गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFCs) लोकपाल योजना – Ombudsman Scheme

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हाल ही में RBI द्वारा गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के लिए लोकपाल योजना (Ombudsman scheme) का शुभारम्भ किया गया. चलिए जानते हैं इस योजना के बारे में details में.

गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी के लिए लोकपाल योजना के विवरण और यह योजना क्यों लाई गई, यह जानने से पहले हमें NBFC क्या है, बैंकों एवं NBFCs में अंतर क्या हैं, NBFCs का महत्त्व जान लेना आवश्यक है.

विदित हो कि हम लोग जल्द से जल्द 2018 की सभी योजनाओं को Yojana 2018 पेज पर संकलित कर रहे हैं. 2019 की Prelims परीक्षा में इन योजनाओं के बारे में आपसे पूछा जा सकता है.

NBFC क्या है?

गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनी (NBFC) उस कम्पनी को कहते हैं जो

i) कम्पनी अधिनियम, 1956 के अंतर्गत पंजीकृत हो,

ii) इसका मुख्य व्यवसाय उधार देना, विभिन्न प्रकार के शेयरों/स्टॉक/बांड्स/डिबेंचर/प्रतिभूतियों, पट्टा कारोबार, किराया-खरीद (हायर-पर्चेज), बीमा व्यवसाय, चिट सम्बन्धी कारोबार में निवेश करना हो, तथा

iii) इसका मुख्य व्यवसाय किसी योजना अथवा व्यवस्था के अंतर्गत एकमुश्त रुप से अथवा किश्तों में जमाराशियाँ प्राप्त करना है. किन्तु, किसी गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनी में ऐसी कोई संस्था शामिल नहीं है जिसका मुख्य व्यवसाय कृषि, औद्योगिक, व्यापार सम्बन्धी ये कंपनियाँ RBI अधिनियम, 1934 की धारा 45-IA के अंतर्गत RBI के साथ पंजीकृत होती हैं.

बैंकों एवं NBFCs में अंतर

  • NBFCs माँग जमा स्वीकार नहीं कर सकती हैं;
  • NBFCs भुगतान एवं निपटान प्रणाली का हिस्सा नहीं हैं एवं स्व-आहरित चेक (cheques drawn on itself) जारी नहीं कर सकती हैं;
  • बैंकों में जमा बीमा तथा क्रेडिट गारंटी निगम की जमा बीमा सुविधा उपलब्ध होती है जबकि इसके विपरीत NBFC के जमाकर्ताओं के लिए यह उपलब्ध नहीं है.

NBFCs का महत्त्व

  • NBFCs वित्तीय क्षेत्रक में विविधता एवं दक्षता लाती हैं तथा ग्राहकों की आवश्यकताओं के प्रति इसे अधिक उत्तरदायी बनाती हैं.
  • 30 सितम्बर, 2017 तक बैंक परिसंपत्तियों का 17% तथा बैंकों जमाओं का 0.26% हिस्सा NBFC क्षेत्रक के पास था. NBFC अपनी बैलेंस शीट के वित्तपोषण के लिए काफी हद तक सार्वजनिक निधियों पर निर्भर होती हैं.

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के लिए लोकपाल योजना की आवश्यकता क्यों?

  • NBFCs द्वारा अग्रिमों में वृद्धि तथा उनके विरुद्ध, सेवाओं में कमी को लेकर बढ़ती शिकायतें.
  • वर्तमान में NBFCs, बैंकिंग लोकपाल के अधीन नहीं है.
  • वित्तीय आसूचना इकाई (Financial Intelligence Unit – FIU) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (Prevention of Money Laundering Act) का अनुपालन न करने के कारण, 9,491 NBFCs को उच्च जोखिम वाले वर्ग के अंतर्गत रखा है.

लोकपाल योजना का विवरण

  • यह इस योजना के अधीन आने वाली NBFC के विरुद्ध सेवाओं में कमी की शिकायतों के लिए निःशुल्क एवं त्वरित शिकायत निवारण तन्त्र प्रदान करेगा.
  • आरम्भ में, इस योजना के दायरे में जमा स्वीकार करने वाली सभी NBFC को आया जाएगा. इसके उपरान्त प्राप्त अनुभव के आधार पर RBI, ग्राहक इंटरफेस के साथ एक बिलियन रुपये या उससे अधिक की परिसम्पत्ति वाली NBFCs की योजना में सम्मिलित करने के लिए इस योजना का विस्तार करेगा.
  • भारतीय रिज़र्व बैंक के महाप्रबन्धक या उससे ऊपर की रैंक के अधिकारी तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए लोकपाल के रूप में नियुक्त किये जा सकते हैं.
  • NBFC लोकपाल के कार्यालय चार मेट्रो केन्द्रों (चेन्नई, कोलकाता, मुंबई और नई दिल्ली) से कार्य करेंगे, ताकि देश-भर के मामले इसके अधीन आ सकें.
  • यदि NBFC शिकायत अस्वीकार कर देती है या एक महीने के भीतर कार्रवाई नहीं करती है तो ग्राहक लोकपाल के समक्ष शिकायत दर्ज कर सकता है.
  • शिकायत के आधार – ब्याज के भुगतान में देरी या भुगतान न करना, जमा का भुगतान न करना, ऋण समझौते में पारदर्शिताका अभाव, RBI के निर्देशों का पालन नहीं करना, ग्राहकों को पर्याप्त सूचना दिए बिना शुल्क लगाना तथा बकाया चुकाने के बावजूद प्रतिभूतियों के दस्तावेजों को वापस करने में विलम्ब करना या वापस नहीं करना आदि.
  • इस योजना के तहत लोकपाल को सम्बंधित NBFC से जानकारी माँगने की एवं 1 लाख रू. तक का मुआवजा लगाने की शक्ति प्राप्त है.
  • शिकायतकर्ता/NBFC के पास लोकपाल के निर्णय के विरुद्ध अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील करने का विकल्प होता है.
  • लोकपाल द्वारा 30 जून को पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान अपने कार्यालय की गतिविधियों की सामान्य समीक्षा एवं RBI द्वारा मांगी गई सभी अन्य आवश्यक जानकारियों के साथ RBI गवर्नर को एक वार्षिक रिपोर्ट भेजनी आवश्यक होगी.

वित्तीय आसूचना इकाई (Financial Intelligence Unit) क्या है?

  • वित्तीय आसूचना इकाई (FIU) की स्थापना सरकार ने मनी लॉन्डरिंग (हवाला), आतंकवाद के वित्तपोषण एवं अन्य आर्थिक अपराधों के दुरूपयोग से वित्तीय प्रणाली को सुरक्षित करने व बेहतर वित्तीय आसूचना प्रदान करने के लिए वर्ष 2004 में की थी.
  • यह एक स्वतंत्र संस्था है, जिसकी  जवाबदेही सीधे वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली आर्थिक आसूचना परिषद् (Economic Intelligence Council – EIC) के प्रति है.
  • यह केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT), केन्द्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क (CBEC), भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI), सिक्योरिटीज एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI), कानूनी मामलों के विभाग व आसूचना एजेंसियों सहित विभिन्न सरकारी विभागों के सदस्यों वाला एक बहु-विषयक (multi-disciplinary) निकाय है.
  • कार्य :- संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से सम्बंधित सूचना प्राप्त करना, उसका विश्लेषण करना एवं उसका प्रसार करना.

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सभी योजनाओं की लिस्ट इस पेज से जोड़ी जा रही है – > Govt Schemes in Hindi

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