Sansar डेली करंट अफेयर्स, 13 July 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 13 July 2020


GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus :  Issues related to development and management of social sector/services.       

Topic : ATAL INNOVATION MISSION (AIM)

संदर्भ 

नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन (AIM) ने देश भर में स्कूली छात्रों के लिए एटीएल ऐप डेवलपमेंट मॉड्यूल लॉन्च किया. इसे भारतीय स्टार्टअप प्लेज़्मो के सहयोग से लॉन्च किया गया है. इसका उद्देश्य AIM के प्रमुख कार्यक्रम अटल टिंकरिंग लैब्स (ATL) के तहत आने वाले समय में स्कूली छात्रों के कौशल में सुधार करना है और उन्हें ऐप उपयोगकर्ता से ऐप का निर्माण करने वाला बनाना है. एटीएल ऐप डेवलपमेंट मॉड्यूल एक ऑनलाइन कोर्स है जो पूरी तरह निःशुल्क है.

अटल नवाचार मिशन क्या है?

  • यह मिशन भारत सरकार की प्रमुख पहल है जिसका प्रयोजन देश में नवाचार एवं उद्यमिता की संस्कृति को बढ़ावा देना है.
  • इस मिशन का कार्य देश के अन्दर नवाचार के वातावरण पर दृष्टि रखने के लिए एक बहु-आयामी अवसरंचना का निर्माण करना है जिससे विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से नवाचार पारिस्थितिकी तन्त्र में क्रान्ति लाई जा सके.

अटल नवाचार मिशन के दो प्रमुख कार्य

स्वरोजगार और प्रतिभा के उपयोग के द्वारा उद्यमिता को बढ़ावा देना. इसके लिए नवाचार करने वाले को सफल उद्यमी बनाने के निमित्त सहायता और मन्त्रणा दोनों दी जायेगी. इसका उद्देश्य विश्व-स्तरीय नवाचार नाभिक केन्द्रों की स्थापना करना है. इसके अतिरिक्त इसका लक्ष्य ग्रैंड चैलेन्जों, स्टार्ट-अप व्यवसायों और अन्य स्व-रोजगार गतिविधियों के माध्यम से मुख्य रूप से तकनीक पर आधारित क्षेत्रों के लिए एक मंच प्रदान करना है.

प्रभाव

  • इस मिशन ने कई बड़े-बड़े और प्रगतिशील पहलें शुरू की हैं, जैसे – अटल टिकरिंग लैब (ATL) और अटल इनक्यूबेशन सेंटर (AIC).
  • अटल नवाचार मिशन की तकनीकी सहायता से भारत सरकार के कई मंत्रालयों और विभागों ने नवाचार से सम्बद्ध गतिविधियाँ आरम्भ की हैं.
  • अटल टिकरिंग लैब कार्यक्रम के अंतर्गत 2020 तक 10,000 से अधिक विद्यालय ऐसी प्रयोगशालाएँ स्थापित करने जा रहे हैं.
  • देश-भर में 100 से अधिक अटल इनक्यूबेशन सेंटर भी बन रहे हैं जिनके माध्यम से पहले पाँच वर्षों में कम से कम 50-60 स्टार्ट-अपों को सहारा दिया जाएगा.
  • अपने आविष्कारों को उत्पाद में बदलने के लिए 100 से अधिक नवाचारियों को इस मिशन के अंतर्गत कुछ न कुछ सहयोग मिलने की सम्भावना है.
  • प्रत्येक चौथे वर्ष एक-एक इनक्यूबेटर तकनीकी नवाचार पर आधारित 50-60 स्टार्ट-अपों को सम्पोषित करेगा.
  • नवाचार पर आधारित नए-नए स्टार्ट-अप खुलने से रोजगार में व्यापक वृद्धि होने की संभावना है.

GS Paper 2 Source : BBC

UPSC Syllabus : Structure, organization and functioning of the Executive and the Judiciary Ministries and Departments of the Government; pressure groups and formal/informal associations and their role in the Polity.

Topic : Extra-judicial Killings

संदर्भ 

सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष एक याचिका दायर की है जिसमें कहा गया है कि विकास दुबे और उसके गिरोह के अन्य सदस्यों की अतिरिक्त न्यायिक हत्या (extra-judicial killing) के बाद उन्हें अपने जीवन पर खतरा मंडराता दिख रहा है.

एनकाउंटरक्या है?

  • भारतीय संविधान के अंतर्गत एनकाउंटरशब्द का कहीं उल्लेख नहीं है. पुलिसिया भाषा में इसका प्रयोग तब किया जाता है जब सुरक्षाबल/पुलिस और चरमपंथी/अपराधियों के बीच हुई भिड़ंत में चरमपंथियों या अपराधियों की मौत हो जाती है.
  • भारतीय क़ानून में वैसे कहीं भी एनकाउंटर को वैध ठहराने का प्रावधान नहीं है. लेकिन कुछ ऐसे नियम-क़ानून अवश्य हैं जो पुलिस को यह शक्ति देते हैं कि वो अपराधियों पर हमला कर सकती है और उस दौरान अपराधियों की मौत को सही ठहराया जा सकता है.
  • आम तौर पर करीब सभी प्रकार के एनकाउंटर में पुलिस आत्मरक्षा के दौरान हुई कार्रवाई का उल्लेख ही करती है.
  • आपराधिक संहिता अर्थात् सीआरपीसी की धारा 46 कहती है कि अगर कोई अपराधी स्वयं को गिरफ़्तार होने से बचाने का प्रयास करता है या पुलिस की गिरफ़्त से भागने की कोशिश करता है या पुलिस पर हमला करता है तो इस परिस्थिति में पुलिस उस अपराधी पर जवाबी हमला कर सकती है.
  • सर्वोच्च न्यायालयऔर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले पर अपने नियम-क़ानून बनाए हुए हैं.

एनकाउंटर पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश

सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इसके लिए पुलिस तय किए गए नियमों का ही पालन करे.

23 सितंबर 2014 को भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश आर एम लोढा और जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन की बेंच ने एक निर्णय के दौरान एनकाउंटर का उल्लेख किया.

इस बेंच ने अपने निर्णय में लिखा था कि पुलिस एनकाउंटर के दौरान हुई मौत की निष्पक्ष, प्रभावी और स्वतंत्र जांच के लिए इन नियमों का पालन किया जाना चाहिए. उस निर्णय की प्रमुख बातें इस प्रकार हैं:

  1. जब कभी भी पुलिस को किसी तरह की आपराधिक गतिविधि की सूचना मिलती है, तो वह या तो लिखित में हो (विशेषकर केस डायरी के रूप में) या फिर किसी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के भेजी गई हो.
  2. अगर कोई भी आपराधिक गतिविधि की सूचना मिलती है, या फिर पुलिस की ओर से किसी तरह की गोलीबारी की जानकारी मिलती है और उसमें किसी की मृत्यु की सूचना आए, तो इस पर तुरंत प्रभाव से धारा 157 के तहत कोर्ट में FIR दर्ज करनी चाहिए. इसमें किसी भी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए.
  3. इस पूरे घटनाक्रम की एक स्वतंत्र जांच सीआईडी से या दूसरे पुलिस स्टेशन के टीम से करवानी आवश्यक है, जिसकी निगरानी एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी करेंगे. यह वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उस एनकाउंटर में सम्मिलित सबसे उच्च अधिकारी से एक रैंक ऊपर होना चाहिए.
  4. धारा 176 के अंतर्गत पुलिस फ़ायरिंग में हुई हर एक मौत की मजिस्ट्रियल जांच होनी चाहिए. इसकी एक रिपोर्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास भेजना भी अनिवार्य है.
  5. जब तक स्वतंत्र जांच में किसी तरह का शक़ पैदा नहीं हो जाता, तब तक एनएचआरसी को जांच में सम्मिलित करना आवश्यक नहीं है. हालांकि घटनाक्रम की सम्पूर्ण जानकारी बिना देरी किए एनएचआरसी या राज्य के मानवाधिकार आयोग के पास भेजना जरूरी है.
  6. न्यायालय का निर्देश है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 141 के अंतर्गत किसी भी प्रकार के एनकाउंटर में इन सभी नियमों का पालन होना अनिवार्य है. अनुच्छेद 141 भारत के सुप्रीम कोर्ट को कोई नियम या क़ानून बनाने की शक्ति देता है.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के निर्देश

  • मार्च 1997 में तत्कालीन एनएचआरसी के अध्यक्ष जस्टिस एमएन वेंकट चलैया ने सभी मुख्यमंत्रियों को एक पत्र लिखा था. उसमें उन्होंने लिखा था, ”आयोग को कई जगहों से और गैर सरकारी संगठनों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि पुलिस के द्वारा फ़र्जी एनकाउंटर लगातार बढ़ रहे हैं. साथ ही पुलिस अभियुक्तों को तय नियमों के आधार पर दोषी साबित करने की जगह उन्हें मारने को तरजीह दे रही है.”
  • जस्टिस वेंकटचलैया साल 1993-94 में सर्वोच्च कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश थे. उन्होंने लिखा था, ”हमारे क़ानून में पुलिस को यह अधिकार नहीं है कि वह किसी व्यक्ति को मार दे, और जब तक यह साबित नहीं हो जाता कि उन्होंने क़ानून के अंतर्गत किसी को मारा है तब तक वह हत्या मानी जाएगी.”
  • केवल दो ही परिस्थिति में इस तरह की मौतों को अपराध नहीं माना जा सकता. पहला, अगर आत्मरक्षा की कोशिश में दूसरे व्यक्ति की मौत हो जाए.
  • दूसरा, सीआरपीसी की धारा 46 पुलिस को बल प्रयोग करने का अधिकार देती है. इस दौरान किसी ऐसे अपराधी को गिरफ़्तार करने का प्रयास, जिसने वो अपराध किया हो जिसके लिए उसे मौत की सज़ा या आजीवन कारावास की सज़ा मिल सकती है, इस कोशिश में अपराधी की मौत हो जाए.

एनएचआरसी ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह निर्देशित किया है कि वह पुलिस एनकाउंटर में हुई मौत के लिए तय नियमों का पालन करे. वो नियम इस प्रकार हैं-

  1. जब किसी पुलिस स्टेशन के इंचार्ज को किसी पुलिस एनकाउंटर की सूचना प्राप्त हो तो वह इसके त्वरित रूप से इसे रजिस्टर में दर्ज करे.
  2. जैसे ही किसी तरह के एनकाउंटर की सूचना मिले और फिर उस पर किसी तरह की शंका प्रकट की जाए तो उसकी जाँच करना आवश्यक है. जाँच दूसरे पुलिस स्टेशन की टीम या राज्य की सीआईडी के माध्यम से होनी चाहिए.
  3. अगर जाँच में पुलिस अधिकारी दोषी पाए जाते हैं तो मारे गए लोगों के परिजनों को उचित मुआवज़ा मिलना चाहिए.

इसके बाद एनएचआरसी ने इसमें कुछ और दिशा-निर्देश जोड़ दिए थे.

  • जब कभी पुलिस पर किसी तरह के ग़ैर-इरादतन हत्या के आरोप लगे, तो उसके ख़िलाफ़ आईपीसी के तहत मामला दर्ज होना चाहिए. घटना में मारे गए लोगों की तीन महीनें के अन्दर मजिस्ट्रेट जांच होनी चाहिए.
  • राज्य में पुलिस की कार्रवाई के दौरान हुई मौत के सभी मामलों की रिपोर्ट 48 घंटें के भीतर एनएचआरसी को सौंपनी चाहिए. इसके तीन महीने बाद पुलिस को आयोग के पास एक रिपोर्ट भेजनी आवश्यक है जिसमें घटना की पूरी जानकारी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, और मजिस्ट्रेट जाँच का प्रतिवेदन शामिल होनी चाहिए.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : China, US in new spat over Uighur crackdown

संदर्भ 

चीन ने कहा कि वह अमेरिकी सीनेटरों मार्को रुबिओ और टेड क्रूज़ के अलावा धार्मिक स्वतंत्रता संबंधी राजदूत सैम ब्राउनबैक तथा क्रिस स्मिथ के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाएगा. चीन ने यह प्रतिबंध अल्पसंख्यक समूहों और लोगों के पंथ के प्रति सत्तारूढ़ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की नीतियों की उनकी आलोचना को लेकर लगाया है.

चीन ने कहा कि अमेरिका द्वारा की गई कार्रवाइयों से “चीन-अमेरिका संबंधों को गंभीर नुकसान पहुंचा है” और चीन इसे अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के रूप में देखता है.

पृष्ठभूमि

ऐसा प्रतीत होता है कि चीन का यह कदम अमेरिका की उस कार्रवाई के जवाब में है जिसके तहत शिनजियांग क्षेत्र के प्रमुख चेन क्वांगु सहित चार चीनी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए गए हैं. शिनजियांग में उइगर मुस्लिम अल्पसंख्यक समूहों के 10 लाख से ज्यादा सदस्यों को कैद कर रखा गया है. हालांकि चीन का कहना है कि वे शिविर लोगों को कट्टरपंथ से मुक्त कराने वाले केंद्र हैं. आलोचकों ने उन शिविरों की तुलना जेलों से की है.

उइगर कौन हैं?

  1. उइगर मुसलमानों की एक नस्ल है जो बहुत करके चीन के Xinjiang प्रांत में रहती है.
  2. उइगर लोगउस प्रांत की जनसंख्या के 45% हैं.
  3. विदित हो कि तिब्बत की भांति Xinjiang भी चीन का एक स्वायत्त क्षेत्र घोषित है.

उइगरों के विद्रोह का कारण

  • कई दशकों से Xinjiang प्रांत में चीन की मूल हान (Han) नस्ल के लोग बसाए जा रहे हैं. आज की तिथि में यहाँ 80 लाख हान रहते हैं जबकि 1949 में इस प्रांत में 220,000 हान रहा करते थे.
  • हान लोग अधिकांश नई नौकरियों को हड़प लेते हैं और उइगर बेरोजगार रह जाते हैं.
  • उइगरों की शिकायत है कि सैनिक उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं जबकि सरकार यह दिखाती है कि उसने सभी को समान अधिकार दिए हुए हैं और विभिन्न समुदायों में समरसता है.

चीन की चिंता

  • चीन का सोचना है कि उइगरों का अपने पड़ोसी देशों से सांस्कृतिक नाता है और वे पाकिस्तान जैसे देशों में रहने वाले लोगों के समर्थन से Xinjiang प्रांत को चीन से अलग कर एक स्वतंत्र देश बनाना चाहते हैं.
  • विदित हो Xinjiang प्रांत की सीमाएँ मंगोलिया, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिजिस्तान, ताजिकिस्तान और अफगानिस्तान से मिलती है.

हाल ही में अमेरिका और चीन के बीच तनाव बढ़ा है. दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कोरोना वायरस महामारी के लिए लगातार चीन को जिम्मेदार ठहराते आए हैं. वहीं अब इस बिल के कारण भी अमेरिका और चीन के बीच तनाव और बढ़ने की आशंका है.


GS Paper 2 Source : Economic Times

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UPSC Syllabus : Indian Constitution- historical underpinnings, evolution, features, amendments, significant provisions and basic structure.

Topic : Delimitation of Constituencies

संदर्भ 

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और असम सरकार से एक याचिका पर जवाब मांगा, जिसमें असम में विधानसभा और संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन की प्रक्रिया पर सवाल उठाये गए हैं. इस याचिका में इस आधार पर परिसीमन प्रक्रिया का विरोध किया गया है कि परिसीमन का आधार 2001 कि जनगणना को बनाया जा रहा है जबकि सरकार के पास 2011 की जनगणना के आंकड़े भी है और वर्तमान में 2021 की जनगणना का कार्य भी चल रहा है.

परिसीमन क्या है?

परिसीमन का शाब्दिक अर्थ विधान सभा से युक्त किसी राज्य के अन्दर चुनाव क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निधारण होता है.

परिसीमन का कार्य कौन करता है?

  • परिसीमन का काम एक अति सशक्त आयोग करता है जिसका औपचारिक नाम परिसीमन आयोग है.
  • यह आयोग इतना सशक्त होता है कि इसके आदेशों को कानून माना जाता है और उन्हें किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है.
  • आयोग के आदेशराष्ट्रपतिद्वारा निर्धारित तिथि से लागू हो जाते हैं. इन आदेशों की प्रतियाँ लोक सभा में अथवा सम्बंधित विधान सभा में उपस्थापित होती हैं. इनमें किसी संशोधन की अनुमति नहीं होती.

परिसीमन आयोग और उसके कार्य

  • संविधान के अनुच्छेद 82 के अनुसार संसद प्रत्येक जनगणना के पश्चात् एक सीमाकंन अधिनियम पारित करता है और उसके आधार पर केंद्र सरकार एक परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) का गठन करती है.
  • इस आयोग में सर्वोच्च न्यायालय का एक सेवा-निवृत्त न्यायाधीश, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और राज्यों के राज्य निर्वाचन आयुक्त सदस्य होते हैं.
  • इस आयोग का काम चुनाव क्षेत्रों की संख्या और सीमाओं का इस प्रकार निर्धारण करना है कि यथासम्भव सभी चुनाव क्षेत्रों की जनसंख्या एक जैसी हो.
  • आयोग का यह भी काम है कि वह उन सीटों की पहचान करे जो अजा/अजजा के लिए आरक्षित होंगे. विदित हो कि अजा/अजजा के लिए आरक्षण तब होता है जब सम्बंधित चुनाव-क्षेत्र में उनकी संख्या अपेक्षाकृत अधिक होती है.
  • सीटों की संख्या और आकार के बारे में निर्णय नवीनतम जनगणना के आधार पर किया जाता है.
  • यदि आयोग के सदस्यों में किसी बात को लेकर मतभेद हो तो बहुत के मत को स्वीकार किया जाता है.
  • संविधान के अनुसार, परिसीमन आयोग का कोई भी आदेश अंतिम होता है और इसको किसी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है.
  • प्रारम्भ में आयोग भारतीय राज्य पत्र में अपने प्रस्तावों का प्रारूप प्रकाशित करता है और पुनः उसके विषय में जनता के बीच जाकर सुनवाई करते हुए आपत्ति, सुझाव आदि लेता है. तत्पश्चात् अंतिम आदेश भारतीय राजपत्र और राज्यों के राजपत्र में प्रकाशित कर दिया जाता है.

परिसीमन आवश्यक क्यों?

जनसंख्या में परिवर्तन को देखते हुए समय-समय पर लोक सभा और विधान सभा की सीटों के लिए चुनाव क्षेत्र का परिसीमन नए सिरे से करने का प्रावधान है. इस प्रक्रिया के फलस्वरूप इन सदनों की सदस्य संख्या में भी बदलाव होता है.

परिसीमन का मुख्य उद्देश्य जनसंख्या के अलग-अलग भागों को समान प्रतिनिधित्व उपलब्ध कराना होता है. इसका एक उद्देश्य यह भी होता है कि चुनाव क्षेत्रों के लिए भौगोलिक क्षेत्रों को इस प्रकार न्यायपूर्ण ढंग से बाँटा जाए जिससे किसी एक राजनीतिक दल को अन्य दलों पर बढ़त न प्राप्त हो.

चुनाव क्षेत्र परिसीमन का काम कब-कब हुआ है?

  • चुनाव क्षेत्रों के परिसीमन का काम सबसे पहले 1950-51 में हुआ था. संविधान में उस समय यह निर्दिष्ट नहीं हुआ था कि यह काम कौन करेगा. इसलिए उस समय यह काम राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग के सहयोग से किया था.
  • संविधान के निर्देशानुसार चुनाव क्षेत्रों का मानचित्र प्रत्येक जनगणना के उपरान्त फिर से बनाना आवश्यक है. अतः 1951 की जनगणना के पश्चात् 1952 में परिसीमन आयोग अधिनियम पारित हुआ. तब से लेकर 1952, 1963, 1973 और 2002 में परिसीमन का काम हुआ. उल्लेखनीय है कि 1976 में आपातकाल के समय इंदिरा गाँधी ने संविधान में संशोधन करते हुए परिसीमन का कार्य 2001 तक रोक दिया था. इसके पीछे यह तर्क दिया था गया कि दक्षिण के राज्यों को शिकायत थी कि वे परिवार नियोजन के मोर्चे पर अच्छा काम कर रहे हैं और जनसंख्या को नियंत्रण करने में सहयोग कर रहे हैं जिसका फल उन्हें यह मिल रहा है कि उनके चुनाव क्षेत्रों की संख्या उत्तर भारत के राज्यों की तुलना में कम होती है. अतः1981 और 1991 की जनगणनाओं के बाद परिसीमन का काम नहीं हुआ.
  • 2001 की जनगणना के पश्चात् परिसीमन पर लगी हुई इस रोक को हट जाना चाहिए था. परन्तु फिर से एक संशोधन लाया गया और इस रोक को इस आधार पर 2026 तक बढ़ा दिया कि तब तक पूरे भारत में जनसंख्या वृद्धि की दर एक जैसी हो जायेगी. इसी कारण 2001 की जनगणना के आधार पर किये गये परिसीमन कार्य (जुलाई 2002 – मई 31, 2018) में कोई ख़ास काम नहीं हुआ था. केवल लोकसभा और विधान सभाओं की वर्तमान चुनाव क्षेत्रों की सीमाओं को थोड़ा-बहुत इधर-उधर किया गया था और आरक्षित सीटों की संख्या में बदलाव लाया गया था.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Science and Technology- developments and their applications and effects in everyday life Achievements of Indians in science & technology; indigenization of technology and developing new technology.

Topic : FASTAGS

संदर्भ 

हाल ही में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने एनआईसी से नए वाहनों के पंजीकरण से पहले और राष्ट्रीय परमिट वाले वाहनों के लिए फिटनेस प्रमाणपत्र प्रदान करते समय फास्टैग विवरण सुनिश्चित करने के लिए कहा है मंत्रालय ने एनआईसी को सूचित किया है कि वाहन (वीएएचएएन) पोर्टल के साथ राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक टोल संग्रह (एनईटीसी) को पूरी तरह जोड़ दिया गया है और यह 14 मई को एपीआई के साथ लाइव हुआ है.

वाहन प्रणाली अब वीआईएन/ वीआरएन के माध्यम से फास्टैग पर सभी जानकारी प्राप्त कर रही है. अतः मंत्रालय ने नए वाहनों का पंजीकरण करते समय तथा राष्ट्रीय परमिट के तहत चलने वाले वाहनों को फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करते समय भी फास्टैग विवरण लेना सुनिश्चित करने को कहा है.

FASTAGS क्या है?

यह टोल भुगतान करने के लिए बनाया गया एक उपकरण है. यह रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान (Radio Frequency Identification ) तकनीक का उपयोग करता है और इससे टोल पर प्रीपेड बैलेंस उपयोग करके सीधे भुगतान किया जा सकता है.

यह उपकरण कार के आगे वाले शीशे से लगा हुआ होता है जिससे वाहन को टोल पर रुकना आवश्यक नहीं रह जाता है. इस टैग की वैधता पाँच वर्ष तक के लिए होती है और इसे समय-समय पर रिचार्ज करना होता है.

इसके क्या लाभ हैं?

  • डिजिटल भुगतान होने के चलते इसमें नकद की आवश्यकता नहीं पड़ती.
  • टोल पर समय बर्बाद नहीं होता.
  • टोल पर रुकने से ईंधन खर्च होता है और प्रदूषण भी होता है. इस तकनीक से इन सब से बचा जा सकता है.
  • इससे सरकार को ये जानकारी हो जाती है किसी टोल से कितने और किस प्रकार के मोटर यान गुजरे. इससे सरकार को पता लगेगा कि बजट में सड़क चौड़ाई और अन्य बुनियादी ढाँचे के लिए कितने खर्च का प्रावधान किया जाए.

Prelims Vishesh

What is the name of butterfly recently recorded as the largest in India? :-

  • अब तक दक्षिणी बर्ड विंग को भारत की सबसे बड़ी तितली माना जाता था, परन्तु पिछले दिनों उत्तराखंड के दीदीहाट (Didihat) से एक ऐसी तितली मिली है जो उससे भी बड़ी है और जिसके पंखों का फैलाव दक्षिणी बर्ड विंग (190mm) से 4mm अधिक है.
  • इसे गोल्डन बर्ड विंग का नाम दिया गया है.

Is DUAC a statutory body? :-

  • DUAC वह वैधानिक निकाय है जिसका गठन 1973 में एक अधिनियम के द्वारा किया गया था.
  • यह निकाय केंद्र सरकार को राजधानी की शहरी और पर्यावरणिक रूपरेखा के सौन्दर्य से जुड़े पहलू के संरक्षण, विकास एवं संधारण के विषय में परामर्श देता है और साथ ही स्थानीय निकायों को मार्गदर्शन भी प्रदान करता है.
  • वास्तव में DUAC भारत सरकार के लिए एक नीति परामर्शी होने के साथ-साथ एक नियामक निकाय तथा एक थिंक टैंक के रूप में भी कार्य करता है.

Places in News- Idlib :-

  • पिछले दिनों सीरिया और रूस के विमानों ने सीरिया के इदलिब नगर के विद्यालयों, अस्पतालों और बाजारों में हवाई हमले किये जिन्हें संयुक्त राष्ट्र के जाँचकर्ताओं ने युद्ध अपराध की संज्ञा दी.
  • ज्ञातव्य है कि इदलिब उत्तर-पश्चिम सीरिया का एक शहर है जो इदलिब प्रान्त की राजधानी अलेप्पो से 59 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में है.

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