राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी अधिनियम, 2008 (NIA Act) और NIA संशोधन अधिनियम, 2019

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What is National Investigation Agency Act, and why is Chhattisgarh challenging it?

छत्तीसगढ़ सरकार ने अनुच्छेद 131 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की है जिसमें राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी अधिनियम, 2008 / National Investigation Agency (NIA) Act, 2008 को इस आधार पर चुनौती दी गई है कि यह अधिनियम विधि एवं व्यवस्था संधारण करने विषयक राज्य की शक्तियों का अतिक्रमण करता है.

NIA एक्ट क्या है?

  • यह एक आतंकवाद-निरोधी एजेंसी से सम्बंधित अधिनियम है जो 26/11 की मुंबई आतंकी घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में पारित हुआ था.
  • इस अधिनियम के अनुसार राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी भारत की एकमात्र वास्तविक संघीय एजेंसी ठीक उसी प्रकार है जिस प्रकार अमेरिका की फ़ेडरल ब्यूरो इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (FBI). सार्वदेशिक होने के कारण यह एजेंसी CBI से अधिक सशक्त है.
  • राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी अधिनियम, 2008 के अनुसार NIA के पास यह शक्ति है कि वह भारत के किसी  भी भाग में होने वाली आंतकवादी गतिविधियों का स्वतः संज्ञान लेते हुए मामला पंजीकृत कर सकती है और राज्य सरकार की अनुमति के बिना किसी राज्य में प्रवेश कर सकती है, जाँच कर सकती है और गिरफ्तारी कर सकती है.

छत्तीसगढ़ की आपत्तियाँ

  • अपनी याचिका में छत्तीसगढ़ सरकार ने कहा है कि राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी अधिनियम, 2008 संविधान-विरुद्ध है और इसको पारित करने की शक्ति संसद को नहीं थी.
  • राज्य सरकार का तर्क है कि संविधान की सातवीं अनुसूची में पुलिस राज्य सूची में दर्ज है. अतः केंद्र को इससे सम्बंधित कानून बनाने का अधिकार नहीं है.
  • यह अधिनियम राज्य को पुलिस के माध्यम से जाँच-पड़ताल करने की शक्ति का हरण करता है और केंद्र को निरंकुश शक्तियां प्रदान करता है.

2019 का NIA संशोधन अधिनियम

  • इस संशोधन के द्वारा कुछ ऐसे नए प्रकार के अपराध जोड़े गये हैं जिनकी जाँच और अभियोजन NIA कर सकती है. ये अपराध हैं – मानव तस्करी, नकली करेंसी, निषिद्ध हथियारों का निर्माण और विक्रय, साइबर आतंकवाद तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 के तहत अपराध.
  • इस संशोधन के द्वारा केंद्र सरकार को यह शक्ति दी गई है कि वह NIA के मुकदमों के लिए सेशन न्यायालयों को विशेष न्यायालय के रूप में नामित कर सकती है.
  • 2019 के NIA संशोधन के अनुसार, कोई NIA अधिकारी सम्बंधित राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) की पूर्वानुमति लिए बिना धावे कर सकता है और उन संपदाओं को जब्त कर सकता है जिनके विषय में शंका हो कि ये आतंकी गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं. इसके लिए NIA के अन्वेषण अधिकारी को अब मात्र अपने ही महानिदेशक की स्वीकृति लेनी होगी.

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