[Sansar Surgery Part 12, 2018] Left Topics of Sansar DCA

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कई बार ऐसा होता है कि हमारी लाख मेहनत के बावजूद करंट अफेयर्स का कोई न कोई टॉपिक छूट ही जाता है. यह सिर्फ हमारे साथ ही नहीं, बड़ी-बड़ी कोचिंग संस्थाओं के साथ भी होता है. हम तो खैर छोटे लोग हैं और वैसे भी मानव की प्रकृति है कि कुछ भी परफेक्ट नहीं हो सकता.

खैर, जब हमने फिर से The Hindu और अन्य अखबारों पर अपनी पैनी नज़र दौड़ाई तो देखा कि कुछ important current affairs को हमने Sansar DCA में cover नहीं किया है या कभी-कभी हम उन टॉपिक को इसमें उठाते हैं जो Revision के लिए उपयुक्त हैं.

फिर हमने सोचा जो लोग UPSC Prelims 2019 को टारगेट कर रहे हैं और संसार लोचन टीम पर आँख मूँद कर भरोसा कर रहे हैं, हमारी यह भूल उनके लिए नाइंसाफी होगी. इसलिए हमने Sansar DCA से हटकर “Sansar Surgery Series” शुरू की है जिसमें वर्ष 2018 और आगामी वर्ष 2019 के वही टॉपिक शामिल होंगे जो हमारे द्वारा भूल से Sansar DCA में कवर नहीं किये गए हों. यह Sansar Surgery Series का पार्ट 12 है.

Sansar Surgery Part 12, 2018

किसी राज्य में उच्च सदन के निर्माण से सम्बंधित तथ्य

हाल ही में, ओडिशा ने विधान परिषद (उच्च सदन) के निर्माण के लिए एक प्रस्ताव पारित किया है. विधान परिषद के सृजन या उत्सादन के लिए संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता नहीं है (अनुच्छेद 169). हमारे संविधान निर्माताओं का मानना था कि प्रत्येक राज्य को उच्च सदन की आवश्यकता नहीं होती है क्योंकि इसकी वजह से कानूनी प्रक्रिया में देरी होती है और राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय भार भी पड़ता है. इसलिए, विधान परिषद बनाने के लिए, राज्यों को सदन के बहुमत के साथ-साथ सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले 2/3 सदस्यों द्वारा एक प्रस्ताव पारित करना होगा. विधान परिषद में होने वाली सीटों की संख्या 40 से अधिक होगी लेकिन विधानसभा की संख्या के 1/3 से कम होगी. इसका एकमात्र अपवाद जम्मू-कश्मीर है जिसकी विधान परिषद में 36 सीटें हैं.

ब्रेंट क्रूड

हाल ही में हुई तेल की कीमतों में वृद्धि ‘ब्रेंट क्रूड’ की आपूर्ति में आई कमी के लिए भी जिम्मेदार है. ब्रेंट क्रूड में कम सल्फर सामग्री होने के कारण इसे ‘स्वीट क्रूड’ कहा जाता है और यह उत्तरी सागर में पाया जाता है. ओमान और दुबई क्रूड में अधिक सल्फर सामग्री होने के कारण इसे ‘सोर क्रूड’ कहा जाता है.

प्रारंभिक परीक्षा के लिए यह प्रश्न इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

यूपीएससी के हाल के रुझानों और समसामयिकी के मुद्दों की उपयोगिता को देखते हुए, हम प्रारंभिक परीक्षा के पाठ्यक्रम को कवर कर छात्रों का ध्यान इस ओर आकृष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं.

फीड इन टैरिफ (FIT) मॉडल

इस मॉडल का उपयोग आमतौर पर सौर, पवन इत्यादि जैसे ऊर्जा के नवीकरणीय स्रोतों के लिए किया जाता है, क्योंकि ‘सौर छत’ के मामले में हम ग्रिड को अतिरिक्त ऊर्जा प्रदान कर सकते हैं. यह मॉडल सरकार को नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता करता है.

भारतीय सौर ऊर्जा निगम

भारतीय सौर ऊर्जा निगम केवल सौर ऊर्जा के विकास की देखरेख नहीं करता है, अपितु यह भू-तापीय, अपतटीय पवन, चक्रवाती पवन आदि में भी विकास कार्यों की भी देखरेख करता है. इसे ध्यान में रखते हुए, इसका नाम बदलकर भारतीय नवीकरणीय ऊर्जा निगम रखा गया है. यह एक गैर लाभकारी संगठन है जो कि नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है.

प्रारंभिक परीक्षा के लिए यह प्रश्न इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

वर्ष 2017, 2018 में यूपीएससी की परीक्षाओं में ऊर्जा दक्षता सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) और आरईसी जैसी एजेंसियों से सम्बंधित प्रश्न पूछे गए थे. अतः बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के कार्यान्वयन वाली एजेंसियों की महत्ता को देखते हुए हमने ऐसी ही कुछ महत्वपूर्ण एजेंसियों की ओर छात्रों का ध्यान आकृष्ट करने का प्रयास किया है.

बॉन्डी बॉन्ड (Bondi Bond)

विश्व बैंक द्वारा जारी बॉन्ड बॉन्ड अपनी तरह का दुनिया का पहला सार्वजनिक बॉन्ड है जो, केवल ब्लॉकचेन का उपयोग करके बनाया गया है और इसका पूरा संचालन भी ब्लॉकचेन तकनीक पर ही आधारित होगा.इसका नाम सिडनी में स्थित विश्व प्रसिद्ध बॉन्डी बीच के नाम पर रखा गया है. विश्व बैंक द्वारा उठाया गया यह कदम महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ब्लॉकचेन प्रणाली की संभावनाओं के उपयोग और समझ की ओर एक बदलाव को दर्शाता है.

जिब्राल्टर की खाड़ी

यह खाड़ी भूमध्य सागर को अटलांटिक महासागर से जोड़ती है. इसके उत्तर में स्पेन और दक्षिण में मोरक्को स्थित है. जिब्राल्टर की चट्टान से इसका नाम जिब्राल्टर की खाड़ी पड़ा है.

प्रारंभिक परीक्षा के लिए यह प्रश्न इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

हमारा प्रयास समाचारों में रहने वाले महत्वपूर्ण स्थानों को कवर करना है. अफ्रीकी देशों से भागकर गैर-कानूनी ढंग से यूरोप आने वाले प्रवासियों के कारण जिब्राल्टर की खाड़ी को अक्सर समाचारों में देखा जाता है. अतः समसामयिकी के सन्दर्भ में इसकी उपयोगिता को देखते हुए हमने छात्रों का ध्यान इस ओर आकृष्ट करने का प्रयास किया है.

वास्तविक प्रभावी विनिमय दर (Real effective exchange rate – REER)

रुपए के मूल्य ह्रास के बाद भी, कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि रूपये का मूल्य अभी भी उसके व्यापारिक भागीदारों के संबंध में उनसे अधिक है. वे अपने बिंदु को साबित करने के लिए वास्तविक प्रभावी विनिमय दर (आरईईआर) का सन्दर्भ देते हैं. बाजार विनिमय दर प्रणाली (उदाहरण के लिए हम कहते हैं 1$ = 70 रुपये) के साथ समस्या यह है कि हम मानते हैं कि पूरा व्यापार डॉलर में होता है और इसलिए अपनी मुद्रा का मूल्यांकन हम केवल डॉलर के साथ करते हैं. लेकिन, वास्तविकता में हम अन्य मुद्राओं जैसे : येन, पाउंड, रॅन्मिन्बी इत्यादि में भी व्यापार करते हैं. अतः व्यापारिक मात्रा के अनुसार मुद्राओं को अलग-अलग महत्व देना चाहिए और फिर एक्सचेंज रेट की गणना करनी चाहिए. इसलिए, एनईईआर सामान्य औसत दर नहीं है अपितु एक अनुरुपित भारित औसत दर है और जब एनईईआर मुद्रास्फीति में समायोजित होता है तो आरईईआर कहलाता है और इससे मुद्रा का संचार बेहतर तरीके से होता है.

नाथू ला दर्रा

हाल ही में, डोकलाम विवाद के कारण “नाथूला दर्रा” समाचारों में रहा है. नाथू ला दर्रा सिक्किम और चीन के स्वायत्त क्षेत्र तिब्बत के बीच में स्थित है. यह क्षेत्र, भारत के चिकन नेक (सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण लेकिन कमज़ोर क्षेत्र) की निकटता के कारण रणनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है. यह भारतीय सेना और चीनी सेना के मध्य आपसी समझौते द्वारा स्थापित उन चार स्थलों में से एक है जहां दोनों सेनाओं के लोग आपसी गतिरोध दूर करने के लिए मिल सकते हैं. सीमा कार्मिक बैठक (बीपीएम) के लिए स्थापित अन्य तीन स्थल : चुशुल (लद्दाख), बुम ला दर्रा (तवांग जिला, अरुणाचल प्रदेश) और लिपुलेख दर्रा (उत्तराखण्ड) हैं.

प्रारंभिक परीक्षा के लिए यह प्रश्न इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

भारत के महत्वपूर्ण दर्रे प्रारम्भिक परीक्षा के भूगोल के पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं. इसलिए, समाचारों में रहने वाले महत्वपूर्ण दर्रों के बारे में छात्रों को जानकारी होना आवश्यक है.

“खरमोर” (लेसर फ्लोरिकन) पक्षी

भारतीय खरमोर पक्षी (Lesser florican) विश्व की सबसे छोटी सोनचिरैया है. वर्तमान में उन्हें ‘लुप्तप्राय’ पक्षियों के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, लेकिन उनकी जनसंख्या गिरावट दर को देखने पर लगता है कि कुछ ही समय में ये विलुप्त हो जाएंगी. ये घास के मैदानों में रहती हैं और आमतौर पर कीड़े, कीट आदि का भोजन करती हैं. खरमोर(लेसर फ्लोरिकन) पक्षियों की गिरावट का कारण, घास के मैदानों को अन्य उद्देश्यों की पूर्ति के लिए परिवर्तित करना और कीटनाशकों का अत्याधिक उपयोग करना है. इन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची 1 में सूचीबद्ध किया गया है. मध्य प्रदेश के सैलाना और सरदारपुर अभयारण्य विशेष रूप से खरमोर (लेसर फ्लोरिकन) पक्षियों को संरक्षित करने के लिए स्थापित किए गए थे, लेकिन वे अपने उद्देश्यों की पूर्ति में पूर्ण रूप से विफल रहे हैं.

भारतीय मानक ब्यूरो (Bureau of Indian Standards (BIS)

बहुमूल्य धातुओं का Bureau of Indian Standards (BIS) मानकों के अनुसार होना अनिवार्य है और Bureau of Indian Standards (BIS), उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत एक राष्ट्रीय मानक निकाय है. Bureau of Indian Standards (BIS), अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (आईएसओ) का संस्थापक सदस्य है और यह आईएसओ और विश्व मानक सेवा नेटवर्क में भारत का प्रतिनिधित्व करता है.

संवहनी वर्षा (Convectional Precipitation)

कुछ लोगों का मानना है कि केरल में बाढ़ के कारण होने वाली अत्यधिक क्षति वर्षा के खराब पूर्वानुमान के कारण हुई. वर्षा का पूर्वानुमान संवहनी बादलों के मूवमेंट को ट्रैक करने से संबंधित है. लेडन विंड (laden winds) में स्थलीय अवरोधों के कारण नमी में वृद्धि होने से, यह ठंडी हो जाती है और इससे होने वाली वर्षा को ऑरोग्राफिक वर्षा कहा जाता है. लेकिन, संवहनी वर्षा (Convectional Precipitation) विभिन्न सतह क्षेत्रों में असमान ताप के कारण होती है और यह सीमित स्थानों पर ही होती है. इसकी बूंदों का आकर आमतौर पर ‘ऑरोग्राफिक वर्षा’ की तुलना में बड़ा होता है.

प्रारंभिक परीक्षा के लिए यह प्रश्न इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

हाल ही में, केरल में में आई बाढ़ के कारण, वर्षा का स्वरूप महत्वपूर्ण हो गया है. इसलिए, इसका अध्ययन विवरण के साथ किया जाना चाहिए. अतः इसकी उपयोगिता को देखते हुए हमने छात्रों का ध्यान इस ओर आकृष्ट करने का प्रयास किया है.

चारागाह (Grassland) पारिस्थितिकी तंत्र

मध्यप्रदेश सरकार नौरदेही अभयारण्य में ‘चीता’ को फिर से बसाने की योजना बना रही है. भारत से 1952 में चीता विलुप्त हो गए थे. वे भूमि पर सबसे तेज दौड़ने वाले जानवर हैं. चीता को जीवित रहने के लिए समतल, शुष्क घास के मैदानों की आवश्यकता होती है क्योंकि उन्हें शिकार पकड़ने के लिए गति की आवश्यकता होती है, जो कि समतल, शुष्क घास के मैदानों पर ही सम्भव है. अतः वे चारागाह (Grassland) पारिस्थितिकी तंत्र के पुनरुत्थान का कारण बनेंगे.

बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (Bombay Natural History Society – BNHS)

जल्द ही, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी (बीएनएचएस) पुरी के चिल्का में एक क्षेत्रीय कार्यालय खोलने वाली है. बीएनएचएस को 1883 में स्थापित किया गया था. यह भारत के सबसे पुराने गैर-सरकारी संगठनों में से एक है. BNHS को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा “वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान संगठन” के रूप में नामित किया गया है. इसका आधिकारिक लोगो “ग्रेट हॉर्नबिल” है.

प्रारंभिक परीक्षा के लिए यह प्रश्न इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

हम सामचारों में रहने वाले महत्वपूर्ण संगठनों को कवर कर रहे हैं. चूंकि, यह भारत के सबसे पुराने और सबसे बड़े गैर-सरकारी संगठनों में से एक है. अतः इसकी महत्ता को देखते हुए हमने इसपर छात्रों का ध्यान आकृष्ट करने का प्रयास किया है.

भारत का मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement – FTA)

आसियान, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ भारत का मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) है. भारत, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ अलग से बातचीत कर रहा है. भारत का मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) चीन के साथ भी नहीं है.

प्रारंभिक परीक्षा के लिए यह प्रश्न इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

इस टॉपिक को आरसीईपी (क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी) को ध्यान में रखते हुए यहाँ दिया गया है. आरसीईपी एक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) है, इसमें एशिया प्रशांत के 16 देश शामिल हैं. इसकी औपचारिक शुरुआत नवंबर 2012 में कंबोडिया में आसियान शिखर सम्मलेन में की गई थी. अतः इसकी महत्ता को देखते हुए हमने छात्रों का ध्यान इस ओर आकृष्ट करने का प्रयास किया है.

एड्रियाटिक सागर

एड्रियाटिक सागर, भूमध्य सागर का एक भाग है और इसके पूर्वोत्तर से लेकर दक्षिणपूर्वी हिस्से में स्थित है. एड्रियाटिक सागर, इटली को बाल्कन राज्यों से अलग करता है.

प्रारंभिक परीक्षा के लिए यह प्रश्न इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

तुर्की के वर्तमान संकट और अवैध प्रवासन के कारण भूमध्य सागर के आसपास का क्षेत्र समाचारों में है. इसलिए, इस क्षेत्र की उपयोगिता को देखते हुए छात्रों का ध्यान इस ओर आकृष्ट करने का प्रयास किया गया है.

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