Sansar डेली करंट अफेयर्स, 28 February 2020

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Contents

Sansar Daily Current Affairs, 28 February 2020


GS Paper 2 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Issues related to Health.

Topic : Pigmentary disorder

संदर्भ

पिछले दिनों फरीदाबाद में स्थित क्षेत्रीय जैव प्रौद्योगिकी केंद्र में कार्यरत सहायक प्रोफेसर डॉ. राजेन्द्र के. मोटियानी को वेलकम ट्रस्ट/ डीबीटी अलायन्स ने इंटरमीडिएट फेलोशिप पुरस्कार दिया है. आशा की जाती है कि इससे शारीरिक वर्णकता (Pigmentary disorder) रोगों की समस्या को समझने के लिए किये गये अध्ययनों को बहुत बड़ा संबल मिलेगा.

विदित हो कि इस पुरस्कार में पांच वर्षों की अवधि के लिए 3.60 करोड़ रुपये का अनुदान मिलता है.

शारीरिक वर्णकता क्या है?

  • शारीरिक वर्णकता एक महत्वपूर्ण रक्षा तंत्र है जिसके द्वारा त्वचा को हानिकारक यूवी विकिरणों से बचाया जाता है.
  • अकुशल वर्णकता त्वचा के कैंसर का कारण बनता है जो दुनिया भर में कैंसर से जुड़ी मौतों के प्रमुख कारणों में से एक है.
  • इसके अतिरिक्त, वर्णक विकार (हाइपो और हाइपर पिगमेंटरी दोनों) एक सामाजिक कलंक माना जाता है और इसलिए वह लंबी अवधि के लिए मनोवैज्ञानिक आघात पहुंचाता है और रोगियों के मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य को प्रभावित करता है.
  • वर्तमान चिकित्सीय रणनीतियाँ वर्णक विकारों को दूर करने में कुशल नहीं हैं.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Structure, organization and functioning of the Executive and the Judiciary Ministries and Departments of the Government; pressure groups and formal/informal associations and their role in the Polity.

Topic : Sedition cases in India

संदर्भ

पिछले वर्षों में राजद्रोह के आधार पर बंदीकरण के मामले बढ़ते जा रहे हैं. इससे पता चलता है कि राजद्रोह कानून अभी भी अत्यंत प्रासंगिक है.

Sedition cases in India

आँकड़ें क्या कहते हैं?

  • नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो यानी NCRB ने साल 2018 के आंकड़े जारी किए. इसके अनुसार, दो साल में राजद्रोह के मामले दोगुने हो गए हैं.
  • 2016 में ये आंकड़ा 35 था, वो 2018 में बढ़कर 70 हो गया. राजद्रोह के मामले में झारखंड सूची में 18 केस के साथ पहले नंबर पर है.
  • इसके अतिरिक्त असम दूसरे स्थान पर है, जहां 17 मामलों में 27 लोगों पर दर्ज केस हुए. जम्मू-कश्मीर में 2018 में 12 मामले दर्ज हुए हैं, जबकि 2017 में राजद्रोह का एक ही केस दर्ज किया गया था.
  • साथ ही केरल में नौ, मणिपुर में चार केस दर्ज हुए हैं. ये दोनों ही राज्य शीर्ष पाँच में शामिल हैं.

राजद्रोह का कानून कब लाया गया?

यह कानून अंग्रेजों का बनाया कानून है. देश द्रोह का ये वो कानून है जो 149 साल पहले भारतीय दंड संहिता में जोड़ा गया. 149 साल यानी 1870 में जब भारत अंग्रेजों का गुलाम था. अंग्रेजों ने ये कानून इसलिए बनाया ताकि वो भारत के देशभक्तों को देशद्रोही करार देकर सजा दे सके. 

राजद्रोह की धारा 124ए है?

  • देश के खिलाफ बोलना, लिखना या ऐसी कोई भी हरकत जो देश के प्रति नफरत का भाव रखती हो वो राजद्रोह कहलाएगी.
  • अगर कोई संगठन देश विरोधी है और उससे अंजाने में भी कोई संबंध रखता है या ऐसे लोगों का सहयोग करता है तो उस व्यक्ति पर भी राजद्रोह का मामला बन सकता है.
  • अगर कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक तौर पर मौलिक या लिखित शब्दों, किसी तरह के संकेतों या अन्य किसी भी माध्यम से ऐसा कुछ करता है.
  • जो भारत सरकार के खिलाफ हो, जिससे देश के सामने एकता, अखंडता और सुरक्षा का संकट पैदा हो तो उसे तो उसे उम्र कैद तक की सजा दी जा सकती है.

राजद्रोह के आरोपी भारत के नायक 

  • बाल गंगाधर तिलक 
  • भगत सिंह
  • लाला लाजपत राय
  • अरविंदो घोष 
  • महात्मा गांधी (साल 1922 में यंग इंडिया में राजनीतिक रूप से ‘संवेदनशील’ 3 आर्टिकल लिखने के लिए राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया.)

इसकी प्रासंगिकता

अंग्रेजों की इस नीति का विरोध पूरे भारत ने किया था. क्योंकि तब भारत अंग्रेजों का गुलाम था. महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू ने उस दौर में राजद्रोह के इस कानून को आपत्तिजनक और अप्रिय कानून बताया था. लेकिन वो आजादी के पहले की स्थिति थी और पूरा देश स्वतंत्रता कि लड़ाई लड़ रहा था. उस परिस्थितियों की तुलना वर्तमान के दौर से नहीं की जा सकती है.

स्वतंत्रता के सात दशक बाद इस कानून को लेकर अकसर सियासत भी खूब होती रही है. कांग्रेस ने तो बकायदा अपने मेनिफेस्टो में लिख दिया था कि… IPC की धारा 124ए जो राजद्रोह अपराध को परिभाषित करती है. जिसका दुरुपयोग हुआ, उसे खत्म किया जाएगा.

इन देशों ने राजद्रोह का कानून खत्म किया

  • ब्रिटेन ने 2009 में राजद्रोह का कानून खत्म किया और कहा कि दुनिया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में है. 
  • आस्ट्रेलिया ने 2010 में 
  • स्काटलैंड ने भी 2010 में 
  • दक्षिण कोरिया ने 1988 में 
  • इंडोनेशिया ने 2007 में राजद्रोह के कानून को खत्म कर दिया.

भारत में राजद्रोह के कानून का प्रयोग

  • 2014 से 2016  के दौरान राजद्रोह के कुल 112 मामले दर्ज हुए.
  • करीब 179 लोगों को इस कानून के तहत गिरफ्तार किया गया.
  • राजद्रोह के आरोप के 80 फीसदी मामलों में चार्जशीट भी दाखिल नहीं हो पाई.
  • सिर्फ 2 लोगों को ही सजा मिल पाई.

1962 में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा?

  • केदारनाथ बनाम बिहार राज्य केस में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकार की आलोचना या फिर प्रशासन पर टिप्पणी करने भर से राजद्रोह का मुकदमा नहीं बनता. राजद्रोह कानून का इस्तेमाल तब ही हो जब सीधे तौर पर हिंसा भड़काने का मामला हो. सुप्रीम कोर्ट के 7 न्यायाधीशों की संवैज्ञानिक बेंच ने तब कहा था कि केवल नारेबाजी राजद्रोह के दायरे में नहीं आती.
  • बलवंत सिंह बनाम पंजाब राज्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 1995 में कहा था कि महज नारेबाजी करना राजद्रोह नहीं है. दो लोगों ने उस समय खालिस्तान की मांग के पक्ष में नारे लगाए थे.

भारतीय लॉ कमीशन का क्या सुझाव है?

धारा 124ए तभी लगे जब कानून व्यवस्था बिगाड़ने या सरकार के खिलाफ हिंसा के मकसद से कोई गतिविधि हो. संविधान की धारा 19 (1) ए की वजह से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगे हुए हैं.  ऐसे में धारा 124 की ज़रूरत नहीं है. 

स्वतंत्र भारत के चर्चित राजद्रोह केस

  • 26 मई 1953 को फॉरवर्ड कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य केदारनाथ सिंह ने बिहार के बेगूसराय में एक भाषण दिया था. राज्य की कांग्रेस सरकार के खिलाफ दिए गए उनके इस भाषण के लिए उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया गया.
  • पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या वाले दिन (31 अक्टूबर 1984) को चंडीगढ़ में बलवंत सिंह नाम के एक शख्स ने अपने साथी के साथ मिलकर ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए थे.
  • साल 2012 में कानपुर के कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी को संविधान का मजाक उड़ाने के आरोप में गिरफ्तार किया था. इस मामले में त्रिवेदी के खिलाफ राजद्रोह सहित और भी आरोप लगाए गए. त्रिवेदी के मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा था.
  • गुजरात में पाटीदारों के लिए आरक्षण की मांग करने वाले कांग्रेस नेता हार्दिक पटेल के खिलाफ भी राजद्रोह का केस दर्ज हुआ था. जेएनयू में भी छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार और उनके साथी उमर खालिद पर राजद्रोह का केस दर्ज हुआ था.
  • दिवंगत पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ साल 2015 में उत्तर प्रदेश की एक अदालत ने राजद्रोह के आरोप लगाए थे. इन आरोपों का आधार नेशनल ज्यूडिशियल कमिशन एक्ट (NJAC) को रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना बताया गया.

आगे की राह

संविधान में राजद्रोह का जिक्र नहीं है. राजद्रोह की अवधारणा औपनिवेशिक सोच और समय की है. जिसकी आजाद भारत में कोई जगह नहीं है. जो शब्द संविधान में नहीं वो हमारे कानून में जिंदा है. इसमें कोई शक या संदेह नहीं कि राष्ट्र के खिलाफ या देश के खिलाफ कभी भी कोई कुछ करता है तो उसे माफ नहीं किया जाना चाहिए. लेकिन राजद्रोह कानून का राजनीतिक तौर पर प्रयोग किया जाना भी गलत है.


GS Paper 2 Source: Indian Express

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UPSC Syllabus : Statutory, regulatory and various quasi-judicial bodies.

Topic : Central Consumer Protection Authority

संदर्भ

भारत सरकार ने केन्द्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की स्थापना करने का निर्णय लिया है. इसकी स्थापना केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के अंतर्गत की जायेगी.

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण

  • केंद्र सरकार उपभोक्ताओं के अधिकारों को बढ़ावा देने, संरक्षण करने और उन्हें लागू करने के लिये केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (Central Consumer Protection Authority- CCPA) का गठन करेगी.
  • यह अथॉरिटी उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन, अनुचित व्यापार और भ्रामक विज्ञापनों से संबंधित मामलों को विनियमित करेगी. महानिदेशक की अध्यक्षता में CCPA की एक अन्वेषण शाखा (इनवेस्टिगेशन विंग) होगी, जो ऐसे उल्लंघनों की जाँच या इनवेस्टिगेशन कर सकती है.

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019

  • उपभोक्ता अधिकारों को मजबूत करने के लिए यह अधिनियम पारित किया गया था. इसे उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के स्थान पर लागू किया गया है.
  • इस अधिनियम में 6 उपभोक्ता कृत्यों को परिभाषित किया गया है : सुरक्षा का अधिकार, मुखबिर होने का अधिकार, चुनने का अधिकार, सुने जाने का अधिकार, उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार और शिकायत निवारण का अधिकार.

भ्रामक विज्ञापन (Misleading Advertisements)

  • इस अधिनियम में  भ्रामक विज्ञापनों को रोकने पर विशेष बल दिया गया है. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 21 भ्रामक विज्ञापनों से संबंधित है.
  • धारा 21 के तहत उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण विज्ञापनदाता, निर्माता, व्यापारी या प्रचारक (endorser) पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगा सकता है. इस प्राधिकरण के पास प्रचारक (endorser) पर प्रतिबन्ध लगाने की शक्तियां हैं.

उपभोक्ता की परिभाषा

उपभोक्ता वह व्यक्ति है जो अपने इस्तेमाल के लिये कोई वस्तु खरीदता है या सेवा प्राप्त करता है. इसमें वह व्यक्ति शामिल नहीं है जो दोबारा बेचने के लिये किसी वस्तु को हासिल करता है या कमर्शियल उद्देश्य के लिये किसी वस्तु या सेवा को प्राप्त करता है. इसमें इलेक्ट्रॉनिक तरीके, टेलीशॉपिंग, मल्टी लेवल मार्केटिंग या सीधे खरीद के ज़रिये किया जाने वाला सभी तरह का ऑफलाइन या ऑनलाइन लेन-देन शामिल है.

उपभोक्ताओं के अधिकार

विधेयक में उपभोक्ताओं के कई अधिकारों को स्पष्ट किया गया है जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं : 

  • ऐसी वस्तुओं और सेवाओं की मार्केटिंग के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करना जो जीवन और संपत्ति के लिये जोखिमपूर्ण हैं.
  • वस्तुओं या सेवाओं की गुणवत्ता, मात्रा, शुद्धता, मानक और मूल्य की जानकारी प्राप्त होना.
  • प्रतिस्पर्द्धा मूल्य पर वस्तु और सेवा उपलब्ध कराने का आश्वासन प्राप्त होना.
  • अनुचित या प्रतिबंधित व्यापार की स्थिति में मुआवज़े की मांग करना.

GS Paper 2 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Separation of powers between various organs dispute redressal mechanisms and institutions.

Topic : Kerala High Court bans all forms of agitations in schools, colleges

संदर्भ

दिल्ली में हालिया विरोध-प्रदर्शनों के बाद हिंसा में हुई मौतों के बाद केरल उच्च न्यायालय ने बुधवार को राज्य में स्कूल और कॉलेज परिसरों में किसी भी प्रकार के विरोध-प्रदर्शनों पर रोक का आदेश दिया है. विदित हो कि इससे पहले दिल्ली के जेएनयू और जामिया मिलिया विश्वविद्यालय के परिसरों में विरोध-प्रदर्शन के दौरान हिंसा और असामाजिक तत्वों की अराजकता देखने को मिली थी.

न्यायालय ने ऐसा आदेश क्यों दिया?

  • केरल उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में विरोध-प्रदर्शनों से शैक्षणिक संस्थानों में सामान्य कामकाज के बाधित होने की बात कहते हुए उनके परिसरों में छात्र समूहों के सभी तरह के आंदोलनों पर प्रतिबंध लगाया है.
  • हर तरह के आंदोलन जैसे घेराव और परिसर में धरने पर बैठना आदि पर रोक लगाते हुए उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि ऐसे विरोध-प्रदर्शनों में भाग लेने के लिए किसी को भी उकसा कर राजी नहीं किया जा सकता है.
  • न्यायालय का कहना है कि किसी को भी अन्य छात्रों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने का अधिकार नहीं है. शिक्षण संस्थान सिर्फ अकादमिक संबंधित गतिविधियों के लिए हैं न कि प्रदर्शनों के लिए.

उच्च न्यायालय के पूर्व के निर्णय

  • उच्च न्यायालय ने पहले भी शिक्षण संस्थानों में धरना और हड़ताल जैसी राजनीतिक गतिविधियों के प्रति नाराजगी जाहिर की थी.
  • साल 2017 में अदालत ने कहा था कि अगर किसी छात्र को इस तरह की गतिविधियों में लिप्त पाया जाता है, तो वह संस्थान से बाहर निकाले जाने या उसका दाखिला रद्द किए जाने के लिए खुद उत्तरदायी होगा.

GS Paper 2 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Welfare schemes for vulnerable sections of the population by the Centre and States and the performance of these

Topic : Assistance to Disabled persons for purchasing/fitting of aids/appliances (ADIP) scheme

संदर्भ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्‍तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित विशाल शिविर में राष्‍ट्रीय वयोश्री योजना के तहत वरिष्‍ठ नागरिकों को और दिव्‍यांगों के लिए उपकरण सहायता योजना – एडीआईपी के तहत सहायता उपकरण वितरित करेंगे. इन उपकरणों के जरिए दिव्‍यांगजनों और वरिष्‍ठ नागरिकों के दैनिक जीवन और सामाजिक, आर्थिक विकास पर यह सहायता उपलब्‍ध कराना है.

विदित हो कि इससे पहले गुजरात के राजकोट में एक शिविर में 18,000 दिव्यांगों को उपकरण बांटे गए थे जबकि प्रयागराज में संख्या के लिहाज से नया रिकॉर्ड बनने वाला है.

एडीआईपी योजना क्या है?

  • मल्टीपल दिव्यांगता वाले मूक-बधिरों के लिए सरकार की ओर से नि:शुल्क कॉक्लियर इम्प्लांट योजना चलाई जा रही है. इसके अंतर्गत 6 लाख तक की सहायता दी जाती है. इस योजना से मूक-बधिर दिव्यांग 100 प्रतिशत तक सुन और 90 प्रतिशत तक बोल सकेंगे.

अर्हता

  • 40 प्रतिशत से अधिक किसी भी प्रकार की दिव्यांगता वाले इस योजना का लाभ उठा सकते हैं. बशर्ते उनकी मासिक आय 20 हजार रुपये से अधिक न हो.
  • अगर लाभुक कोई बच्चा है तो उसके माता-पिता की आय भी 20 हजार से अधिक नहीं होनी चाहिए. योजना के लाभ के लिए योजना संबद्ध केंद्रों या इकाइयों से संपर्क करना होगा.

GS Paper 3 Source: The Hindu

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UPSC Syllabus : Major crops cropping patterns in various parts of the country, different types of irrigation and irrigation systems storage, transport and marketing of agricultural produce and issues and related constraints; e-technology in the aid of farmers

Topic : Krishi Vigyan Kendra (KVK)

संदर्भ

नई दिल्ली में ‘एम्पोवेरिंग यूथ फॉर टेक्नोलॉजी एलईडी फार्मिंग’ पर 11 वें राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) सम्मेलन 2020 का उद्घाटन किया गया है.

सम्मेलन से सम्बंधित मुख्य बिंदु

  • इस सम्मेलन का उद्घाटन केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा किया गया. सम्मेलन के दौरान कृषि विज्ञान केंद्रों के प्रकाशनों और कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों को भी जारी किया गया.
  • इस सम्मेलन काआयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा किया गया.
  • इस बार सम्मलेन में “प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में युवाओं को सशक्त बनाना”, इस थीम पर ज़ोर दिया गया है जिससे युवा वर्ग को उद्यमियता में एक बेहतर क्षेत्र और अवसर उपलब्ध कराया जा सके.

 राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) क्या हैं?

  • एक कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) भारत में एक कृषि विस्तार केंद्र है.
  • आमतौर पर एक स्थानीय कृषि विश्वविद्यालय के साथ जुड़े, ये केंद्र भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और किसानों के बीच अंतिम कड़ी के रूप में काम करते हैं, और कृषि अनुसंधान को व्यावहारिक, स्थानीय सेटिंग में लागू करने का लक्ष्य रखते हैं.
  • सभी KVK पूरे भारत में 11 कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थानों (ATARI) में से एक के अधिकार क्षेत्र में आते हैं.
  • पहला KVK 1974 में पांडिचेरी में स्थापित किया गया था. तब से, सभी राज्यों में केवीके स्थापित किए गए हैं, और संख्या लगातार बढ़ रही है.
  • केवीके से जहां अपनी परियोजनाएं शुरू करने की उम्मीद की जाती है, वहीं स्थानीय क्षेत्रों में सरकारी पहल के विस्तार के लिए एक संसाधन केंद्र के रूप में भी काम करने की उम्मीद है. वर्तमान राष्ट्रीय सरकार के कार्यक्रम “कृषि किसानों की आय 2022 तक दोगुनी है” कृषि उत्पादकता में वृद्धि, प्रधान मंत्री कृषि सिचाई योजना और प्रधान मंत्री आवास बीमा योजना के साथ-साथ तकनीकी नवाचार पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का आह्वान करता है.
  • सरकार को उम्मीद है कि केवीके इन नई सरकारी पहलों के संबंध में सूचना और प्रथाओं के प्रसार में सहायता करेगा.
  • केवीके के अलावा, कई स्थानीय संस्थान हैं जो किसानों के साथ सीधे इंटरफेस करते हैं, जैसे कि कृषि उपज बाजार समिति और कृषि इंजीनियरिंग विभाग.

GS Paper 3 Source: PIB

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UPSC Syllabus : Science and Technology- developments and their applications and effects in everyday life Achievements of Indians in science & technology; indigenization of technology and developing new technology.

Topic : National Science Day

संदर्भ

प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी 28 फरवरी को रमन प्रभाव के आविष्कार की स्मृति में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया गया. ज्ञातव्य है कि प्रसिद्ध भारतीय भौतिकशास्त्री सर चन्द्रशेखर वेंकट रमन ने रमन प्रभाव (Raman effect) का आविष्कार किया था और उन्हें इसके लिए 1930 में भौतिकी का नोबल पुरस्कार दिया गया था. इस बार की थीम है :- विज्ञान जगत में महिलाएँ / Women in Science.

सी.वी. रमन कौन थे?

चन्द्रशेखर वेंकट रमन जो सी वी रमन के नाम से प्रसिद्ध हैं, न केवल एक महान् वैज्ञानिक थे बल्कि मानव कल्याण और मानवीय सम्मान की वृद्धि में विश्वास करते थे. उन्हें 1930 में भौतिकी में नोबल पुरस्कार मिला और चन्द्रशेखर रमन पुरस्कार प्राप्त करने वाले वह पहले एशियाई थे. श्री सी.वी. रमन का जन्म 7 नवंबर, 1888 ई. में तमिलनाडु में तिरूचिरापल्ली नगर में हुआ था. सी वी रमन के पिता भौतिकी और गणित के प्रोफेसर थे. वह संस्कृत साहित्य, संगीत और विज्ञान के वातावरण में पले बड़े हुए. प्रकृति ने उन्हें तीव्र एकाग्रता, प्रखर बुद्धि और अन्वेषण की प्रवृत्ति प्रदान की थी.

रमन प्रभाव क्या है?

जब एक रंग का प्रकाश पुंज एक पारदर्शी पदार्थ से होकर गुजरता है, तो वह बिखर जाता है. रमन ने इस बिखरे हुए प्रकाश का अध्ययन किया. उन्होंने देखा कि पानी में डाली गई एक प्रमुख प्रकाश की रेखा के समानान्तर दो बहुत कम चमक वाली रेखाएँ दृष्टिगोचर होती हैं. इससे यह ज्ञात होता है यद्यपि पानी में डुबोया गया प्रकाश एकवर्णी था परंतु बिखरा हुआ प्रकाश एकवर्णी नहीं था. इस प्रकार प्रकृति का एक बहुत बड़ा रहस्य उनके समक्ष उद्घाटित हो गया. यह परिवर्तन रमन प्रभाव के नाम से ही प्रसिद्ध हो गया और बिखरे हुए प्रकाश की विशेष रेखाएँ भी ‘रमन रेखाएँ’ के नाम से प्रसिद्ध हो गईं. यद्यपि वैज्ञानिक इस प्रश्न पर विवाद करते रहे हैं कि क्या प्रकाश लहरों के समान हैं अथवा कणों के? लेकिन रमन प्रभाव ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रकाश छोटे-छोटे कणों से मिल कर बनता है जिन्हें फोटोन कहा जाता है. चन्द्रशेखर वी रमन एक महान् शिक्षक और एक महान् पथ-प्रदर्शक भी थे. वह अपने छात्रों में अत्यधिक आत्मविश्वास भर देते थे. उनका एक विद्यार्थी बहुत ही निराश था क्योंकि उसके पास केवल एक किलो वॉट की शक्ति वाला एक्सरे यंत्रा था जबकि उस समय इंग्लैण्ड में वैज्ञानिक 5 किलोवाट की शक्ति वाले एक्सरे यंत्र से कार्य कर रहे थे. डा. रमन ने उसे प्रोत्साहित करते हुए, बदले में 10 किलोवाट की शक्ति वाला मस्तिष्क प्रयोग करने का सुझाव दिया. डा. रमन का जीवन हम सबके लिए अनुकरणीय है. जब भारत अंग्रेजों के वर्चस्व से पीड़ित था और शोध कार्य के लिए भौतिक संसाधन बहुत अल्प थे, उन्होंने अपनी प्रतिभाशाली मस्तिष्क रूपी प्रयोगशाला का ही प्रयोग किया. उन्होंने अपने जीवन का उदाहरण देते हुए सिद्ध कर दिखाया कि किस प्रकार हमारे पूर्वजों ने मस्तिष्क के बल पर बड़े-बड़े सिद्धांतों की खोज कर डाली.


Prelims Vishesh

Bengal Eastern Frontier Regulation (BEFR) :-

  • मिजोरम सरकार ने बंगाल पूर्वी सीमांत नियमावली 1873 (Bengal Eastern Frontier Regulation – BEFR 1873) तथा लुशाई पहाड़ी आंतरिक रेखा अधिसूचना 1993 (Inner Line of the Lushai Hills Notification of 1993) के आधार पर असम के साथ मिजोरम की सीमा में संशोधन की माँग की.
  • ज्ञातव्य है कि 1972 में संघीय क्षेत्र और फिर 1987 में राज्य बनने के पहले मिजोरम असम का एक भाग था और उसे उस समय लुशाई पहाड़ी जिला कहा जाता था.

ICoSDiTAUS-2020 :-

  • पिछले दिनों दिल्ली में एक अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ जिसमें आयुष में प्रयुक्त निदान एवं शब्दावली के मानकीकरण पर विचार हुआ.
  • सम्मेलन में पारम्परिक औषधि से सम्बंधित नैदानिक आँकड़ों के संग्रहण और वर्गीकरण पर एक घोषणा को अंगीकृत किया गया जिसे नई दिल्ली घोषणा कहा गया है.

Indradhanush :-

  • भारत में भारतीय और यूनाइटेड किंगडम की वायुसेनाओं का एक अभ्यास चल रहा है जिसे इंद्रधनुष नाम दिया गया है.
  • इस अभ्यास की थीम है – अड्डा प्रतिरक्षा एवं बल सुरक्षा / Base Defence and Force Protection.

RAISE 2020 :-

  • आगामी अप्रैल में नई दिल्ली में कृत्रिम बुद्धि पर एक अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन होगा.
  • पहली बार आयोजित हो रहे इस सम्मेलन का नाम रखा गया है – RAISE 2020 : सामाजिक सशक्तीकरण हेतु उत्तरदायी कृत्रिम बुद्धि.
  • इसका आयोजन भारत सरकार उद्योग जगत और शिक्षा जगत की भागीदारी में कर रही है.

Market Intelligence and Early Warning System (MIEWS) Web Portal :-

  • टमाटर, प्याज और आलू के दामों पर क्षण-प्रतिक्षण दृष्टि रखने के लिए एक वेब-पोर्टल और डैशबोर्ड तैयार किया गया है.
  • अपनी तरह के इस पहले ऐप का नाम MIEWS रखा गया है. इसका पूरा नाम Market Intelligence and Early Warning System है.
  • यह पोर्टल टमाटर, प्याज और आलू के दामों, आवक (arrival), फसल के क्षेत्र, उत्पादन, आयात-निर्यात, फसल पंचांग आदि के बारे में लगातार सूचना दर्शाता रहेगा.

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