Sansar डेली करंट अफेयर्स, 11 April 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 11 April 2020


GS Paper 1 Source: PIB

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UPSC Syllabus : The Freedom Struggle – its various stages and important contributors /contributions from different parts of the country.

Topic : Jallianwala incident

संदर्भ

आगामी 13 अप्रैल के दिन जालियाँबाग नरसंहार को 101 साल पूरे होने जा रहे हैं.

जालियाँबाग नरसंहार

  • 10 अप्रैल, 1919 को अमृतसर में सत्याग्रहियों पर गोली चलाने तथा अपने नेताओं डॉ. सत्यपाल व डॉ. किचलू की गिरफ्तारी के खिलाफ टाउन हॉल और पोस्ट ऑफिस पर हमले किये गये और इस दौरान हिंसा भी हुई. नगर का प्रशासन जनरल डायर के हाथों में सौंप दिया गया. डायर ने जनसभाएँ आयोजित करने पर प्रतिबंध लगा दिया.
  • 13 अप्रैल, 1919 को बैशाखी के दिन अमृतसर के जालियाँवाला बाग़ में एक सार्वजनिक सभा का आयोजन किया गया. सभा में भाग लेने वाले अधिकांश लोग आस-पास के गावों से आये हुए ग्रामीण थे जो बैशाखी मेले में भाग लेने आये थे तथा सरकार द्वारा शहर में आरोपित प्रतिबंध से बेखबर थे.
  • जनरल डायर ने सभाके आयोजन को सरकारी आदेश की अवहेलना समझा तथा सभा-स्थल को सशस्त्र सैनिकों के साथ घेर लिया. डायर ने बिना किसी पूर्व चेतावनी के सभा पर गोलियाँ चलाने का आदेश दे दिया. सरकारी आँकड़ों के अनुसार 379 लोग मारे गये थे पर वास्तव में यह संख्या बहुत अधिक थी.
  • हंटर आयोग के समय डायर ने दुःख व्यक्त किया कि उसका गोला-बारूद ख़त्म हो गया था एवं संकरी गलियों में बख्तरबंद गाड़ी नहीं ले जा सका.

परिणाम

  • इस घटना में 379 लोग मारे गये, जिसमें युवा, महिलाएँ, बूढ़े, बच्चे सभी शामिल थे. जालियाँवाला बाग़ हत्याकांड से पूरा देश स्तब्ध रह गया. वहशी क्रूरता ने देश को मौन कर दिया. पूरे देश में बर्बर हत्याकांड की भर्त्सना की गई.
  • गाँधीजी ने बोअर युद्ध (द.अफ्रीका) के दौरान की गई सहायता के लिए मिले “कैसर-ए-हिन्द” स्वर्ण पदक को वापस लौटा दिया. बाद में पंजाब में हुई क्रूरता से सम्बंधित हंटर आयोग की रिपोर्ट को “पन्ने दर पन्ने निर्लज्ज सरकारी लीपापोती” कहा. इस रिपोर्ट के शासन के पक्ष को सही ठहराया गया था.
  • रविन्द्रनाथ टैगोरने विरोध स्वरूप अपनी “नाइटहुड” की उपाधि त्याग दी तथा शंकरन नायर ने वायसराय की कार्यकारिणी से त्यागपत्र दे दिया.
  • अब उद्देश्य नैतिक प्रभाव उत्पन्न करना था, इसके लिए आगे मार्शल लॉ लागू करने जबरन गिरफ्तारियाँ, यातनाएं, सार्वजनिक रूप से कोड़े मारना, नाक रगड़ने को विवश करना, पूरे दिन चिलचिलाती धूप में खड़ा करना, सभी साहबों को सलाम करने हेतु बाध्य करना जैसी विचित्र सजाएँ दी गयीं.
  • गाँधीजी ने अनेक स्थानों पर हुई हिंसक घटनाओं के कारण 18 अप्रैल 1919 को सत्याग्रह स्थगित कर दिया, क्योंकि उनके अनुसार सत्याग्रह में हिंसा का कोई स्थान नहीं था.
  • सरकार ने अत्याचारी अपराधियों को दण्डित करने के स्थान पर उनका पक्ष लिया. जनरल डायर को सम्मानित किया गया. ब्रिटेन में रुडयार्ड किपलिंग ने डायर को भारत बचाने वाला बताया, मॉर्निंग पोस्ट पत्रिका ने डायर के पक्ष में जनमत बनाकर उसे “ब्रिटेन का शेर” कहा एवं उपहार देने हेतु चंदा एकत्रित किया.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes; mechanisms, laws, institutions and bodies constituted for the protection and betterment of these vulnerable sections.

Topic : Charting a Common Minimum Relief Programme

संदर्भ

नए कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण घोषित तालेबंदी के फलस्वरूप भारत एक आर्थिक संकट में फंसने वाला है. इसलिए समय की मांग है कि केंद्र सरकार इस स्थिति से निबटने के लिए एक सामान्य न्यूनतम राहत कार्यक्रम (Common Minimum Relief Programme) तैयार करे.

कौन-कौन-सी बातों पर बल देना होगा?

  1. दिहाड़ी मजदूरों और प्रवासी कामगारों पर सबसे अधिक आर्थिक एवं सामाजिक असुरक्षा का खतरा है. इसलिए उनपर सबसे पहले ध्यान देना होगा.
  2. उसी प्रकार छोटे और सीमांत किसानों को भी तत्काल सहारे की आवश्यकता होगी.
  3. तालेबंदी के कारण मजदूर नहीं मिलने के कारण और परिवहन रुक जाने के कारण उपभोक्ता सामग्रियों की आपूर्ति की शृंखला बिगड़ गयी है जिस कारण खाने-पीने और अन्य आवश्यक वस्तुओं का अभाव हो रहा है इसका कोई समाधान निकलना होगा.
  4. कोविड-19 संकट से मध्यम एवं छोटे उद्यमों पर खतरा आ गया है और करोड़ों की आजीविका संकट में है. ज्ञातव्य है कि अभी देश में 25 करोड़ MSME पंजीकृत हैं जो भारत के GDP में 61 लाख करोड़ रुपयों अर्थात् 29% का योगदान करते हैं.
  5. सामान्य न्यूनतम राहत कार्यक्रम में मध्यम वर्ग पर ध्यान देने की अपेक्षा है.

क्या-क्या करना चाहिए?

  1. आय का संबल प्रदान करने के साथ-साथ साधारण जीवन के लिए आवश्यक सामग्रियों, जैसे – चावल, गेहूं, बाजरा, दवाएं, पानी आदि की आपूर्ति के लिए एक समान तंत्र बनाया जाना चाहिए.
  2. आगामी खरीफ मौसम में किसानों को समस्या का सामना नहीं करना पड़े, इसके लिए सरकारों को चाहिए कि वे तत्काल खाद, कीटनाशक, ऋण आदि किसानों को उपलब्ध कराएं.
  3. MSME के लिए सरकार की ओर से एक कार्ययोजना बनाना आवश्यक होगा जिसके अंतर्गत उन्हें डूबने से बचाने के लिए वित्तीय पैकेज दिया जाए.
  4. कम से कम तात्कालिक रूप से ही सरकार को एक न्यूनतम आय गारंटी कार्यक्रम का निर्माण करना चाहिए और उसे लागू करना चाहिए.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : EU €500bn corona rescue deal

संदर्भ

यूरोप में कोरोना वायरस महामारी से होने वाले दुष्प्रभाव को कम करने के लिए यूरोपीय संघ ने 500 बिलियन यूरो का एक उद्धार कार्यक्रम उद्घाटित किया है जो महादेश को पटरी पर लाने का काम करेगा और साथ ही मजदूरों, व्यवसायों और सार्वजनिक वित्त को सुदृढ़ करेगा.

इस उद्धार कार्यक्रम में क्या-क्या है?

  1. स्वास्थ्य सुविधा से सम्बंधित तंत्रों के लिए सुरक्षा
  2. कामगारों और स्वरोजगारियों के लिए सुरक्षा का प्रबंध
  3. यूरोपीय स्थिरता तंत्र (European Stability Mechanism – ESM) उपलब्ध कराना. इसके अंतर्गत सरकारों को कुल मिलाकर 240 बिलियन यूरो की राशि उपलब्ध कराई जायेगी.
  4. पूरे यूरोप में लागू होने वाली एक ऋण योजना के माध्यम से कम्पनियों तथा MSME प्रतिष्ठानों को आर्थिक सुदृढ़ता प्रदान की जायेगी.

उद्धार पैकेज की कमियाँ

यह उद्धार पैकेज कोरोना वायरस महामारी के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए जो आर्थिक उपाय प्रस्तुत करता है, वह अल्प-अवधि के हैं. इसमें इस प्रश्न का समाधान नहीं किया गया है कि महामारी से निटपने के पश्चात् पुनर्निर्माण के काम के लिए दीर्घकालिक योजनायें क्या-क्या हैं? इसके अतिरिक्त यूरोपीय संघ द्वारा उपलब्ध कराए गये कोष का वास्तविक स्वरूप क्या उभर कर आएगा इसको लेकर सदस्य देशों के बीच अतिशय असहमति दिखी है.


GS Paper 2 Source: Indian Express

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : How is WHO funded?

संदर्भ

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) पर बड़ा आरोप लगाया है। ट्रंप ने कहा कि वह विश्व स्वास्थ्य संगठन को अमेरिका की ओर से दिए जाने वाले वित्त पोषण (फंडिंग) पर रोक लगाएंगे। उन्होंने संगठन पर कोरोना वायरस महामारी के दौरान सारा ध्यान चीन पर केंद्रित करने का आरोप लगाया।

WHO क्या है?

  • इस संगठन की स्थापना की नींव 19 जून, 1946 को संयुक्त राष्ट्र संघ की आर्थिक एवं सामाजिक परिषद्‌ द्वारा न्यूयॉर्क में आमंत्रित एक सम्मेलन में पड़ी .
  • स्वास्थ्य समस्याओं पर विचार करने के लिए आयोजित इस सम्मेलन ने 22 जुलाई, 1946 तक कार्य किया और इसी बीच उसने विश्व स्वास्थ्य संगठन के संविधान की रचना की. 67 देशों के प्रतिनिधियों ने इस सम्मेलन में संविधान रचना में भाग लिया.
  • 7 अप्रैल, 1948 को इस संगठन की स्थापना हुई. इसी- कारण 7 अप्रैल को पूरे विश्व में स्वास्थ्य दिवस के रूप में मनाया जाता है.
  • इस संगठन का उद्देश्य विश्व के देशों की आम जनता को स्वास्थ्य की उच्चतम दशा को प्राप्त करना है. इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए यह संगठन अन्तर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य के कार्यों का संचालन एवं समन्वय, महामारियों एवं बीमारियों के उन्मूलन को प्रोत्साहन करना, आहार पोषण, निवास गृह तथा सफाई एवं इस कार्य करने की दशाओं को उन्नत करने का कार्य करता है.
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ने विकासशील देशों के हित में छूआछूत से फैलने वाली बीमारियों एवं महामारियों की रोकथाम में महत्त्वपूर्ण कार्य किया है.
  • इसके कार्यक्रमों में स्वास्थ्य सेवाओं का विकास, रोग निवारण व नियंत्रण, पर्यावरणीय स्वास्थ्य का संवर्द्धन, स्वस्थ मानव शक्ति विकास तथा जैव-चिकित्सा, स्वास्थ्य सेवाओं, शोध व स्वास्थ्य कार्यक्रमों का विकास एवं प्रोत्साहन शामिल हैं.
  • इसके पास दुनिया का सबसे बड़ा Blood Bank है दुनिया की कई बीमारी जैसे- हैजा, मलेरिया, चेचक, वायरस आदि बीमारियों को रोकने के लिए WHO अपना महत्वपूर्ण योगदान देता है.

WHO के लिए वित्त पोषण (funding) कहाँ से होता है?

WHO को चलाने के लिए सदस्य देश वित्तीय वित्त योगदान करते हैं. ये योगदान विभिन्न प्रकार के होते हैं, जैसे :-

  1. प्रत्येक देश के लिए निर्धारित योगदान राशि – WHO के हर सदस्य देश को उसकी संपदा और जनसंख्या के अनुसार आर्थिक योगदान का आकलन किया जाता है. यह योगदान सभी सदस्य देशों को करना पड़ता है.
  2. स्वैच्छिक योगदान – सदस्य देश चाहें तो स्वेच्छा से अपने योगदान के अतिरिक्त और भी राशि WHO को उपलब्ध करा सकते हैं.
  3. कोर स्वैच्छिक योगदान – कोर स्वैच्छिक योगदान की राशि से उन योजनाओं को पूरा करने में सहायता मिलती है जिनके लिए पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं और जिस कारण वे अटकी पड़ी होती हैं.
  4. 2011 से WHO के सदस्य देश एक और प्रकार का आर्थिक योगदान करते हैं जिसे PIP अर्थात् Pandemic Influenza Preparedness (विश्वव्यापी इन्फ्लुएंजा के प्रति सन्नद्धता) कहते हैं. यह राशि विशेषकर ऐसे इन्फ्लुएंजा विषाणुओं से लड़ने के लिए होती है जिमें विश्व-भर में फ़ैल जाने की क्षमता दिखाई पड़ती है. इस राशि का व्यय टीके तैयार करने में और अन्य आवश्यक सामग्रियों की आपूर्ति करने में होती है.

2019 की चौथी तिमाही में WHO को कुल 5.62 बिलियन डॉलर का योगदान मिला जिसमें विभिन्न प्रकार के योगदानों का अंश निम्न प्रकार से था –

  1. आकलन द्वारा निर्धारित योगदान – 956 मिलियन डॉलर
  2. स्वैच्छिक योगदान – 4.38 बिलियन डॉलर
  3. कोर स्वैच्छिक योगदान – 160 मिलियन डॉलर
  4. PIP योगदान – 178 मिलियन डॉलर

WORLD HEALTH ORGANISATION को योगदान देने वाले बड़े-बड़े देश

  1. वर्तमान में अमेरिका सबसे बड़ा योगदानकर्ता है क्योंकि यह WHO को 553.1 मिलियन डॉलर देता है जो उस संगठन को मिलने वाली पूर्ण राशि 14.67 प्रतिशत है.
  2. अमेरिका के बाद बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन का स्थान है जो 367.7 मिलियन डॉलर देता है जो कुल राशि का 9.76% होता है.
  3. तीसरे, चौथे और पांचवें बड़े योगदानकर्ता क्रमशः ये हैं – GAVI Vaccine Alliance (8.39%), यूनाइटेड किंगडम (7.79%) और जर्मनी (5.68%).
  4. इनके बाद चार और बड़े दानकर्ता ये अंतर्राष्ट्रीय निकाय हैं – संयुक्त राष्ट्र मानवतावादी कार्य समन्वयन कार्यालय/ United Nations Office for the Coordination of Humanitarian Affairs (5.09%), विश्व बैंक (3.42%), रोटरी इंटरनेशनल (3.3%), यूरोपीय आयोग (3.3%).
  5. भारत और चीन के योगदान का प्रतिशत क्रमश: 0.48% और 0.21% है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन का क्षेत्रवार खर्च

  • अफ़्रीकी क्षेत्र – 1.2 बिलियन डॉलर
  • पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्र – 1.02 बिलियन डॉलर
  • WHO मुख्यालय – 963.9 मिलियन डॉलर
  • दक्षिण-पूर्वी एशिया (भारत इसी क्षेत्र में आता है) – 198.7 मिलियन डॉलर
  • यूरोप – 200.4 मिलियन डॉलर
  • पश्चिमी प्रशांत – 152.1 मिलियन डॉलर
  • उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका – 39.2 मिलियन डॉलर

कार्यक्रमवार खर्च

  • पोलियो उन्मूलन – 26.51%
  • स्वास्थ्य एवं पोषण सेवायें – 12.04%
  • रोकथाम करने योग्य रोगों के लिए टीके – 8.89%

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