Sansar डेली करंट अफेयर्स, 12 January 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 12 January 2021


GS Paper 2 Source : The Hindu

UPSC Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : Gulf Leaders Sign Deal to End 3-Year Doha Boycott After Saudi Crown Prince, Qatar Emir’s Embrace

संदर्भ

हाल ही में खाड़ी देशों ने सऊदी अरब के अल उला (Al Ula) में आयोजित 41वें खाड़ी सहयोग परिषद् (GCC) शिखर सम्मेलन में ‘एकजुटता और स्थिरता’ समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं

gulf countries

पृष्ठभूमि

सऊदी अरब के नेतृत्व में खाड़ी देशों के समूह ने जून 2017 में ‘कतर’ से राजनयिक, कारोबारी एवं परिवहन संबंधों पर रोक लगा दी थी. इन देशों ने कतर पर ईरान के नजदीक होने तथा कट्टरपंथी इस्लामिक समूहों के समर्थन का आरोप लगाया था. कतर ने आरोपों को खारिज करते हुए इन प्रतिबंधों को अपनी संप्रभुता पर हमला बताया था.

इस क्षेत्र में शांति आवश्यक क्यों है?

  1. मध्य-पूर्व (Middle East) में किसी भी प्रकार की अस्थिरता से तेल की कीमतों में वृद्धि होने की संभावना रहती है, और दीर्घकालीन अस्थिरता की स्थिति में तेल की उच्च कीमतें बरकरार रहती हैं.
  2. कतर, विश्व में तरल प्राकृतिक गैस (LNG) का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है तथा मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) प्रमुख प्राप्तकर्ता हैं.
  3. भारत, अपनी 90% प्राकृतिक गैस आवश्यकताओं के लिए कतर पर निर्भर है.
  4. कतर का सॉवरिन वेल्थ फंड और राज्य के स्वामित्व वाली अन्य संस्थाएं, साथ ही कतर के निजी निवेशक, भारत में अवसरंचना क्षेत्र में निवेश करने का विकल्प देख रहे हैं.

खाड़ी सहयोग परिषद् (GCC)

  • GCC वस्तुत: खाड़ी से संलग्न अरब राष्ट्रों का एक राजनीतिक एवं आर्थिक संघ है, जिसमें 6 देश शामिल हैं, यथा- संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर, ओमान, कुवैत और बहरीन.
  • इसका उद्देश्य अरब और इस्लामी संस्कृतियों में निहित अपनी समान राजनीतिक एवं सांस्कृतिक पहचान के आधार पर परिषद के सदस्यों के मध्य एकता स्थापित करना है.
  • GCC के सदस्य राष्ट्र भारत के लिए ऊर्जा और वार्षिक विप्रेषणों के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में से हैं.
  • सचिवालय सऊदी अरब के रियाद में स्थित है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

UPSC Syllabus : Important International Institutions

Topic : Seventh Trade Policy Review of India at the WTO

संदर्भ

हाल ही में विश्व व्यापार संगठन (WTO) द्वारा जीनेवा में भारत की व्यापार नीति की सातवीं समीक्षा की गयी. जिनेवा, स्विट्जरलैंड में आयोजित भारत की सातवीं व्यापार नीति समीक्षा (Trade Policy Review -TPR) के अंतिम सत्र में डब्ल्यूटीओ के सदस्यों ने 2015 के बाद से व्यापार और आर्थिक वातावरण में सुधार के लिए भारत द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की.

क्या है व्यापार नीति समीक्षा तंत्र?

  • व्यापार नीति समीक्षा तंत्र (TPRM) विश्व व्यापार संगठन (WTO) के सदस्यों के बीच व्यापार प्रथाओं में पारदर्शिता को स्थापित करने वाला एक उपकरण है.
  • बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली में सरकार के निर्णय लेने की घरेलू पारदर्शिता के निहित मूल्य का पालन करने के लिए दिसंबर 1988 में इसे मॉन्ट्रियल मिड-टर्म रिव्यू के दौर में स्थापित किया गया था.

समीक्षा के प्रमुख निष्कर्ष

विश्व व्यापार संगठन ने निम्नलिखित बिंदुओं पर भारत की सराहना की :-

  1. वर्ष 2016 में भारत द्वारा प्रस्तुत वस्तु एवं सेवा कर (Goods & Services Tax) के विषय में.
  2. विश्व व्यापार संगठन के व्यापार सुविधा समझौते (Trade Facilitation Agreement) के कार्यान्वयन के लिए भारत द्वारा उठाए गए कदमों के विषय में. विदित हो कि व्यापार सुविधा समझौते (TFA) का उद्देश्य सीमा शुल्क प्रक्रियाओं में तेज़ी लाना तथा व्यापार को सरल, तीव्र एवं सुगम बनाना है.
  3. देश में व्यापार सुगमता की दिशा में किये गए प्रयासों के विषय में.
  4. ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस रिपोर्ट के अंतर्गत ‘ट्रेडिंग अक्रॉस बॉर्डर्स’ अर्थात् सीमा पार व्यापार संकेतक में भारत की बेहतर रैंकिंग के विषय में.
  5. भारत द्वारा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment- FDI) नीति और राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा अधिकार नीति (National Intellectual Property Rights Policy), 2016 को उदार बनाए जाने के लिये उठाए गए कदमों के मामले में.

भारत की चिंता

  • पिछली समीक्षा के बाद से अब तक भारत की व्यापार नीति बहुत हद तक अपरिवर्तित रही है.
  • WTO के अनुसार, व्यापार नीति के साधनों जैसे- टैरिफ, निर्यात कर, न्यूनतम आयात मूल्य, आयात तथा निर्यात प्रतिबंध और लाइसेंसिंग पर भारत की निर्भरता बनी हुई है. इन साधनों का उपयोग घरेलू मांग तथा आपूर्ति संबंधी आवश्यकताओं को प्रबंधित करने, घरेलू मूल्य में व्यापक उतार-चढ़ाव से अर्थव्यवस्था को बचाने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं उनका समुचित उपयोग सुनिश्चित करने के लिये किया जाता है. इनके परिणामस्वरूप टैरिफ दरों और व्यापार नीति के अन्य साधनों में लगातार परिवर्तन होते रहते हैं जिसके कारण व्यापारियों के लिये अनिश्चितता की स्थिति उत्पन्न होती है.
  • वर्तमान में व्याप्त महामारी ने एक बार फिर लोगों के लिये खाद्य तथा जीविका की सुरक्षा के महत्त्व को दर्शाया है तथा खाद्य सुरक्षा के स्थायी समाधान के लिये पब्लिक स्टॉक होल्डिंग (PSH) का मार्ग अपनाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया है.

व्यापार नीति समीक्षा तंत्र की प्रक्रिया

  • समीक्षा का आधार और आवृत्ति विश्व व्यापार में सदस्यों के हिस्से पर निर्भर करती है. विश्व व्यापार के चार बड़े हिस्सेदार जैसे यूरोपीय संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और जापान की समीक्षा हर दो साल में की जाती है.
  • इनके बाद आने वाले 16 बड़े व्यापार साझीदारों की व्यापार नीति की समीक्षा हर चार साल में समीक्षा की जाती है. अन्य सदस्यों की समीक्षा हर छह साल में की जाती है. हालांकि कुछ कम से कम विकसित सदस्य देशों के लिए एक लंबी अवधि भी तय की जा सकती है.
  • यह समीक्षा विश्व व्यापार संगठन की सामान्य परिषद का एक अनुषंगी निकाय “व्यापार नीति समीक्षा निकाय” द्वारा की जाती है.

GS Paper 3 Source : The Hindu

UPSC Syllabus : Infrastructure and Energy.

Topic : Perform Achieve and Trade: PAT

संदर्भ

विद्युत मंत्रालय ने निष्पादन, उपलब्धि एवं व्यापार (Perform Achieve and Trade: PAT) योजना के द्वितीय चरण के अंतर्गत निर्गत ई-प्रमाण पत्र के व्यापार के लिए मानदंड एवं मानक अधिसूचित किए हैं.

PAT योजना

  • निष्पादन, उपलब्धि एवं व्यापार (PAT) योजना, विशिष्ट ऊर्जा गहन उद्योगों {जिन्हें नामित उपभोक्ता (Designated Consumers: DCs) कहा जाता है} के मध्य ऊर्जा की खपत को कम करने और ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने के लिए एक बाजार आधारित कार्बन ट्रेडिंग प्रणाली है.
  • यह वर्धित ऊर्जा दक्षता के लिए राष्ट्रीय मिशन (National Mission for Enhanced Energy Efficiency: NMEEE) के अंतर्गत ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (Bureau of Energy Efficiency: BEE) की एक प्रमुख योजना है.
  • ऊर्जा दक्षता के लिए राष्ट्रीय मिशन (NMEEE) जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (National Action Plan on Climate Change: NAPCC) के अंतर्गत संचालित अष्ट मिशनों में से एक है.
  • इस योजना के अंतर्गत, अनिवार्य विशिष्ट ऊर्जा उपभोग कटौती लक्ष्यों को तीन वर्ष के चक्र हेतु DCs को सौंपा गया है.
  • PAT योजना का द्वितीय चरण वर्ष 2016 में अधिसूचित किया गया था.
  • ऊर्जा बचत प्रमाण-पत्र (Energy saving certificates: ESCerts), एक DC को अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के उपरांत प्रदान किया जाता है. इस ESCert को वह अपने लक्ष्य से वंचित रहने वाले अन्य DC को विक्रय कर सकता है. ESCerts का मान, ऊर्जा बचत के 1 टन तेल के समतुल्य (Tonne of Oil Equivalent: TOE) माना गया है.
  • इंडियन एनर्जी एक्सचेंज (IEX) और पावर एक्सचेंज इंडिया लिमिटेड (PXIL) में ESCerts का व्यापार किया जा सकता है. इनको PAT के अंतर्गत अन्य इकाइयों द्वारा क्रय किया जा सकता है, जो अपनी अनुपालन आवश्यकताओं को पूर्ण करने के लिए इनका उपयोग कर सकती हैं.

ESCerts

ESCerts के व्यापार हेतु BEE एक प्रशासक है और केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (Central Electricity Regulatory Commission) एक विनियामकीय निकाय है.


GS Paper 3 Source : The Hindu

UPSC Syllabus : Indian Economy and issues relating to planning, mobilization of resources, growth, development and employment.

Topic : India’s economy is showing decisive signs of a ‘V-shaped’ recovery in 2021

संदर्भ

भारतीय वाणिज्य एंव उद्योग मंडल (एसोचेम) के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था में 2021 में तेजी से सुधार देखा जा रहा है और अर्थव्यवस्था V-आकार के सुधार की ओर तेजी से बढ़ रही है.

भारत में आर्थिक पुनरुत्थान (ECONOMIC RECOVERY) की आदर्श आकृति क्या होनी चाहिए?

COVID-19 संकट और अपर्याप्त वित्तीय उत्प्रेरण के कारण बहुत संभावना है कि भारत में आर्थिक पुनरुत्थान (economic recovery) की आकृति लम्बे U-आकार (elongated U-shape) में होगी.

आर्थिक पुनरुत्थान की आकृतियाँ कौन-कौन सी होती हैं?

आकृति वाला आर्थिक पुनरुत्थान (Z-shaped recovery)

यह सबसे अच्छा परिदृश्य होता है जिसमें अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से सुदृढ़ हो जाती है. अर्थव्यवस्था को जो कुछ भी हानि (जैसे – तालेबंदी के पश्चात् बदले की भावना से खरीद) हो चुकी होती है उसकी इस आकृति में तत्काल क्षतिपूर्ति हो जाती है.

आकृति वाला आर्थिक पुनरुत्थान (V-shaped recovery)

इसमें भी अर्थव्यवस्था तेजी से पटरी पर आ जाती है और सामान्य वृद्धि की राह पर चल पड़ती है.

आकृति वाला आर्थिक पुनरुत्थान (U-shaped recovery)

इसमें अर्थव्यवस्था को संघर्ष करना पड़ता है और वृद्धि की दर कुछ समय तक निम्न स्तर पर रहती है और उसके पश्चात् धीरे-धीरे सामान्य स्तर तक पहुँचती है.

आकृति वाला आर्थिक पुनरुत्थान (W-shaped recovery)

इसमें वृद्धि की दर बार-बार गिरती और बढ़ती है और अन्त में जाकर सामान्य दर पर पहुँच पाती है. इस प्रकार W की आकृति वाला चार्ट बन जाता है.

आकृति वाला आर्थिक पुनरुत्थान (L-shaped recovery)

यह सबसे बुरा परिदृश्य होता है जिसमें एक बार गिर जाने के बाद अर्थव्यवस्था निम्न स्तर पर टिकी रहती है और उसे फिर से पटरी पर आने में बहुत-बहुत समय लगता है.

आकृति वाला आर्थिक पुनरुत्थान (J-shaped recovery)

यह परिवेश तनिक यथार्थ से दूर होता है क्योंकि इसमें वृद्धि बहुत तेजी से होती है और ऊँचे स्तर पर बहुत समय तक टिक जाती है.

अन्य आकृतियाँ

स्वूश (Swoosh) आकृति वाला आर्थिक पुनरुत्थान : इसमें पुनरुत्थान की आकृति Nike के logo के समान V-आकृति और U-आकृति के बीच का रूप लिए होती है. इसमें पतन के पश्चात् वृद्धि तेजी से होती है, परन्तु फिर उसके मार्ग में अड़चनें आ जाती हैं और अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर आती है.

अन्दर मुड़े वर्गमूल की आकृति वाला वाला आर्थिक पुनरुत्थान (Inverted square root shaped recovery) : यह परिकल्पना वित्त प्रदाता George Soros द्वारा कुछ वर्षों पहले की गई थी. इसके अंतर्गत अर्थव्यवस्था न्यूनतम स्थान पर जाकर फिर से ऊपर उठ सकती है, किन्तु फिर वृद्धि धीमी पड़ जाती है और अर्थव्यवस्था एक कदम नीचे आ जाती है.

आर्थिक पुनरुत्थान का आकार किन कारकों पर निर्भर है?

आर्थिक पुनरुत्थान की आकृति का निर्धारण सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की गति और दिशा से होता है. इसके अतिरिक्त और भी कई कारक होते हैं, जैसे – राजकोषीय एवं मौद्रिक उपाय, उपभोक्ता की आय और भावना आदि.

आकृति को यहाँ जरूर देखें आर्थिक पुनरुत्थान (ECONOMIC RECOVERY)


Prelims Vishesh

Magneto-telluric :-

  • विद्युत चुम्बकीयदृभू-सतह (MT) वस्तुतः एक भू-भौतिकीय पद्धति है. इसके अंतर्गत भूगर्भीय (भूमिगत) संरचना और प्रक्रियाओं को समझने के लिए पृथ्वी के चुंबकीय व विद्युत क्षेत्रों की प्राकृतिक समय विभिन्‍नता का उपयोग किया जाता है.
  • इस सर्वेक्षण से द्रव की उपस्थिति का पता लगाया जायेगा. यह द्रव सामान्यतः: भूकंप के उत्पन्न होने की संभावना को बढ़ाता है. 
  • राष्ट्रीय भूकंपीय केंद्र (NSC) द्वारा दिल्‍ली क्षेत्र में एक MT सर्वेक्षण किया जा रहा है.

Sudden Stratospheric Warming :-

  • 5 जनवरी, 2021 को उत्तरी ध्रुव के ऊपर SSW घटना घटित हुई थी.
  • संभवत: यह वर्तमान में विश्व के विस्तृत भागों में अत्यधिक शीत मौसम के लिए उत्तरदायी हो सकती है.
  • एक SSW के दौरान, विगत कुछ दिनों की तुलना में घ्रुवीय समताप मंडल का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है.
  • प्रायः इस प्रकार की घटनाओं के बाद अधिक शीत मौसम, विशेषकर व्यापक हिम तूफान की घटना घटित होती है.
  • समताप मंडल पृथ्वी की सतह से लगभग 10-50 किलोमीटर ऊपर वायुमंडल की एक परत है.

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