Sansar डेली करंट अफेयर्स, 09 March 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 09 March 2021


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Modern Indian history from about the middle of the eighteenth century until the present- significant events, personalities, issues

Topic : 50 years of the 1971 India-Pakistan war in 2021

संदर्भ

बांग्लादेश द्वारा पाकिस्तान के विरुद्ध 1971 के मुक्ति संग्राम के 50 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 8 मार्च से 10 मार्च 2021 तक स्वर्णिम विजय वर्ष समारोह का आयोजन किया जा रहा है. इस समारोह में भारतीय नौसेना के जहाज भी सम्मिलित होने जा रहे हैं.

पूरी कहानी

  • वर्ष 1971 में पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) के लोकप्रिय नेता शेख मुजीबुर्रहमान की आवामी पार्टी ने पाकिस्तान के आम चुनावों में बहुमत प्राप्त कर लिया था, परन्तु पश्चिमी पाकिस्तान में सेना द्वारा इसे स्वीकार नहीं किया गया और पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) में दमन के लिए मार्च 1971 में एक सैन्य अभियान ऑपरेशन सर्चलाइट चलाया.
  • ऑपरेशन सर्चलाइट, पूर्वी पाकिस्तान में पाकिस्तानी सेना द्वारा किया गया एक नियोजित सैन्य अभियान था, जिसे बंगाली स्वतंत्रता आंदोलन को नियंत्रित करने के लिए प्रारम्भ किया गया था.
  • ऑपरेशन के जरिये बांग्लादेश में नरसंहार करना शुरू कर दिया गया. इस नरसंहार के बाद लगभग 1 करोड़ से अधिक बंगलादेशी शरणार्थी भागकर भारत आ गए.
  • स्थिति को बिगड़ता देख तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी ने अमरीका से पाकिस्तान पर पूर्वी पाकिस्तान में सैन्य ऑपरेशन खत्म करने के लिए दबाव बनाने के लिए कहा. परन्तु अमरीका से कोई आश्वासन न मिलने परअप्रैल 1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मुक्तिवाहिनी (मुक्तिवाहिनी एक छापामार संगठन था, जो पाकिस्तानी सेना के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध लड़ रहा था) को समर्थन देकर, बांग्लादेश को स्वतंत्र करवाने का निर्णय लिया और गुरिल्ला युद्ध छेड़ दिया. चीन भी इस वक्त पाकिस्तान के साथ था.
  • इस दौरान भारत सरकार ने अमरीका-चीन-पाकिस्तान के संभावित गुट के खतरे से निपटने के लिए सोवियत संघ के साथ मैत्री संधि पर हस्ताक्षर किए, इस संधि से न केवल भारत की जनता का मनोबल काफी बढ़ गया था बल्कि सोवियत संघ ने UNSC में अमरीका के कई भारत विरोधी प्रस्तावों को वीटो भी किया.
  • इस वक्त सेनाध्यक्ष सैम मानेक शॉ भी सैन्य युद्ध के लिए सही समय की प्रतीक्षा कर रहे थे.
  • वर्षाकाल में बांग्लादेश में नदियाँ उफान पर होती हैं, इसलिए युद्ध संभव नही हो पाता तो उन्होंने युद्ध के लिए सर्दियों का समय चुना, ताकि चीन भी हिमालय पार कर जल्दी से पाकिस्तान की मदद के लिए न आ सके.
  • इंदिरा गाँधी युद्ध में पहला प्रहार करने में हिचकिचा रही थीं. इसी समय पाकिस्तानी सेना के जनरल यादह्या खान ने 3 दिसंबर को भारतीय एयर फ़ोर्स के अड्डों पर हमला (ऑपरेशन चंगेज खान) करके उनका काम आसान कर दिया और इस प्रकार मानेक शॉ के सुझाव पर इंदिरा गाँधी ने 4 दिसंबर 1971 को बांग्लादेश में भारतीय सेना भेज दी.
  • केवल 13 दिनों में भारतीय सेना ने पाकिस्तान को समर्पण के लिए विवश कर दिया, तथा 16 दिसंबर को पाकिस्तान के 93,000 सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया और इस प्रकार एक नये देश बांग्लादेश का जन्म हुआ.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

  • ऑपरेशन पोलो (1948) — भारतीय सेना ने दक्षिण भारत में हैदराबाद के निज़ाम के शासन का अंत किया और हैदराबाद रियासत को भारतीय संघ ने विलीन किया.
  • ऑपरेशन विजय (1961) — गोवा, दमन और दीव और अंजिदिव द्वीपों को पुर्तगालियों से छुड़ाकर अपने कब्जे में लिया.
  • ऑपरेशन मेघदूत (1984) —भारतीय सेना ने सियाचीन ग्लेशियर के अधिकाँश हिस्सों पर कब्ज़ा किया.
  • ऑपरेशन राजीव (1987) — भारतीय सेना का कैद पोस्ट को अपने अधिकार में करना.
  • ऑपरेशन पवन (1987) — 1987 के अंत में श्रीलंका में लिट्टे को निशस्त्र कर जाफना को नियंत्रण में लेने के लिए भारतीय शांति सेना द्वारा किये गए अभियान.
  • ऑपरेशन विराट (1988) — उत्तरी श्रीलंका में लिट्टे के विरुद्ध राजद्रोह विरोधी अभियान.
  • ऑपरेशन त्रिशूल (1988) — ऑपरेशन विराट के साथ उत्तरी श्रीलंका में लिट्टे के विरुद्ध राजद्रोह विरोधी अभियान.
  • ऑपरेशन चेकमेट (1988) — जून 1988 में भारतीय शांति रक्षा. सेना द्वारा श्रीलंका के वादमरची में लिट्टे के खिलाफ चलाया गया राजद्रोह निरोधी अभियान.
  • ऑपरेशन कैक्टस (1988) — पैराकमांडोज़ (भारत) और मार्कोस ने किराये के तमिल राष्ट्रवादी सैनिकों को मालदीव की राजधानी माले में सत्ता परिवर्तन करने से रोका.
  • ऑपरेशन विजय (1999) —सफल भारतीय अभियान जिसमें कारगिल में घुसे घुसपैठियों को वापस खदेड़ा गया.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : India and its neighbourhood- relations. Bilateral, regional and global groupings and agreements involving India and/or affecting India’s interests

Topic : Rare Disease

संदर्भ

हाल ही में, दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दुर्लभ रोगों (Rare Disease) से पीड़ित रोगियों को उपचार और चिकित्सा विकल्प प्रदान करने के तरीकों पर समयबद्ध समाधान खोजने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया है.

समिति से, ‘दुर्लभ बीमारियों से ग्रसित बच्चों की उपचार लागत के लिए क्राउडफंडिंग करने हेतु तत्काल ठोस प्रस्ताव’ देने के लिया गया है.

संबंधित प्रकरण

उच्च न्यायालय द्वारा, ड्यूशेन पेशीय अपविकास’ (Duchenne Muscular Dystrophy– DMD) तथा हंटर सिंड्रोम (Hunter’s syndromes) जैसे दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित मरीजों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश निर्गत किये गए हैं. याचिका में, इन दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित मरीजों ने, इलाज की अत्यधिक लागत के मद्देनजर निर्बाध निःशुल्क चिकित्सा मुहैया कराने के लिए न्यायालय से सरकार को दिशा-निर्देश निर्गत करने की माँग की है.

  1. DMD की दशा में पीड़ित की मांसपेशियाँ क्रमिक रूप से विकृत तथा कमजोर होती जाती है.
  2. हंटरसिंड्रोम, एक वंशानुगत दुर्लभ बीमारी है. यह अधिकांशतः लड़कों को प्रभावित करती है और इस बीमारी की दशा में रोगी का शरीर, हड्डियों, त्वचा, शिराओं और अन्य ऊतकों का निर्माण करने वाली एक प्रकार की शर्करा का विखंडन नहीं कर पाता है.

रेयर डिजीज क्या होता है?

  • दुर्लभ रोग अर्थात् अनाथ रोग (orphan disease) एक ऐसा रोग है जिससे बहुत कम लोग ग्रस्त होते हैं.
  • अधिकांश दुर्लभ रोग आनुवंशिक होते हैं और ये किसी व्यक्ति के पूरे जीवन तक चलते हैं, चाहे इसके लक्षण तुरंत न दिखें. जहाँ तक यूरोप की बात है तो वहाँ दुर्लभ रोग अथवा विकृति उस रोग अथवा विकृति को कहते हैं जिसकी चपेट में 2,000 नागरिकों में से एक से भी कम नागरिक आता है.
  • दुर्लभ रोगों में भाँति-भाँति के अनेक लक्षण होते हैं जो रोगानुसार बदलते रहते हैं.
  • यदि एक से अधिक रोगी किसी एक दुर्लभ रोग से ग्रस्त हैं तो भी उनमें अलग-अलग लक्षण हो सकते हैं. बहुत से लक्षण ऐसे होते हैं जो सामान्य लक्षण हैं अतः किसी दुर्लभ रोग के निदान में बहुधा भूल हो जाती है.
  • भारत में सबसे अधिक पाए जाने वाले दुर्लभ रोग हैं – हीमोफिलिया, थैलसीमिया, सिकल-सेल एनीमिया, बच्चों में प्राथमिक इम्युनो की कमी, ऑटो-इम्यून रोग, लाइसो सोमल स्टोरेज विकृतियाँ, जैसे – पोम्पे डिजीज, हिर्स्चप्रंग रोग, गौचर की बीमारी, सिस्टिक फाइब्रोसिस, हेमांगीओमास और कुछ प्रकार के मस्कुलर डिस्ट्रोफी.

समस्या और निदान

  • सरकार का यह कर्तव्य बनता है कि वह प्रत्येक नागरिक को स्वास्थ्य की देखभाल सम्बन्धी सुविधा दे. संविधान की धारा 21, 38 और 47 में भी इस बात का उल्लेख है.
  • जो रोग दुर्लभ हैं उनसे ग्रस्त रोगी भी दुर्लभ होते हैं. कहने का अभिप्राय यह है कि यदि कोई कम्पनी इनके लिए दवा बनाए तो उसे बहुत कम मात्रा में दवा बनानी होगी. इस कारण यह मुनाफे का सौदा नहीं है. अतः आवश्यकता है कि ऐसी दवा कंपनियों को आगे आने के लिए उत्प्रेरणा देकर प्रोत्साहित किया जाए.
  • दवा बनाने वाली कंपनियाँ कम मात्रा में बनी दवाइयों से अधिक से अधिक पैसा कमाना चाहेंगी और इसलिए इनका दाम बहुत ऊँचा रखना चाहेंगी. इसलिए यह आवश्यक होगा कि सरकार अनाप-शनाप मूल्य रखने से इन्हें रोकने के लिए एक विनियमन प्रणाली स्थापित करे.
  • यह सच है कि दुर्लभ रोग हजारों में एक को ही होता है परन्तु उस एक आदमी के जीवन का भी मोल होता है. अतः सरकार को चाहिए कि इस विषय में एक राष्ट्रीय नीति लेकर आये जिससे दुर्लभ रोगों से ग्रस्त व्यक्तियों को देखभाल उपलब्ध हो सके.

चिंताएँ और चुनौतियाँ

स्वास्थ्य की देखभाल से सम्बंधित तंत्र के लिए दुर्लभ रोग बहुत बड़ी चुनौती होते हैं क्योंकि इनके लिए रोग प्रसार विषयक डाटा जमा करना कठिन होता है और फलस्वरूप यह पता लगाना कठिन हो जाता है कि इनसे ग्रस्त लोगों की संख्या क्या है, इनके उपचार में कितना खर्च आएगा और इनका समय पर और सही निदान कैसे किया जाए आदि.

दुर्लभ रोग के कुछ मामले गंभीर, दीर्घकालिक और जानलेवा हो सकते हैं. कुछ ऐसे भी मामले होते हैं कि किसी दुर्लभ रोग से ग्रस्त व्यक्ति, विशेषकर बच्चे अपाहिज भी हों.

2017 के एक प्रतिवेदन में बताया गया है कि आधे से अधिक दुर्लभ रोगग्रस्त व्यक्ति बच्चे होते हैं और ऐसे रोगों से मरने वाले 35% व्यक्ति एक वर्ष से कम की उम्र के होते हैं. इन रोगों से 10% मृत्यु उन लोगों की होती है जिनकी आयु 1 से 5 के बीच होती है. इसी प्रकार 12% मृत्यु 5-15 के आयु वर्ग के बच्चों की होती है.


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : India and its neighbourhood- relations. Bilateral, regional and global groupings and agreements involving India and/or affecting India’s interests

Topic : Saudi Arabia asked India to use the cheap oil in its strategic reserves to deal with the current price rally

संदर्भ

सऊदी अरब ने तेल-आपूर्ति बढ़ाने के अनुरोध के जवाब में भारत को रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (Strategic Petroleum Reserves) से तेल का उपयोग करने का सुझाव दिया है.  ओपेक प्लस (OPEC+) को पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) और उसके सहयोगियों के रूप में जाना जाता है.

ओपेक प्लस ने वैश्विक आर्थिक व्यवस्था के पुनः मजबूत होने तक, कच्चे तेल की आपूर्ति में वृद्धि न करने पर सहमति व्यक्त की है.

भारत ने कच्चे तेल पर उत्पादन नियंत्रण को शिथिल करने का अनुरोध किया है, क्‍योंकि उत्पादन में कटौती से तेल के दामों में इजाफा होता है. हालाँकि, मूल्य शिथिलता के लिए भारत को सामरिक भंडार का उपयोग करने का परामर्श दिया गया था.

वर्तमान में, भारत में कुल भंडारण क्षमता 74 दिनों की है

रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार

ज्ञातव्य है कि भारत ने तीन स्थानों पर भूमिगत भंडार बना रखे हैं जिसमें 5.33 मिलियन टन कच्चा तेल सुरक्षित कर दिया गया है. इन भंडारों से देश की तेल सम्बन्धी आवश्यकताएँ 9.5 दिन तक पूरी की जा सकेंगी. जिन स्थानों में भंडारण किया गया है, वे हैं – विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश), मंगलौर (कर्नाटक) और पुदुर (कर्नाटक). इन तीनों भंडारों के अतिरिक्त भारत में कच्चे तेल के और पेट्रोलियम उत्पादों के कई और भंडार भी हैं जो तेल कम्पनियों के पास हैं. यदि कभी विदेश से आपूर्ति में बाधा होगी तो ये भंडार काम आयेंगे.

तेल की कीमतों में वृद्धि का प्रभाव

  • भारत, तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक देश है और यह अपनी तेल आवश्यकताओं का लगभग 84% आयात करता है.
  • भारत में तेल की स्थानीय खुदरा दरों को अंतर्राष्ट्रीय कीमतों के आधार पर तय किया जाता है.
  • RBI के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में प्रत्येक 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि के फलस्वरूप 12.5 बिलियन डॉलर का अतिरिक्त चालू खाता घाटा उत्पन्न होता है.

तेल आयात पर निर्भरता कम करने के उपाय

  • तेल और प्राकृतिक गैस कंपनी विदेश लिमिटेड (ONGC Videsh) भारत के बाहर स्थित क्षेत्रों में तेल और गैस के अन्वेषण हेतु प्रयासरत एक निकाय है. साथ ही, यह 17 देशों में 37 तेल एवं गैस परिसंपत्तियों में एक प्रमुख हिस्सेदार के रूप में भी शामिल है.
  • भारत का लक्ष्य वर्ष 2030 तक ऊर्जा बास्केट में गैस की हिस्सेदारी को 6% से बढ़ाकर 15% करना है.
  • इसके अतिरिक्त, यह अपनी आयात आपूर्ति में विविधता लाने वाले उपायों की खोज की दिशा में भी प्रयासरत है.

मेरी राय – मेंस के लिए

 

  • आज की तिथि में में बंगाल की खाड़ी में कृष्णा-गोदावरी बेसिन में नए गैस क्षेत्रों की हाल की खोज के बावजूद, आने वाले वर्षों में इन स्रोतों से अतिरिक्त उत्पादन मांग और आपूर्ति के अंतर को पूरा करने के लिए केवल मामूली योगदान देगा.
  • भारत के सामरिक कच्चे तेल के भंडार वर्तमान में विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश), मंगलौर (कर्नाटक) और पाडुर (कर्नाटक) में स्थित हैं. इनके अलावा सरकार ने चंदीखोल (ओडिशा) और पादुर (कर्नाटक) में दो अतिरिक्त सुविधाएँ स्थापित करने की घोषणा की थी. वर्तमान में ‘सामरिक पेट्रोलियम भंडार कार्यक्रम’ (Strategic Petroleum Reserves programme- SPRP) के तहत भारत 87 दिनों तक आवश्यकता पूर्ति की भंडारण क्षमता रखता है. विदित हो कि भारत के सामरिक कच्चे तेल के भंडार वर्तमान में विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश), मंगलौर (कर्नाटक) और पाडुर (कर्नाटक) में स्थित हैं. इनके अलावा सरकार ने चंदीखोल (ओडिशा) और पादुर (कर्नाटक) में दो अतिरिक्त सुविधाएँ स्थापित करने की घोषणा की थी.
  • इसलिए आयातित तेल और गैस पर भारत की भारी निर्भरता अपरिहार्य है.
  • यह निर्भरता जो वर्तमान में लगभग 70 प्रतिशत है, 2030 तक 90 प्रतिशत से अधिक होने की संभावना है. इसलिए भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए तेल और गैस क्षेत्र अत्यंत महत्वपूर्ण हैं.

GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Important aspects of governance, transparency and accountability, e-governance, e-applications, models, successes, limitations and potential; citizens charters, transparency & accountability and institutional and other measures.

Topic : GeM – Government E-Marketplace

संदर्भ

हाल ही में इंडियन मेडिसिन फ़ार्मास्यूटिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IMPCL) और गवर्नमेंट ई- मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के बीच हुए समझौते के तहत IMPCL, अब गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल पर अपने उत्पाद बेचेगी अर्थात् IMPCL की आयुर्वेदिक और यूनानी दवाएँ अब सरकारी क्षेत्र के सैकड़ों खरीदारों के लिए GeM पोर्टल में प्रदर्शित की जाएँगी. इससे केंद्र और राज्य सरकार के संस्थानों को इन दवाओं को स्वास्थ्य कार्यक्रमों में उपयोग करने के लिए त्वरित खरीद में मदद मिलेगी.

GeM क्या है?

  1. सरकारी ई-बाजार एक ऑनलाइन बाजार है जिसके माध्यम से सरकार के विभिन्न मंत्रालय एवं एजेंसियाँ और सेवाओं का क्रय करती हैं.
  2. यह बाजार केन्द्र सरकार के विभागों, राज्य सरकार के विभागों, लोक उपक्रम प्रतिष्ठानों और सम्बद्ध निकायों के लिए है.
  3. यह एक सर्वसमावेशी अभियान है जिसमें सभी प्रकार के विक्रेताओं और सेवा-प्रदाताओं को सशक्त किया जाएगा, जैसे – MSMEs, स्टार्ट-अप, स्वदेशी निर्माता, महिला उद्यमी, स्वयं सहायता समूह (SHGs).
  4. इस बाजार का उद्देश्य सरकारी खरीद में भ्रष्टाचार दूर करना तथा उसमें पारदर्शिता, सक्षमता और गति लाना है.
  5. सरकारी ई-बाजार एक 100% सरकारी कम्पनी है जिसकी स्थापना केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन हुई है.

GEM से फायदे

  1. विक्रेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा के चलते उत्पाद की कीमतों में कमी (15-20% ↓)
  2. अवैध रूप से सरकारी खरीददारी पर रोक लगी

GEM पोर्टल में आने वाली दिक्कतें 

  1. GeM के माध्यम से खरीददारी कर रहे लोगों की सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि GeM किसी भी तरह की खरीद-बिक्री की जिम्मेदारी अपने ऊपर नहीं लेता.
  2. इस पोर्टल पर उपलब्ध सामान की कीमत और उपलब्धता पर इसे चलाने वाले विभाग DGS&D का कोई नियंत्रण नहीं होता.
  3. उत्पादों की रेट एक समान नहीं है और हमेशा उतार-चढ़ाव होता रहता है जिससे एक ही विभाग एक ही सामान के अलग-अलग समय पर अलग-अलग दाम चुकाता है.
  4. GeM के जरिये खरीददारी करते वक़्त कई अलग-अलग ID देनी पड़ती है. इसे लेकर अधिकृत अधिकारी एतराज जताते हैं.

Prelims Vishesh

Food Waste Index Report 2021 :-

  • संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की फूड वेस्ट इंडेक्स रिपोर्ट, 2021 के अनुसार, दुनिया-भर में 2019 में अनुमानित 931 मिलियन टन भोजन बर्बाद हुआ.
  • भोजन की बर्बादी में घरों का योगदान 61%, खाद्य सेवाओं का 26%, जबकि खुदरा क्षेत्र का 13% योगदान है.
  • भारत में घरेलू भोजन बर्बादी प्रति वर्ष 50 किलोग्राम प्रति व्यक्ति है जो प्रति वर्ष 68,760,163 टन के बराबर है.

Women Will Platform :-

गूगल ने “अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस” ​​के अवसर पर 8 मार्च 2021 को एक नया वेब प्लेटफॉर्म ‘Women Will’ लॉन्च किया है. यह मंच भारत में 1 मिलियन ग्रामीण महिलाओं को अपना समर्थन प्रदान करेगा ताकि वे त्वरक कार्यक्रमों, व्यावसायिक ट्यूटोरियल और मेंटरशिप की मदद से उद्यमी बन सकें.

Gangavaram Port :-

  • हाल ही में अडानी पोर्ट्स ऐंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) ने गंगावरम पोर्ट लिमिटेड (GPL) में 31.5% हिस्सेदारी लेने की घोषणा की है.
  • गंगावरम बंदरगाह लिमिटेड (GPL), आंध्र प्रदेश के उत्तरी भाग में विजाग पोर्ट के पास में स्थित है.
  • यह आंध्र प्रदेश में 64 मिलियन टन प्रति वर्ष (mtpa) क्षमता के साथ आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा रियायत के तहत स्थापित दूसरा सबसे बड़ा गैर-प्रमुख बंदरगाह है.

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