[Sansar Editorial] भारत और आसियान के 25 साल – ASEAN 2018 Highlights

Sansar LochanIndia and its neighbours, International Affairs, Sansar Editorial 20182 Comments

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भारत और आसियान के रिश्तों के 25 साल पूरे होने पर दिल्ली में भारत-आसियान शिखर सम्मेलन (ASEAN-INDIA Commemorative Summit) का आयोजन हो रहा है. इसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ म्यांमार, इंडोनेशिया, मलेशिया, वियतनाम, फिलिपीन्स, कम्बोडिया, लाओस, सिंगापुर, ब्रूनेई और थाईलैंड की सरकारों के मुखिया शिरकत कर रहे हैं. सम्मेलन का उद्देश्य भारत और आसियान के बीच के संबंधों को और मजबूत बनाना है. ASEAN 2018 का थीम (theme) है – साझा मूल्य और साझा भविष्य (Shared Values, Common Destiny).

भारत-आसियान के 25 साल

  1. 1992 में भारत ASEAN का सेक्टोरल साझेदार बना.
  2. 1996 में ASEAN ने भारत को वार्ता साझेदार बना दिया.
  3. 1996 से भारत हर साल ASEAN की बैठक में हिस्सा ले रहा है.
  4. 2002 में भारत को सम्मेलन साझेदार का दर्जा मिला.
  5. 2003 में ASEAN-भारत मुक्त व्यापार क्षेत्र पर एक महत्त्वपूर्ण करार हुआ. 2009 में इस पर अंतिम सहमति बनी और तब से व्यापारिक गतिविधियाँ और तेज हुई हैं.
  6. 2012 में भारत रणनीतिक साझेदार बन गया.
  7. 2015 में भारत ने ASEAN देशों के साथ सम्बन्ध को और मजबूती देने के लिए विशेष राजदूत की नियुक्ति की.
  8. 2015-16 में भारत और आसियान देशों के बीच 65 अरब डॉलर का व्यापार हुआ.
  9. 2016-17 में व्यापार बढ़ कर 70 अरब डॉलर पहुँच गया है.
  10. 2017 में भारत और दोस्ती के 25 साल पूरे होने पर रजत जयंती मनाई जा रही है.

ASEAN के बारे में महत्त्वपूर्ण जानकारियाँ

  1. ASEAN का full-form है – Association of Southeast Asian Nations.
  2. ASEAN का headquarters जकार्ता, Indonesia में है.
  3. आसियान में 10 member देश (ब्रुनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाइलैंड और वियतनाम) हैं और 2 observer देश हैं (Papua New Guinea और East Timor).
  4. ASEAN देशों की साझी आबादी 64 करोड़ से अधिक है जो कि यूरोपियन यूनियन से भी ज्यादा है.
  5. अगर ASEAN को एक देश मान लें तो यह दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है.
  6. इसकी GDP 28 हजार करोड़ डॉलर से अधिक है.
  7. आसियान के chairman Lee Hsien Loong हैं जो ब्रूनेई से हैं.
  8. आसियान में महासचिव का पद सबसे बड़ा है. पारित प्रस्तावों को लागू करने का काम महासचिव ही करता है. इसका कार्यकाल 5 साल का होता है.
  9. क्षेत्रीय सम्बन्ध को मजबूत बनाने के लिए 1997 में ASEAN +3 का गठन किया गया था जिसमें जापान, दक्षिण कोरिया और चीन को शामिल किया गया.
  10. बाद में भारत, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैण्ड को भी इसमें शामिल किया गया. फिर इसका नाम बदलकर ASEAN +6 कर दिया गया.
  11. 2006 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने आसियान को पर्यवेक्षक का दर्जा दिया.
  12. आसियान की बढ़ती महत्ता को देखते हुए अब कई देश इसके साथ करार करना चाहते हैं.

आसियान 2018 क्यों महत्त्वपूर्ण है?

  1. भारत की एक्ट एशिया नीति के लिए आसियान देश महत्त्वपूर्ण हैं. भारत के साथ उनके सांस्कृतिक और आर्थिक सम्बन्ध काफी पुराने हैं.
  2. भारत की दृष्टि से आसियान 2018 के प्रमुख पहलू हैं  क्षेत्रीय सुरक्षा और नौवहन सहयोग.
  3. इस शिखर सम्मेलन का मकसद ASEAN देशों के साथ सांस्कृतिक और धार्मिक रिश्तों को मजबूत करना है.
  4. बौद्ध धर्म और रामायण भारत और ASEAN को आपस में जोड़ते हैं.
  5. आसियान के देशों में बौद्ध धर्म और रामायण अलग-अलग रूपों में मौजूद हैं.
  6. दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते दखल के बीच आसियान देश भारत के साथ रिश्तों को मजबूत कर रणनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
  7. आसियान क्षेत्र आर्थिक रूप से भी मजबूत है. तेजी से विकसित हो रहा भारत आसियान में मजबूत आर्थिक और वाणिज्यिक संभावनाओं का लाभ उठाना चाहता है.
  8. आसियान क्षेत्र भारत का चौथा सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार है और भारत उनका सातवाँ बड़ा व्यापारी हिस्सेदार है.
  9. पिछले दशक में आसियान देशों में भारत का निवेश 70 अरब डॉलर रहा है.
  10. यातायात सुगम बनाने के लिए भारत-म्यांमार-थाईलैंड के बीच राजमार्ग का निर्माण जारी है. आने वाले दिनों में इस सड़क को बढ़ाकर कम्बोडिया, लाओस और विएतनाम तक पहुंचाने की योजना है.
  11. ASEAN और भारत के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए कई साझे कोष बनाए गए हैं, जैसे – आसियान-भारत सहयोग कोष, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विकास कोष, हरित कोष.
  12. दोनों के बीच कृषि, अन्तरिक्ष, पर्यावरण, मानव संसाधन विकास, विज्ञान और प्रौद्योगिकी समेत ऊर्जा, पर्यटन, यातायात के क्षेत्र में कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है.
  13. शिखर बैठक का आयोजन ऐसे वक्त में हो रहा है जब क्षेत्र में चीन की आर्थिक और सैन्य हठधर्मिता बढ़ी है. इसके अलावा उत्तर कोरिया परमाणु विवाद, दक्षिण चीन सागर विवाद और हिन्द महासागर में समुद्री जहाज़ों की सुरक्षा सम्बंधित सभी मुद्दे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थायित्व के लिए खतरा बन रहे हैं.
  14. भारत का जोर इन देशों के साथ जल्द से जल्द मुक्त व्यापार समझौता करने पर है.

भारत-आसियान रिश्तों की डोर

भारत इन देशों के सामने खुद को मजबूत और भरोसेमंद साथी के तौर पर पेश कर रहा है. भारत इन देशों के साथ न सिर्फ सैन्य सहयोग चाहता है बल्कि इस पूरे क्षेत्र को बड़े बाजार में तब्दील करने पर काम कर रहा है. इस वर्ष गणतंत्र दिवस की परेड में 10 ASEAN देशों की भारत में एक साथ मौजूदगी इस दशा में एक बड़ा कदम है. भारत समुद्री क्षेत्र में सहयोग और सुरक्षा के मुद्दे पर इन देशों की चिंता साझा करता है. भारत और आसियान देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है. भारत को उम्मीद है कि अगले कुछ वर्षों में इसे करीब दोगुना किया जा सकता है.

दक्षिण चीन सागर इलाका

व्यापारिक और सामरिक नजरिये से हिन्द प्रशांत इलाके के इस क्षेत्र की अहमियत ऐसे भी समझी जा सकती है कि यहाँ चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपीन्स, सिंगापुर, ताइवान, थाईलैंड, कम्बोडिया, ब्रूनेई और विएतनाम जैसे देश स्थित हैं. इनमें से ज्यादातर के साथ भारत के पुराने सांस्कृतिक, व्यापारिक और सामरिक रिश्ते हैं. दक्षिण कोरिया की ऊर्जा जरूरतों की दो तिहाई, जापान की ऊर्जा जरूरतों का 60%, ऑस्ट्रेलिया के निर्यात का 80%, चीन के तेल आयात का बड़ा हिस्सा इस समुद्री इलाके से आता है. इसके अलावा कई प्रमुख तेल और गैस भण्डार इसी क्षेत्र में हैं.

भारत के कुल निर्यात में आसियान देशों की हिस्सेदारी 11.24% है. भारत से समुद्र के रास्ते भेजे जाने वाले सामान का 25% इसी इलाके से होकर गुजरता है. भारत इसी रास्ते अपने कुल sea-food के निर्यात का 1.4% जापान को निर्यात करता है. अगर यह रास्ता बंद हो जाए तो भारत के निर्यात ही नहीं, आयात पर भी बुरा असर पड़ेगा. भारत से सामान भेजने या मंगवाने की लागत कई गुना बढ़ जाएगी. इसके आलावा भारत इस इलाके में तेल और गैस के क्षेत्र में भारी निवेश कर चुका है. जापान और द. कोरिया के साथ भारत के रक्षा, रक्षा उपकरण निर्माण एवं तकनीक और जहाजरानी क्षेत्र में समझौते हैं. दक्षिण पूर्व एशिया के साथ सड़क यातायात को दुरुस्त करना भारत की प्राथमिकता रही है. इस दिशा में भारत-म्यांमार और थाईलैंड के बीच राजमार्ग बन रहा है.

इधर चीन की विस्तारवादी गतिविधियाँ दक्षिण-चीन सागर तक ही सीमित नहीं हैं. समुद्री डाकुओं के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर चीन जिबूती, पाकिस्तान और सीशेल्स में नौसैनिक अड्डे बना रहा है. चीन One Road One Belt योजना के जरिये नए व्यापारिक गठजोड़ कर रहा है. इसके अलावा वह बांग्लादेश में बंदरगाह सुविधाएँ हासिल करने की कोशिश में लगा है. इस क्षेत्र में चीन ने नौसेनिक जहाज़ों के अलावा मिसाइल और दूसरे हथियार भी तैनात किये हैं.

जाहिर है ऐसे हालात में ASEAN देशों के साथ मजबूत रिश्ते भारत के लिए न सिर्फ नए रास्ते खोलने वाले हैं बल्कि चीन की चुनौती से निपटने में भी मददगार साबित होंगे.

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