था और अब इस क्षेत्र में लगभग 80 बाघ हैं.

भारतीय बाघ के बारे में

  • IUCN की रेड डेटा सूची में संकटग्रस्त श्रेणी मे शामिल. 
  • बाघ विविध प्राकृतिक आवासों में पाए जाते हैं: वर्षा वन, घास के मैदान, सवाना, और यहां तक कि मैंग्रोव दलदल में भी. दुर्भाग्य से, 93% ऐतिहासिक बाघ भूमि मुख्य रूप से मानव गतिविधियों के विस्तार के कारण समाप्त हो गई है.
  • भारत में कुल 52 टाइगर रिजर्व हैं.
  • बाघों के अखिल भारतीय अनुमान-2018 के अनुसार, भारत में बाघों की संख्या 2014 में 2,226 से बढ़कर 2,967 हो गई है.
  • भारत के राज्यों में मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या सर्वाधिक 526 है, इसके बाद कर्नाटक में और 524 और उत्तराखंड में 442 पाई गई.

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