Sansar डेली करंट अफेयर्स, 06 March 2020

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Contents

Sansar Daily Current Affairs, 06 March 2020


GS Paper 2 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Statutory, regulatory and various quasi-judicial bodies.

Topic : Child Adoption Regulatory Authority (CARA)

संदर्भ

केन्‍द्रीय दत्तकग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) ने दत्तक ग्रहण प्रक्रिया को सरलीकृत करने के लिए सभी हितधारकों से परामर्श आमंत्रित किए है. इसमें दत्तक ग्रहण के इच्छुक माता-पिता, दत्तक ग्रहण विशेषज्ञ एजेंसी, बाल विकास समितियाँ, राज्य दत्‍तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण और आम जनता सम्मिलित हैं.

पृष्ठभूमि

दत्तक ग्रहण प्रक्रिया में सुधार करने और इसे सरल बनाने की संभावना पर विचार करने के लिए सीएआरए ने 14 जनवरी,2020 को नई दिल्ली में एक राष्ट्रीय परामर्श का आयोजन किया था. CARA ने दत्तक ग्रहण अधिनियम,2017 को जनवरी,2017 में अधिसूचित किया था और दत्तकग्रहण कार्यक्रम की समय-समय पर समीक्षा की जाती है.

बच्चे के दत्तकग्रहण के लिए कौन व्यक्ति पात्र होता है?

  • भावी दत्तक माता-पिताको शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से स्थिर होना चाहिए, वित्तीय रूप से सक्षम होना चाहिए, बच्चे को अपनाने के लिए प्रोत्साहित होना चाहिए, बिना किसी जीवन संकट की चिकित्सकीय स्थिति के होना चाहिए.
  • कोई भी दत्तक माता-पिता, अपनी वैवाहिक स्थिति और उसका कोई जैविक पुत्र या पुत्री है या नहीं, का लिहाज किए बिना, बच्चे को अपना सकते हैं.
  • अविवाहित महिला किसी भी लिंग के बच्चे को अपनाने के लिए पात्र हैं.
  • अविवाहित पुरुष किसी लड़की को अपनाने के पात्र नहीं होंगे.
  • दंपतियों के मामले में, दोनों अभिभावकों की स्वीकृति आवश्यक होगी.
  • दंपति को दत्तकग्रहण के लिए कोई भी बच्चा तब तक नहीं दिया जाएगा जब तक उनका वैवाहिक जीवन कम से कम दो वर्षतक का न हो.
  • पंजीकरण की तारीख को भावी दत्तक माता-पिता की आयु की गणना पात्रता के निर्णय हेतु की जाएगी और विभिन्न आयु समूहों के बच्चों के लिए आवेदन करने के लिए भावी दत्तक माता-पिता की पात्रता निम्नवत होगी :

बालक की आयु

भावी दत्तक माता-पिता की अधिकतमसंयुक्त आयु

अविवाहित भावी दत्तक माता-पिताकी अधिकतम आयु

4 वर्ष तक

90 वर्ष

45 वर्ष

4 वर्ष से अधिक किंतु 8 वर्ष तक

100 वर्ष

50 वर्ष

8 वर्ष से अधिक किंतु 18 वर्ष तक

110 वर्ष

55 वर्ष

 

  • बच्चे तथा भावी दत्तक माता-पिता के बीच न्यूनतम आयु का अंतर 25 वर्ष से कम नहीं होना चाहिए. पात्रता की आयु भावी दत्तक मता-पिता के पंजीकरण की तारीख होगी.
  • 4 बच्चों से अधिक वाले दंपतियों के दत्तकग्रहण आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा.

CARA क्या है?

  • केन्द्रीय दत्तकग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का एक वैधानिक निकाय है.
  • CARA देशंतारीय दत्तक ग्रहण विषयक 1993 की हेग संधि, जिसे भारत ने 2003 में अंगीकृत किया था, में CARA को ऐसे मामलों के लिए केन्द्रीय प्राधिकरण घोषित किया गया था.
  • CARA का मुख्य कार्य अनाथ, त्यक्त और समर्पित किये गये बच्चों के दत्तकग्रहण को विनियमित है.
  • हेग संधि (Hague Convention) का कार्य बच्चों और उनके परिवारों को विदेश में अवैध, अनियमित, समय-पूर्व अथवा अविचारित दत्तक ग्रहण से रक्षा करना है.
  • हाल ही में अवैध दत्तकग्रहण के बढ़ते मामलों को देखते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों को यह निर्देश दिया था कि एक महीने के अन्दर वे सभी बाल देखभाल संस्थानों को पंजीकृत करें और उन्हें CARA से जोड़ दें.
  • ज्ञातव्य है कि किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और सुरक्षा) अधिनियम, 2015 में यह प्रावधान है कि बाल देखभाल की सभी संस्थाएँ पंजीकृत की जाएँ और उन्हें CARA से जोड़ दिया जाए.

हेग कन्वेंशन से सम्बंधित तथ्य

  • यह एक अंतर्राष्ट्रीय संधि है, जो उन बच्चों की त्वरित वापसी को सुनिश्चित करता है, जिनका “अपहरण” कर उन्हें उस जगह पर रहने से वंचित कर दिया गया है, जहाँ वे रहने के अभ्यस्त हैं.
  • आजकल अंतर-देशीय विवाह बहुत होते हैं. बहुधा कोई भारतीय विदेश में जाता है और वहाँ की लड़की से विवाह करता है. वहाँ उसके बच्चे होते हैं और बाद में तलाक या अलगाव हो जाता है. उस हालत में बच्चे को लेकर माता-पिता में विवाद हो जाता है.
  • ऐसा देखा गया है कि पति बच्चों को लेकर भारत चला आता है और उसकी पत्नी विदेश में ही रह जाती है.
  • यह स्थिति बच्चों के लिए मानसिक यंत्रणा का कारण बनती है.
  • माता-पिता में मारपीट तो होती ही है, साथ ही बच्चा अपने-आप को एक अनजान संस्कृति के बीच पाता है.
  • यद्यपि यह कोई अपहरण का मामला नहीं है फिर भी यह एक गंभीर विषय अवश्य है.
  • ऐसे मामलों के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा एक समझौता हो चुका है जिसे “Hague Abduction Convention” कहते हैं.
  • भारत ने इस समझौते पर अभी हस्ताक्षर नहीं किये गये हैं.
  • वर्तमान में सरकार ने Hague समझौते का अध्ययन कर कानूनी राय लेने के लिए न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी.
  • इस समिति (Justice Rajesh Bindal Committee) ने अपनी अनुसंशा प्रस्तुत कर दी है.
  • इसके अनुसार भारत में एक ऐसा निकाय बनाया जाए जो अंतर-देशीय अभिवावकों द्वारा किये गये बाल अपहरण के मामलों पर सुनवाई कर निर्णय दे सके.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : RPA related issues.

Topic : NPR data useful for welfare schemes, says Union Home Ministry

संदर्भ

गृह मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि जनगणना 2021 और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) अद्यतन की तैयारी जोर-शोर से चल रही है और यह प्रक्रिया एक अप्रैल से शुरू हो जाएगी.

पृष्ठभूमि

इससे पहले सरकार ने राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को अपडेट करने की मंजूरी देते हुए इसके अपडेशन के काम के लिए 8500 करोड़ रुपये के फंड को भी अनुमति दी गई थी. जानकारी के मुताबिक हर नागरिक के लिए रजिस्टर में नाम दर्ज कराना जरूरी होगा. एनपीआर में ऐसे लोगों का लेखा जोखा होगा, जो किसी इलाके में 6 महीने या उससे अधिक समय से रह रहे हों.

क्यों विवादों में है NPR?

नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर का देश के तमाम राज्यों में विरोध हो रहा है. विपक्ष तमाम राज्यों से अपील कर रहा है कि अपने राज्य में एनपीआर को ना होने दें. यही नहीं कई राज्यों ने एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव भी पारित किया है. इन तमाम विरोध के बीच सरकार ने साफ कर दिया है कि वह एनपीआर में पूछे जाने वाले सवालों से पीछे नहीं हटेगी. गृहमंत्रालय ने संसद की स्टैंडिंग कमेटी से कहा है कि इस तरह के सवाल पहले भी एनपीआर में पूछा जा चुके हैं. वहीं कमेटी का मानना है कि एनपीआर को लेकर सरकार लोगों को एकजुट नहीं कर सकी, लिहाजा इस बात का डर है कि जनगणना की प्रक्रिया बाधित हो सकती है.

सरकार का क्या तर्क है?

बता दें कि एनपीआर की प्रक्रिया इस वर्ष 1 अप्रैल से शुरू हो सकती है. गृहमंत्रालय की स्टैंडिंग कमेटी ने डिमांड फॉर ग्रांट्स (2020-2021) की प्रतिवेदन राज्यसभा में गुरुवार को रखी है. इस कमेटी की अध्यक्षता कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा कर रहे हैं. प्रतिवेदन में कहा गया है कि एनपीआर फॉर्म 2020 में माता-पिता के जन्मस्थान और उनकी जन्मतिथि को लेकर सवाल पूछे गए हैं. इसपर सरकार का तर्क है कि इससे बैक एंड डेटा प्रोसेसिंग और मजबूत होगा. गौरतलब है कि कई राज्यों ने एनपीआर को लेकर आपत्ति जाहिर की है. एनडीए के सहयोगी जदयू और एलजेपी ने भी इसको लेकर अपनी चिंता जाहिर की है.

माता-पिता के जन्मस्थान और उनकी जन्मतिथि को लेकर सवाल

व्यापक स्तर पर पूछे जाएंगे सवाल गृहमंत्रालय ने कहा है कि एनपीआर 20100 में भी माता-पिता के जन्मस्थान और उनकी जन्मतिथि को लेकर सवाल पूछा गया था. जिनके माता पिता घर में नहीं रहते हैं या कहीं और रहते हैं या फिर उनका देहांत हो गया है, सिर्फ उन्हीं लोगों को अपने माता-पिता के जन्मस्थान और उनकी जन्मतिथि की जानकारी देनी है.

राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी क्या है?

  • यह एक पंजी है जिसमें देश के निवासियों से सम्बंधित विवरण होगा.
  • इस पंजी को नागरिकता अधिनियम 1955 तथा नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण एवं राष्ट्रीय पहचान कार्य का निर्गमन) नियमावली, 2003 के प्रावधानों के अंतर्गत राष्ट्रीय, राज्य, जिला, अनुमंडल और स्थानीय (गाँव/कस्बा) के स्तर पर तैयार किया जा रहा है.
  • भारत के प्रत्येकसामान्य निवासी” को इस पंजी में दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है.
  • यहाँ “सामान्य निवासी” से तात्पर्य उस व्यक्ति से है जो किसी स्थान विशेष में पिछले छह महीने या उससे अधिक से रहा होअथवा वह व्यक्ति जो उस क्षेत्र में आगामी छह महीने अथवा अधिक रहना चाहता है.
  • राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी में जो डेटाबेस होगा उसके अन्दर जनसांख्यिक विवरणों के साथ-साथ बायोमेट्रिक विवरण भी होंगे.
  • अंत में 18 वर्ष से ऊपर के व्यक्तियों को एक निवासी पहचान का रेजिडेंट आइडेंटिटी कार्ड(RIC) दिया जाएगा. यह एक स्मार्ट कार्ड होगा जिसमें लगे चिप में प्रत्येक व्यक्ति के जनसांख्यिक और बायोमेट्रिक विवरण अंकित होंगे. इस कार्ड पर UID नंबर भी छपा होगा.

राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी के लाभ

  • सरकार के पास देश में रहने वाले हर निवासी की जानकारी होगी.
  • एनपीआर का उद्देश्य लोगों का बायोमीट्रिक डेटा तैयार कर सरकारी योजनाओं का लाभ असली लाभार्थियों तक पहुंचाना भी है.

जनसांख्यिकी विवरण

राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी के लिए प्रत्येक निवासी का निम्नलिखित जनसांख्यिकीय विवरण लिया जाएगा, जिसे देना आवश्यक है:

  • व्यक्ति का नाम
  • घर के मुखिया से रिश्ता
  • पिता का नाम
  • माता का नाम
  • जीवनसाथी का नाम (शादीशुदा होने पर)
  • लिंग
  • जन्मतिथि
  • वैवाहिक स्थिति
  • जन्मस्थान
  • राष्ट्रीयता
  • सामान्य नागरिक का वर्तमान पता
  • वर्तमान पते पर रहने की अवधि
  • स्थायी निवास का पता
  • व्यवसाय/गतिविधि
  • शैक्षणिक योग्यता

NPR और NRC में अंतर

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं. एनआरसी का मकसद देश में अवैध रूप से रह रहे बाहरी नागरिकों की पहचान करना है, वहीं जनसंख्या रजिस्टर का उद्देश्य किसी स्थान पर छह महीने या उससे ज्यादा वक्त से रह रहे निवासियों की जानकारी एकत्र करना है. अगर कोई बाहरी नागरिक भी देश के किसी हिस्से में छह महीने से ज्यादा वक्त से रह रहा हो तो उसका नाम भी इसमें दर्ज होगा.


GS Paper 2 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these schemes; mechanisms, laws, institutions and bodies constituted for the protection and betterment of these vulnerable sections.

Topic : North East Venture Fund (NEVF)

संदर्भ

संसद में दी गई सूचना के अनुसार  पूर्वोत्तर वेंचर निधि (NEVF) ने अब 12 स्टार्ट-अप कम्पनियों को 18 करोड़ रु. वितरित किये हैं.

NEVF क्या है?

  • पूर्वोत्तर विकास वित्त निगम लिमिटेड (NEDFL) ने पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के साहचर्य में पूर्वोत्तर वेंचर निधि (NEVF) की स्थापना की है.
  • यह निधि ऐसी पहली निधि है जो मात्र पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए ही समर्पित है.
  • उद्देश्य :इस निधि की स्थापना का उद्देश्य पूर्वोत्तर क्षेत्र में उद्यमिता के विकास में योगदान करना है. आशा की जाती है कि इस निधि से निवेशकों को मुहैया कराई जाने वाली धनराशि से भविष्य में दीर्घकालिक लाभ होगा.
  • इस निधि से 25 लाख से लेकर 10 करोड़ रु. प्रत्येक वेंचर को देने की योजना है. यह निवेश दीर्घकालिक निवेश होगा जो चार-पाँच वर्षों तक चलेगा.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Important aspects of governance, transparency and accountability.

Topic : Freedom in the World 2020

संदर्भ

हाल ही में एक अमेरिकी संस्था फ्रीडम हाउस (Freedom House) ने फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2020’ (The Freedom in the World 2020) नामक एक प्रतिवेदन प्रकाशित की है. विदित हो कि यह रिपोर्ट अनेक देशों में चुनावी प्रक्रिया, राजनीतिक बहुलवाद, भागीदारी एवं सरकारी कामकाज जैसे राजनीतिक अधिकारों के संकेतकों के आधार पर अंक प्रदान करती है.

फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2020 प्रतिवेदन से सम्बंधित मुख्य तथ्य

  • इस प्रतिवेदन में फिनलैंड, नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड एवं लक्जमबर्ग शीर्ष पाँच स्थानों पर हैं.
  • यह प्रतिवेदन 195 देशों और 15 क्षेत्रों में वर्ष 2019 के दौरान स्वतंत्रता की स्थिति का मूल्यांकन करती है.
  • इस प्रतिवेदन में दो संकेतकों का प्रयोग किया गया है- राजनीतिक अधिकार (0–40 अंक) एवं नागरिक स्वतंत्रता (0–60 अंक).
  • इन अंकों को देशों में व्याप्त स्वतंत्रता की इन तीन स्थितियों के आधार पर प्रदान किया जाता है – स्वतंत्र (Free), आंशिक रूप से स्वतंत्र (Partly Free) एवं स्वतंत्र नहीं (Not Free).

भारत की स्थिति

  • इस प्रतिवेदन के अनुसार, भारत को दुनिया के स्वतंत्र’ (Free) देशों की श्रेणी में रखा गया है.
  • इस साल के फ्रीडम इन द वर्ल्ड प्रतिवेदन में भारत को 83वाँ स्थान प्राप्त हुआ है.
  • ‘स्वतंत्र’ वर्ग के रूप में वर्गीकृत देशों में सिर्फ ट्यूनीशिया को भारत से कम अंक प्राप्त हुआ है.
  • इस वर्ष भारत को 71 अंक प्राप्त हुए जो पिछले वर्ष की तुलना में 4 अंक कम है.
  • इस वर्ष विश्व के 25 सबसे विशाल लोकतंत्रों के अंक में भारत की गिरावट सबसे अधिक है.
  • भारत ने राजनीतिक अधिकार की श्रेणी में 40 में से 34 स्कोर प्राप्त किये हैं.
  • वहीं नागरिक स्वतंत्रता की श्रेणी में भारत को 60 में से मात्र 37 अंक प्राप्त हुए हैं. विदित हो कि पिछले वर्ष भारत को इस प्रतिवेदन में 75 अंक प्राप्त हुए थे.

भारत की स्थिति पिछले वर्ष की तुलना में कमजोर क्यों?

  • ऐसा अक्सर देखने को मिलता है कि भारत के आंतरिक मामलों में विदेशी देशों को आवश्यकता से अधिक दिलचस्पी रहती है. इसलिए इस प्रतिवेदन में भी कश्मीर में हो रहे राजनीतिक उठा-पटक, NPR और नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के साथ-साथ विरोध प्रदर्शनों की कार्रवाई आदि को तूल दी गई है और भारत के स्थान को नीचे खिसका दिया गया.
  • प्रतिवेदन में यहाँ तक कह दिया गया कि भारत की राजनीतिक प्रणाली भेदभावपूर्ण है और धर्मनिरपेक्षता के विरुद्ध है.
  • फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2020 के अनुसार ने यह भी अनुमान लगाया कि यदि वर्तमान सरकार इसी तरह से जनता के साथ पक्षपातपूर्ण व्यवहार रखेगी तो भारत में लोकतंत्र लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकता है.
  • इस प्रतिवेदन में भारत की तुलना सीधे चीन से कर दी गई. इस रिपोर्ट में कहा गया कि जिस तरह चीन ने हाल के वर्षों में में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उइगर और अन्य मुस्लिम समूहों के विरुद्ध दमनात्मक कदम उठाये हैं और चीन ऐसे आरोपों को सिरे से खारिज करता आया है, ठीक उसी प्रकार वर्तमान मोदी सरकार अपनी हिंदू राष्ट्रवादी नीतियों की आलोचना सह नहीं पाती और इन आरोपों को गलत ठहरा देती है.
  • इस प्रतिवेदन में फ्रीडम हाउस वालों को कश्मीर के इन्टरनेट शटडाउन को लेकर उनके दिल में बहुत कसक महसूस होती है. इसलिए उन्होंने रिपोर्ट में यह व्यक्तव्य दे डाला कि कश्मीर में इंटरनेट शटडाउन को एक लोकतांत्रिक देश द्वारा लगाया गया सबसे लंबा शटडाउन बताया गया.
  • फ्रीडम इन द वर्ल्ड 2020 प्रतिवेदन के अनुसार, भारत में पत्रकारों, शिक्षाविदों आदि को रोजाना जीवन में उत्पीड़न और धमकियों का सामना करना पड़ता है. भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की स्थिति दयनीय है.

फ्रीडम हाउस

  • फ्रीडम हाउस विश्व-भर में लोकतंत्र के समर्थन और संरक्षण हेतु समर्पित सबसे प्राचीन अमेरिकी संगठन है.
  • द्वितीय विश्वयुद्ध के अंतराल अमेरिकी भागीदारी और फासीवाद के विरुद्ध लड़ाई को प्रोत्साहन देने के लिए इसे 1941 में न्यूयॉर्क में औपचारिक रूप से इसकी स्थापना हुई थी.
  • फ्रीडम हाउस राजनीतिक अधिकारों एवं नागरिक स्वतंत्रता पर विश्लेषण करने के साथ-साथ मानव अधिकारों की रक्षा और लोकतांत्रिक परिवर्तन को प्रोत्साहित करने के लिए यथासंभव कार्य करती है.
  • यह अमेरिकी संस्था विश्लेषण, वकालत और कार्रवाई के संयोजन के जरिये स्वतंत्रता हेतु उत्प्रेरक के रूप में काम करती है.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Important International institutions, agencies and fora, their structure, mandate.

Topic : International Criminal Court

संदर्भ

अंतरराष्ट्रीय युद्ध अपराध न्यायाधीश बृहस्पतिवार को फैसला देंगे कि अफगानिस्तान में युद्ध के समय अपराधों की जांच जारी रहेगी अथवा नहीं. इसमें अमेरिकी सुरक्षा बलों द्वारा किए गए संभावित अत्याचार भी शामिल हैं.

पृष्ठभूमि

  • अंतरराष्ट्रीय अपराध अदालत (आईसीसी) के अभियोजकों ने 2006 में संभावित युद्ध अपराधों और मध्य एशिया के इस देश में 2003 से मानवता के खिलाफ अपराधों की प्रारंभिक जांच शुरू की थी. मुख्य अभियोजक फतोऊ बेंसौदा ने 2017 में न्यायाधीशों से पूरी जांच की अनुमति देने की अपील की थी और कहा था कि महज तालिबान और अफगानिस्तान सरकार के कर्मियों की जांच नहीं हो बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बलों, अमेरिकी सैनिकों और सेंट्रल इंटेलीजेंस एजेंसी के सदस्यों के अपराधों की भी जांच हो. लेकिन न्यायाधीशों ने कहा कि ‘‘इससे न्याय के हित नहीं सधेंगे’’ और अदालत को सफलता के बेहतर अवसर वाले मामलों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.
  • अमेरिकी अधिकारियों ने जहां निर्णय की सराहना की थी वहीं मानवाधिकार समूहों ने कहा था कि यह हजारों पीड़ितों के लिए झटका है. अमेरिका कभी भी आईसीसी में शामिल नहीं हुआ और वह अमेरिकी नागरिकों पर उसके अधिकार को भी स्वीकार नहीं करता है . उसका कहना है कि ऐसा करना राष्ट्रीय प्रभुसत्ता के लिए खतरा पैदा करता है. उसका यह भी तर्क है कि दुराचार में शामिल अमेरिकी सैनिकों से निपटने के लिए उसकी अपनी व्यवस्था है.
  • अफगानिस्तान भी इस जांच का यह कहते हुए विरोध करता रहा है कि देश और अपने नागरिकों को न्याय दिलाने के लिए वह स्वयं उत्तरदायी है.

ICC क्या है?

  • यह फौजदारी का अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय है जो हेग में स्थित है.
  • अंतर्राष्ट्रीय फौजदारी न्यायालय को 1998 में घोषित रोम कानून (Rome Statute) के द्वारा स्थापित किया गया था.
  • यह संसार का ऐसा पहला अंतर्राष्ट्रीय स्थाई फौजदारी न्यायालय है जो किसी संधि पर आधारित है.
  • इसकी स्थापना अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के विरुद्ध जघन्य और परम चिंतनीय अपराध करने वालों को सजा दिलवाना है.
  • इस न्यायालय का काम है – जनसंहार, युद्ध-अपराध, मानवता के प्रति अपराध तथा आक्रमण के अपराध के आरोपी व्यक्तियों का अपराध तय करना और उनके खिलाफ मुकदमा चलाना.
  • भारत ने अभी तक रोम कानून पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं और इसलिए वहअंतर्राष्ट्रीय फौजदारी न्यायालय सदस्य नहीं है.
  • वैसे तो इस न्यायालय का खर्चा मुख्य रूप से सदस्य देश देते हैं किन्तु इसको अन्य स्रोतों से भी स्वैच्छिक वित्तीय सहायता मिलती है, जैसे – सरकारें, अंतर्राष्ट्रीय संगठन, व्यक्ति, निगम और अन्य इकाइयाँ.

न्यायालय का स्वरूप और मतदान की शक्ति

  • न्यायालय का प्रबंधन और पर्यवेक्षण एक विधायी निकाय द्वारा किया जाता है जिसका नाम असेम्बली ऑफ़ स्टेट्स पार्टीज है जिसमें प्रत्येक देश का एक प्रतिनिधि होता है. इस असेंबली में एक अध्यक्ष और दो उपाध्यक्ष होते हैं जो सदस्यों द्वारा तीन वर्ष के लिए चुने जाते हैं.
  • प्रत्येक देश के पास एक वोट होता है. प्रयास किया जाता है कि जो भी निर्णय हो वह सर्वसहमति से हो. यदि सर्वसहमति नहीं होती है तभी मतदान होता है.

आलोचना

  • अंतर्राष्ट्रीय फौजदारी न्यायालय के पास संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार करने की क्षमता नहीं होती है और वह इसके लिए सदस्य देशों पर निर्भर रहता है.
  • इस न्यायालय के अभियोजकों और न्यायाधीशों के अधिकारों पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं दिखता. फलस्वरूप इसके दुरुपयोग की संभावना को नकारा नहीं जा सकता.
  • बहुधा इस न्यायालय को पश्चिमी साम्राज्यवाद का संवाहक और पक्षपातपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह अमीर और शक्तिशाली देशों द्वारा किये गये अपराधों से आँख मूँद लेता है और छोटे, दुर्बल देशों के नेताओं को ही दण्डित करता है.
  • ICC वादों के चुनाव में एक-सी नीति नहीं अपनाता. इसको कठोर वाद नहीं दिए जाते. बड़े-बड़े अपराधी अपने देशों को अपने प्रभाव में लाकर इस न्यायालय में जाने से बच जाते हैं.

GS Paper 3 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Employment related issues.

Topic : Solar Charkha Mission

संदर्भ

रूचि प्रकाशन ( Expression of Interest EOI) के आधार पर  सोलर चरखा मिशन के अंतर्गत अभी तक 10 प्रस्तावों को अनुमोदन दिया जा चुका है, जिनसे 13,784 शिल्पियों को लाभ पहुँचने की आशा है.

सोलर चरखा मिशन

  1. इस मिशन का अनावरण 2018 में हुआ था.
  2. इस मिशन का अनावरण भारत सरकार के सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा किया गया है.
  3. इस कार्यक्रम का कार्यान्वयन का कार्यान्वयन खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग (KVIC) करेगा.
  4. सौर चरखा मिशन ग्रामीण इलाकों में रोजगार पैदा करेगा और हरित अर्थव्यवस्था में योगदान देगा.
  5. इस मिशन में दो वर्षों के शुरुआती दौर में 50 समूहों के लिए 550 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जायेगी और प्रत्येक समूह 400 से 2000 कारीगरों को रोजगार देगा.
  6. इस मिशन का उद्देश्य पूरे देश की पाँच करोड़ महिलाओं को इस पहल से जोड़ना है.
  7. आशा है कि इस मिशन से शुरूआती दो सालों में एक लाख नौकरियों का सृजन होगा.

लाभ

  • ये सोलर चरखे सौर ऊर्जा का उपयोग करके संचालित किये जायेंगे जो एक अक्षय ऊर्जा का स्रोत है.
  • यह हरित अर्थव्यवस्था के विकास में मदद करेगा क्योंकि यह पर्यावरण के अनुकूल कार्यक्रम है.
  • यह कारीगरों के लिये स्थायी रोज़गार भी पैदा करेगा.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Nanotechnology related issues.

Topic : International Conference on Nano Science and Nano Technology (ICONSAT)

संदर्भ

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के नैनो मिशन के तत्वावधान में नैनो विज्ञान और नैनो प्रौद्योगिकी (ICONSAT) पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ  किया गया.

यह मिशन आधारभूत अनुसंधान, मानव संसाधन विकास, शोध अवसंरचना विकास, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग आदि को बढ़ावा देकर नैनो विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से सम्बंधित गतिविधियों को दृढ़ता प्रदान करेगा.

सम्मेलन से सम्बंधित मुख्य तथ्य

  • ICONSAT 2020 का आयोजन 5 से 7 मार्च के दौरान कोलकाता के एस.एन बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साईंसिस के द्वारा बिस्वा बांग्ला कन्वेंशन सेंटर में किया जा रहा है.
  • इस तीन दिवसीय आयोजन में भौतिक, रासायनिकसामग्री के साथ-साथ जैविक विज्ञान के क्षेत्र में अत्याधुनिक विकास के कई विषयगत विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा.
  • नैनो-सामग्रियों पर वर्तमान शोध के अतिरिक्त, कई उभरते क्षेत्रों जैसे कि क्वांटम मैटिरियल, ऊर्जा सामग्री और कृषि के लिए नैनो प्रौद्योगिकी को डीएसटी नैनो मिशन के चिन्हित क्षेत्रों में शामिल किया गया है.

नैनो-विज्ञान और प्रौद्योगिकी की आवश्यकता

  • 5M अर्थात् – यांत्रिक, सामग्री, मशीनें, विनिर्माण और जनशक्ति, समय की आवश्यकता है और हमें इन सभी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए कि कैसे नैनो-विज्ञान और प्रौद्योगिकी का सतत विकास और नई तकनीक (मशीन शिक्षण, कृत्रिम बुद्धि) जैसी चुनौतियों में प्रयोग किया जा सके.
  • विज्ञान को हमारे समाज के बड़े भाग से जुड़ना चाहिए. नैनो विज्ञान कार्य करने के लिए एक असाधारण क्षेत्र है और इसमें समाज को लाभान्वित करने के बहुत सारे अवसर हैं.

Prelims Vishesh

Deccan Queen express :-

  • डेकन क्वीन एक्सप्रेस में जर्मनी के Linke Hofmann Busch (LHB) रेल डिब्बे लगाये जाएँगे जिससे इस गाड़ी की सुरक्षा बेहतर हो जायेगी और बेहतर अवलंबन प्रणाली के फलस्वरूप यात्रियों की यात्रा पहले से अधिक सुखकर हो जायेगी.
  • विदित हो कि यह गाड़ी मध्य रेलवे जोन में चलती है.  

Pragyan Conclave 2020 :-

  • नई दिल्ली में स्थल युद्ध अध्ययन केंद्र (Centre for Land Warfare Studies – CLAWS) ने पिछले दिनों दो दिनों का एक सेमीनार आयोजित किया जिसका नाम था – भारतीय सेना अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार.
  • इस सेमीनार में प्रतिभागियों ने नए युग की युद्ध कला से सम्बंधित नए-नए विचारों, परिदृश्यों आदि पर विचार-विमर्श किया.

What is Swap Ratio? :-

  • विलय अथवा अधिग्रहण के समय अधिग्रहण करने वाली कम्पनी अधिगृहीत होने वाली कम्पनी के शेयरों के बदले अपने शेयरों के लिए जिस अनुपात का प्रस्ताव देती है उसे स्वैप अनुपात कहा जाता है.
  • स्वैप अनुपात के आकलन के लिए कम्पनियाँ बुक वैल्यू, प्रति शेयर उपार्जन, कर देने के पश्चात् लाभ, भुगतान किया गया लाभांश आदि का विश्लेषण करती है.
  • पिछले दिनों स्वैप अनुपात चर्चा में रहा क्योंकि आठ सरकारी बैंकों का विलय होने वाला है और इन बैंकों ने अपना-अपना स्वैप अनुपात घोषित किया है.

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