सामान्य न्यूनतम राहत कार्यक्रम

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नए कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण घोषित तालेबंदी के फलस्वरूप भारत एक आर्थिक संकट में फंसने वाला है. इसलिए समय की मांग है कि केंद्र सरकार इस स्थिति से निबटने के लिए एक सामान्य न्यूनतम राहत कार्यक्रम (Common Minimum Relief Programme) तैयार करे.

सामान्य न्यूनतम राहत कार्यक्रम के अंतर्गत कौन-कौन-सी बातों पर बल देना होगा?

  1. दिहाड़ी मजदूरों और प्रवासी कामगारों पर सबसे अधिक आर्थिक एवं सामाजिक असुरक्षा का खतरा है. इसलिए उनपर सबसे पहले ध्यान देना होगा.
  2. उसी प्रकार छोटे और सीमांत किसानों को भी तत्काल सहारे की आवश्यकता होगी.
  3. तालेबंदी के कारण मजदूर नहीं मिलने के कारण और परिवहन रुक जाने के कारण उपभोक्ता सामग्रियों की आपूर्ति की शृंखला बिगड़ गयी है जिस कारण खाने-पीने और अन्य आवश्यक वस्तुओं का अभाव हो रहा है इसका कोई समाधान निकलना होगा.
  4. कोविड-19 संकट से मध्यम एवं छोटे उद्यमों पर खतरा आ गया है और करोड़ों की आजीविका संकट में है. ज्ञातव्य है कि अभी देश में 4.25 करोड़ MSME पंजीकृत हैं जो भारत के GDP में 61 लाख करोड़ रुपयों अर्थात् 29% का योगदान करते हैं.
  5. सामान्य न्यूनतम राहत कार्यक्रम में मध्यम वर्ग पर ध्यान देने की अपेक्षा है.

क्या-क्या करना चाहिए?

  1. आय का संबल प्रदान करने के साथ-साथ साधारण जीवन के लिए आवश्यक सामग्रियों, जैसे – चावल, गेहूं, बाजरा, दवाएं, पानी आदि की आपूर्ति के लिए एक समान तंत्र बनाया जाना चाहिए.
  2. आगामी खरीफ मौसम में किसानों को समस्या का सामना नहीं करना पड़े, इसके लिए सरकारों को चाहिए कि वे तत्काल खाद, कीटनाशक, ऋण आदि किसानों को उपलब्ध कराएं.
  3. MSME के लिए सरकार की ओर से एक कार्ययोजना बनाना आवश्यक होगा जिसके अंतर्गत उन्हें डूबने से बचाने के लिए वित्तीय पैकेज दिया जाए.
  4. कम से कम तात्कालिक रूप से ही सरकार को एक न्यूनतम आय गारंटी कार्यक्रम का निर्माण करना चाहिए और उसे लागू करना चाहिए.

Tags : Common Minimum Relief Programme in Hindi. Charting a Common Minimum Relief Programme, Overview of the proposed programme.

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