जैव विविधता प्रबंधन समिति (BMC) क्या है? – गठन एवं कार्य

Sansar LochanBiodiversityLeave a Comment

Biodiversity management committees (BMC)

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (National Biodiversity Authority – NBA) राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (National Green Tribunal) को यह निवेदन करने जा रहा है कि उसने जनवरी 2020 तक 243,499 जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ (biodiversity management committees – BMC) तथा 95,525 जन जैव विविधता पंजियाँ (people’s biodiversity registers – PBR) बना ली हैं.

पृष्ठभूमि

राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण एक ऐसे वाद में सुनवाई कर रहा है जो जैव विविधता अधिनियम, 2002 (Biological Diversity Act 2002) के पूर्ण कार्यान्वयन के विषय में है.

जैव विविधता प्रबंधन समिति क्या है?

जैव विविधता अधिनियम, 2002 के अनुसार, पूरे देश में स्थानीय निकायों को जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ गठित करनी हैं. इन समितियों का उद्देश्य जैव विविधता का संरक्षण एवं सतत उपयोग को बढ़ावा देना तथा उसका अभिलेखीकरण करना है.

समिति की बनावट

  • समिति में एक अध्यक्ष के साथ-साथ अधिकतम छह ऐसे व्यक्ति होंगे जिन्हें स्थानीय निकाय नामित करेगा. इन छह व्यक्तियों में कम से कम एक तिहाई स्त्रियाँ होनी चाहिएँ और कम से कम 18% अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के होने चाहिएँ.
  • इस समिति के अध्यक्ष को समिति के सदस्यों में से एक बैठक द्वारा चुना जाएगा. इस बैठक की अध्यक्षता स्थानीय निकाय का अध्यक्ष करेगा.
  • चुनाव में यदि दो व्यक्तियों को एक ही बराबर मत मिलते हैं तो स्थानीय निकाय का मत निर्णायक होगा.

BMC के कार्य

BMC का प्रमुख कार्य स्थानीय लोगों के परामर्श से जन जैव विविधता पंजी (People’s Biodiversity Register) तैयारी करना है. इस पंजी में स्थानीय जैव विविधता संसाधनों की उपलब्धता और जानकारी के साथ-साथ उनके औषधीय अथवा अन्य उपयोग के बारे में व्यापक सूचना अंकित होगी.

Tags : Biodiversity management committees (BMC) Composition in Hindi, functions and significance.

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