Sansar डेली करंट अफेयर्स, 02 January 2020

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Sansar Daily Current Affairs, 02 January 2020


GS Paper 1 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian culture will cover the salient aspects of Art Forms, Literature and Architecture from ancient to modern times.

Topic : Guru Gobind Singh

संदर्भ

गुरु गोविन्द सिंह जयंती इस वर्ष 2 जनवरी को पड़ रही है.

गुरु गोविन्द सिंह कौन थे?

  • गुरु गोविन्द सिंह 10वें सिख गुरु कहलाते हैं.
  • गुरु गोविन्द सिंह (Guru GobindSingh)  ने भली-भांति विचार करके शांतिप्रिय सिख सम्प्रदाय को सैनिक संगठन का रूप दिया जो दृढ़तापूर्वक मुसलामानों के अतिक्रमण और अत्याचारों का सामना कर सके.
  • साथ ही उन्होंने सिखों में ऐसी अनुशासन की भावना भरी कि वे लड़ाकू शक्ति बन गए. उन्होंने अपने पंथ का नामखालसा (पवित्र) रखा.
  • साथ ही समस्त सिख समुदाय को एकता-सूत्र में बाँध कर के विचार से सिखों केकेश, कच्छ, कड़ा, कृपाण और कंघा – पाँच वस्तुओं को आवश्यक रूप में धारण करने का आदेश दिया. उन्होंने पाहुल प्रथा का शुभारम्भ किया जिसके अनुसार सभी सिख समूह में जात-बंधन तोड़ने के उद्देश्य से एक ही कटोरे में प्रसाद ग्रहण करते थे.
  • गुरु गोविन्द सिंह ने स्थानीय मुग़ल हाकिमों से कई युद्ध किये, जिनमें उनके दो बालक पुत्र मारे भी गए. पर इससे वे हतोत्साहित नहीं हुए. अपनी मृत्यु तक सिखों का संगठन करते रहे. 1708 ई. में एक अफगान ने उनकी हत्या कर दी.
  • आगे चलकर गुरु गोविन्द सिंह की रचनाएँ भी संकलित हुईं और यह संकलन “गुरु ग्रन्थ साहब” का परिशिष्ट (appendix) बना.
  • समस्त सिख समुदाय उनका इतना आदर करता था कि उनकी मृत्यु के बाद गुरु पद ही समाप्त कर दिया गया. वैसे उनके मृत्यु के बाद ही बंदा वीर ने सिखों का नेतृत्व भार संभाल लिया. वीर वंदा के नेतृत्व में 1708 ई. से लेकर 1716 ई. तक सिख निरंतर मुगलों से लोहा लेते रहे, पर 1716 ई. में बंदा वीर बंदी बना लिया गया औरबादशाह फर्रुखशियर (1713-1719ई.) की आज्ञा से हाथियों से रौंदवादकर उसकी निर्मम हत्या कर दी गई.

और भी विस्तार से पढ़ें > सिख धर्म का इतिहास


GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : Saansad Adarsh Gram Yojana

संदर्भ

सांसद आदर्श ग्राम योजना (Saansad Adarsh Gram Yojana – SAGY) के चौथे चरण में कुल 790 में से मात्र 252 सांसदों ने ग्राम पंचायत गोद लिए हैं. जब से यह योजना चली है तब से केवल 1,753 ग्राम पंचायतों को चार चरणों में चुना गया है जो प्रत्याशा से कम है.

सांसद आदर्श ग्राम योजना (SAGY) क्या है?

  • यह योजना 2014 में ग्राम विकास के लिए आरम्भ हुई थी.
  • इसके अन्दर प्रत्येक सांसद को 2019 तक तीन-तीन गाँवों में भौतिक एवं संस्थागत अवसंरचनाओं के विकास का उत्तरदायित्व लेना था.
  • यह परियोजना लोक नायक जय प्रकाश नारायण की जयंती पर आरम्भ की गई थी.

कार्यान्वयन

  1. इस योजना के संचालन के लिए एक ग्राम विकास योजना बनेगी जिसको प्रत्येक चुनी हुई ग्राम पंचायत तैयार करेगी.
  2. इस योजना में इस बात पर विशेष ध्यान दिया जाएगा कि प्रत्येक गरीब परिवार गरीबी से ऊपर आने में समर्थ हो जाए.
  3. इस योजना में जहाँ कहीं भी वित्त की कमी होगी उसकी भरपाई सांसद अपनी MPLAD के बजट से करेगा.
  4. प्रत्येक गाँव के लिए योजना बनाने में ग्रामीणों का हाथ होगा और इस कार्य का समन्वयन जिला कलेक्टर करेंगे. सम्बंधित सांसद इस प्रक्रिया में अपना सक्रिय योगदान देंगे.
  5. इस कार्यक्रम की सफलता के लिए नई तकनीकों को अपनाना और नवाचार लाना आवश्यक होगा. इसके लिए अन्तरिक्ष में स्थित उपग्रहों एवं दूरस्थ सेंसरों का प्रयोग होगा तथा निगरानी के लिए मोबाइल पर आधारित तकनीक का प्रयोग किया जाएगा. साथ ही कृषि तकनीक का उपयोग करते हुए उत्पादकता को बढ़ाई जायेगी.
  6. योजना के कार्यान्वयन के लिए राज्य स्तर पर एक प्राधिकृत समिति होगी जिसका अध्यक्ष मुख्य सचिव होगा. इस समिति में सम्बंधित विभाग के अधिकारी और विशेषज्ञों के अतिरिक्त सिविल सोसाइटी से सम्बंधित कम से कम दो प्रतिनिधि होंगे.
  7. SAGY के कार्यान्वयन के लिए जिला कलेक्टर नाभिक अधिकारी होगा. वह प्रत्येक महीने सम्बन्धित विभागों के प्रतिनिधियों के साथ समीक्षात्मक बैठक करेगा. ऐसी बैठक की अध्यक्षता वह सांसद करेगा जिसने गाँव को गोद लिया है.
  8. SAGY सामुदायिक प्रतिभागिता पर बल देता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि ग्रामीण समुदाय को सामाजिक रूप से सक्रिय बनाने पर गाँव में अपने-आप कई विकासात्मक गतिविधियों की एक शृंखला शुरू हो सकती है.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Salient features of the Representation of People’s Act.

Topic : Political Parties Registration Tracking Management System

संदर्भ

पिछले दिनों भारतीय निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों के लिए एक नई ऑनलाइन अनुसरण प्रणाली (new online tracking system for political parties) बनाई है.

प्रणाली के मुख्य तत्त्व

  • निर्वाचन पैनल के पास पंजीकरण हेतु आवेदन समर्पित होने के पश्चात् वह आवेदन कहाँ-कहाँ जाता है, इसकी तत्काल जानकारी इस प्रणाली द्वारा मुहैया कराई जायेगी.
  • यह प्रणाली उन राजनीतिक दलों के लिए हैं जो 1 जनवरी, 2020 से पंजीकरण का आवेदन देंगे.

यह प्रणाली कैसे काम करती है?

इस प्रणाली के माध्यम से जनवरी 1, 2020 से पंजीकरण के लिए आवेदन देने वाला राजनीतिक दल यह देख सकेगा कि उसके आवेदन की प्रगति क्या है. SMS और ई-मेल से आवेदनकर्ता को उसके आवेदन की प्रगति की सूचना दी जायेगी.

राजनीतिक दलों के पंजीकरण से सम्बंधित नियम

  • राजनीतिक दलों के पंजीकरण के नियम जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुभाग 29A में वर्णित हैं.
  • इसके अनुसार अपने गठन होने के उपरान्त किसी राजनीतिक दल को 30 दिनों के अन्दर निर्वाचन आयोग को पंजीकरण के लिए आवेदन देना पड़ता है. इसके लिए भारतीय निर्वाचन आयोग विहित करता है क्योंकि उसे ही इसके लिए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के अनुभाग 29A के अतिरिक्त संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अधिकार मिले हुए हैं.

GS Paper 3 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Science and Technology- developments and their applications and effects in everyday life Achievements of Indians in science & technology; indigenization of technology and developing new technology.

Topic : Gaganyaan mission

संदर्भ

पिछले दिनों ISRO के अध्यक्ष ने एक प्रेस कार्यक्रम में बतलाया कि गगनयान मिशन के अंतर्गत अन्तरिक्ष में भेजने के लिए चार अंतरिक्षयात्रियों का चयन कर लिया गया है.

गगनयान मिशन के बारे में

भारत के 72वें स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित करते हुए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि भारत 2022 में अंतरिक्ष में अंतरिक्ष यात्री भेजेगा. इस मिशन को गगनयान मिशन का नाम दिया गया है.

गगनयान के आनुषंगिक लाभ

  1. देश में विज्ञान और तकनीक के स्तर में वृद्धि.
  2. अनेक संस्थानों, शिक्षण संस्थानों और उद्योग को एक राष्ट्रीय परियोजना से जुड़ने का अवसर.
  3. औद्योगिक वृद्धि में सुधार.
  4. युवजनों को प्रेरणा.
  5. सामाजिक लाभ के लिए तकनीक का विकास.
  6. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में बढ़ोतरी.

भारतीय मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम

  • इस कार्यक्रम (Gaganyaan mission) का उद्देश्य पृथ्वी कक्ष में एक ऐसा अन्तरिक्ष यान प्रक्षेपित करना है जिसमें दो अथवा तीन अन्तरिक्षयात्री सवार हों.
  • इसके लिए शुरू में अन्तरिक्ष में पृथ्वी के ऊपर 400 km की दूरी पर स्थित परिक्रमा पथ पर 2-3 अन्तरिक्ष यात्रियों को 7 दिन के लिए भेजा जाएगा.
  • इसके लिए भारत सरकार ने पिछले बजट में 12.4 billion की राशि निर्धारित कर दी है.
  • इस अंतरिक्षयान का प्रक्षेपण जीएसएलवी मार्क III द्वारा किया जाएगा.

तकनीकी चुनौतियाँ

ISRO को तीन प्रमुख क्षेत्रों में ध्यान देने की जरूरत है – i) पर्यावरण नियंत्रण और जीवनरक्षक प्रणाली (ECLS system) ii) चालक दल सुरक्षा प्रणाली और iii) फ्लाइट सूट सुविधा. इन चुनौतियों के समाधान करने के लिए सरकार ने आवश्यक तैयारी हेतु 145 करोड़ रूपए स्वीकृत किये हैं.

हाल ही में किये गए तकनीकी प्रयोग

  • पिछले वर्ष ISRO ने “PAD ABORT” अर्थात् अन्तरिक्ष यात्री उद्धार प्रणाली का सफल परीक्षण किया था.
  • इस प्रणाली के माध्यम से यदि कभी प्रक्षेपण विफल हो जाता है तो उस समय अन्तरिक्ष यात्री उससे बाहर निकलकर अपने प्राण बचाने में समर्थ हो जाते हैं.
  • यह परीक्षण श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अन्तरिक्ष केंद्र में हुआ था.
  • विदित हो कि अगर भारत इस मिशन (गगनयान मिशन) को सफलतापूर्वक लौंच करता है, तो यह संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के बाद ऐसा करने वाला चौथा राष्ट्र बन जायेगा.

सफल मानव अन्तरिक्ष यात्रा के लिए आवश्यक है कि हम यात्रा के पश्चात् अन्तरिक्ष यात्रियों को सकुशल पृथ्वी पर वापस ला सकें और साथ ही यह अन्तरिक्ष यान ऐसा हो कि उसमें बैठे अन्तरिक्षयात्री पृथ्वी जैसी दशाओं में रह सकें.


GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Infrastructure related issues.

Topic : National Infrastructure Pipeline

संदर्भ

प्रधानमन्त्री के द्वारा 2024-25 तक भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के संकल्प के अनुरूप वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 102 लाख करोड़ रु. के राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन का पिछले दिनों अनावरण किया है.

पृष्ठभूमि

वित्त मंत्रालय ने आर्थिक मामले के सचिव की अध्यक्षता में एक कार्यदल गठित किया है जो 2019-20 से 2024-25 तक के लिए एक राष्ट्रीय अवसरंचना पाइपलाइन का मानचित्र तैयार करे. इस पाइपलाइन के अंतर्गत विभिन्न प्रक्षेत्रों में धनराशि का व्यय किया जाएगा.

व्यय की जाने वाली धनराशियों का प्रक्षेत्रवार विववरण निम्नलिखित है –

  1. सिंचाई और ग्रामीण अवसरंचना की परियोजनाओं में प्रत्येक परियोजना पर 7.7 लाख करोड़ रु. व्यय किया जाएगा.
  2. औद्योगिक अवसंरचना पर 3.07 लाख करोड़ रु. खर्च किया जाएगा.
  3. सड़क परियोजनाओं में 19.63 लाख करोड़ रु. लगाया जाएगा.
  4. रेलवे परियोजनाओं पर 13.68 लाख करोड़ रु. लगाया जाएगा.
  5. बंदरगाह परियोजनाओं पर 1 लाख करोड़ रु. खर्च होगा.
  6. हवाई अड्डों के लिए 1.43 लाख करोड़ रु. की व्यवस्था है.
  7. शहरी अवसंरचना के लिए 16.29 लाख करोड़ रु. दिए जाएँगे.
  8. टेलिकॉम परियोजनाओं पर 3.2 लाख करोड़ रु. खर्च होंगे.
  9. ऊर्जा प्रक्षेत्र में 24.54 लाख करोड़ रु. का निवेश होगा.
  10. विद्युत प्रक्षेत्र में 11.7 लाख करोड़. का व्यय होगा.
  11. राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन परियोजनाओं में अब एक्सप्रेस मार्गों, राष्ट्रीय गैस ग्रिड और PMAY-G को भी सम्मिलित कर लिया गया है.

राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन क्या है और इसका महत्त्व क्या है?

  • अनुमान है कि अपनी वृद्धि दर को बनाये रखने के लिए भारत को 2030 तक अवसंरचना पर 4.5 ट्रिलियन डॉलर खर्च करने पड़ेंगे. इसी तथ्य को ध्यान में रखकर राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन योजना बनाई गई है जिसका काम इस लक्ष्य को कुशलतापूर्वक प्राप्त करना होगा.
  • राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन यह देखेगी कि देश में चल रहीं अवसंरचना से जुड़ी परियोजनाएँ ठीक से तैयार हुईं हैं और उनका काम ठीक से शुरू हुआ है अथवा नहीं.
  • ये परियोजनाएँ ग्रीन फील्ड और ब्राउन फील्ड दोनों प्रकार की होंगी. शर्त यह है कि इनकी लागत 100 करोड़ से ऊपर की होनी चाहिए.
  • प्रत्येक मंत्रालय/विभाग का यह दायित्व होगा कि वह परियोजनाओं का अनुश्रवन करे और यह सुनिश्चित करे कि उनका समय पर तथा निर्धारित लागत के अन्दर कार्यान्वयन हो जाए.
  • राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन का उद्देश्य देश में अवसंरचना के क्षेत्र में वार्षिक निवेश इतना बढ़ाया जाए कि 2024-25 तकपाँच ट्रिलियन डॉलर की GDP का लक्ष्य पूरा किया जा सके.

अवसंरचना में पैसा लगाना आवश्यक क्यों?

  • 2008-17 के दशक में भारत ने अवसंरचना में 1.1 ट्रिलियन डॉलर का निवेश किया था.
  • यदि सतत आधार व्यापक एवं समावेशी वृद्धि का लक्ष्य प्राप्त करना है तो उसके लिए यह आवश्यक हो जाता है कि हमारी अवसरंचनाएँ उच्च गुणवत्ता वाली हों.
  • भारत की वृद्धि दर अभी ऊँची चल रही है. इसको बनाये रखने के लिए अवसंरचना में निवेश आवश्यक होगा.
  • 2024-25 तक पाँच ट्रिलियन GDP (पढ़ें > GDP in Hindi) पाने के लिए भारत को 2019-20 से लेकर 2024-25 तक 1.4 ट्रिलियन डॉलर खर्च करने पड़ेंगे.

Prelims Vishesh

Mani app :-

  • दृष्टिबाधित लोगों को करेंसी नोट पहचानने में सुविधा देने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने “मनी” नामक मोबाइल ऐप बनाया.
  • यह ऐप अधिष्ठापित करने के बाद ऑफलाइन भी काम करता है. इसमें मोबाइल फ़ोन के कैमरे से करेंसी नोट की पहचान हो जाती है और हिंदी-अंग्रेजी में नोट के बारे में जानकारी भी मिल जाती है.

Senna Spectabilis :

  • सेना स्पेक्टेबिलिस अमेरिका के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों का एक पर्णपाती वृक्ष है जो तेजी से फैलकर अन्य वनस्पतियों को हानि पहुँचाता है.
  • यह तेजी से 15 से 20 मीटर तक बढ़ जाता है और हजारों बीज छितरा देता है.
  • इस वृक्ष को IUCN लाल सूची में “सबसे कम चिंता का विषय / Least Concern” की श्रेणी में रखा गया है.
  • केरल सरकार इस वृक्ष की बेतहाशा वृद्धि से नीलगिरी जैव मंडल आश्रयणी और वायनाड वन्यजीव आश्रयणी को बचाने के लिए योजना बना रही है.

Sangita Kalanidhi award :

  • एस.सोमैया को कर्नाटक संगीत में बहुमूल्य योगदान के लिए संगीत अकादमी का संगीता कलानिधि पुरस्कार दिया गया है.
  • संगीत कलानिधि पुरस्कार चेन्नई के संगीत अकादमी द्वारा 1942 से प्रतिवर्ष दिया जाता रहा है.

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