Sansar डेली करंट अफेयर्स, 30 June 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 30 June 2021


GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Parliament and State Legislatures – structure, functioning, conduct of business, powers & privileges and issues arising out of these.

Topic : Parliamentary Privileges

संदर्भ

विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष, कांग्रेस नेता जयराम रमेश द्वारा समिति की बैठक की कार्यवाही के बारे में “मिथ्या और हानिकारक” रिपोर्टिंग करने हेतु ‘टाइम्स नाउ’ समाचार चैनल के खिलाफ ‘विशेषाधिकार प्रस्ताव’ (Privilege Motion) पेश किया गया है. 

विशेषाधिकार

एक सांसद या विधायक होना सिर्फ जनप्रतिनिधि होना नहीं है अपितु ये लोग संविधान के पालक और नीतियाँ/कानून बनाने वाले लोग भी हैं. कार्यपालिका के साथ मिलकर यही लोग देश का वर्तमान और भविष्य तय करते हैं. इन पदों की महत्ता और निष्ठा को देखते हुए संविधान ने इन्हें कुछ विशेषाधिकार दिए हैं. संविधान के अनुच्छेद 105 और अनुच्छेद 194 के खंड 1 और खंड 2 के तहत विशेषाधिकार का प्रावधान किया गया है. भारतीय संविधान में विशेषाधिकार के विषय इंग्लैंड के संविधान से लिए गये हैं.

संविधान के अनुच्छेद 105 (3) और 194 (3) के तहत देश के विधानमंडलों को वही विशेषाधिकार मिले हैं जो संसद को मिले हैं. संविधान में यह स्पष्ट किया गया है कि ये स्वतंत्र उपबंध हैं. यदि कोई सदन विवाद के किसी भाग को कार्यवाही से हटा देता है तो कोई भी उस भाग को प्रकाशित नहीं कर पायेगा और यदि ऐसा हुआ तो संसद या विधानमंडल की अवमानना मानना जाएगा. ऐसा करना दंडनीय है. इस परिस्थिति में अनुच्छेद 19 (क) के तहत बोलने की आजादी (freedom of speech and expression) के मूल अधिकार की दलील नहीं चलेगी.

हालाँकि बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि भले ही विशेषाधिकार के मामले अनुच्छेद 19 (क) के बंधन से मुक्त हों लेकिन यह अनुच्छेद 20-22 और अनुच्छेद 32 के अधीन माने जायेंगे.

प्रकार

विशेषाधिकार के मामलों को दो भागों में बाँटा जा सकता है –

  1. हर सदस्य को मिला व्यक्तिगत विशेषाधिकार
  2. संसद के प्रत्येक सदन को सामूहिक रूप से मिला विशेषाधिकार

व्यक्तिगत विशेषाधिकार

  1. सदस्यों को सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 135 (क) के तहत गिरफ्तारी से छूट मिलती है. इसके तहत सदस्य को समितियों की बैठक के 40 दिन पहले या 40 दिन बाद तक गिरफ्तारी से छूट मिलती है. यह छूट सिर्फ सिविल मामलों में मिलती है. आपराधिक मामलों के तहत यह छूट नहीं मिलेगी.
  2. जब संसद सत्र चल रहा हो तो सदस्य को गवाही के लिए बुलाया नहीं जा सकता.
  3. संसद के सदस्य द्वारा संसद में या उसकी समिति में कही गई किसी बात के लिए न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती.

लेकिन यहाँ यह जानना जरुरी है कि सदस्यों को मिले ये विशेषाधिकार तब तक लागू रहेंगे जबतक वह संसद या सदन के हित में हो. यानी सदस्य सदन की प्रतिष्ठा की परवाह किये बिना अपनी इच्छानुसार कुछ भी कहने का हकदार नहीं है.

सामूहिक रूप से मिला विशेषाधिकार

  1. चर्चाओं और कार्यवाहियों को प्रकाशित करने से रोकने का अधिकार.
  2. अन्य व्यक्तियों को अपवर्जित या प्रतिबंधित करने का अधिकार.
  3. सदन के आंतरिक मामलों को निपटाने का अधिकार.
  4. संसदीय कदाचार को प्रकाशित करने का अधिकार.
  5. सदस्यों और बाहरी लोगों को सदन के विशेषाधिकारों को भंग करने के लिए दंडित करने का अधिकार.

अन्य अधिकार

इसके अलावा भी सदनों के भीतर कुछ विशेषाधिकारों की बात करें तो सदनों के अध्यक्ष और सभापति को किसी अजनबी को सदन से बाहर जाने का आदेश देने का अधिकार है. सदन के कार्यवाहियों को सुचारू रूप से चलाने और विवाद की स्थिति में बिना न्यायालय के दखल के आंतरिक तौर पर निपटाने का अधिकार भी है. यानी संसद की चारदीवारी के भीतर जो कहा या किया जाता है, उसके बारे में कोई भी न्यायालय जाँच नहीं कर सकता.

एक और महत्त्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय न्यायालयों ने भी समय-समय पर स्पष्ट किया है कि संसद या राज्य विधान मंडलों के किसी सदन को यह निर्णय लेने का अधिकार है कि किसी मामले में सदन या सदस्य के Parliamentary Privilege का उल्लंघन हुआ है या नहीं.


GS Paper 2 Source : Indian Express

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UPSC Syllabus : Government policies and interventions for development in various sectors and issues arising out of their design and implementation.

Topic : One Nation One Ration Card

संदर्भ

हाल ही में, सर्वोच्च न्यायालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ (One Nation One Ration Card) प्रणाली लागू करने का निर्देश दिया है.

एक राष्ट्र –  एक राशन कार्ड योजना क्या है?

यह एक राष्ट्रीय योजना है जो यह सुनिश्चित करती है कि कि जन-वितरण प्रणाली से लाभ लेने वाले सभी व्यक्ति, विशेषकर एक स्थान से दूसरे स्थान जाने वाले, देश के अन्दर किसी भी अपनी पसंद की PDS दुकान से अनाज आदि प्राप्त कर सकें.

अब तक यह सुविधा आंध्र प्रदेश, बिहार, दादरा और नगर हवेली और दमन और दीव, गोवा, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, केरल, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब, तेलंगाना, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे 17 राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों में उपलब्ध कराई गई है.

लाभ

इस योजना का लाभ यह होगा कि खाद्य सुरक्षा योजना के अंतर्गत सब्सिडी युक्त अनाज पाने से कोई निर्धन व्यक्ति इसलिए वंचित न हो जाए कि वह एक स्थान से दूसरे स्थान चला गया है. इस योजना से एक अतिरिक्त लाभ यह होगा कि कोई व्यक्ति अलग-अलग राज्यों में जन-वितरण प्रणाली का लाभ लेने के लिए एक से अधिक राशन कार्ड नहीं बनवा पायेगा.

माहात्म्य

इस योजना से के फ़लस्वरूप लाभार्थी किसी एक PDS दुकान से बंधा नहीं रह जाएगा और ऐसी दुकान चलाने वालों पर उसकी निर्भरता घट जायेगी और साथ ही भ्रष्टाचार के मामलों में भी कटौती होगी.

चुनौतियाँ

  • प्रत्येक राज्य के पास जन-वितरण प्रणाली के विषय में अपने नियम होते हैं. यदि एक राष्ट्र – एक राशन कार्ड योजना लागू की गई तो संभावना है कि इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिले. वैसे भी सभी जानते हैं कि इस प्रणाली में भ्रष्टाचार होता रहता है.
  • इस योजना से जन-सामान्य का कष्ट बढ़ जाएगा और बिचौलिए तथा भ्रष्ट PDS दुकान के मालिक उसका शोषण करेंगे.
  • इन्हीं कारणों से तमिलनाडु ने इस योजना का विरोध किया है और कहा है कि इसको लागू करने से अवांछित परिणाम होंगे. साथ ही उसका कहना है कि यह योजना संघवाद पर कुठाराघात करती है.

GS Paper 2 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : OPEC and rising oil prices

संदर्भ

भारत द्वारा तेल निर्यातक देशों को तेल की बढ़ती कीमतों को कम करने के लिए राजी करने पर कार्य किया जा रहा है, साथ ही भारत ने चेतावनी देते हुए कहा है, कि तेल ऊँची कीमतों की वजह से उसके लिए ईरान जैसे वैकल्पिक आयात स्रोतों की ओर रूख करना पड़ सकता है.

पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन और उसके सहयोगियों (OPEC+) द्वारा 1 जुलाई को वैश्विक मांग में उछाल को देखते हुए आपूर्ति-कटौती में संभावित ढील देने पर चर्चा किए जाने की संभवना है.

भारत के समक्ष वर्तमान चुनौतियाँ

  1. कई राज्यों में पेट्रोल की खुदरा कीमतें ₹100 प्रति लीटर को पार चुकी हैं और इसकी वर्तमान कीमत बहुत ही चुनौतीपूर्ण है.
  2. खपत में सुधार होने और मांग के हिसाब से आपूर्ति कम होने की वजह से, हाल के दिनों में, अंतर्राष्ट्रीय तेल की कीमतें 75 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई हैं. यह अप्रैल 2019 के बाद सबसे ज्यादा कीमत है.
  3. तेल की ऊंची कीमतों से मुद्रास्फीति-दबाव में बढ़ोतरी हो रही है.
  4. भारत के द्वारा, तेल की कम कीमतों का फायदा उठाकर पिछले साल तैयार किए गए सामरिक खनिज तेल भंडार समाप्त हो रहे हैं.
  5. पेट्रोल और डीजल की कीमतों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचने का प्रमुख कारण, पेट्रोल और डीजल पर केंद्र और राज्य द्वारा की गयी कर-वृद्धि भी है.
  6. पिछले सात वर्षों में भारत की तेल मांग में भी 25% की वृद्धि हुई है, जोकि किसी भी अन्य प्रमुख खरीदार देश से ज्यादा है.

OPEC

  • OPEC का फुल फॉर्म है –Organization of the Petroleum Exporting Countries. इस प्रकार यह तेल उत्पादक देशों का एक समूह है जिसकी स्थापना 1960 में ईराक के बग़दाद में हुई थी और यह 1961 से प्रभावी हो गया.
  • ओपेक का मुख्यालय इसके गठन के पहले पाँच वर्षों तक जिनेवा, स्विट्जरलैंड में था पर कालांतर में 1 सितंबर, 1965 में इसके मुख्यालय को ऑस्ट्रिया के विएना में स्थानांतरित कर दिया गया.
  • ओपेक का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच पेट्रोलियम नीतियों का समन्वय और एकीकरण करना है जिससे पेट्रोलियम उत्पादकों के लिए उचित और स्थिर कीमत सुनिश्चित की जा सके.
  • ओपेक देश दुनिया की तेल निर्यात का 40% से ज्यादा का हिस्सा नियंत्रित करता है. यह 82% तेल भंडार के मालिक भी है.

OPEC की सदस्यता

  • OPEC के सदस्य तीन प्रकार के होते हैं – संस्थापक सदस्य, पूर्ण सदस्य और सहयोगी सदस्य.
  • पूर्ण सदस्य वे देश होते हैं जहाँ से अच्छा-ख़ासा कच्चा तेल निर्यात होता है.
  • इस समूह में नए सदस्य तभी शामिल हो सकते हैं जब उनके इस विषय में दिए गये आवेदन पर OPEC के सदस्य 3/4 बहुमत से अपना अनुमोदन दे देते हैं.
  • OPEC के कानून में यह प्रावधान है कि उस देश को भी ओपेक में सहयोगी सदस्य बनाया जा सकता है जो पूर्ण सदस्यता की अर्हता नहीं रखता है, पंरतु किसी विशेष परिस्थिति में उसे सदस्य बना लिया जाता है.
  • वर्तमान में OPEC संगठन में 13 सदस्य देश हैं, जिनके नाम हैं – अल्जीरिया, अंगोला, इक्वेटोरियल गिनी, गैबॉन, ईरान, इराक, कुवैत, लीबिया, नाइजीरिया, कांगो गणराज्य, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और वेनेज़ुएला.
  • क़तर 2018 में ओपेक से अलग हो गया.
  • इक्वाडोर ने दिसंबर 1992 में अपनी सदस्यता स्थगित कर दी. अक्टूबर 2007 को वह ओपेक में फिर से शामिल हो गया. लेकिन उसने पुनः 1 जनवरी, 2020 को ओपेक की सदस्यता त्याग दी.

ओपेक प्लस’ क्या है?

ओपेक प्लस (OPEC+) कच्चे तेल का उत्पादन करने वाले देशों का एक गठबंधन है. यह गठबंधन वर्ष 2017 से तेल बाजारों में की जाने वाली आपूर्ति में सुधार कर रहा है.

ओपेक प्लस देशों में अज़रबैजान, बहरीन, ब्रुनेई, कजाकिस्तान, मलेशिया, मैक्सिको, ओमान, रूस, दक्षिण सूडान और सूडान शामिल हैं.


GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Indian Economy and issues relating to planning, mobilization of resources, growth, development and employment.

Topic : Currency Exchange Agreement

संदर्भ

श्रीलंका, इस वर्ष अपने ऋण-चुकौती दायित्वों को पूरा करने और मौजूदा आर्थिक संकट पर काबू पाने के लिए भारत के साथ हुए 1 बिलियन डॉलर के मुद्रा विनिमय (Currency Swap) समझौता पर आश्रित है.

कुछ महीने पूर्व श्रीलंका द्वारा SAARC सुविधा के माध्यम से भारतीय रिजर्व बैंक के साथ 400 मिलियन डॉलर का मुद्रा विनिमय किया गया था.

पृष्ठभूमि

श्रीलंका, अपने ऋण सेवा दायित्वों के साथ-साथ ‘विदेशी मुद्रा संकट’ का सामना कर रहा है.

मुद्रा विनिमय (CURRENCY SWAP) क्या है?

  • यह समझौता दो देशों के मध्य, एक देश की मुद्रा के बदले दूसरे देश की मुद्रा प्राप्त करने हेतु किया जाता है. इसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा बाज़ार और विनिमय दर में स्थिरता तथा अन्य जोखिमों से बचना होता है.
  • एक करेंसी स्वैप सुविधा, एक देश को बाजार से सीधे उधार लेने की तुलना में बेहतर ब्याज दरों पर विदेशी मुद्रा ऋण प्राप्त करने में मदद करती है, इसके तहत भुगतान समझौते के समय पर तय विनिमय दर पर किया है. यह विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव के कारण जोखिम को समाप्त करता है.

GS Paper 3 Source : Down to Earth

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UPSC Syllabus : Conservation, environmental pollution and degradation, environmental impact assessment.

Topic : Over 18 million kids at e-waste dumpsites face threat of health hazards: WHO

संदर्भ

विश्व स्वास्थ्य संगठनके अनुसार ई-अपशिष्ट भराव स्थलों पर 18 मिलियन से अधिक बच्चे स्वास्थ्य से सम्बंधित खतरों का सामना कर रहे हैं. ये निष्कर्ष इलेक्ट्रॉनिक-अपशिष्ट (ई-अपशिष्ट) और बाल स्वास्थ्य पर WHO की प्रथम प्रतिवेदन का हिस्सा हैं.

ई-अपशिष्ट क्या है?

ई-अपशिष्ट पुराने एवं अनुपयोगी हो चुके या त्याग दिए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और उनके भागों व घटकों को संदर्भित करता है.

रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

  • करीब 12.9 मिलियन महिलाएं अनौपचारिक अपशिष्ट क्षेत्र में कार्य कर रही हैं. इससे वे विषाक्त ई-अपशिष्ट (जैसे-निकिल, सीसा, पारा आदि) के संपर्क में आ रही हैं. फलस्वरूप उन महिलाओं तथा उनके अजन्मे बच्चों के समक्ष खतरा उत्पन्न हो रहा है.
  • ई-अपशिष्ट के संपर्क में आने वाले बच्चे अपने छोटे आकार, अल्प विकसित अंगों और वृद्धि तथा विकास की तीव्र दर के कारण अपशिष्ट में मौजूद विषाक्त रसायनों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं.
  • सुझाव: ई-अपशिष्ट का पर्यावरण के अनुकूल निपटान और श्रमिकों की सुरक्षा (निर्यातकों, आयातकों एवं सरकारों द्वारा), ई-अपशिष्ट के जोखिम व स्वास्थ्य परिणामों की निगरानी करना था सामग्रियों के बेहतर पुनः उपयोग की सुविधा प्रदान करना.
  • संयुक्त राष्ट्र ग्लोबल ई-वेस्ट मॉनिटर-2020 के अनुसार, वर्ष 2019 में संपूर्ण विश्व में 53.6 मिलियन मीट्रिक टन ई-अपशिष्ट उत्पन्न हुआ था. इसमें से मात्र 17.4% ई-अपशिष्ट को एकत्रित और पुनर्नवीनीकृत किया गया था.
  • भारत, चीन और अमेरिका के बाद तीसरा सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक अपशिष्ट उत्पन्न करने वाला देश है.
  • वर्ष 2016 में, भारत ने ई-अपशिष्ट (प्रबंधन) नियम लागू किए थे. इनके अंतर्गत ई-अपशिष्ट को दो व्यापक श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है, जैसे सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार उपकरण तथा उपभोक्ता इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरण.

Prelims Vishesh

Mandatory Hallmarking of Gold Jwellery :-

  • इसे 16 जून से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और ज्वैलर्स को केवल 14, 18 और 22 कैरेट के स्वर्ण आभूषण विक्रय करने की अनुमति होगी.
  • स्वर्ण की हॉलमार्किंग एक शुद्धता प्रमाणीकरण की प्रक्रिया है और इसका उपयोग अब तक स्वैच्छिक रहा है.
  • भारतीय मानक ब्यूरो वर्ष 2000 से स्वर्ण आभूषणों के लिए हॉलमाकिंग योजना संचालित कर रहा है.
  • वर्तमान में लगभग 40% स्वर्ण आभूषणों की हॉलमार्किंग की जा रही है.
  • हॉलमार्किंग के लाभ: इससे आभूषणों की विश्वसनीयता में वृद्धि होगी और निम्न कैरेट (सोने की शुद्धता) स्वर्ण से जनता के उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा होगी.

Government releases Desertification and Land Degradation Atlas of India :-

  • इसे अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र, इसरो, अहमदाबाद द्वारा प्रकाशित किया गया है.
  • यह एटलस वर्ष 2018-19 की समयावधि के लिए राज्यवार अपरदित भूमि का क्षेत्र प्रदर्शित करता है.
  • यह वर्ष 2003-04 से वर्ष 2018-19 तक 15 वर्षों की अवधि के दौरान हुए परिवर्तन का विश्लेषण भी प्रदान करता है.
  • यह महत्वपूर्ण आधारभूत और अस्थायी डेटा तथा तकनीकी इनपुट प्रदान करके भूमि पुनर्स्थापन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए परिकल्पित राष्ट्रीय कार्य योजना को मजबूत करने में सहायक है.

Tardigrades :-

  • जापान के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पोलर रिसर्च के वैज्ञानिकों ने एक जमे हुए जीव “टार्डिग्रेड’ को पुनर्जीवित किया है, जिसे उन्होंने अंटार्कटिका में खोजा था.
  • टार्डिग्रेड्स, जिन्हें आमतौर पर “वाटर बियर” या “मॉस पिगलेट” के रूप में जाना जाता है, सामान्यतया पूर्ण विकसित होने पर लगभग 0.5 मिमी (0.02 इंच) तक लंबे होते हैं.
  • टार्डिग्रेड्स बहुत कठोर जीव हैं और पृथ्वी पर पर्वत-शिखर से लेकर गहरे समुद्र तक पाए जाते हैं.
  • वे पांच सामूहिक विलोपन (five mass extinctions) की घटनाओं के उपरांत भी अपना अस्तित्व बनाए हुए हैं.
  • इन छोटे जीवों की उच्च दबाव वाले वातावरण में जीवित रहने की क्षमता उन्हें अत्यधिक उपयोगी शोधपरक जीव बनाती है.

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