Sansar डेली करंट अफेयर्स, 27 May 2019

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Sansar Daily Current Affairs, 27 May 2019


GS Paper  2 Source: The Hindu

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Topic : UNESCO World Heritage Sites     

संदर्भ

संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन अर्थात् UNESCO ने मध्य प्रदेश के ओरछा नगर को तात्कालिक रूप से विश्व धरोहर स्थलों की सूची में सम्मिलित कर लिया है.

ओरछा नगर के बारे में

  • यह नगर मध्य प्रदेश के बुन्देलखंड क्षेत्र के निवाड़ी जिले में बेतवा नदी के तट पर स्थित है.
  • यह नगर चतुर्भुज मंदिर, ओरछा किला संकुल तथा राजा महल जैसे कई प्राचीन स्मारकों के लिए जाना जाता है. यहाँ के सावन और भादो नामक दो मीनार सुप्रसिद्ध हैं. यहाँ चार किले भी हैं, यथा – जहाँगीर किला, रायप्रवीण महल, राजा महल और शीश महल आदि.
  • ओरछा में ही श्री राम राजा मंदिर है जिसके बारे में कहा जाता है कि यह एक ऐसा एकमात्र स्थान है जहाँ भगवान् राम ने ईश्वर के रूप में नहीं, अपितु एक राजा के रूप में पूजा की थी.

विश्व धरोहर स्थल क्या है?

UNESCO विश्व धरोहर स्थल वह स्थान है जो UNESCO विशेष सांस्कृतिक अथवा भौतिक महात्म्य के आधार पर सूचीबद्ध करता है. यह सूची UNESCO विश्व धरोहर समिति के द्वारा प्रशासित अंतर्राष्ट्रीय विश्व धरोहर कार्यक्रम द्वारा संधारित की जाती है. इस समिति में 21 देश सदस्य होते हैं जिनका चयन संयुक्त राष्ट्र महासभा करती है.

प्रत्येक विश्व धरोहर स्थल जिस देश में होता है उसके वैधानिक भूक्षेत्र का एक भाग बना रहता है, परन्तु UNESCO अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के हित में इसके संरक्षण का जिम्मा लेता है.

विश्व धरोहर स्थल के लिए पात्रता

  • विश्व धरोहर स्थल के रूप में चुने जाने के लिए उस स्थान पर विचार किया जाता है जो पहले से ही श्रेणीबद्ध लैंडमार्क के रूप में मानी है और जो भौगोलिक एवं ऐतिहासिक दृष्टि से अनूठा है. इसका विशेष सांस्कृतिक अथवा महत्त्व होना आवश्यक है, जैसे – कोई प्राचीन भग्नावशेष अथवा ऐतिहासिक स्मारक, भवन, नगर, संकुल, मरुभूमि, वन, द्वीप, झील, स्थापत्य, पर्वत अथवा जंगल.
  • विश्व धरोहर स्थल उस स्थल को कहते हैं जो या तो प्राकृतिक है अथवा मनुष्यकृत है. इसके अतिरिक्त कोई भी ऐसा ढाँचा जिसका अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व है अथवा ऐसी जगह जिसके लिए विशेष सुरक्षा की आवश्यकता है, वह विश्व धरोहर स्थल (world heritage site) कहलाता है.
  • ऐसे धरोहर स्थलों को संयुक्त राष्ट्र संघ और UNESCO की ओर से औपचारिक मान्यता दी जाती है. UNESCO का विचार है कि विश्व धरोहर स्थल मानवता के लिए महत्त्वपूर्ण हैं और इनकी सांस्कृतिक एवं भौतिक सार्थकता ही है.

विश्व धरोहर स्थल का वैधानिक दर्जा

जब UNESCO किसी स्थल को विश्व धरोहर स्थल नामित करता है तो प्रथमदृष्टया यह मान लिया जाता है कि सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील यह स्थल वैधानिक रूप से सुरक्षित होगा. सुरक्षा की यह गारंटी जेनेवा और हेग संधियों में वर्णित प्रावधानों से प्राप्त होती है. विदित हो कि ये संधियाँ युद्ध के समय सांस्कृतिक संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय  कानून की परिधि में लाती हैं.

संकटग्रस्त स्थल (endangered sites) क्या होते हैं?

  • यदि विश्व धरोहर की सूची में सम्मिलित किसी स्थल पर सशस्त्र संघर्ष और युद्ध, प्राकृतिक आपदाओं, प्रदूषण, अवैध शिकार अथवा अनियंत्रित नगरीकरण अथवा मानव विकास से खतरा उत्पन्न होता है तो उस स्थल को संकटग्रस्त विश्व धरोहरों की सूची में डाल दिया जाता है.
  • ऐसा करने का उद्देश्य यह होता है कि पूरे विश्व में इन खतरों के प्रति जागरूकता उत्पन्न की जाए और उनके प्रतिकार के लिए उपाय करने को प्रोत्साहन मिले. खतरों को दो भागों में बाँट सकते हैं – पहले भाग में वे खतरे हैं जो सिद्ध हो चुके हैं और दूसरे भाग में वे खतरे हैं जो संभावित हैं.
  • UNESCO प्रतिवर्ष संकटग्रस्त सूची के स्थलों के संरक्षण के बारे में जानकारी लेता रहता है. समीक्षोपरान्त सम्बंधित समिति अतिरिक्त कदम उठाने का अनुरोध कर सकती है. चाहे तो वह उस स्थल को सूची से इस आधार पर निकाल दे कि खतरे समाप्त हो गये हैं अथवा उसे संकटग्रस्त सूची एवं विश्व धरोहर की सूची दोनों से विलोपित भी कर सकती है.

GS Paper  2 Source: The Hindu

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Topic : Institutes of Eminence Scheme

संदर्भ

केंद्र सरकार का मानव संसाधन विकास मंत्रालय मंत्रिमंडल के समक्ष एक प्रस्ताव लाने जा रहा है जिसके अनुसार उत्कृष्ट संस्थानों (इंस्टिट्यूट्स ऑफ़ एमिनेन्स) की वर्तमान संख्या 20 से बढ़ाकर 30 कर दी जायेगी और उन्हें पहले से अधिक स्वायत्तता दी जायेगी.

इंस्टिट्यूट्स ऑफ़ एमिनेन्स योजना क्या है?

  • यह योजना भारत सरकार केमानव संसाधन विकास मंत्रालय की है. इसका उद्देश्य भारतीय संस्थानों को वैश्विक मान्यता दिलवाना है.
  • चुने गये संस्थानों को सम्पूर्ण शैक्षणिक एवं प्रशासनिक स्वयत्तता मिलेगी.
  • सरकार इन संस्थानों में से दस को चलाएगी और उन्हें विशेष धनराशि मुहैया कराएगी.
  • उत्कृष्ट संस्थान के रूप में संस्थानों को चुनने के लिए एक विशेष विशेषज्ञ समिति गठित की गई है.
  • उत्कृष्ट संस्थान के रूप में चयन के लिए वही शैक्षणिक संस्थान योग्य माने जाएँगे जिन्हें वैश्विक-स्तर पर शीर्षस्थ 500 संस्थानों में स्थान मिला हुआ है.
  • इसके लिए वह संस्थान भी आवेदन कर सकता है जिसको राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग ढाँचे (NIRF) के अंदर शीर्षस्थ 50 में स्थान मिला है.
  • ‘उत्कृष्ट संस्थान’ के रूप में चुने गए प्रत्येक ‘सार्वजनिक संस्थान’ को पाँच साल की अवधि में 1000 करोड़ रूपये की वित्तीय सहायता दी जायेगी. निजी संस्थानों को यह वित्तीय सहायता नहीं मिलेगी. निजी संस्थानों को यह दर्जा तभी मिलेगा जब वह आगामी 15 वर्ष के लिए अपनी ऐसी योजना प्रस्तुत करे जो भरोसा देने वाली हो.
  • इन संस्थानों को विदेशी छात्रों को प्रवेश देने के लिए, विदेशी अध्यापकों को भर्ती करने के सन्दर्भ में अधिक स्वायत्तता प्रदान की जाएगी.
  • उन्हें UGC की अनुमति के बिना शीर्ष 500 विश्व-संस्थानों के साथ अकादमिक सहयोग करने की भी अनुमति प्रदान की जायेगी.

निहितार्थ

उत्कृष्ट संस्थानों को अधिक स्वायत्तता मिलेगी और उनको UGC को रिपोर्ट भी नहीं देना पड़ेगा. वे विदेश से छात्रों को ले सकेंगे और विदेशी शिक्षकों की नियुक्ति कर सकेंगे. इसके अतिरिक्त वे एक लचीला पाठ्यक्रम और शुल्क का ढाँचा अपना सकते हैं.

विश्व-स्तरीय संस्थानों की आवश्यकता क्यों?

अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग के अनुसार, भारत में विश्व-स्तरीय विश्वविद्यालयों का अभाव है और यहाँ के शिक्षकों को विदेश की तुलना में कम पैसा दिया जाता है. चीन की तुलना में भारत में विश्वविद्यालय के स्तर पर पढ़ने वाले छात्रों की संख्या आधी है. इस मामले में वह अधिकांश लैटिन अमेरिकी और अन्य मध्यम आय वाले देशों से कहीं पीछे है.


GS Paper  2 Source: The Hindu

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Topic : World Wildlife Fund (WWF)

संदर्भ

विश्व वन्यजीव कोष (World Wildlife Fund – WWF) के अनुसार रूस की छह स्तनपायी, पक्षी और मछली की प्रजातियाँ विलोप के कगार पर पहुँच गई हैं. ये प्रजातियाँ हैं – शैगा हरिन, जिरफाल्कन बाज, पारसी तेंदुआ, चम्मच जैसी चोंच वाला सैंड पाइपर, सखालीन स्टर्जन समुद्री मछली और कलुगा स्टर्जन समुद्री मछली.

विश्व वन्यजीव कोष क्या है?

  • यह एक अंतर्राष्ट्रीय गैरसरकारी संगठन है.
  • इसकी स्थापना 1961 में हुई थी.
  • इसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के ग्लैंड नगर में स्थित है.
  • इस संगठन का लक्ष्य वन्यजीवन का संरक्षण करना तथा पर्यावरण पर मानवीय प्रभाव को घटाना है.
  • यह संरक्षण से सम्बंधित विश्व का सबसे बड़ा संगठन है.

उद्देश्य

  • विश्व की जैव विविधता का संरक्षण करना.
  • नवीकरणीय प्राकृतिक संसाधनों के प्रयोग को टिकाऊ बनाना.
  • प्रदूषण और निरर्थक खपत में कमी को बढ़ावा देना.

WWF के प्रतिवेदन एवं कार्यक्रम

  • लिविंग प्लेनेट रिपोर्ट : यह रिपोर्ट WWF द्वारा 1998 से प्रत्येक दो वर्ष पर प्रकाशित होता है. यह लिविंग प्लेनेट इंडेक्स और पर्यावरणीय फुटप्रिंट कैलकुलेशन पर आधारित होता है.
  • अर्थ आवर
  • डेट-फॉर-नेचर कार्यक्रम (Debt-for-nature swaps) : इस कार्यक्रम के अंतर्गत विकासशील देश के विदेशी ऋणभार का एक अंश इस शर्त पर माफ़ कर दिया जाता है कि वह देश पर्यावरण के संरक्षण पर स्थानीय स्तर पर निवेश करेगा.
  • मरीन स्टेवार्डशिप कौंसिल (MSC) : यह परिषद् एक स्वायत्त लाभरहित संस्था है जो मछली मारने के टिकाऊ उपायों के लिए मानदंड निर्धारित करती है.
  • हेल्दी ग्रोन पोटेटो : यह एक इको ब्रांड है जो उच्च गुणवत्ता वाले सतत रूप से उपजाए गये, डिब्बाबंद किये गये आलू उपभोक्ताओं को मुहैया करता है. इस कार्यक्रम में बड़े-बड़े खेतों में समेकित कीटनाशक प्रबंधन का प्रयोग होता है.

GS Paper  3 Source: The Hindu

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Topic : Minimum Support Price (MSP)

संदर्भ

राज्य में भूजल के बढ़ते खतरे को ध्यान में रखकर हरियाणा सरकार धान की खेती को हतोत्साह करने की योजना बना रही है क्योंकि धान बहुत अधिक पानी खाता है. परन्तु वहाँ के किसानों का कहना है कि ऐसा करने के पहले राज्य सरकार वैकल्पिक फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर क्रय की व्यवस्था करे जिससे कि किसानों को हानि न हो.

हरियाणा में भूजल समस्या

वर्षों से दोहन के कारण राज्य में भूमिजल इतना घट गया है कि राज्य में 60 ऐसे भूभाग हैं जहाँ जलाभाव देखा जाता है. इनमें दस जिलों में स्थित 21 ऐसे भूभाग हैं जहाँ यह समस्या सबसे विकट है.

चुनौतियाँ

  • सरकार पानी तो बचाना चाहती है, पर जमीनी सच्चाइयों से वह अवगत नहीं है.
  • यदि सरकार चाहती है कि किसान धान उगाना छोड़ दे और उसकी जगह पर कोई अन्य फसल उगायें तो उसे न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसी वैकल्पिक फसल के क्रय की व्यवस्था करनी होगी.
  • सरकार को एक कानून बनाकर गारंटी देनी होगी कि किसान के पैदावार को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदा जाएगा.
  • सरकार धान की जगह पर मकई और अरहर की फसल लगाने का सुझाव दे रही है, परन्तु किसान धान की खेती तभी छोड़ेंगे जब यह पक्का हो जाए कि दूसरी फसल को लगाने में उन्हें अधिक लाभ मिलेगा.

MSP क्या है

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सरकार के द्वारा तय किया गया वह मूल्य है जिसपर किसान अपनी फसल सरकार को बेच सकते हैं.
  • जब बाजार की कीमतें सरकार द्वारा तय किये गए न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे आ जाती हैं तो सरकार की खरीद-एजेंसियाँ किसानों के ​​फसल को खरीदने के लिए आगे आ जाती हैं.
  • जिन फसलों की आपूर्ति घट जाती है, उन फसलों को आगामी मौसम में लगाने के लिए किसानों को प्रेरित करने हेतु MSP का सहारा लिया जाता है.
  • आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति बुवाई के हर मौसम की शुरुआत में विभिन्न फसलों के लिए MSP की घोषणा करती है.
  • न्यूनतम समर्थन मूल्य का फैसला कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (Commission for Agricultural Costs and Prices – CACP) की अनुशंसा पर लिया जाता है.
  • CACP अपनी अनुशंसा माँग और आपूर्ति, उत्पादन की लागत एवं कीमत की रुझान के आधार पर करता है.

Prelims Vishesh

Elephant Bonds :-

  • व्यापार एवं उद्योग से सम्बंधित सरकार द्वारा नियुक्त एक उच्च-स्तरीय समिति ने सुझाव दिया है कि लोगों को एलीफैंट बांड नामक बांड निर्गत किये जाएँ जिसके अंतर्गत वे गुप्त आय की घोषणा करें और अनिवार्य रूप से उसका 50% निवेश करें.
  • एलीफैंट बांड 25 वर्ष के सोवेरेन बांड होंगे. इससे प्राप्त धन को मात्र निर्माण से सम्बंधित परियोजनाओं में लगाया जाएगा.

Mount Agung volcano :

  • इंडोनेशिया के बाली में स्थित माउंट अगुंग अथवा Gunung Agung नामक ज्वालामुखी पर्वत हाल ही में फट पड़ा है.
  • विदित हो कि इंडोनेशिया में मोटे तौर से 400 ज्वालामुखी पर्वत हैं जिनमें 127 अभी सक्रिय हैं. इस प्रकार विश्व की सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक तिहाई इसी देश में है.
  • माउंट अगुंग: इंडोनेशिया के बाली में माउंट अगुंग एक सक्रिय ज्वालामुखी है.
  • माउंट ब्रोमो: माउंट ब्रोमो इंडोनेशिया के पूर्वी जावा में एक सक्रिय ज्वालामुखी और टेंगर मासिफ का हिस्सा है.
  • माउंट मेरापी: माउंट मेरापी एक सक्रिय ज्वालामुखी है जो मध्य जावा और योग्याकार्टा प्रांत, इंडोनेशिया के बीच की सीमा पर स्थित है.

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