Sansar डेली करंट अफेयर्स, 11 January 2020

Sansar LochanSansar DCALeave a Comment

Contents

Sansar Daily Current Affairs, 11 January 2020


GS Paper 2 Source: The Hindu

the_hindu_sansar

UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Mineral Laws (Amendment) Ordinance 2020

संदर्भ

खदान एवं खनिज (विकास एवं नियमन) अधिनियम, 1957/Mines and Minerals (Development and Regulation) Act 1957 तथा कोयला खदान (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015/Coal Mines (Special Provisions) Act 2015 में संशोधन करके खनिज विधि (संशोधन) अध्यादेश 2020/Mineral Laws (Amendment) Ordinance 2020 की अधिसूचना निकालने के लिए केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने अपना अनुमोदन दे दिया है.

खनिज विधि (संशोधन) अध्यादेश 2020 में क्या है?

  1. इसमें मिश्रित लाइसेंस सह-खदान लीज के लिए कोयला/लिग्नाइट के ब्लॉकों के आवंटन का प्रावधान किया गया है.
  2. जिन ब्लॉकों को केंद्र सरकार पहले ही आवंटित कर चुकी है उनके लिए पूर्वानुमति की आवश्यकता को निरस्त कर दिया गया है.
  3. यह अध्यादेश परियोजनाओं के कार्यान्वयन की प्रक्रिया में गति लाएगा और व्यवसाय की सुगमता को बढ़ावा देगा. इसमें प्रक्रिया को सरलतर बना दिया गया है, अतः इससे उन सभी पक्षकारों को लाभ मिलेगा जो उन क्षेत्रों में कार्यरत हैं जहाँ खनिज पाए जाते हैं.

पृष्ठभूमि

2018 में सरकार ने निजी प्रतिष्ठानों के द्वारा वाणिज्यिक खनन कार्य की अनुमति दे दी थी. परन्तु नीलामी म एन केवल कोयला कम्पनियों को  ही प्रतिभागिता करने दिया गया था.

अगस्त 2019 में सरकार ने खुले विक्रय और सम्बद्ध अवसंरचना, जैसे वाशरी (washeries) के निर्माण के लिए कोयला खनन में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति की घोषणा की थी.

खनिज विधि (संशोधन) अध्यादेश 2020 के निहितार्थ

  1. यह अध्यादेश कोयला के खनन में इस्पात और ऊर्जा के अतिरिक्त अन्य व्यवसायियों के लिए मार्ग प्रशस्त करता है.
  2. इससे कुशल ऊर्जा का एक बाजार तैयार होगा जिससे प्रतिस्पर्धा तो बढ़ेगी ही, साथ ही कोयले के आयात में भी घटत होगी. उल्लेखनीय है कि विगत वर्ष भारत ने 235 मिलियन टन कोयले का आयात किया था. यदि यह अध्यादेश पहले लागू हो जाता तो 135 मिलियन टन कम कोयला आयात करना पड़ता जिसका मूल्य 171 हजार करोड़ होता.
  3. यह अध्यादेश कोयला प्रक्षेत्र में काल इंडिया लिमिटेड के एकाधिकार को समाप्त कर देगा.
  4. यह अध्यादेश विश्व-भर में खननकर्ताओं के द्वारा प्रयोग में लाई गई भूगर्भ खनन की आधुनिकतम तकनीक भारत को उपलब्ध कराने में सहायता पहुँचायेगा.

नया खनन लक्ष्य (New mining target)

2018 में भारत सरकार ने निजी प्रतिष्ठानों को वाणिज्यिक खनन की अनुमति देते समय 2020 तक 1 . 5 बिलियन टन के खनन का लक्ष्य निर्धारित किया था. इसमें 1 बिलियन टन खनन कोल इंडिया को करना था और शेष 500 मिलियन टन अन्य प्रतिष्ठानों को करना था. अब इस लक्ष्य को सुधार करके 2023-24 तक 1 बिलियन टन के खनन का लक्ष्य रखा गया है.

खनन की अनुमति कौन देता है?

खनन की अनुमति राज्य सरकार उन सभी खनिजों के लिए देती है जो उस राज्य की सीमा के भीतर अवस्थित हैं. ऐसा प्रावधान खदान एवं खनिज (विकास एवं नियमन) अधिनियम, 1957 तथा खनिज छूट नियमावली, 1960 (Mineral Concession Rules, 1960( के तहत किया जाता है. परन्तु, खदान एवं खनिज (विकास एवं नियमन) अधिनियम, 1957 की प्रथम अनुसूची में वर्णित खनिजों के खनन के लिए केंद्र सरकार का अनुमोदन अनिवार्य होता है. उल्लेखनीय है कि इस अनुसूची में वर्णित खनिज इस प्रकार हैं – हाइड्रोकार्बन, आणविक खनिज तथा धात्वीय खनिज, जैसे – लौह अयस्क, बॉक्साइट अयस्क, ताम्र अयस्क, सीसा, बहुमूल्य पत्थर, जस्ता और सोना.


GS Paper 2 Source: The Hindu

the_hindu_sansar

UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : Nepal’s Seke ‘near-extinct’

संदर्भ

पिछले दिनों न्यूयॉर्क टाइम्स नामक पत्रिका ने यह सूचना दी कि नेपाल की लुप्तप्राय भाषा “सेके” के बोलने वाले विश्व में अब मात्र 700 ही रह गये हैं.

सेके और उसकी विलुप्ति का खतरा

संकटग्रस्त भाषा संघ (Endangered Language Alliance – ELA) के अनुसार सेके नेपाल की सौ देशज भाषाओं में से एक है. कुछ वर्षों से नेपाल की सरकारी भाषा नेपाली के समक्ष सेके पिछड़ रही है क्योंकि नेपाल में गाँवों के बाहर शिक्षा और रोजगार के अवसर नेपाली भाषा को ही पढ़ने से मिल सकते हैं. ELA के अनुसार, घर की विषम परिस्थितियों और अन्यत्र आजीविका की संभावना के चलते सेके बोलने वाले पोखरा, काठमांडू और यहाँ तक न्यूयॉर्क तक चले गये हैं. इस प्रकार हम कह सकते हैं कि यह भाषा लोगों के अन्यत्र ऐसी जगहों पर चले जाने से संकट में आ गई है जहाँ यह भाषा बोली नहीं जाती है क्योंकि वहाँ इस भाषा को बोलने और अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का परिवेश प्राप्त नहीं होता. इसके अतिरिक्त सेके बोलने वाले परिवारों के छोटे बच्चे इस भाषा को न सीखते हुए नेपाली और अंग्रेजी पर अधिक ध्यान दे रहे हैं.

UNESCO की दृष्टि में किस भाषा को संकटग्रस्त कहेंगे?

UNESCO के अनुसार, किसी भाषा के संकटग्रस्त होने की छह कोटियाँ होती हैं जो निम्नलिखित हैं –

  1. सुरक्षित :- वैसी भाषाएँ जो सभी पीढ़ियों द्वारा बोली जाती हैं और बिना बाधा के एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चलती जाती हैं.
  2. संकटग्रस्त :- ये वैसी भाषाएँ हैं जिनको अधिकांश बच्चे बोलते तो हैं, परन्तु इनका प्रयोग सर्वत्र नहीं होता.
  3. निश्चित रूप से संकटग्रस्त :- जिस भाषा को बच्चे अपनी मातृभाषा के रूप में नहीं सीख रहे हैं उसको निश्चित रूप से संकटग्रस्त भाषा कहा जाता है.
  4. विकट रूप से संकटग्रस्त :- ये ऐसी भाषाएँ हैं जिनको दादा-दादी और पुराने लोग बोलते हैं और माता-पिता समझते हैं, परन्तु वे स्वयं इस भाषा में आपस में अथवा बच्चों से बात नहीं करते हैं.
  5. अतिशय संकटग्रस्त :- अतिशय संकटग्रस्त भाषा वह भाषा है जिसको दादा-दादी अथवा घर के बूढ़े लोग सदैव नहीं बोलते, अपितु कभी-कभार ही प्रयोग में लाते हैं.
  6. विलुप्त :- जब किसी भाषा के बोलने वाले कोई नहीं बचते तो उस भाषा को विलुप्त भाषा कहा जाता है.

उपर्युक्त कसौटी पर कसने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि “सेके” भाषा एक “निश्चित रूप से संकटग्रस्त भाषा” की कोटि  में आता है.

विश्वभर में संकटग्रस्त भाषाओं की स्थिति

2019 को संयुक्त राष्ट्र ने अंतर्राष्ट्रीय देशज भाषा वर्ष (International Year of Indigenous Languages) घोषित किया था.

UNESCO के अनुसार, विश्व-भर में छह हजार भाषाएँ हैं. उनमें 57% पर कोई खतरा नहीं है, परन्तु 10% संकटग्रस्त, 10 . 7% निश्चित रूप से संकटग्रस्त, 9% विकट रूप से संकटग्रस्त, 9 . 6% अतिशय संकटग्रस्त और 3 . 8% विलुप्त हैं.

संकटग्रस्त भाषा परियोजना (Endangered Languages Project – ELP) के अनुसार, संकटग्रस्त भाषाओं की संख्या भारत में 201 और नेपाल में 70 है.


GS Paper 2 Source: The Hindu

the_hindu_sansar

UPSC Syllabus : Indian Constitution- historical underpinnings, evolution, features, amendments, significant provisions and basic structure.

Topic : Curative petition

संदर्भ

निर्भया वाद में दण्डित अभियुक्तों में से दो ने सर्वोच्च न्यायालय में उपचारात्मक याचिकाएँ (Curative petition) समर्पित की हैं. ज्ञातव्य है दिल्ली सत्र न्यायालय ने इस मामले से जुड़े चार अभियुक्तों को जनवरी 22 को तिहाड़ जेल में फाँसी देने का आदेश दे रखा है.

उपचारात्मक याचिका क्या है?

  1. उपचारात्मक याचिका दायर करना वह अंतिम न्यायिक उपाय है जिसका कोई व्यक्ति सहारा ले सकता है. यह उपाय तब लगाया जाता है तब किसी व्यक्ति को यह लगे कि उसे सर्वोच्च न्यायालय से भी वास्तविक न्याय नहीं मिला हो और उस व्यक्ति को यह लगता हो कि सर्वोच्च न्यायालय के अंतिम निर्णय में न्यायालय से कोई चूक हुई है. यह उपचार अति विरल मामलों में ही उपलब्ध होता है. इसमें जज द्वारा चैम्बर के अंदर बैठकर परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लिया जाता है. किसी-किसी विरल मामले में ऐसी याचिका पर खुले न्यायालय में भी सुनवाई होती है. यदि यह याचिका भी खारिज कर दी जाती है तब दोषी के पास राष्ट्रपति के पास क्षमादान याचिका दायर करने का अंतिम विकल्प बचता है.
  2. उपचारात्मक याचिका की अवधारणा सबसे पहले तब सामने आई थी जब सर्वोच्च न्यायालय ने रूपा अशोक हुर्रा बनाम अशोक हुर्रा एक अन्य (2002)/ Rupa Ashok Hurra vs. Ashok Hurra and Anr. (2002) के अंतर्गत यह व्यवस्था दी थी कि न्यायिक प्रक्रिया का दुरूपयोग रोकने और न्याय की अस्पष्ट अवहेलना के निराकरण के लिए सर्वोच्च न्यायालय चाहे तो अपने न्याय-निर्देशों पर अपनी मूलभूत शक्तियों का प्रयोग करते हुए फिर से विचार कर सकता है. यही आगे चलकर उपचारात्मक याचिका (curative petition) कहलाई.

उपचारात्मक याचिका (curative petition) स्वीकारने के लिए आवश्यक शर्तें

  • याचिकाकर्ता को यह सिद्ध करना होगा कि उसके मामले में नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों की वास्तविक अवेहलना हुई है और न्यायाधीश के द्वारा पक्षपात बरता गया है.
  • याचिकाकर्ता को बतलाना होगा कि उसके द्वारा उल्लिखित आधार समीक्षा याचिका में वर्णित हुए थे, परन्तु इन्हें बिना पूर्ण विचार के निरस्त कर दिया था.
  • उपचारात्मक याचिका (curative petition) उस बेंच के तीन वरिष्ठतम न्यायाधीशों को भेजी जाती है जिसने आदेश पारित किया था.
  • यदि जजों में से अधिकांश सहमत हों कि उपचारात्मक याचिका सुनवाई के योग्य है तब उसे उसी बेंच को यथासंभव भेज दिया जाता है. यदि याचिका तथ्यहीन हो तो न्यायालय याचिकाकर्ता पर कोस्ट (cost) भी लगा सकता है.

समीक्षा की शक्ति

संविधान के अनुच्छेद 137 में यह प्रावधान है कि संसद‌ द्वारा बनाई गई किसी विधि के या अनुच्छेद 145 के अधीन बनाए गए नियमों के उपबंधों के अधीन रहते हुए, सर्वोच्च न्यायालय को अपने द्वारा सुनाए गए निर्णय या दिए गए आदेश का पुनर्विलोकन करने की शक्ति होती है.


GS Paper 3 Source: The Hindu

the_hindu_sansar

UPSC Syllabus : Conservation related issues.

Topic : Green Credit Scheme

संदर्भ

वन परामर्शदात्री समिति (Forest Advisory Committee) ने हरित साख योजना (Green Credit Scheme) के कार्यान्वयन के लिए अनुमोदन दे दिया है.

हरित साख योजना की मुख्य विशेषताएँ

  • हरित साख योजना एक जींस के रूप में वनों का व्यापार करने की अनुमति देती है.
  • इस योजना के अंतर्गत वन विभाग पुनर्वनीकरण से सम्बंधित अपने दायित्व को अ-सरकारी एजेंसियों को सौंपने का अधिकार दिया जाता है.

हरित साख योजना का कार्यान्वयन

  • यह योजना भूमि की पहचान करने और वनरोपण करने के लिए एजेंसियों को अधिकार देती है. ये एजेंसियां या तो निजी कम्पनियाँ हो सकती हैं या कोई ग्राम्य वन समुदाय (village forest communities).
  • तीन वर्षों के बाद यदि वन विभाग के सभी मानदंड पूरे होते हों तो उस भूमि को क्षतिपूरक वन भूमि (compensatory forest land) मान लिया जाएगा.
  • तत्पश्चात् यदि किसी उद्योग को वनभूमि चाहिए तो वह एजेंसी के पास पहुंचेगा और पुनर्वनीकृत भूखंड के लिए भुगतान करेगा और वह भूमि वन विभाग को दे दी जायेगी जो उसे एक वन भूमि के रूप में अभिलिखित कर लेगा.
  • इस प्रक्रिया में सम्मिलित होने वाली एजेंसी अथवा ग्राम्य वन समुदाय को वन भूखंड की सम्पदाओं का टुकड़ों-टुकड़ों में व्यापार करने का अधिकार होगा.

वर्तमान परिवेश

  1. वर्तमान में जो प्रणाली चल रही है उसके अन्दर एक उद्योग यदि कोई वन भूखंड लेता है तो उसे उसके बदले उचित आकार का गैर-वन भूखंड देना पड़ता है जिससे कि खोये हुए वन की क्षतिपूर्ति हो सके.
  2. इसके अतिरिक्त उद्योग को सम्बंधित वन भूखंड के शुद्ध वर्तमान मूल्य (Net Present Value) के समतुल्य बाजार में चल रहा दाम वन विभाग को देना पड़ता है.
  3. तब जाकर वन विभाग का यह दायित्व बनता है कि वह उसे सौंपी भूमि को समय-समय पर वृक्षारोपण करते हुए उसे फिर से जंगल के रूप में बदल डाले.

ग्रीन क्रेडिट स्कीम की आवश्यकता क्यों पड़ी?

  1. उद्योगों को यह शिकायत रहती थी कि उन्हें वांछित वनभूमि के लिए उस वनभूमि के सटे ही एक उपयुक्त गैर-वन भूखंड देना पड़ता था जो एक अति कठिन कार्य था.
  2. पिछले कई दशकों से केंद्र सरकार को 50,000 करोड़ रुपयों का राजस्व प्राप्त हो चुका है. किन्तु प्राप्त धनराशि इसीलिए बिना खर्च के पड़ी रह जाती है कि राज्य सरकारें उस धनराशि को फिर से वन लगाने के काम में खर्च नहीं कर पाती हैं.
  3. राज्यों को अगस्त, 2019 तक 47,000 करोड़ रूपये विमुक्त किये जा चुके हैं, पर इस राशि से जंगलों का कायाकल्प हुआ हो ऐसा नहीं दिखता.

योजना का माहात्म्य

यह योजना लोगों को पारम्परिक वन भूमि के बाहर पेड़ लगाने के लिए प्रोत्साहन देती है. हम लोगों ने सतत विकास लक्ष्य के लिए जो अंतर्राष्ट्रीय वचन दिए हैं उनको पूरा करने में इस योजना से सहायता मिलेगी. साथ ही वनरोपण से सम्बन्धित देश के अपने लक्ष्यों की प्राप्ति में भी यह सहायक होगी.


GS Paper 3 Source: The Hindu

the_hindu_sansar

UPSC Syllabus : Cyber security related issues.

Topic : Revised norms for data-led probes

संदर्भ

आपराधिक मामलों में विदेशों से कानूनी सहायता लेने की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने संशोधित दिशा-निर्देश निर्गत किये हैं. इसके अतिरिक्त उसने इन विषयों पर भी मार्गनिर्देश दिए हैं – लेटर्स रोगेट्री (letters rogatory) के लिए प्रारूप-निर्माण एवं प्रक्रिया,  सूचनाओं को गंतव्य तक पहुँचाने तथा पारस्परिक कानूनी सहायता (mutual legal assistance) हेतु अनुरोध, सूचनाएँ तथा अन्य न्यायिक प्रलेख.

नए दिशा-निर्देश क्या हैं?

  • विदेश के सर्वर में होस्ट किये हुए किसी व्यक्ति के ई-मेल खाते के बारे में सूचना माँगने से पहले अन्वेषण एजेंसियों को यह सिद्ध करना होगा कि यह खाता किसी अपराध से जुड़ा हुआ है.
  • व्यक्तिगत समेत सभी प्रकार के डाटा को कानूनी रूप से और न्यायपूर्वक ही प्राप्त किया जाएगा. जिस देश से सूचना के लिए अनुरोध किया गया है उसको यह भी बताना होगा कि डाटा कब तक चाहिए.
  • विदेश से जो डाटा मिलेगा उसको उसी अवधि तक अपने पास रखना होगा जब तक डाटा लेने का उद्देश्य पूरा हो जाए. तत्पश्चात् डाटा सम्बन्धित देश को या तो वापस कर दिया जायेगा अथवा अवधि के पूरे होने पर डिलीट कर दिया जायेगा.
  • साइबर अपराधों और डिजिटल साक्ष्य से जुड़े अपराधों की पड़ताल के लिए डाटा को सुरक्षित रखना अतीव आवश्यक होगा.
  • किसी भी डाटा को तत्क्षण सुरक्षित रखने के लिए अनुरोध करने हेतु G8 देशों के 24/7 नेटवर्क का उपयोग किया जा सकता है.

G8 देशों का 24/7 नेटवर्क क्या है?

यह एक ऐसा नेटवर्क है जिससे कानून प्रवर्तन एजेंसियाँ किसी डिजिटल डाटा को उसके नष्ट होने के पहले अविलम्ब सुरक्षित रखने के लिए अनुरोध करती हैं. यह एक नया तंत्र है जो प्रतिभागी सरकारों अथवा अन्य स्वायत्त कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सम्पर्क की सुविधा प्रदान करता है.

साइबर अपराध के मामलों में अविलम्ब सहायता के लिए यह एक बिना किसी मध्यस्थता के काम करने वाला नेटवर्क है.


Prelims Vishesh

Coronavirus :-

  • चीन के शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस प्रजाति के एक नए वायरस का पता लगाया है जिससे पिछले दिनों निमोनिया जैसी एक नई बिमारी उस देश के वुहान प्रांत में पिछले महीने फ़ैल गई थी और जिसके चलते 59 लोग बीमार पड़े और अनेक आतंकित हो गये.
  • कोरोना वायरस किसी राजा के मुकुट जैसा दिखता है इसलिए इसको कोरोना वायरस नाम दिया गया है.
  • इस वायरस से कुछ पक्षियों के साथ-साथ स्तनपाई पशु भी ग्रस्त होते हैं, जैसे – गाय, बैल, सूअर, बिल्ली, कुत्ता, ऊँट आदि.

World Hindi Day 2020 :-

  • प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी जनवरी 10 को विश्व हिंदी दिवस मनाया जा रहा है.
  • यह दिवस 1975 में हुए विश्व हिंदी सम्मेलन की वर्षगाँठ के रूप में मनाया जाता है.
  • एक ओर जहाँ विश्व हिंदी दिवस 10 जनवरी को मनाया जाता है तो दूसरी ओर सितम्बर 14 को राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया जाता है. स्मरणीय है कि सितम्बर 14 को ही 1949 में संविधान सभा ने हिंदी को देश की राजभाषा के रूप में अंगीकृत किया था.

Click here to read Sansar Daily Current Affairs – Sansar DCA

December, 2019 Sansar DCA is available Now, Click to Download

Books to buy

Leave a Reply

Your email address will not be published.