Sansar डेली करंट अफेयर्स, 06 September 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 06 September 2019


GS Paper 1 Source: Indian Express

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UPSC Syllabus : Modern Indian history from about the middle of the eighteenth century until the present- significant events, personalities, issues

Topic : Formation of Interim government of India

संदर्भ

पिछले दिनों 1946 के सितम्बर 2 को गठित भारत की अंतरिम सरकार का स्मरण किया गया.

अंतरिम सरकार क्या है?

  • यह भारत के स्वतंत्रता के पूर्व गठित केन्द्रीय सरकार थी जिसमें जवाहरलाल नेहरु को प्रधानमंत्री बनाया गया था.
  • यह देश के इतिहास की एकमात्र एक ऐसी सरकार थी जिसमें केंद्र में कांग्रेस के साथ-साथ मुस्लिम लीग भी शामिल थी.
  • इस सरकार को अच्छी-ख़ासी स्वायत्तता मिली हुई थी. यह ब्रिटिश शासन समाप्त होने तक चली और उसके बाद भारत दो टुकड़ों में बँट गया.

पृष्ठभूमि

1942 के क्रिप्स मिशन से लेकर आगे ब्रिटिश सरकार ने भारत में अंतरिम सरकार बनाने के लिए अनेक प्रयास किये थे. इसी परिप्रेक्ष्य में 1946 में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री क्लेमेंट एटली के द्वारा भेजे गये कैबिनेट मिशन के प्रस्तावों के आधार पर संवैधानिक सभा के लिए चुनाव हुए थे. कालांतर में वायसराय वैवेल ने भारतीय प्रतिनिधियों को अंतरिम सरकार में शामिल होने का आह्वान किया. यह अंतरिम सरकार भारत सरकार अधिनियम, 1919 के अनुसार संचालित होनी थी.

अंतरिम सरकार द्वारा लिए गये कुछ निर्णय

  • सभी देशों के साथ प्रत्यक्ष कूटनीतिक सम्बंधित स्थापित करना.
  • विश्व-भर के उपनिवेशों को मुक्त कराने की वकालत करना.
  • अंतर्राष्ट्रीय नागरिक विमानन संधि को नवम्बर 1946 में अंगीकृत करना.
  • उसी महीने एक समिति की नियुक्ति करना जो सशस्त्र सैन्य बलों को राष्ट्रीयकृत करने के विषय में सरकार को परामर्श करने वाली थी.
  • जून 1, 1947 को भारतीय राष्ट्रकुल सम्बन्ध विकास विभाग (Indian Commonwealth Relations Department) तथा विदेश विभाग का विलय करके विदेश एवं राष्ट्रकुल सम्बन्ध विभाग (Department of External Affairs and Commonwealth Relations) नाम का एक विभाग बनाया गया.

GS Paper 2 Source: Indian Express

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UPSC Syllabus : Comparison of the Indian constitutional scheme with that of other countries.

Topic : Tibetan Democracy Day

संदर्भ

प्रत्येक वर्ष की भाँति 2019 में भी सितम्बर 2 को भारत में निर्वासित जीवन बिताने वाले तिबत्ती जनों के लिए प्रजातांत्रिक प्रणाली की स्थापना का दिवस मनाया गया.

यह दिवस प्रजातंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है. इस वर्ष यह 59वाँ प्रजातंत्र दिवस था.

इस दिवस का माहात्म्य

तिब्बत में चीन के हस्तक्षेप के कारण चौदहवें दलाई लामा अपने देश से भागकर कई अनुयायियों के साथ भारत आ गये थे. फरवरी, 1960 में उन्होंने बोधगया में निर्वासित तिब्बतियों के लिए प्रजातांत्रिक पद्धति के विषय में एक विस्तृत कार्यक्रम की घोषणा की थी.

उन्होंने परामर्श दिया था कि तिब्बत के तीनों प्रान्तों में से प्रत्येक से तीन-तीन निर्वासित प्रतिनिधि एवं तिब्बती बौद्ध मत की चार धार्मिक शाखाओं में से एक-एक प्रतिनिधि मिलाकर कुल तेरह प्रतिनिधियों का एक निर्वाचित निकाय गठित किया जाए.

इस परामर्श के अनुसार चुनाव किया गया और तेरह प्रतिनिधि निर्वाचित हुए. इनको “डेप्युटी” नाम दिया गया. निर्वाचित निकाय को “कमीशन ऑफ़ तिब्बतन पीपल्स डेप्युटीज (CTPD)कहा गया. प्रतिनिधियों ने सितम्बर 2, 1960 को शपथ ली थी, अतः 1975 के बाद से इस दिवस को तिब्बती प्रजातंत्र दिवस के रूप में मनाया जाने लगा.

निर्वासित संसद (Parliament-in-Exile – TPiE) क्या है?

  • TPiE का पूरा नाम है – Tibetan Parliament-in-Exile.
  • यह केन्द्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) का सर्वोच्च विधायी निकाय है.
  • इसे तिब्बती प्रजातांत्रिक शासन के तीन स्तम्भों में से एक माना जाता है. अन्य दो स्तम्भ हैं – न्यायपालिका और कशाग (कार्यपालिका).
  • केन्द्रीय तिब्बती प्रशासन हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से काम करता है.
  • TPiE के सदस्यों एवं प्रधानमंत्री (सिक्योंग) का चुनाव प्रत्येक पाँच वर्ष पर होता है.

तिब्बती निर्वासित सरकार (Government-in-Exile)

  • 1963 के मार्च 10 को दलाई लामा ने तिब्बती निर्वासित सरकार का संविधान (Tibetan Government-in-Exile – TGiE) घोषित किया था.
  • 1991 के बाद से TPiE केन्द्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) का विधायी अंग बन गया और तिब्बती सर्वोच्च न्याय आयोग CTA का न्यायिक अंग बन गया. साथ ही कशाग इसका कार्यकारी अंग घोषित हुआ.
  • TGiE को भारत समेत किसी भी देश की औपचारिक मान्यता नहीं मिली है. परन्तु अमेरिका जैसे कई देश हैं जो सीधे सिक्योंग अर्थात् तिब्बती प्रधानमंत्री और अन्य तिब्बती नेताओं के साथ विभिन्न मंचों के माध्यम से सम्पर्क में रहते हैं.

GS Paper 2 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Appointment to various Constitutional posts, powers, functions and responsibilities of various Constitutional Bodies.

Topic : President appoints Governors

संदर्भ

संविधान के अनुच्छेद 156 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पिछले दिनों पाँच राज्यों के लिए नए राज्यपालों की नियुक्ति की.

  1. राजस्थान – कलराज मिश्रा
  2. महाराष्ट्र – भगत सिंह कोशयारी
  3. हिमाचल प्रदेश – बंडारू दत्तात्रेय
  4. केरल – आरिफ मोहम्मद खान
  5. तेलंगाना – तमिलसई सौन्दरराजन

संविधान में राज्यपाल की स्थिति

  • राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संविधान केअनुच्छेद 156 में प्रदत्त शक्ति के अंतर्गत की जाती है.
  • राज्यपाल राज्य का एक सैद्धांतिक प्रमुख होता है क्योंकि वास्तविक शक्तियाँ किसी भी राज्य में वहाँ के मुख्यमंत्री के पास होती हैं.
  • संविधान केसातवें संशोधन के द्वारा 1956 में यह व्यवस्था की गई थी कि एक ही व्यक्ति दो अथवा दो से अधिक राज्यों का राज्यपाल हो सकता है.
  • संघीय क्षेत्रों मेंराज्यपाल के बदले उप-राज्यपाल होते हैं जिन्हें अंग्रेजी में लेफ्टिनेंट गवर्नर कहा जाता है.
  • राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा पाँच वर्षों के लिए होती है. राष्ट्रपति पाँच वर्ष के भीतर भी राज्यपाल को पदच्युत कर सकता है अथवा उसका स्थानान्तरण कर सकता है. वह इस अवधि के भीतर भी राष्ट्रपति के पास त्यागपत्र भेजकर पदत्याग कर सकता है. राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत अपने पद पर बना रहता है. यद्दपि उसका कार्यकाल पाँच वर्ष का है पर वह नए राज्यपाल के पद-ग्रहण करने के पूर्व तक अपने पद पर रहता है.

राज्यपाल के लिए योग्यताएँ – ELIGIBILITY/QUALIFICATIONS

इस पद पर वही व्यक्ति नियुक्त हो सकता है जो –

  1. भारत का नागरिक हो.
  2. जिसकी आयु 35 वर्ष से अधिक हो.
  3. जो संसद या विधानमंडल का सदस्य नहीं है और यदि ऐसा व्यक्ति हो तो राज्यपाल के पदग्रहण के बाद उसकी सदस्यता का अंत हो जायेगा. अपनी नियुक्ति के बाद वह किसी अन्य लाभ के पद पर नहीं रह सकता.

राज्यपाल के कार्य 

  1. वह विधानमंडल के किसी भी सदन को जब चाहे तब सत्र बुला सकता है, सत्रावसान कर सकता है और विधान सभा को, यदि वह उचित समझे, तो विघटित कर सकता है.
  2. वह विधान परिषद् के 1/6 सदस्यों को मनोनीत भी करता है. वह दोनों सदनों को संबोधित कर सकता है या उनमें विधेयक-विषयक कोई सन्देश भेज सकता है, जिसपर सदन शीघ्र ही विचार करेगा.
  3. विधानमंडल के प्रत्येक सदस्य को राज्यपाल या उसके द्वारा नियुक्त किसी व्यक्ति के समक्ष शपथ लेना पड़ता है.
  4. वह प्रत्येक विक्तीय वर्ष के आरम्भ में उस वर्ष का वार्षिक वित्त-वितरण विधान सभा के सम्मुख प्रस्तुत करता है.
  5. विधान सभा में उसकी अनुमति के बिना किसी अनुदान की माँग नहीं की जा सकती. जब कोई विधेयक पारित होता है, तब वह उसकी स्वीकृति के लिए भेजा जाता है. राज्यपाल उसपर अपनी स्वीकृति दे सकता है, उसे अस्वीकृत भी कर सकता है या राष्ट्रपति के विचारार्थ रख सकता है.
  6. वह धन विधेयक को छोड़कर अन्य विधेयक को पुनः विचार करने के लिए विधानमंडल के पास भी भेज सकता है. लेकिन, यदि वह विधेयक पुनः संशोधनसहित या बिना किसी संशोधन के विधानमंडल द्वारा पारित हो जाए, तो उसे अपनी स्वीकृति देनी ही पड़ती है.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Bilateral, regional and global groupings and agreements involving India and/or affecting India’s interests.

Topic : Automatic Exchange of Information (AEOI)

संदर्भ

भारत और स्विट्ज़रलैंड के बीच सितम्बर 1, 2019 से स्वतः सूचना विनिमय (Automatic Exchange of Information – AEOI) की व्यवस्था आरम्भ हो गई जिसके अंतर्गत स्विट्ज़रलैंड में भारतीय नागरिकों द्वारा वर्ष 2018 में संधारित वित्तीय खातों से सम्बंधित सूचना भारत को मिलने लगेगी.

इसके निहितार्थ

ज्ञातव्य है कि स्विट्ज़रलैंड में बैंक खातों की गोपनीयता के विषय में बहुत कठोर नियम चलते हैं जिस कारण उनके बारे में जानकारी लेना कठिन होता है. अब इस व्यवस्था के लागू होने से स्विस बैंकों में भारतीयों द्वारा जमा किये गये धन के विषय में अधिक से अधिक जानकारी प्राप्त हो सकेगी. स्विट्ज़रलैंड के ज्युरिच नगर में स्थित स्विस नेशनल बैंक (SNB) ने 2018 में  बताया था कि स्विट्ज़रलैंड के बैंकों में रखे भारतीयों की धनराशि में 2017 में 50% का उछाल आया था अर्थात् 7,000 करोड़ की वृद्धि देखी गई थी.

स्वतः सूचना विनिमय व्यवस्था क्या है?

सूचना सूचना विनिमय की व्यवस्था वह तंत्र है जिसके अंतर्गत कोई देश किसी दूसरे देश से यह सूचना विधिवत् एवं समय-समय पर प्राप्त कर सकता है कि वहाँ उसके नागरिकों ने कितना धन जमा कर रखा है. यह व्यवस्था तभी संभव हो पाती है जब दोनों देशों के बीच में कुछ आवश्यक औपचारिकताएँ पूरी कर ली जाती हैं, यथा – दोहरा कराधान वंचना समझौते से बचने के लिए समझौते (Double Taxation Avoidance Agreements – DTAAs) और करों के मामले में परस्पर प्रशासनिक सहयोग से सम्बंधित बहुपक्षीय संधि (Multilateral Convention on Mutual Administrative Assistance in Tax Matters – MAC). AEOI का उद्देश्य विश्व-भर कर वंचना को घटाना है.

AEOI के अंतर्गत होने वाले सूचना विनिमय के लिए किसी देश को अनुरोध करने की आवश्यकता नहीं होती है इसलिए इसे स्वतः विनिमय कहा जाता है.

AEOI की आवश्यकता

  • करदाता अपने देश में लगने वाले कर से बचने के लिए विदेशों में स्थित बैंकों की शरण लेते हैं. इस कारण देश को अपार कर राशि से वंचित हो जाना पड़ता है. यह प्रचलन बहुत दिनों से है और इसमें लगातार वृद्धि होती जाती रही है क्योंकि एक देश से दूसरे देश में आमदनी को पहुँचाना सरल से सरलतर होता जा रहा है.
  • कर से बचने के लिए लोग विशाल धनराशि बाहर के देशों में रखते हैं और इस प्रकार कर चुकाने से बच जाते हैं.
  • अधिकतर जिन देशों में राशि जमा की जाती है वहाँ बैंक खातों की सूचना अत्यंत गोपनीय होती है और वे इस विषय में जानकारी साझा नहीं करते हैं. AEOI हो जाने से ऐसी जानकारी इच्छुक देश को स्वतः मिलने लगती है. देशहित में यह व्यवस्था अत्यावश्यक हो गई थी.

AEOI का महत्त्व और लाभ

  • AEOI से कर वंचना के उन मामलों की जानकारी होती है जिनके विषय में पहले से पता नहीं था.
  • इसके आधार पर सरकार बचाए हुए कर की वसूली कर सकती है.
  • इस व्यवस्था के लागू हो जाने से बहुत से लोग अपनी सम्पत्तियों के बारे में अपने मन से खुलासा करने लगेंगे और सभी प्रासंगिक सूचना देने लगेंगे.
  • AEOI के कारण वित्तीय संस्थानों और कर प्रशासनों के अन्दर पारदर्शिता, सहयोग और उत्तरदायित्व बढ़ाने के अंतर्राष्ट्रीय प्रयास सुदृढ़ होंगे.

GS Paper 3 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Science and Technology- developments and their applications and effects in everyday life Achievements of Indians in science & technology; indigenization of technology and developing new technology.

Topic : ‘Build for Digital India’ programme

संदर्भ

पिछले दिनों इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और गूगल ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किये जिसके अनुसार “बिल्ड फॉर डिजिटल इंडिया” नामक एक कार्यक्रम चालू किया जाएगा.

बिल्ड फॉर डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ

  • इस कार्यक्रम के अंतर्गत इंजीनियरिंग के छात्रों को एक मंच मिलेगा जहाँ वे मुख्य सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए बाजार में सीधे प्रयुक्त होने वाले तकनीक पर आधारित नवाचारों का निर्माण कर सकेंगे.
  • आवेदकों को मशीन ज्ञानार्जन, क्लाउड और एंड्राइड जैसी प्रधान तकनीकों को सीखने के लिए ऑनलाइन एवं ऑफलाइन अवसर प्राप्त होंगे.
  • इस कार्यक्रम को गूगल के डिवलपर स्टूडेंट क्लब नेटवर्क और गूगल डिवलपर नेटवर्कों के माध्यम से संचालित किया जाएगा.
  • सबसे अधिक संभावना भरे उत्पादों और प्रोटो-टाइपों के लिए गूगल उत्पादन रूपांकन, रणनीति और तकनीक के कुछ कार्यक्रम भी चलाएगा जिनमें विशेषज्ञ मन्त्रणा उपलब्ध कराई जायेगी.

माहात्म्य

बिल्ड फॉर डिजिटल इंडिया एक ऐसी पहल है जो देश-भर के कॉलेज छात्रों को नवाचार करने तथा मुख्य सामाजिक चुनौतियों के लिए अच्छी तकनीक वाले समाधान को उत्पादित करने की प्रेरणा देगी.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Science and Technology- developments and their applications and effects in everyday life Achievements of Indians in science & technology; indigenization of technology and developing new technology.

Topic : Samudrayaan’ project

संदर्भ

भारत गहरे महासागर के अन्दर खनन कार्य के लिए “समुद्रयान” नामक एक परियोजना लाने जा रही है.

समुद्रयान परियोजना क्या है?

  • समुद्रयान परियोजना एक प्रायोगिक परियोजना है जो मृदा विज्ञान मंत्रालय द्वारा संचालित होगी.
  • इसमें गहरे महासागर में प्रवेश कर PMN जैसे विरल खनिजों की खुदाई की जायेगी.
  • इस परियोजना में एक डुबंत यान (submersible vehicle) में बैठकर लोग गहरे समुद्र में उतरेंगे और सामुद्रिक अध्ययन करेंगे.
  • आशा की जाती है कि यह परियोजना 2021-22 तक एक वास्तविकता बन जायेगी.
  • इस परियोजना का कार्यान्वयन राष्ट्रीय महासागरीय प्रौद्योगिकी संस्थान (National Institute of Ocean Technology – NIOT) करेगा.

महत्त्व

यदि समुद्रयान परियोजना सफल होती है तो भारत महासागर से खनिज निकालने वाले गिने-चुने विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में आ जाएगा. ऐसा करने वाला वह पहला विकासशील देश होगा.

PMN क्या है?

PMN का पूरा नाम Polymetallic nodules है. ये आलू के आकार के सछिद्र नोड्यूल होते हैं जो विश्व के सभी महासागरों के गहरे समुद्र तल में प्रचुर मात्रा में बिछे रहते हैं.

PMN के अन्दर मैंगनीज और लोहा तो होता ही है, अपितु कई धातुएं भी होती हैं. जैसे – निकल, तांबा, कोबाल्ट, रांगा, मोलिब्डेनम, कैडमियम, वैनेडियम, टाइटेनियम आदि. इनमें से निकल, कोबाल्ट और तांबे का आर्थिक एवं सामरिक दृष्टि से बहुत अधिक महत्त्व है.

अनुमान है कि हिन्द महासागर में PMN का जो भंडार है उसका 10% भी दोहन हो जाए तो भारत में अगले 100 वर्षों के लिए ऊर्जा की आवश्यकता पूरी हो जायेगी. वस्तुतः अनुमान यह है कि मध्य हिन्द महासागर के समुद्रों की निचली सतह में 380 मिलियन मेट्रिक टन PMN का भंडार है.


Prelims Vishesh

AH-64 Apache combat helicopters :-

पिछले दिनों अमेरिका में निर्मित अत्याधुनिक युद्धक हेलिकॉप्टर बोइंग AH-64 अपाचे भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया.

Who is a Professor Emerita/Emeritus, and how is she/he appointed? :-

  • पूरे विश्व में प्रोफेसर एम्रिटस की पदवी वैसे सेवा निवृत्त शिक्षाविदों को दी जाती है जिन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवा दी हो.
  • भारत में भी ऐसे शिक्षाविदों को यह पदवी दी जाती है. ये शिक्षाविद 70 वर्ष की उम्र तक प्रोफेसर एम्रिटस बने रहते हैं. कभी-कभी इन्हें अधिकतम दो वर्ष का पद-विस्तार दिया जाता है.

Lignin :-

  • लिग्निन एक जटिल जैव पोलिमर है जिसमें सूक्ष्म जीवाणु प्रतिरोधी गुण वाले अनेक पोलीफेनोल होते हैं.
  • यह पोलिमर सभी सूखे पौधों में और पेड़ों की छालों में पाए जाते हैं.
  • पिछले दिनों शोधकर्ताओं ने लिग्निन से बने नैनो-कंपोजिट पदार्थ तैयार किये हैं जो परत चढ़ाने और माल को डब्बाबंद करने में काम आ सकते हैं.

Joint Naval Annual Quality Conclave (JNAQC) :-

विशाखापत्तनम में संयुक्त नौसैनिक वार्षिक गुणवत्ता सम्मेलन होने जा रहा है जिसका आयोजन रक्षा मंत्रालय के अधीनस्थ गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशालय करेगा.


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