सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम – Border Area Development Program : BADP Scheme

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17 राज्यों में अंतर्राष्ट्रीय सीमा के साथ स्थित गाँवों के सर्वंगीण विकास के लिए केंद्र सरकार ने सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम / Border Area Development Program : BADP Scheme (2015-16 में 990 करोड़ रुपये से 2017-18 में 1,000 करोड़ रुपये) के तहत अपने परिव्यय में वृद्धि की है.

BADP के बारे में

भारत में सीमावर्ती क्षेत्रों में निम्नस्तरीय पहुँच, अपर्याप्त अवसंरचना, निराशाजनक आर्थिक विकास, अत्यधिक गरीबी और लोगों के मध्य असुरक्षा की भावना जैसी समस्याएँ विद्यमान हैं. इसलिए सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए सीमा प्रबंधन को एक महत्त्वपूर्ण तत्त्व के रूप में देखा जा रहा है. इसलिए 1987 में एक केंद्र प्रयोजित योजना के रूप में BADP scheme की शुरुआत की गई.

इसके तीन प्राथमिक उद्देश्य हैं –

  • अवसंरचना निर्माण
  • सीमावर्ती लोगों को आर्थिक अवसर प्रदान करना, और
  • उनके मध्य सुरक्षा की भावना का सृजन करना.

इस योजना के तहत अंतर्राष्ट्रीय सीमा के 50 किलोमीटर के भीतर रहने वाले नागरिकों पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा. इन नागरिकों की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए BADP परियोजना में 17 राज्यों के 111 सीमावर्ती जिलों को शामिल किया गया है.

शुरुआत में इस कार्यक्रम को सीमावर्ती सुरक्षा बल की तैनाती की सुविधा के लिए अवसंरचनात्मक विकास पर बल देते हुए पश्चमी सीमा राज्यों में लागू किया गया था.

बाद में, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और अन्य सम्बद्ध क्षेत्रों जैसे अन्य सामाजिक-आर्थिक पहलुओं को शामिल करने के लिए इसकी परिधि में विस्तार किया गया.

BADP योजना का कार्यान्वयन पंचायती राज संस्थानों, स्वायत्त परिषदों और स्थानीय निकायों के माध्यम से सहभागिता और विकेंद्रीकरण के आधार पर किया जाता है.

प्रमुख उद्देश्य

  • BADP का प्रमुख उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास स्थित दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों की विकास से सम्बंधित आवश्यकताओं और उनको पूरा करना और उनके कल्याण के लिए काम करना है.

  • इस योजना का उद्देश्य सीमा क्षेत्रों में भारत सरकार और राज्य सरकार के द्वारा चलाई गई सभी योजनाओं का लाभ पहुँचाना और उसके लिए आवश्यक निर्माण कार्य करना है.

सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम के कार्यान्वयन में बाधाएँ

  • इसके पहले चरण को सीमावर्ती क्षेत्रों से 0-10 किमी. की सीमा में लागू किया जाना है. जब इस क्षेत्र के लिए सभी विकास कार्य पूरे हो जाएँगे, तब राज्य सरकार 10 किमी. से आगे के क्षेत्र में कार्य करना शुरू कर सकती है. यह एक गंभीर समस्या है क्योंकि प्रथम चरण में शामिल क्षेत्रों तक पहुँचने के लिए अल्पविकसित क्षेत्रों से होकर गुजरना होगा (जिन्हें बाद के चरणों में शामिल किया जाएगा), जिससे परियोजना की लागत में वृद्धि हो जायेगी.
  • इसके साथ ही, BADP योजना में यह अनिवार्य किया गया है कि 10 किमी. से आगे के क्षेत्र को तब तक आवंटित नहीं किया जाना चाहिए तब तक कि 0-10 किमी. (सीमा से) तक का क्षेत्र “संतृप्त” न हो जाए; इसके अतिरिक्त यह निर्धारित करने के लिए कोई मापदंड नहीं है कि क्षेत्र संतृप्त है या नहीं.
  • दूरस्थ क्षेत्रों में, वर्षा ऋतु में अत्यधिक वर्षा और शीत ऋतु के दौरान बर्फबारी से योजना के कार्यान्वयन, विशेष रूप से निर्माण कार्य, में बड़ी कठनाई उत्पन्न होती है.
  • योजना के अंतर्गत धन को अवसंरचना पर व्यय किया जाता है जिससे अन्य संरचनाओं का भी निर्माण किया जाता है. जिससे BADP के विशिष्ट लक्ष्यों का प्रभाव कम होता जा रहा है.
  • वित्त के आवंटन के लिए कोई उचित व्यवस्था/प्रणाली नहीं है. वस्तुतः सीमा से दूरी के अनुसार वित्त आवंटन अनुपात का निर्धारण किया जाना चाहिए.
विदित हो कि हम लोग जल्द से जल्द 2018 की सभी योजनाओं को Yojana 2018 पेज पर संकलित कर रहे हैं. 2019 की Prelims परीक्षा में इन योजनाओं के बारे में आपसे पूछा जा सकता है.

Border Area Development Program के कार्यान्वयन के लिए अनुशंसाएँ

NITI आयोग द्वारा की गई अनुशंसाओं में से कुछ महत्वपूर्ण निम्नलिखित हैं –

  • कार्यक्रम का निरीक्षण और निगरानी : ऐसी विकास योजनाओं की वित्तीय स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए पूरे देश में एक समान प्रारूप होना चाहिए. वर्तमान में, इस उद्देश्य के लिए प्रत्येक राज्य का अपना प्रारूप है. साथ ही, BADP के तहत कार्यों के कार्यान्वयन के प्रस्ताव को तैयार करने और प्रस्ताव भेजने तक प्रत्येक चरण में प्रखंडों (blocks) को शामिल किया जाना चाहिए.
  • रोजगार और कौशल सृजित करने वाली योजनाएँ : कृषि क्षेत्र संतृप्त बन चुका है तथा शिक्षित और अशिक्षित बेरोजगारों युवाओं की संख्या में वृद्धि हुई है जो यह अनुभव करते हैं कि इस योजना के तहत मजदूरी कम है. छोटे पैमाने पर उद्योग संवर्धन जैसे गैर-कृषि रोजगार के अवसरों को सृजित करने के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अत्यधिक विविधता होनी चाहिए.
  • राजनीतिक भागीदारी को कम किया जाना चाहिए
  • BADP के बारे में जागरूकता : विभिन्न मुख्य विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरुरी है और साथ-साथ सभी चयनित जिलों और प्रखंडों में BADP के तहत कवर की गई विभिन्न सम्पत्तियों के सम्बन्ध में जागरूकता अभियानों की भी आवश्यकता है.
  • गाँवों को सड़क मार्ग से जोड़ा जाना : इन गाँवों के सड़क मार्ग से जुड़े न होने के चलते वित्त की अपर्याप्तता और केंद्र से धन के सीमित प्रवाह की समस्या और भी गंभीर हो जाती है.
  • अधिक फंड / समय पर निधि जारी करना : BADP के तहत कार्य के समय पर पूरा होने के लिए यह एक  प्रमुख बाधा बनी हुई है.
  • नियोजन में पंचायतों को शक्ति प्रदान करना : सीमावर्ती गाँवों की पंचायत समिति को कार्यक्रम की योजना और कार्यान्वयन में शामिल होना चाहिए.

योजना का प्रभाव

विभिन्न राज्यों में योजना का प्रभाव अलग-अलग है. उदाहरण के लिए –

  • मणिपुर के 32% लोग, मिजोरम के 54% लोग और हिमाचल प्रदेश में 100% लोग योजना के सामुदायिक विकास कार्यों के प्रबाव से संतुष्ट थे.
  • त्रिपुरा के 82% लोगों और नागालैंड के 14% स्थानीय लोगों ने कहा कि वे सुरक्षित महसूस नहीं करते हैं. गुजरात के 100% स्थानीय लोगों ने कहा कि वे सुरक्षित महसूस करते हैं.
  • लगभग सभी क्षेत्रों में (हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त) महिलाओं की भागीदारी अलग-अलग और असंतोषजनक रही है.

BADP में हालिया बदलाव

  • BADP के तहत विभिन्न परियोजनाओं के बेहतर नियोजन, निगरानी और कार्यान्वयन के लिए BADP ऑनलाइन प्रबन्धन प्रणाली प्रारम्भ की गई है.
  • सीमावर्ती राज्य अपनी सम्बन्धित वार्षिक कार्य योजनाएँ ऑनलाइन प्रस्तुत करते हैं और इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से गृह मंत्रालय से अनुमोदन प्राप्त कर सकते हैं. यह स्वीकृति प्रक्रिया में पारदर्शिता लाएगा और योजना एवं कार्यान्वयन की गुणवत्ता में सुधार लाएगा.
  • सीमावर्ती गाँवों के व्यापक और समस्त विकास के लिए 61 मॉडल गाँवों को विकसित करने का निर्णय लिया गया है.
  • प्रत्येक मॉडल गाँव सीमावर्ती क्षेत्रों में सतत रूप से रहने में सक्षम बनाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक शिक्षा, सामुदायिक केंद्र, कनेक्टिविटी, जल निकासी, पेयजल इत्यादि जैसी सभी बुनियादी सुविधाएँ प्रदान करेगा.

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