PPV&FR अधिनियम, 2001 क्या है? – Protection of Plant Varieties & Farmers Rights Act

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बड़े-बड़े कृषक समूहों से शिकायतें आने के पश्चात् पादप प्रकार एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (Protection of Plant Varieties and Farmers Rights Authority – PPV&FRA) ने यह निर्णय किया है कि वह उस  FAQ प्रलेख में संशोधन करेगा जिसका उद्धरण खाद्य एवं पेय निर्माता पेप्सिको इंडिया ने गुजरात के आलू उगाने वाले कृषकों के विरुद्ध अपने दृष्टिकोण के समर्थन में प्रस्तुत किया है.

ppv&fr act

मामला क्या है?

  • विवादित FAQ प्रलेख में यह लिखा हुआ है कि PPV&FRA अधिनियम, 2001 के अंतर्गत अधिकारों पर दावा वही छोटे और सीमान्त किसान कर सकते हैं जो अपने खाने-पीने भर ही खेती कर लेते हैं.
  • FAQ में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ये अधिकार वाणिज्यिक किसानों के लिए नहीं हैं, अपितु मात्र उन किसानों के लिए हैं जो छोटे पैमाने पर खेती करते हैं.
  • पेप्सिको का दावा था कि कुछ किसानों ने उसके पंजीकृत आलू के प्रकार का उत्पादन किया है और उन्हें बेचा है. अतः इसलिए उसने 2018 में कुछ किसानों पर केस कर दिया था और 2 करोड़ रु. का दावा ठोक दिया था.
  • पेप्सिको की इस कार्रवाई का बहुत ही प्रतिरोध हुआ और उसके उत्पादनों का बहिष्कार होने लगा. अंततः मई, 2019 के लोकसभा चुनाव के ठीक पहले सरकार ने इसमें हस्तक्षेप किया और पेप्सिको ने सभी मामलों को उठा लिया.

PPV&FRA अधिनियम क्या है?

  • यह अधिनियम 2001 में पारित हुआ था.
  • इसका निर्माण 1978 के अंतर्राष्ट्रीय नवीन पादप प्रकार संरक्षण संघ (International Union for the Protection of New Varieties of Plants – UPOV )के प्रावधानों के अनुरूप है.
  • इस अधिनियम में वाणिज्यिक पादप प्रजाति निर्माताओं और किसानों दोनों के योगदान को मान्यता दी गई है.
  • साथ ही यह TRIP को भी कुछ इस प्रकार लागू करने का प्रावधान करता है जो सभी हितधारकों के विशिष्ट सामाजिक-आर्थिक हितों का समर्थन करता है.
  • इन हितधारकों में निजी प्रक्षेत्र, सार्वजनिक प्रक्षेत्र और शोध संस्थानों के साथ-साथ वे किसान भी शामिल माने जाते हैं जिनके पास संसाधनों की कमी होती है.
  • इस अधिनियम के जरिये पादप किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण बना जो 2005 से अस्तित्व में आया.
  • यह प्राधिकरण इस मायने में सबसे अलग है कि यह किसानों को उनके अधिकार प्रदान करता है जिसका प्रावधान विश्व के अन्य किसी देश द्वारा नहीं किया गया है.
  • अधिनियम द्वारा कृषक किस्मों को बौद्धिक सम्पदा सुरक्षा प्रदान की जाती है

प्रोटेक्‍शन ऑफ प्लांट वैराइटीज एंड फॉर्मर राइट्स एक्ट 2001 के उद्देश्य

  • पौधों की किस्मों, कृषकों और प्रजनकों के अधिकार की सुरक्षा और पौधों की नई किस्म के विकास को बढ़ावा देने के लिये एक प्रभावी प्रणाली की स्थापना करना.
  • पौधों की नई किस्मों के विकास के लिये पादप आनुवंशिक संसाधन उपलब्ध कराने तथा किसी भी समय उनके संरक्षण व सुधार में किसानों द्वारा दिए गए योगदान के सन्दर्भ में किसानों के अधिकारों को मान्यता देना व उन्हें सुरक्षा प्रदान करना.
  • देश में कृषि विकास में तेजी लाना, पादप प्रजनकों के अधिकारों की सुरक्षा करना. पौधों की नई किस्मों के विकास के लिये सार्वजनिक और निजी क्षेत्र, दोनों में अनुसन्धान और विकास के लिये निवेश को प्रोत्साहित करना.
  • देश के बीज उद्योग की प्रगति को सुगम बनाना जिससे किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीजों तथा रोपण सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके.

पादप प्रकार एवं कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत अधिकार

पादप-प्रजाति का प्रजनन करने वालों के अधिकार (Breeders’ Rights)

संरक्षित पादप प्रजाति को उत्पन्न करने, बेचने, बाजार में पहुँचाने, वितरित करने और आयात-निर्यात करने का एकमात्र अधिकार उनका होगा जो इस प्रजाति का प्रजनन करेंगे. यदि इनके अधिकार का हनन होता है तो वे इसके लिए कानून का शरण ले सकते हैं. प्रजनन प्रजाति प्रजनन करने वाले अपना एजेंट और लाइसेंसी नियुक्त कर सकते हैं.

शोधकर्ताओं के अधिकार (Researchers’ Rights)

प्रयोग एवं शोध करने के लिए शोधकर्ता अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत किसी भी प्रजाति-प्रकार का प्रयोग कर सकते हैं. नई निर्मित प्रजाति को भी कोई शोधकर्ता एक आरम्भिक स्रोत के रूप में नई प्रजाति के बनाने के उद्देश्य से प्रयोग में ला सकता है. परन्तु उस प्रजाति का बारम्बार प्रयोग करने के लिए पंजीकृत प्रजननकर्ता से पूर्वानुमति आवश्यक होगी.  

कृषक अधिकार (Farmers’ Rights)

  1. जो किसान एक नया प्रजाति प्रकार विकसित कर लेता है तो वह भी प्रजाति निर्माता कम्पनियों की भाँति उसका पंजीकरण और संरक्षण प्राप्त कर सकता है.
  2. किसान द्वारा उत्पादित नई प्रजाति को एक वर्तमान प्रजाति (extant variety) के रूप में पंजीकृत किया जा सकता है.
  3. अधिनियम के अंतर्गत सुरक्षित बीज-प्रकार के साथ-साथ किसान अपनी फसल को बचा सकता है, उपयोग में ला सकता है, बो सकता है, फिर से बो सकता है, उसका विनियम कर सकता है, उसे बाँट सकता है अथवा बेच सकता है. परन्तु PPV&FR अधिनियम के अंतर्गत संरक्षित किसी ब्रांडेड बीज प्रजाति को किसान नहीं बेच सकेगा.
  4. खेतों में उपजाए गये पादपों के आनुवंशिक संसाधनों (Plant Genetic Resources) तथा नकदी फसलों के वन्य प्रकारों के संरक्षण के लिए किसान समुचित सम्मान और पुरस्कार पाने के अधिकारी होंगे.
  5. अधिनियम के अनुभाग 39(2) के अनुसार यदि किसान द्वारा बनाई गई नई पादप-प्रजाति ठीक से फलदायी नहीं होती तो उसे इसके लिए क्षतिपूर्ति मिल सकती है.
  6. अधिनियम के तहत प्राधिकरण या रजिस्ट्रार या ट्रिब्यूनल या उच्च न्यायालय के समक्ष चलने वाली किसी भी कार्यवाही के लिए किसान को किसी भी शुल्क का भुगतान नहीं करना पड़ेगा.

Tags : Objectives of the PPV & FR Act, 2001. Protection of Plant Varieties and Farmers’ Rights (PPV&FR) Act, 2001. Key features of the act and the need for protection of farmers’ rights. पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण अधिनियम .

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