Sansar डेली करंट अफेयर्स, 27 January 2021

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Contents

Sansar Daily Current Affairs, 27 January 2021


GS Paper 1 Source : The Hindu

UPSC Syllabus : Modern Indian history from about the middle of the eighteenth century until the present- significant events, personalities, issues.

Topic : Govind Ballabh Pant

संदर्भ

संसद परिसर में नए भवन के लिए गोविंद वल्लभ पंत के 9 फुट ऊंचे पुतले को अस्थायी तौर पर हटाकर दूसरी जगह स्थापित कर दिया गया है.

Govind-ballabh-pant-stamp

गोविंद बल्लभ पंत कौन थे?

  1. अपने संकल्प और साहस के मशहूर पंत जी का जन्म 10 सितम्बर, 1887 ई. वर्तमान उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा ज़िले के खूंट (धामस) नामक गाँव में ब्राह्मण परिवार में हुआ था. इस परिवार का सम्बन्ध कुमाऊँ की एक अत्यन्त प्राचीन और सम्मानित परम्परा से है. पन्तों की इस परम्परा का मूल स्थान महाराष्ट्र का कोंकण प्रदेश माना जाता है और इसके आदि पुरुष माने जाते हैं जयदेव पंत. ऐसी मान्यता है कि 11वीं सदी के आरम्भ में जयदेव पंत तथा उनका परिवार कुमाऊं में आकर बस गया था.
  2. उन्होंने काशीपुर में प्रेम सभा नामक एक संगठन की स्थापना की जिसने कई दिशाओं में सुधार कार्य शुरू किए. ब्रिटिश शासकों ने समझा कि समाज सुधार के नाम पर यहाँ आतंकवादी कार्यो को प्रोत्साहन दिया जाता है. फलस्वरूप इस सभा को हटाने के अनेक प्रयत्न किये गये पर पंत जी के प्रयत्नों से वह सफल नहीं हो पाये.
  3. उन्होंने ब्रिटिश सरकार के लिए करों का भुगतान नहीं करने के कारण एक स्कूल को बंद होने से बचाया.
  4. 1914 में पंत जी के प्रयत्नों से ही उदयराज हिन्दू हाईस्कूल’ की स्थापना हुई. राष्ट्रीय आन्दोलन में भाग लेने के आरोप में ब्रिटिश सरकार ने इस स्कूल के विरुद्ध डिग्री दायर कर नीलामी के आदेश पारित कर दिये. जब पंत जी को पता चला तो उन्होंनें चन्दा मांगकर इसको पूरा किया. 1916 में पंत जी काशीपुर की नोटीफाइड ऐरिया कमेटी में लिये गये. बाद में कमेटी की ‘शिक्षा समिति’ के अध्यक्ष बने. कुमायूं में सबसे पहले निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा लागू करने का श्रेय पंत जी को ही है.
  5. पंतजी ने कुमायूं में राष्ट्रीय आन्दोलन‘ को ‘अंहिसा‘ के आधार पर संगठित किया. आरम्भ से ही कुमाऊं के राजनीतिक आन्दोलन का नेतृत्व पंत जी के हाथों में रहा. कुमाऊं में राष्ट्रीय आन्दोलन का आरम्भ कुली उतारजंगलात आंदोलनस्वदेशी प्रचार तथा विदेशी कपड़ों की होली व लगान-बंदी आदि से हुआ. बाद में धीरे-धीरे कांग्रेस द्वारा घोषित असहयोग आन्दोलन की लहर कुमायूं में छा गयी. 1926 के बाद यह कांग्रेस में मिल गयी.

उनके द्वारा धारण किये गए पद

स्वतंत्रता पूर्व

  1. उन्हें, दिसंबर 1921 में, आगरा और अवध के संयुक्त प्रांत की विधान सभा के लिए चुना गया, जिसे बाद में उन्होंने उत्तर प्रदेश का नाम दिया.
  2. उन्हें नैनीताल से स्वराज पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुना गया था.
  3. भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत वर्ष 1937 में हुए प्रांतीय चुनावों में पंत को संयुक्त प्रांत का प्रमुख नियुक्त किया गया था. उन्होंने वर्ष 1939 तक इस पद पर कार्य किया, इसके पश्चात अंग्रेजों द्वारा भारत को द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल करने के विरोध में उन्होंने कांग्रेस के सभी मंत्रियों सहित इस्तीफा दे दिया.
  4. वर्ष 1946 में हुए चुनावों में, पंत को एक बार फिर से संयुक्त प्रांत का प्रमुख नियुक्त किया गया.

स्वतंत्रता के बाद

  1. वे उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने.
  2. उन्होंने वर्ष 1955 से 1961 तक भारत के गृह मंत्री के रूप में कार्य किया. यह उनके कार्यकाल के दौरान राज्यों को भाषाई आधार पर पुनर्गठित किया गया था.

प्रमुख योगदान

उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान जमींदारी व्यवस्था उन्मूलन तथा वन संरक्षण जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया.

  1. उन्होंने ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाए गए अत्यधिक लगान से किसानों को बचाने के लिए भी उल्लेखनीय कार्य किये.
  2. उन्होंने देश में कई कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहित किया और कुली-बेगार कानून का विरोध किया, जिसमे मजदूरों को ब्रिटिश अधिकारियों के भारी सामान को बिना किसी भुगतान के ढोना पड़ता था.
  3. गांधी के नक्शेकदम पर चलते हुए, पंत ने संयुक्त प्रांत में व्यापक स्तर पर नमक आंदोलन का आयोजन किया. इसके लिए मई 1930 में, उन्हें देहरादून जेल में गिरफ्तार किया गया.
  4. उन्होंने साइमन कमीशन के खिलाफ भी विरोध किया.
  5. पंत, अल्पसंख्यकों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल के विरुद्ध थे, उनका कहना था कि यह कदम समुदायों को विभाजित करने वाला है.

पुरस्कार एवं सम्मान

भारत रत्न सम्मान उनके ही काल में आरम्भ किया गया. सन् 1957 में गणतन्त्र दिवस पर महान् देशभक्त, कुशल प्रशासक, सफल वक्ता, तर्क का धनी एवं उदारमना पन्त जी को भारत की सर्वोच्च उपाधि ‘भारत रत्न’ से विभूषित किया गया. आज उनकी याद में उनके जन्म स्थान पर एक स्मारक का निर्माण किया गया है. पंडित पन्त को उत्तराखंड के लोग गोठी पोंढ़ ज्यू कह कर भी पुकारते हैं क्योंकि पन्त जी का जन्म अपने ननिहाल के ‘गोठ’ यानि जो स्थान मवेशियों के लिए बनाया जाता है वहाँ हुआ था.


GS Paper 2 Source : The Hindu

UPSC Syllabus : Effect of policies and politics of developed and developing countries on India’s interests, Indian diaspora.

Topic : U.S. announces restoration of relations with Palestinians

संदर्भ

हाल ही में, अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन के प्रशासन द्वारा फिलिस्तीनियों के साथ संबंधों को बहाल करने तथा फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए फिर से सहायता प्रदान करने घोषणा की गयी है.

अमेरिका का यह कदम, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन द्वारा फिलिस्तीनियों से संबंध-विच्छेद किए जाने के विपरीत है, तथा दशकों पुराने संघर्ष को समाप्त करने के लिए इजरायल और फिलिस्तीनियों मध्य सहमति प्राप्त दो-राष्ट्र’ समाधान के लिए इसके नए सहयोग का एक एक प्रमुख तत्व है.

इज़राइल-फिलिस्तीन संघर्ष

  • 1948 के अरब-इजराइली युद्ध में जॉर्डन ने वेस्ट बैंक पर आधिपत्य कर लिया था.
  • 1967 के छह दिवसीय युद्ध के समय इजराइल ने जॉर्डन से यह भूभाग छीन लिया और तब से इस पर इजराइल का ही कब्ज़ा है.
  • इजराइल ने यहाँ 130 औपचारिक बस्तियाँ बनाई हैं. इसके अतिरिक्त इतनी ही बस्तियाँ पिछले 20-25 वर्षों में यहाँ बन चुकी हैं.
  • यहाँ 26 लाख फिलिस्तीनी रहते हैं. इसके अतिरिक्त यहाँ 4 लाख इजराइली बस गये हैं. यहूदियों का मानना है कि इस भूभाग पर उनको बाइबिल में ही जन्मसिद्ध अधिकार मिला हुआ है.
  • फिलिस्तीनी लोगों का कोई अलग देश नहीं है. उनका लक्ष्य है कि इस भूभाग में फिलिस्तीन देश स्थापित किया जाए जिसकी राजधानी पूर्वी जेरुसलम हो. इस कारण यहूदियों और फिलिस्तीनियों में झगड़ा होता रहता है. फिलिस्तीनियों का मानना है कि 1967 के बाद वेस्ट बैंक ने जो यहूदी बस्तियाँ बसायीं, वे सभी अवैध हैं.
  • संयुक्त राष्ट्र महासभासुरक्षा परिषद् और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय भी यही मानता है कि वेस्ट बैंक में इजराइल द्वारा बस्तियाँ स्थापित करना चौथी जिनेवा संधि (1949) का उल्लंघन है जिसमें कहा गया था कि यदि कोई देश किसी भूभाग पर कब्ज़ा करता है तो वहाँ अपने नागरिकों को नहीं बसा सकता है.
  • रोम स्टैच्यूट (Rome Statute)के अंतर्गत 1998 में गठित अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (International Criminal Court) के अनुसार भी इस प्रकार एक देश के लोगों को कब्जे वाली भूमि पर बसाना एक युद्ध अपराध है.

अमेरिका और भारत का दृष्टिकोण

अमेरिका इजराइली बस्तियों को अंतर्राष्ट्रीय कानून का उल्लंघन नहीं मानता है, अपितु उन्हें इजराइल की सुरक्षा के लिए आवश्यक मानता है. भारत पारम्परिक रूप से इस मामले में दो देशों के अस्तित्व के सिद्धांत (2-state solution) पर चलता आया है और इसलिए वह एक संप्रभु और स्वतंत्र फिलिस्तीन देश के स्थापना का समर्थन करता है. फिर भी इजराइल से भारत के रिश्ते दिन-प्रतिदिन प्रगाढ़ होते रहे हैं.

West Bank dispute israel and palestine

क्या है पश्चिम एशिया शान्ति योजना?

  • इजराइल और फिलिस्तीनियों के बीच स्थगित वार्ता को फिर से शुरू करने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा पश्चिम एशिया के लिए एक शान्ति योजना (West Asia Peace Plan) घोषित की गयी थी.
  • जिसमें एक स्वतंत्र फिलिस्तीन देश के निर्माण और पश्चिम तट की बस्तियों पर इजराइल की सम्प्रभुता स्थापित करने की बात कही गयी थी.
  • इस योजना में यह भी कहा गया था कि यदि फिलिस्तीनी इससे सहमत होता है तो अमेरिका दस वर्षों में इस शांति एवं पुनर्निर्माण प्रक्रिया के लिए 50 मिलियन डॉलर का निवेश करेगा.

भारत-इजराइल संबंधों की पृष्ठभूमि

  • इजराइल राज्य के निर्माण पर भारत की प्रतिक्रिया कई कारकों से प्रभावित थी. इन कारकों में स्वयं भारत का धार्मिक आधार पर विभाजन और अन्य देशों के साथ भारत के संबंध शामिल थे.
  • इसके साथ ही, भारत में एक बड़ी मुस्लिम आबादी थी जो कि परंपरागत रूप से फिलीस्तीनी भूमि पर इजरायल के निर्माण का विरोध करती थी.
  • भारत ने सितंबर, 1950 में इजराइल की आजादी को औपचारिक रूप से मान्यता प्रदान की. द्रष्टव्य है कि भारत की इजराइल नीति फिलस्तीन के पक्ष के सैद्धांतिक समर्थन तथा भारत की घरेलू आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण पर आधारित है.
  • घरेलू स्तर पर, राजनेताओं को यह डर था कि यदि इजराइल के साथ संबंधों को साम्रान्य किया जाएगा तो वे अपना वोट बैंक खो देंगे.
  • इसके अतिरिक्त भारत, फारस की खाड़ी में स्थित अरब देशों में काम कर रहे अपने नागरिकों की बड़ी आबादी को खतरे में नहीं डालना चाहता था जो कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार के लिए महत्त्वपूर्ण थी.
  • इसके अतिरिक्त, भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए तेल की आपूर्ति हेतु भी अरब देशों पर निर्भर था.
  • 1950 के दशक में गुट-निरपेक्ष आंदोलन का उद्धव हुआ जिसमें भारत एक संस्थापक सदस्य था. इन परिस्थितियों में भारत किसी भ्री रूप में इस्राइली पक्ष का सार्वजनिक रूप से समर्थन करने में अक्षम था.

1992 में पूर्ण राजनयिक संबंधों की स्थापना

1992 में भारत ने अंततः इज़राइल के साथ पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित किए. हालाँकि, इससे पूर्व फ़िलिस्तीनी राष्ट्रपति यासर अराफात को विश्वास में लिया गया. इसके पीछे दो कारण थे:

  • पहला कारण यह था कि उस समय इजराइल और फिलिस्तीन के बीच शांति प्रक्रिया उन्नत चरण में थी.
  • दूसरा कारण, संयुक्त राज्य अमेरिका का दबाव था. नौकरशाही मान्यताओं के अनुसार, 1991 में आर्थिक उदारीकरण को अपनाने का निर्णय लेने के बाद भारत की अर्थव्यवस्था के लिए एक वैश्विक इंटरफ़ेस की आवश्यकता महमूस की गयी. इसके साथ ही USSR के पतन के बाद इसे अपनी रक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए नए बाजार की जरुरत थी.

इस आर्टिकल को पढ़ेंभारत-इजराइल सम्बन्ध


GS Paper 2 Source : Indian Express

UPSC Syllabus : Bilateral, regional and global groupings and agreements involving India and/or affecting India’s interests; India and its neighbourhood- relations.S. announces restoration of relations with Palestinians

Topic : QUAD and Sea Dragon 2021

संदर्भ

प्रशांत महासागर में क्वाड देशों (अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया) के मध्य आयोजित की जा रही एक संयुक्त नौसेना अभ्यास ‘सी ड्रैगन’ में पहली बार कनाडा भी भाग ले रहा है.

सी ड्रैगन 2021 के बारे में

  • पंद्रह दिनों तक चलने वाले पनडुब्बी रोधी युद्ध अभ्यास “सी ड्रैगन 2021” का आयोजन संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा अमेरिकी क्षेत्र गुआम स्थित एंडरसन एयर फोर्स बेस में किया जा रहा है.
  • इस अभ्यास में रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स, इंडियन नेवी और जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स प्रतिभाग करेंगी.
  • कनाडा ने इस सैन्य अभ्यास के संदर्भ में कहा है कि वह भी हिन्द-प्रशांत के अंतर्गत आने वाले देशों में शामिल है और रॉयल कैनेडियन एयर फोर्स अक्सर अमेरिकी नौसेना के सातवें बेड़े के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास करती है. इसके अलावा सी ड्रैगन 2021 में कनाडा की भागीदारी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसके गठबंधन की ताकत और स्थायित्व को प्रदर्शित करने का एक अवसर है.

QUAD क्या है?

  • Quad एक क्षेत्रीय गठबंधन है जिसमें ये चार देश शामिल हैं – ऑस्ट्रेलिया, जापान, भारत और अमेरिका.
  • ये चारों देश प्रजातांत्रिक देश हैं और चाहते हैं कि समुद्री व्यापार और सुरक्षा विघ्नरहित हो.
  • Quad की संकल्पना सबसे पहले जापान के प्रधानमन्त्रीShinzo Abe द्वारा 2007 में दी गई थी. परन्तु उस समय ऑस्ट्रेलिया के इससे निकल जाने के कारण यह संकल्पना आगे नहीं बढ़ सकी.

QUAD का महत्त्व

  • मुक्त, खुला, समृद्ध और समावेशी भारत-प्रशांत क्षेत्र: भारत-प्रशांत वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के केंद्र के रूप में उभरा है.
  • विश्व का दो-तिहाई कंटेनर व्यापार इस क्षेत्र से होता है.
  • आर्थिक रूप से, इस रणनीति को चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के प्रति प्रतिक्रिया के रूप में माना जाता है, जो चीन-केंद्रित व्यापार मार्ग स्थापित कर रहा है.
  • क्वाड चीन की बढ़ती हठधर्मिता और वर्धित वैश्विक घुसपैठ को नियंत्रित करने हेतु एक सशक्त समूह सिद्ध हो सकता है.

अमरीका के लिए QUAD का महत्त्व

चीन इस क्षेत्र में एकतरफ़ा निवेश और राजनैतिक संधियाँ कर रहा है. अमेरिका इसे अपने वर्चस्व पर खतरा मानता है और चाहता है कि चीन की आक्रमकता को नियंत्रित किया जाए. चीन के इन क़दमों का प्रत्युत्तर देने के लिए अमेरिका चाहता है कि Quad के चारों देश आपस में सहयोग करते हुए ऐसी स्वतंत्र, सुरक्षात्मक और आर्थिक नीतियाँ बनाएँ जिससे क्षेत्र में चीन के बढ़ते वर्चस्व को रोका जा सके. भारत-प्रशांत सागरीय क्षेत्र में चीन स्थायी सैन्य अड्डे स्थापित करना चाह रहा है. चारों देशों को इसका विरोध करना चाहिए और चीन को यह बता देना चाहिए कि वह एकपक्षीय सैन्य उपस्थिति की नीति छोड़े और क्षेत्र के देशों से विचार विमर्श कर उनका सहयोग प्राप्त करे. चारों देश अपने-अपने नौसैनिक बेड़ों को सुदृढ़ करें और अधिक शक्तिशाली बाएँ तथा यथासंभव अपनी पनडुब्बियों को आणविक प्रक्षेपण के लिए समर्थ बानाएँ.

भारत का दृष्टिकोण

भारत-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते क़दमों को नियंत्रित करना न केवल अमेरिका के लिए, अपितु भारत के लिए उतना ही आवश्यक है. भारत चीन का पड़ोसी है और वह चीन की आक्रमकता का पहले से ही शिकार है. आये दिन कोई न कोई ऐसी घटनाएँ घटती रहती हैं जो टकराव का कारण बनती हैं. इसके अतिरिक्त यदि चीन भारत-प्रशांत क्षेत्र में हावी हो गया तो वह भारत के लिए व्यापारिक मार्गों में रुकावटें खड़ी करेगा और साथ ही इस क्षेत्र के अन्य देशों को अपने पाले लाने में का भरसक प्रयास करेगा. अंततोगत्वा भारत को सामरिक और आर्थिक हानि पहुँचेगी. सैनिक दृष्टि से भी भारत कमजोर पड़ सकता है. अतः यह उचित ही है कि Quad के माध्यम से ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका से मिलकर भारत भारत-प्रशांत क्षेत्र के लिए ऐसी नीति तैयार करे और ऐसे कदम उठाये जिससे चीन को नियंत्रण के अन्दर रखा जाए. कुल मिलाकर यह इन चारों देशों के लिए ही नहीं, अपितु यह पूरे विश्व की शांति के लिए परम आवश्यक है.


GS Paper 3 Source : The Hindu

UPSC Syllabus : Science and Technology.

Topic : Akash-NG Missile

संदर्भ

हाल ही में आकाश-एनजी मिसाइल (Akash-NG Missile) का सफल परीक्षण किया गया है.

आकाश-एनजी मिसाइल (Akash-NG Missile) से जुड़े प्रमुख बिन्दु

  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने ओडिशा के तट से दूर एकीकृत परीक्षण रेंज (Integrated Test Range) से आकाश-एनजी (नई पीढ़ी) मिसाइल का पहला सफल प्रक्षेपण किया है.
  • आकाश-एनजी(Akash-NG), एक नई पीढ़ी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (Surface to Air Missile) है.
  • आकाश आकाश-एनजी मिसाइल की मारक क्षमता 30 किलोमीटर है. 
  • आकाश-एनजी मिसाइल 30 किलोमीटर दूर एवं 18000 मीटर ऊंचाई तक के रेंज में आने वाली लगभग सभी विमान को लक्षित कर सकता है.
  • आकाश-एनजी मिसाइल के द्वारा लड़ाकू जेट विमान क्रूज़ मिसाइलों और हवा से सतह वाली मिसाइलों के साथ-साथ बैलिस्टिक मिसाइलों जैसे हवाई लक्ष्यों को बेअसर किया जा सकता है.
  • इस मिसाइल का इस्तेमाल भारतीय वायु सेना कम ऊंचाई वाले हवाई हमलों को रोकने में करेगी.

बैलिस्टिक मिसाइल

तकनीकी दृष्टि से बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र या बैलिस्टिक मिसाइल (ballistic missile) उस प्रक्षेपास्त्र को कहते हैं जिसका प्रक्षेपण पथ सब-आर्बिटल बैलिस्टिक पथ होता है. इसका उपयोग किसी हथियार (प्राय: नाभिकीय अस्त्र) को किसी पूर्वनिर्धारित लक्ष्य पर दागने के लिये किया जाता है. यह मिसाइल अपने प्रक्षेपण के प्रारम्भिक चरण में ही केवल गाइड की जाती है; उसके बाद का पथ कक्षीय यांत्रिकी (या आर्बिटल मेकैनिक्स) के सिद्धान्तों एवं बैलिस्टिक्स के सिद्धान्तों से निर्धारित होता है. अभी तक इन्हें रासायनिक रॉकेट इंजनों के द्वारा प्रणोदित (प्रोपेल) किया जाता है.

इस टॉपिक से UPSC में बिना सिर-पैर के टॉपिक क्या निकल सकते हैं?

आकाश-MK-1S से सम्बंधित मुख्य बातें

  • यह सतह से हवा में मार करने वाला विमान-प्रतिरोधी प्रक्षेपणास्त्र है जो 25 किलोमीटर तक आक्रमण कर सकता है और 60 किलोग्राम तक का हथियार (warhead) ढो सकता है.
  • यह 18 किलोमीटर तक की ऊँचाई पर जा सकता है.
  • इस प्रक्षेपणास्त्र को ट्रैक पर रखकर अथवा पहियेदार मंच से भी छोड़ा जा सकता है.
  • इस प्रक्षेपणास्त्र को राजेन्द्र नामक एक रडार मार्गदर्शन देता है. इस रडार को बैटरी स्तर का रडार कहा जाता है जिसकी टोही क्षमता लगभग 60 किलोमीटर तक की होती है.
  • आकाश-MK-1S शत्रु के युद्धक विमानों और ड्रोनों को सटीक रूप से एवं कुशलतापूर्वक मार गिराने की क्षमता रखता है.
  • सतह से हवा में मार करने वाले आकाश प्रक्षेपणास्त्र को इस प्रकार बनाया गया है कि शत्रु की ओर से आने वाले विमान अथवा मिसाइल को 18 से 30 किलोमीटर की दूरी से ही नष्ट कर दिया जाए.

GS Paper 3 Source : PIB

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UPSC Syllabus : Inclusive growth and issues arising from it.

Topic : 4-Tier Structure for Regulation of NBFCs

संदर्भ

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के विनियमन के लिए 4-स्तरीय संरचना प्रस्तुत की है.

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मुख्य तथ्य

  • RBI ने वृहद इकाईयों को पृथक करने हेतु NBFCs के लिए एक मापन-आधारित विनियामक ढांचा प्रस्तुत किया है. यह प्रस्ताव उन्हें “बैंक सदृश” नियमों (bank-like rules) के एक कठोर ढांचे के अंतर्गत लाकर वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के प्रयास पर केंद्रित है.
  • मापन-आधारित विनियमन का उद्देश्य पूँजी, ऋण और अभिशासन के कठोर मानदंडों को लागू करना है, ताकि IL&FS जैसी वित्तीय चूक तथा DHFL संकट जैसी स्थितियों से बचा जा सके.
  • NBFCs को विलंबित भुगतान, चल निधि की कमी, ऋण की अधिक लागत, उनके द्वारा वित्तपोषित परियोजनाओं में विलंब आदि जैसे मुद्दों का सामना करना पड़ रहा है.

प्रस्तावित परिवर्तन

  • NBFCs की विनियामक और पर्यवेक्षी रूपरेखा चार-स्तरीय संरचना पर आधारित होनी चाहिए. इस संरचना में ऊपर की ओर बढ़ने पर, विनियामकीय प्रणाली कठोर होती जाएगी.
  • वर्गीकरण को 180 दिन से घटाकर 90 दिन करके बैंकों और NBFCs के मध्य अशोध्य परिसंपत्तियों की पहचान स्पष्ट करना.
  • शुद्ध-स्वामित्व वाली निधियों की न्यूनतम अर्हता को 2 करोड़ रुपये से 10 गुना तक बढ़ाकर 20 करोड़ रुपये करके NBFCs के वित्त क्षेत्र में प्रवेश हेतु कठोर मानदंड प्रस्तावित किए गए हैं .
  • प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण NBFCs के अभिनिर्धारण हेतु प्रारंभिक सीमा को 500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 1,000 करोड़ रुपये किया गया है.
  • एक NBFC वस्तुत: कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत एक पंजीकृत कंपनी होती है. RBI सभी NBFCs को विनियमित नहीं करता है. अन्य संस्थान जैसे भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI), भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) आदि भी NBFCs की विविधता के अनुसार इनके विनियमन में शामिल होते हैं.

Prelims Vishesh

Padma Awards 2021 :-

  • हाल ही में पद्म पुरस्कार 2021(Padma Awards 2021) की घोषणा की गई है.
  • इस बार विभिन्न क्षेत्रों के 119 लोगों को पद्म पुरस्कार प्रदान किए जाने की घोषणा की गई है। जिसमें 7 पद्म विभूषण, 10 पद्म भूषण और 102 पद्मश्री पुरस्कार हैं.
  • वर्ष 2021 के पद्म पुरस्कारों में 29 महिलाएं शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, इन पुरस्कारों में विदेशी श्रेणी(जैसे- एनआरआई, पीआईओ और ओसीआई) में 10 लोगों को शामिल किया गया है.

पद्म पुरस्कार तीन प्रकार के होते हैं – पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री. यह पुरस्कार भी 1954 से ही चालू है. इनमें पद्म विभूषण सबसे बड़ा पुरस्कार है तथा उसके पश्चात् और पद्म भूषण और पद्मश्री का स्थान है. जिन क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य के लिए ये पुरस्कार दिए जाते हैं, वे हैं – कला, सामाजिक कार्य, सार्वजनिक मामले, विज्ञान और इंजीनियरिंग, व्यापार और उद्योग, चिकित्सा, साहित्य, शिक्षा, खेलकूद, सिविल सेवा, आदि. सामान्यतया ये पुरस्कार मरणोपरांत नहीं दिए जाते हैं, परन्तु कोई ऐसा मामला है जिसमें किसी व्यक्ति ने बहुत ही उत्कृष्ट कार्य किया हो तो सरकार चाहे तो उसको ये पुरस्कार देने पर विचार कर सकती है. पद्म पुरस्कारों की घोषणा प्रत्येक वर्ष गणतंत्र दिवस के अवसर पर होती है.

पद्म विभूषण 2021 पाने वाले व्यक्ति

  • जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे (पब्लिक अफेयर्स)
  • एस पी बालासुब्रमण्यम (मरणोपरांत)- कला
  • सुदर्शन साहू (कला)
  • बी.बी. लाल (पुरातत्व)
  • मौलाना वहीद्दुीन खान (अध्यात्मवाद)
  • डॉक्टर मोनप्पा  हेगडे (मेडिसिन)
  • नरिंदर सिंह कपानी (विज्ञान और इंजीनियरिंग)

पद्म भूषण 2021 पाने वाले व्यक्ति

  1. असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई (पब्लिक अफेयर्स)
  2. पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन (पब्लिक अफेयर्स)
  3. नृपेंद्र मिश्रा (सिविल सेवा)
  4. पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान (मरणोपरांत) – पब्लिक अफेयर्स
  5. धर्मगुरु कब्ले सादिक (मरणोपरांत) – अध्यात्मवाद
  6. कृष्णन नायर शांतकुमारी (कला)
  7. चंद्रशेखर कंबरा (साहित्य एंव शिक्षा)
  8. केशुभाई पटेल (मरणोपरांत)- पब्लिक अफेयर्स
  9. रजनीकांत देवीदास (व्यापार और उद्योग)
  10. तरलोचन सिंह (पब्लिक अफेयर्स)

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