Sansar डेली करंट अफेयर्स, 13 January 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 13 January 2020


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Separation of powers between various organs dispute redressal mechanisms and institutions.

Topic : SC verdict on internet shutdowns

संदर्भ

अगस्त 5, 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया गया जम्मू-कश्मीर और वहाँ कतिपय प्रतिबंध लगा दिए गये. इन प्रतिबंधों को निरस्त करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में अनेक याचिकाएँ दी गईं जिन सभी पर एक साथ सुनवाई करते हुए उस न्यायालय ने यह निर्देश दिया कि जम्मू-कश्मीर में धारा 144 (CrPC) लगाने और इन्टरनेट सेवा बंद करने पर सरकार एक सप्ताह के भीतर पुनर्विचार करे.

सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा प्रकट मन्तव्य  

धारा 144 से सम्बंधित

  1. धारा 144 का प्रयोग किसी मत अथवा शिकायत की वैध अभिव्यक्ति को दबाने के लिए या जनतांत्रिक अधिकारों को दबाने के लिए नहीं होना चाहिए.
  2. किसी आपातकाल में ही संकट की आशंका के आधार पर धारा 144 लगनी चाहिए.
  3. धारा 144 लगाने के समय राज्य के हित के साथ-साथ व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है.
  4. धारा 144 के अधीन शक्तियों का प्रयोग विवेक-सम्मत और सम्यक रीति से से होना चाहिए एवं इससे सम्बंधित आदेश में ठोस तथ्यों को दर्शाना चाहिए जिससे कि आदेश की न्यायिक समीक्षा हो सके.

इन्टरनेट प्रतिबंध से सम्बंधित

  1. सर्वोच्च न्यायालय का मंतव्य है कि इन्टरनेट का अधिकार एक मौलिक अधिकार है जो संविधान के अनुच्छेद 19 के अन्दर वर्णित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अंतर्गत आता है. इस प्रकार का प्रतिबंध मनमाने ढंग से नहीं होना चाहिए, अपितु उस समय होना चाहिए जब पूर्ण विचार-विमर्श कर यह समझा जाए कि और कोई उपाय बचा नहीं है.
  2. इन्टरनेट को सीमित करने और प्रतिबंधित करने के विषय में निकाला गया आदेश न्यायिक के अन्दर आएगा.
  3. अनिश्चित काल के लिए इन्टरनेट सेवा बंद करना टेलिकॉम नियमों का उल्लंघन भी है.

धारा 144 क्या है?

  • यह धारा आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) के अंतर्गत एक धारा है जोजिला दंडाधिकारी अथवा उपमंडल दंडाधिकारी अथवा किसी अन्य कार्यकारी दंडाधिकारी को यह अधिकार देती है कि वह राज्य सरकार की ओर से एक आदेश निकालकर किसी व्यक्ति अथवा सर्वसाधारण को किसी एक विशेष स्थान अथवा क्षेत्र में गतिविधि विशेष में लिप्त होने से रोक दे. यह आदेश एकपक्षीय (ex-parte) भी हो सकता है.
  • परन्तु सर्वोच्च न्यायालय ने यह व्यवस्था दी है कि इस धारा का प्रयोग कर नागरिकों के अधिकारों को दबाने के लिए खतरे की आशंका मात्र एक उपयुक्त आधार नहीं हो सकता.
  • जहाँ धारा 144 लागू (Section 144) होती है वहाँ हथियार लेकर चलना मना है. इसके लिएअधिकतम तीन वर्ष के कारावास का प्रावधान है.
  • धारा 144 लागू होने पर जनसाधारण की आवाजाही पर रोक लग जाती है और सभी शैक्षणिक संस्थान बंद हो जाते हैं. जब तक आदेश लागू रहता है तब तक उस क्षेत्र में कहीं भी सार्वजनिक बैठक अथवा जुलूस का आयोजन नहीं हो सकता है.
  • धारा 144 (Section 144) अधिकारियों कोइन्टरनेट रोकने की भी शक्ति प्रदान करता है.

धारा 144 (Section 144) कब लागू होती है?

  1. जब विधिसम्मत रूप से नियुक्त किसी व्यक्ति के काम में बाधा अथवा आघात पहुंचाया जाता है.
  2. जब मानव जीवन, स्वास्थ्य अथवा सुरक्षा को खतरा हो.
  3. सार्वजनिक शान्ति भंग हो अथवा कोई दंगा या झड़प हो.

धारा 144 की अवधि

धारा 144 के अंतर्गत निर्गत आदेश दो महीने से अधिक प्रभाव नहीं होता है. परन्तु राज्य सरकार दो-दो महीने करके इसकी अवधि अधिकतम छह महीने तक बढ़ा सकती है. परिस्थिति सामान्य होने पर धारा 144 बीच में ही उठा ली जा सकती है.

Section 144 का दुरुपयोग

बहुधा यह देखा गया है कि धारा 144 का दुरूपयोग शान्तिपूर्ण प्रतिरोध को भी दबाने के लिए किया जाता है. वस्तुतः यह धारा संविधान के अनुच्छेद 19 (1)(b) एवं (c) की भावना के विरुद्ध है. विशेषज्ञों की मान्यता है कि धारा 144 औपनिवेशिक युग की धरोहर है और यह अभी तक इसलिए बनी हुई है क्योंकि भारत सरकार ने 1872 की आपराधिक प्रक्रिया संहिता (1872 Code of Criminal Procedure) के अधिकांश प्रावधानों को बिना मीन-मेख के ज्यों का त्यों अपना लिया था.


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Important aspects of governance, transparency and accountability.

Topic : Top Risks 2020

संदर्भ

यूरेशिया ग्रुप नामक अमेरिका की एक प्रभावशाली आकलन कम्पनी ने टॉप रिस्क 2020 शीर्षक प्रतिवेदन प्रकाशित कर दिया है.

मुख्य निष्कर्ष

भारत के सन्दर्भ में  :-

  1. भू-राजनैतिक जोखिम की दृष्टि से भारत विश्व का पाँचवाँ सबसे बड़ा जोखिम माना गया है.
  2. प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में आर्थिक प्रगति पर ध्यान न देकर कई सामाजिक विवादास्पद नीतियों को बढ़ावा दिया है.
  3. इसके परिणामस्वरूप 2020 में सामुदायिक और पन्थगत अस्थिरिता तो होगी ही, साथ ही विदेश नीति और आर्थिक नीति को भी धक्का पहुंचेगा.
  4. देश की तिमाही वृद्धि 4 . 5% है जो छह वर्षों में सबसे कम है. ऐसी स्थिति में मोदी के पास संरचनात्मक सुधार करने के लिए जगह कम बची है.
  5. अर्थव्यवस्था के दुर्बल पड़ने से आर्थिक राष्ट्रवाद और संरक्षणवाद को बढ़ावा मिलेगा जो 2020 में भारत के लिए अड़चन सिद्ध होगा.

विश्व के सन्दर्भ में :-

  1. अमेरिका को इस प्रतिवेदन में इस वर्ष का सबसे बड़ा भू-राजनैतिक जोखिम माना गया है.
  2. यह वर्ष अमेरिका के लिए सबसे उथल-पुथल का वर्ष होगा क्योंकि यहाँ महाभियोग चल रहा है और न्यायालय में अनेक चुनौतियाँ निर्णय हेतु पड़ी हुई हैं. साथ ही आगामी चुनाव को कुछ लोग अवैध मानेंगे.
  3. विदेश नीति का परिवेश भी अवांछनीय होगा.
  4. अमेरिका और चीन के बीच तनाव इस वर्ष बने रहेंगे जिससे विश्व स्तर पर चुनतियाँ खड़ी होंगी.
  5. फलस्वरूप सुरक्षा, प्रभाव और मान्यताओं को लेकर खुला टकराव देखने को मिलेगा.
  6. अनेक देश और सरकारें बहुराष्ट्रीय निगमों के प्रति कठोरता अपनाएंगे और नियमावलियों में कट्टर राष्ट्रवाद के तत्त्व डालेंगे.
  7. अमेरिका और चीन के द्वारा प्रदर्शित एकपक्षीयता यूरोपीय संघ को भी कष्ट में डालेगी.
  8. जलवायु परिवर्तन का दुष्प्रभाव कम्पनियों और देशों पर समान रूप से पड़ेगा जिससे कार्बन उत्सर्जन को नियंत्रित करना कठिन होगा.
  9. शिया देश स्थानीय अस्थिरता उत्पन्न करेंगे.
  10. तुर्की वर्चस्व दिखाना चाहता है जोकि मध्य-पूर्व के लिए एक संकट खड़ा कर सकता है.
  11. लैटिन अमेरिका में अस्थिरता और विप्लव का जोखिम बना हुआ है.

GS Paper 3 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Infrastructure- energy.

Topic : State Energy Efficiency Index 2019

संदर्भ

2019 का राज्य ऊर्जा दक्षता तत्परता सूचकांक (State Energy Efficiency Preparedness Index) निर्गत हो गया है. विदित हो कि ऐसा पहला सूचकांक अगस्त 1, 2018 में प्रकाशित हुआ था.

यह सूचकांक क्या है?

  • इस सूचकांक को ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (Bureau of Energy Efficiency – BEE) एवं ऊर्जा सक्षम अर्थव्यवस्था संघ (AEEE) संयुक्त रूप से तैयार करते हैं. यह एक राष्ट्रीय सूचकांक है जो राज्यों की ऊर्जा विषयक नीतियों और कार्यक्रमों का आकलन करता है.
  • यह प्रतिवेदन देश के 36 राज्यों/संघीय क्षेत्रों में ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में हुई प्रगति का आकलन 97 महत्त्वपूर्ण संकेतकों के आधार पर करता है.
  • विवेक सम्मत तुलना के लिए राज्यों और संघीय क्षेत्रों को चार समूहों में विभक्त कर दिया गया है. इस विभाजन का आधार यह है कि किस राज्य या संघीय क्षेत्र ने बिजली की माँग के लिए अपेक्षित कितनी सम्पूर्ण प्राथमिक ऊर्जा आपूर्ति (Total Primary Energy Supply – TPES) की है. इसको इस प्रकार कह सकते हैं कि इन्होंने बिजली, कोयला, खनिज तेल, गैस आदि के लिए कितनी ऊर्जा मुहैया की है.

उद्देश्य

  • इस सूचकांक से राष्ट्रीय ऊर्जा दक्षता के लिए राज्यों में किये जाने वाले प्रयासों को लागू करने में सहायता मिलेगी. साथ ही ऊर्जा सुरक्षा (energy security), ऊर्जा उपलब्धता (energy access) एवं जलवायु परिवर्तन (climate change) के राज्यस्तरीय तथा राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी.
  • स्वतंत्र संकेतकों में मुख्य हैं – भवन निर्माण, उद्योग, नगरपालिका, परिवहन, कृषि तथा ऊर्जा वितरण कंपनियाँ.
  • यह सूचकांक राज्यों की नीतियों एवं नियमों, वित्तीय तंत्रों, संस्थागत क्षमता, ऊर्जा बचाने वाले उपायों तथा बचाई गई ऊर्जा का अध्ययन करता है.

सूचकांक में वर्णित श्रेणियाँ

सूचकांक में राज्यों को उपलब्धि के आधार पर उन्हें कुछ श्रेणियाँ दी जाती हैं, जैसे – अग्रणी (Front Runner), सफल (Achiever), प्रतियोगी (Contender), आकांक्षी (Aspirant)

विभिन्न राज्यों का प्रदर्शन

  • इस वर्ष किसी भी राज्य को अग्रणी (front runner) की पदवी नहीं दी गई है.
  • सबसे अच्छा प्रदर्शन कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पुडुचेरी का रहा है.
  • सबसे बुरा प्रदर्शन करने वाले राज्य हैं – मणिपुर, झारखंड, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर.

सूचकांक की महत्ता

ज्ञातव्य है कि अमेरिका और चीन के बाद भारत ही वह देश है जहाँ सबसे अधिक ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जित होते हैं. अतः भारत की योजना है कि 2030 तक कार्बन फुटप्रिंट को 2005 के स्तर से 33-35% घटाया जाए. पेरिस 2015 की बैठक में भारत ने यह लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की थी. राज्य ऊर्जा दक्षता तत्परता सूचकांक (State Energy Efficiency Preparedness Index) प्रकाशित करने से कार्बन उत्सर्जन को समझने और नियंत्रित करने में विपुल सहायता मिलेगी.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Cybersecurity.

Topic : Cyber Crime Coordination Centre

संदर्भ

पिछले दिनों भारत सरकार ने भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) (Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) का उद्घाटन किया. ज्ञातव्य है कि 2018 में ऐसे केंद्र की स्थापना के लिए अनुमोदन दिया गया था जहाँ सभी प्रकार के साइबर अपराधों से व्यापक और समन्वित रीति से निपटा जा सके.

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र क्या है?

यह केंद्र केन्द्रीय गृह मंत्रालय साइबर एवं सूचना सुरक्षा (Cyber and Information Security (CIS) प्रभाग के अंतर्गत सृजित किया गया है.

इसमें निम्नलिखित सात अवयव हैं –

  1. राष्ट्रीय साइबर अपराध खतरा विशेलेषण इकाई (National Cyber Crime Threat Analytics Unit)
  2. राष्ट्रीय साइबर अपराध प्रतिवेदन पोर्टल (National Cyber Crime Reporting Portal)
  3. राष्ट्रीय साइबर अपराध प्रशिक्षण केंद्र (National Cyber Crime Training Centre)
  4. साइबर अपराध पारिस्थितिकी तंत्र प्रबंधन इकाई (Cyber Crime Ecosystem Management Unit)
  5. राष्ट्रीय साइबर अपराध शोध एवं नवाचार केंद्र (National Cyber Crime Research and Innovation Centre)
  6. राष्ट्रीय साइबर अपराध फोरेंसिक प्रयोगशाला पारिस्थितिकी तंत्र (National Cyber Crime Forensic Laboratory Ecosystem)
  7. संयुक्त साइबर अपराध अन्वेषण दल (Platform for Joint Cyber Crime Investigation Team)

महत्ता

I4C से साइबर सुरक्षा से सम्बंधित अन्वेषणों को केंद्रीकृत करने में तथा प्रतिक्रिया उपायों को विकसित करने के समय प्राथमिकताओं के निर्धारण में सहायता मिलेगी. साथ ही इससे खतरे को सँभालने के लिए निजी कम्पनियों को साथ लाने में सहायता मिलेगी.

उद्देश्य

  • साइबर अपराध से लड़ाई में भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र एक नाभिक कार्यालय के रूप में कार्य करेगा.
  • देश और विदेश के शिक्षा जगत/शोध संस्थानों के सहयोग से नई तकनीकों और फोरेंसिक उपायों के निर्माण के लिए आवश्यक शोध एवं विकास गतिविधियाँ चलाने तथा शोध से जुड़ी समस्याओं और आवश्यकताओं की पहचान करने में यह केंद्र सहायक सिद्ध होगा.
  • अतिवादी और आतंकवादी उद्देश्य से साइबर स्पेस का दुरूपयोग रोकना.
  • तेजी से बदलती हुई तकनीकों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के साथ कदम से कदम मिलाने के लिए साइबर कानून में अपेक्षित संशोधन सुझाना.
  • गृह मंत्रालय के नाभिक अधिकारी के साथ विचार-विमर्श करके अन्य देशों के साथ साइबर अपराध से सम्बंधित हस्ताक्षरित पारस्परिक विधि सहायता संधियों (MLAT) को लागू करने से सम्बंधित सभी गतिविधियों का समन्वय करना.

निगरानी की आवश्यकता

सबसे अधिक साइबर अपराधी एशिया में रहते हैं जिस कारण यहाँ बहुत आर्थिक क्षति होती है. क्योंकि यह क्षेत्र वैश्विक आर्थिक बाजार में एक बड़ी भूमिका निभाता है, अतः इस क्षेत्र में साइबर खतरे बढ़ेंगे ही ऐसा अनुमान है. भारत में वर्तमान में 460 मिलियन लोग इन्टरनेट चलाते हैं और इसलिए उनपर ऑनलाइन अपराधियों और संगठनों का खतरा बना रहता है.

आगे की राह

ऑनलाइन धोका, हैकिंग, पहचान की चोरी, डार्क नेट, तस्करी, बाल अश्लील चित्रण, ऑनलाइन धार्मिक कट्टरता और साइबर आतंकवाद जैसे नए युग के अपराधों से लड़ने के लिए तथा साथ ही भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र की भविष्यगत कार्य-योजना तैयार करने के लिए सरकार ने प्रमुख सरकारी और निजी संस्थानों से IT विशेषज्ञों को काम पर रखने का निर्णय लिया है.


Prelims Vishesh

Kolkata port renamed :-

  • पिछले दिनों कलकत्ता पत्तन न्यास का नाम बदलकर डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी पत्तन न्यास कर दिया गया.
  • विदित हो कि 16वीं शती में पुर्तगालियों द्वारा निर्मित कलकत्ता बंदरगाह विश्व का एकमात्र नदी बंदरगाह है जो समुद्र से 203 किलोमीटर अन्दर हुगली नदी पर स्थित है.

Mission Purvodaya :

  • देश के पूर्वी क्षेत्र को एक समेकित इस्पात गढ़ (steel hub) बनाने के लिए मिशन पूर्वोदय नामक योजना का अनावरण किया है.
  • ज्ञातव्य है कि राष्ट्रीय इस्पात नीति में यह कहा गया है कि पूर्वी क्षेत्र में इस्पात उत्पादन की क्षमता को 75% से अधिक बढ़ाने की संभावना विद्यमान है.
  • इस कार्यक्रम के द्वारा सरकार पूर्वी भारत में माल-ढुलाई और उपयोगी अवसंरचना के निर्माण का काम करेगी जिससे यहाँ के सामाजिक और आर्थिक परवेश में क्रान्ति आ सकती है.

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