Sansar डेली करंट अफेयर्स, 28 June 2021

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Sansar Daily Current Affairs, 28 June 2021


GS Paper 1 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Population and associated issues, poverty and developmental issues, urbanization, their problems and their remedies. 

Topic : 6th Anniversary to commemorate launch of PMAY-U, AMRUT & Smart Cities Mission celebrated

संदर्भ

25 जून को प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) (PMAY-U),  स्मार्ट सिटी मिशन (SCM) और अटल मिशन फॉर रेजुवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (AMRUT) के 6 वर्ष पूर्ण हो गए.

प्रधानमंत्री आवास योजना – शहरी (PMAY-U)

  • प्रधानमन्त्री आवास योजना (शहरी) एक निर्माण कार्यक्रम है जिसका अनावरण आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय (MoHUPA) द्वारा किया गया है.
  • सरकार का यह मिशन है कि 2022, जब भारत के स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे हो जायेंगे, तक सभी शहरों में सभी के लिए आवास हो जाए.
  • इस योजना के लाभार्थी गरीब लोग, EWS (Economically Weak Sections) के नीचे के लोग और LIG (Low Income Group) के लोग होंगे.
  • यह योजना तीन चरणों में पूरी की जायेगी
  1. पहले चरण में अप्रैल 2015 से मार्च 2017 में 100 शहरों में ऐसे आवास बनाए जायेंगे.
  2. दूसरे चरण में अप्रैल 2017 से मार्च 2019 में 200 और शहरों को लिया जायेगा.
  3. तीसरे चरण में अप्रैल 2019 से मार्च 2022 में बाकी शहर इस योजना में शामिल किये जायेंगे.
  • योजना के अंतर्गत प्रत्येक लाभार्थी को आवास बनाने के लिए एक लाख रु. दिया जाता है.
  • यदि लाभार्थी अपने आवास का जीर्णोद्धार (renovation) करना चाहे तो उसको डेढ़ लाख रु. का ऋण भी दिया जाता है.
  • इस ऋण पर 15 वर्ष तक के लिए 5% की घटी हुई दर पर सूद लिया जाता है.

स्मार्ट सिटी मिशन (Smart City Mission)

  • इसके अंतर्गत 100 चुने गये शहरों में आवश्यक आधारभूत ढांचे जैसे- पर्याप्त जल आपूर्ति, विद्युत आपूर्ति, सस्टेनेबल ठोस कचरा प्रबंधन, सतत ऊर्जा आधारित परिवहन, अफॉर्डेबल हाउसिंग, सूचना प्रौद्योगिकी कनेक्टिविटी तथा ई-गवर्नेंस आदि का विकास करना शामिल है.
  • इसका क्रियान्वयन इन शहरों के स्थानीय निकायों द्वारा स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) के माध्यम से किया जा रहा है.
  • 5 वर्षो तक केंद्र सरकार द्वारा लगभग 48,000 करोड़ रु. निर्गत किये गये. इसके अतिरिक्त राज्यों, शहरी स्थानीय निकायों ने म्युनिसिपल बांड के माध्यम से भी वित्त जुटाए हैं.

अटल मिशन फॉर रेजुबनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत)

  • मिशन का उद्देश्य पीने के पानी की आपूर्ति का सार्वभौमिक कवरेज तथा वर्षा जल निकासी के साथ- साथ सीबरेज एवं सेप्टेज की कवरेज एवं उपचार क्षमताओं में उल्लेखनीय बढ़ोतरी, गैर-मोटरीकृत शहरी परिवहन एवं हरित स्थान, पार्क आदि सुनिश्चित करना है.
  • 5 वर्षों में इस मिशन के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा लगभग 31,526 करोड़ खर्च किए गये.

GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Bilateral, regional and global groupings and agreements involving India and/or affecting India’s interests.

Topic : Tax Inspectors Without Borders

भारत और भूटान के द्वारा संयुक्त रूप से 23 जून, 2021 को “टैक्स इन्सपेक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (Tax Inspectors Without Borders – TIWB) पहल का आनावरण किया गया है.

मुख्य बिंदु

  • यह कार्यक्रम लगभग 24 महीने की अवधि का है.
  • इसका उद्देश्य कर लेखा परीक्षकों को तकनीकी जानकारी और कौशल हस्तांतरित कर सर्वोत्तम लेखापरीक्षा प्रथाओं को साझा करके कर प्रशासन को मज़बूत करने में भूटान की सहायता करना है. कार्यक्रम की केंद्रबिंदु अंतर्राष्ट्रीय कराधान और हस्तांतरण तथा मूल्य निर्धारण के क्षेत्र पर ध्यान केन्द्रित करनी होगी.
  • स्थानांतरण मूल्य, जिसे स्थानांतरण लागत के रूप में भी जाना जाता है, वह मूल्य है जिस पर संबंधित पक्ष एक-दूसरे के साथ लेन-देन करते हैं, इसमें विभागों के बीच आपूर्ति या श्रम के व्यापार के दौरान होने वाला लेन-देन शामिल है. बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ अपने को कम कर क्षेत्रों में स्थानांतरित करने के लिये हस्तांतरण कीमतों में हेर-फेर कर सकती हैं.
  •  यह कार्यक्रम भारत और भूटान के बीच निरंतर सहयोग और दक्षिण-दक्षिण सहयोग हेतु भारत के निरंतर तथा सक्रिय समर्थन में एक और मील का पत्थर है.

“टैक्स इन्सपेक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स” पहल के बारे में

  • संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) की एक संयुक्त पहल है.
  • इसका उदेश्य विकासशील देशों को ऑडिट क्षमता का निर्माण करके राष्ट्रीय कर प्रशासन को मजबूत करने में सहायता करना है.
  • इस कार्यक्रम के अंतर्गत, भारत द्वारा UNDP और TIWB सचिवालय के सहयोग से भूटान को उसके “कर प्रशासन” को मजबूत करने के लिए सहायता प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है.

GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Role of civil services in a democracy.

Topic : Mission Karmayogi

संदर्भ

हाल ही में इंफोसिस के पूर्व सीईओ एस.डी. शिबू लाल को “मिशन कर्मयोगीके तहत गठित तीन सदस्यीय टास्क फोर्स का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. इस टास्क फ़ोर्स को, “मिशन कर्मयोगी’ के दिशा-निर्देशन एवं संचालन हेतु एक एक स्पष्ट रोड मैप तथा एक Special Purpose Vehicle तैयार करने का कार्य सौंपा गया है.

ज्ञातव्य है कि केन्द्रीय कैबिनेट ने सितंबर 2020 में “मिशन कर्मयोगी’ – राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम (NPCSCB) को स्वीकृति दी थी. इसके अंतर्गत करीब 40 लाख केन्द्रीय कर्मियों को कवर किया जायेगा.

“मिशन कर्मयोगी” का लक्ष्य

  • “मिशन कर्मयोगी” का लक्ष्य भारतीय सिविल सेवकों को और भी अधिक रचनात्मक, सृजनात्मक, विचारशील, नवाचारी, अधिक क्रियाशील, प्रोफेशनल, प्रगतिशील, ऊर्जावान, सक्षम, पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-समर्थ बनाते हुए भविष्य के लिए तैयार करना है.
  • विशिष्ट भूमिका-दक्षताओं से युक्त सिविल सेवक उच्चतम गुणवत्ता मानकों वाली प्रभावकारी सेवा प्रदायगी सुनिश्चित करने में समर्थ होंगे.

विशेषताएँ

  • सिविल सेवा में क्षमता विकास हेतु नई अवसंरचना का विकास किया जायेगा. इसमें व्यक्तिगत, संस्थागत और प्रक्रिया के स्तर पर क्षमता विकास व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन किये जायेंगे.
  • सिविल सेवा क्षमता विकास योजनाओं की स्वीकृति एवं निगरानी के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मानव संसाधन परिषद का गठन किया जायेगा. इस परिषद् में मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री और विशेषज्ञ भी शामिल होंगे.
  • प्रशिक्षण मानकों में आपसी तालमेल बनाने के लिए क्षमता विकास आयोग बनाया जायेगा, जो केद्धीय प्रशिक्षण संस्थानों की निंगरानी भी करेगा.
  • कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में समन्वय इकाई का गठन किया जायेगा.
  • डिजिटल परिसंपत्तियों के स्वामित्त्व, परिचालन और प्रशिक्षण के लिए एक विशेष प्रयोजन कम्पनी (SPV) बनाई जायेगी.
  • मिशन कर्मयोगी योजना के तहत अगले पाँच वर्षों में करीब 510 करोड़ खर्च किए जाएँगे.

GS Paper 2 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Issues relating to development and management of Social Sector/Services relating to Health, Education, Human Resources;

Topic : CoWIN Platform

संदर्भ

भारत ने CoWIN प्लेटफॉर्म की तकनीक को दूसरे देशों के साथ साझा करने का निर्णय लिया है ताकि वे इस तकनीक का उपयोग अपने स्वयं के टीकाकरण अभियान चलाने के लिए कर सकें. वियतनाम, इराक, पेरू, मैक्सिको, डोमिनिकन गणराज्य, पनामा, नाइजीरिया, युक्रेन, संयुक्त अरब अमीरात और युगांडा सहित देशों ने अपने टीकाकरण कार्यक्रम चलाने के लिए CoWIN तकनीक के बारे में सीखने में अपनी रुचि व्यक्त की है.

CoWIN प्लेटफॉर्म क्या है?

  • यह कोविड 19 टीकाकरण की योजना, कार्यान्वयन, निगरानी और मूल्यांकन के लिए एक क्लाउड-आधारित आईटी समाधान है.
  • यह लाभार्थियों के पंजीकरण, टीकाकरण केंद्रों के आवंटन, टेक्स्ट मेसेज भेजने और कोल्ड स्टोरेज में संग्रहीत शीशियों की लाइव निगरानी का काम करता है.
  • इसके माध्यम से क्युआर कोड-आधारित टीकाकरण प्रमाणपत्र उन कोविड 19 वैक्सीन लाभार्थियों के लिए जारी किया जाता है, जो CoWIN प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत हैं.
  • यह एप्लीकेशन वैक्सीन स्टॉक की रियल टाइम जानकारी, उनके भंडारण तापमान और कोविड 19 वैक्सीन के लाभार्थियों की ट्रैकिंग सुविधा प्रदान करता है.

GS Paper 3 Source : The Hindu

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UPSC Syllabus : Environmental Pollution & Degradation Conservation.

Topic : Pygmy Hogs

संदर्भ

हाल ही में “पिग्मी हॉग कंजर्वेशन प्रोग्राम (PHCP)” के तहत असम के मानस राष्ट्रीय उद्यान में 8 पिम्मी हॉग (pygmy hogs) छोड़े गए हैं. इस कार्यक्रम के तहत वर्ष 2025 तक मानस राष्ट्रीय उद्यान में 60 पिम्मी हॉग छोड़ने की योजना बनाई गई है.

Pygmy Hog

पिम्मी हॉग के बारे में

  • ये विश्व के सबसे दुर्लभ और सबसे छोटे जंगली सूअर हैं, जो हिमालय की दक्षिणी तलहटी में घने जलोढ़ घास के मैदानों के मूल निवासी है.
  • ये सर्वाहारी होते हैं जो जड़ों, छोटे पौधों, कीड़ों आदि को खाते हैं.
  • पिम्मी हॉग उत्तर-पश्चिमी असम में मानस राष्ट्रीय उद्यान के आस-पास बहुत कम स्थानों तक ही सीमित हैं. यहाँ पर इसकी मूल आबादी अभी भी जीवित है, हालांकि इनकी संख्या में पर्याप्त रूप से गिरावट आई है.
  • जंगलों में इनकी आबादी मात्र लगभग 250 के आस-पास बची है और वर्तमान में यह प्रजाति IUCN रेड डेटा सूची में “गंभीर रूप से संकटग्रस्त” (critically endangered) के रूप में सूचीबद्ध है.
  • भारत में वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत पिम्मी हॉग को अनुसूची-1 प्रजाति के रूप में शामिल किया गया है.

PHCP

पिम्मी हॉग कंजर्वेशन प्रोग्राम (PHCP), यूनाईटेड किंगडम के जर्सी में स्थित ड्यूरेल वाइल्डलाइफ कंज़र्वेशन ट्स्ट, असम वन विभाग, वाइल्ड पिग स्पेशलिस्ट ग्रुप, तथा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के बीच एक भागीदारी कार्यक्रम है. इसे आरण्यक और इकोसिस्टम इंडिया के सहयोग से कार्यन्वित किया जा रहा है.


Prelims Vishesh

Employee’s State Insurance Corporation: ESIC :-

  • श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने घोषणा की है कि ESIC अपने स्वास्थ्य बीमा कवर का लाभ नगर निकायों में संलग्न सभी आकस्मिक और संविदा कर्मचारियों को प्रदान करेगा.
  • ESIC, कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 के तहत स्थापित एक सांविधिक निगमित निकाय है, जो कर्मचारी राज्य बीमा (Employees’ State Insurance: ESI) योजना के प्रशासन के लिए उत्तरदायी है.
  • ESI योजना एक स्व-वित्तपोषित व्यापक सामाजिक सुरक्षा योजना है. यह योजना में सम्मिलित किए गए कर्मचारियों को नियोजन के दौरान रोग, दिव्यांगता या चोटों के कारण मृत्यु की घटनाओं से उत्पन्न वित्तीय संकट से बचाने के लिए तैयार की गई है.

Indian Science Technology and Engineering facilities Map – I-STEM :-

  • आई-एसटीईएम (I-STEM) पोर्टल अब उपयोगकर्ताओं को कॉम्सॉल (COMSOL) मल्टीफिजिक्स सॉफ्टवेयर तक पहुँचने में मदद करेगा.
  • कॉम्सॉल समूह द्वारा विकसित कॉम्सॉल मल्टीफिजिक्स सॉफ्टवेयर सूट का उपयोग विश्व-भर में अनुसंधान और विकास के साथ-साथ सीखने एवं निर्देश के लिए विभिन्‍न प्रकार के कंप्यूटर अनुकरण के लिए एक अनिवार्य उपकरण के रूप में किया जाता है.
  • I-STEM एक राष्ट्रीय पोर्टल है, जो शोधकर्ताओं को उनके अनुसंधान एवं विकास कार्य के लिए आवश्यक विशिष्ट सुविधाओं का पता लगाने में सहायता करता है.
  • इसका उद्देश्य देश भर के विभिन्‍न संस्थानों में अनुसंधान एवं विकास संसाधनों का एक डेटाबेस निर्मित कर “शोधकर्ताओं और संसाधनों को जोड़ना” है.
  • यह प्रधानमंत्री विज्ञान, प्रौद्योगिकी और इनोवेशन सलाहकार परिषद् (PM-STIAC) मिशन के तहत प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय की एक पहल है.

Woolly Flying Squirells Spicies :-

Woolly Flying Squirrel Species

  • हाल ही में, हिमालय में ऊनी उड़ने वाली गिलहरियों की 2 नई प्रजातियां पाई गई हैं. इनका नाम तिब्बती ऊनी उड़ने वाली गिलहरी (यूपेटौरस टिबेटेंसिस) और युन्नान ऊनी उड़ने वाली गिलहरी (यूपेटौरस निवामन्स) है.
  • अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) द्वारा ऊनी उड़न गिलहरी (यूपेटॉरस सिनेरेस) को इंडेंजर्ड (EN) प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है.
  • यह विश्व में सबसे बड़ा ग्लाइडिंग स्तनपायी और लम्बे समय से विश्व में दुर्लभ तथा सबसे कम अध्ययन किया गया स्तनपायी है.
  • 20वीं शताब्दी के अधिकांश समय तक, इसे विलुप्त माना जाता था. वर्ष 1994 में इसकी उत्तरी पाकिस्तान में पुन: खोज की गई थी.

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